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जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव से रिश्तों को शर्मसार करने और लालच में अपनों का ही हक मारने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी तीन अनाथ भतीजियों कुमारी संध्या और चांदनी का हक छीन लिया और उन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया। अनाथ बच्चियों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार कराई गई है। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां हैं, जो पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गईं। नियमों के अनुसार, पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था, लेकिन बच्चियों के चाचा और ताऊ की नियत डोल गई। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौज़ नौगांव खसरा संख्या 683 की एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली, जिसमें वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चियों के पिता जीवित नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है और बच्चियों को जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है। इस धोखाधड़ी के बाद तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं, उनके पास न तो रहने के लिए छत बची है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।

1 hr ago
user_राष्ट्र की आवाज न्यूज मीडिया
राष्ट्र की आवाज न्यूज मीडिया
Media company गोवर्धन, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव से रिश्तों को शर्मसार करने और लालच में अपनों का ही हक मारने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी तीन अनाथ भतीजियों कुमारी संध्या और चांदनी का हक छीन लिया और उन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया। अनाथ बच्चियों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार कराई गई है। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां हैं, जो पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गईं। नियमों के अनुसार, पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था, लेकिन बच्चियों के चाचा और ताऊ की नियत डोल गई। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौज़ नौगांव खसरा संख्या 683 की एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली, जिसमें वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चियों के पिता जीवित नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है और बच्चियों को जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है। इस धोखाधड़ी के बाद तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं, उनके पास न तो रहने के लिए छत बची है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।

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  • जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव से रिश्तों को शर्मसार करने और लालच में अपनों का ही हक मारने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी तीन अनाथ भतीजियों कुमारी संध्या और चांदनी का हक छीन लिया और उन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया। अनाथ बच्चियों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार कराई गई है। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां हैं, जो पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गईं। नियमों के अनुसार, पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था, लेकिन बच्चियों के चाचा और ताऊ की नियत डोल गई। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौज़ नौगांव खसरा संख्या 683 की एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली, जिसमें वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चियों के पिता जीवित नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है और बच्चियों को जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है। इस धोखाधड़ी के बाद तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं, उनके पास न तो रहने के लिए छत बची है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।
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    जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव से रिश्तों को शर्मसार करने और लालच में अपनों का ही हक मारने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी तीन अनाथ भतीजियों कुमारी संध्या और चांदनी का हक छीन लिया और उन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया। अनाथ बच्चियों की संपत्ति हड़पने के लिए उनके दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार कराई गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां हैं, जो पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गईं। नियमों के अनुसार, पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था, लेकिन बच्चियों के चाचा और ताऊ की नियत डोल गई। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौज़ नौगांव खसरा संख्या 683 की एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली, जिसमें वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चियों के पिता जीवित नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है और बच्चियों को जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है।

इस धोखाधड़ी के बाद तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं, उनके पास न तो रहने के लिए छत बची है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।
    user_राष्ट्र की आवाज न्यूज मीडिया
    राष्ट्र की आवाज न्यूज मीडिया
    Media company गोवर्धन, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • ब्यावर जिले की लांबिया ग्राम पंचायत भवन में मंगलवार को उपखंड अधिकारी मनोज कुमार मीणा की अध्यक्षता में एक ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 22 विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया, जिन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और मौके पर ही अनेक मामलों का समाधान किया। उपखंड अधिकारी मनोज कुमार मीणा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आमजन की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। शिविर के दौरान ग्रामीणों ने मुख्य पेयजल लाइन में बार-बार लीकेज, नलों में गंदा एवं बदबूदार पानी आने तथा कई मोहल्लों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने जैसी गंभीर समस्याएं उठाईं। इस पर संबंधित विभाग के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, बारिश के मौसम को देखते हुए नालों और पानी निकासी मार्गों पर रेत-मिट्टी के ढेर तथा अतिक्रमण हटाकर जलभराव की समस्या से बचाव के भी निर्देश दिए गए। शिविर में पट्टा वितरण, म्यूटेशन (नामांतरण), नाम शुद्धिकरण, जन्म-मृत्यु और जाति प्रमाण पत्र संबंधी प्रकरणों का निस्तारण किया गया। कृषि विभाग ने तारबंदी, फसली बीमा एवं कृषि ऋण से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की। वहीं, रास्तों से अतिक्रमण हटाने और खेल मैदान स्वीकृति सहित विभिन्न विभागों से संबंधित कार्यों का भी समाधान किया गया। इस अवसर पर शिविर प्रभारी नायब तहसीलदार प्रहलादराम, अतिरिक्त विकास अधिकारी रामरसिया आचार्य, पीईईओ सत्यनारायण वैष्णव, ग्राम विकास अधिकारी सोहनलाल विश्नोई, प्रशासक प्रतिनिधि मानसिंह राठौड़ के साथ-साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
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    ब्यावर जिले की लांबिया ग्राम पंचायत भवन में मंगलवार को उपखंड अधिकारी मनोज कुमार मीणा की अध्यक्षता में एक ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में 22 विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया, जिन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और मौके पर ही अनेक मामलों का समाधान किया।

उपखंड अधिकारी मनोज कुमार मीणा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आमजन की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें और योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। शिविर के दौरान ग्रामीणों ने मुख्य पेयजल लाइन में बार-बार लीकेज, नलों में गंदा एवं बदबूदार पानी आने तथा कई मोहल्लों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने जैसी गंभीर समस्याएं उठाईं। इस पर संबंधित विभाग के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, बारिश के मौसम को देखते हुए नालों और पानी निकासी मार्गों पर रेत-मिट्टी के ढेर तथा अतिक्रमण हटाकर जलभराव की समस्या से बचाव के भी निर्देश दिए गए।

शिविर में पट्टा वितरण, म्यूटेशन (नामांतरण), नाम शुद्धिकरण, जन्म-मृत्यु और जाति प्रमाण पत्र संबंधी प्रकरणों का निस्तारण किया गया। कृषि विभाग ने तारबंदी, फसली बीमा एवं कृषि ऋण से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की। वहीं, रास्तों से अतिक्रमण हटाने और खेल मैदान स्वीकृति सहित विभिन्न विभागों से संबंधित कार्यों का भी समाधान किया गया। इस अवसर पर शिविर प्रभारी नायब तहसीलदार प्रहलादराम, अतिरिक्त विकास अधिकारी रामरसिया आचार्य, पीईईओ सत्यनारायण वैष्णव, ग्राम विकास अधिकारी सोहनलाल विश्नोई, प्रशासक प्रतिनिधि मानसिंह राठौड़ के साथ-साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
    user_Rajesh Kumar
    Rajesh Kumar
    कुम्हेर, भरतपुर, राजस्थान•
    16 min ago
  • डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ (IPS) के निर्देश पर मंगलवार को बहज चौकी उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर विशेष वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान सघन नाकाबंदी कर वाहनों की जांच की गई, जिसमें कोतवाली थाना प्रभारी रामनरेश मीणा और उप निरीक्षक अमर सिंह गुर्जर सहित अन्य पुलिस जाब्ता मौजूद रहा। कोतवाली थाना प्रभारी रामनरेश मीणा ने बताया कि इस अभियान के तहत काली फिल्म, फैंसी नंबर प्लेट, मॉडिफाइड वाहन, अवैध हूटर, फ्लैशर, लाल-नीली बत्ती, बिना नंबर, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और बिना वैध दस्तावेज चलने वाले वाहनों सहित यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह अभियान अपराध नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले के सभी सर्किल व थाना क्षेत्रों में लगातार जारी रहेगा।
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    डीग पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ (IPS) के निर्देश पर मंगलवार को बहज चौकी उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर विशेष वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान सघन नाकाबंदी कर वाहनों की जांच की गई, जिसमें कोतवाली थाना प्रभारी रामनरेश मीणा और उप निरीक्षक अमर सिंह गुर्जर सहित अन्य पुलिस जाब्ता मौजूद रहा।

कोतवाली थाना प्रभारी रामनरेश मीणा ने बताया कि इस अभियान के तहत काली फिल्म, फैंसी नंबर प्लेट, मॉडिफाइड वाहन, अवैध हूटर, फ्लैशर, लाल-नीली बत्ती, बिना नंबर, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और बिना वैध दस्तावेज चलने वाले वाहनों सहित यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह अभियान अपराध नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले के सभी सर्किल व थाना क्षेत्रों में लगातार जारी रहेगा।
    user_Amardeep sain ripoter
    Amardeep sain ripoter
    Advertising Photographer डीग, भरतपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • मथुरा जिले के छाता क्षेत्र से रिश्तों को शर्मसार करने और लालच में अपनों का हक मारने का एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। यहां नौगांव निवासी सगे चाचा और ताऊ पर अपनी ही तीन अनाथ भतीजियों कुमारी संध्या, चांदनी और एक अन्य का हक छीनने और उन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर करने का गंभीर आरोप लगा है। संपत्ति हड़पने के लिए दादा के नाम पर एक कथित फर्जी वसीयत तैयार कराई गई। मिली जानकारी के अनुसार, इन बच्चियों के पिता वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी। पति की मौत के बाद बेसहारा हुई उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया, जिससे वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गईं। नियमों के आधार पर पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक होना चाहिए था, लेकिन बच्चियों के चाचा और ताऊ की नीयत डोल गई। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौजा नौगांव खसरा संख्या 683 के लिए एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली, जिसमें वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चियों के पिता जीवित ही नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है। उन्हें जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है। इस धोखाधड़ी के बाद तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं। उनके पास न तो रहने के लिए छत बची है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित नाबालिग बच्चियों ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है, यह मांग करते हुए कि अगर इस सरकार में कहीं न्याय है तो इन बेसहारा मासूमों को मिलना चाहिए।
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    मथुरा जिले के छाता क्षेत्र से रिश्तों को शर्मसार करने और लालच में अपनों का हक मारने का एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है। यहां नौगांव निवासी सगे चाचा और ताऊ पर अपनी ही तीन अनाथ भतीजियों कुमारी संध्या, चांदनी और एक अन्य का हक छीनने और उन्हें पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर करने का गंभीर आरोप लगा है। संपत्ति हड़पने के लिए दादा के नाम पर एक कथित फर्जी वसीयत तैयार कराई गई।

मिली जानकारी के अनुसार, इन बच्चियों के पिता वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी। पति की मौत के बाद बेसहारा हुई उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया, जिससे वीरेंद्र और रजनी की तीन मासूम बच्चियां पूरी तरह अनाथ और असहाय हो गईं।

नियमों के आधार पर पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक होना चाहिए था, लेकिन बच्चियों के चाचा और ताऊ की नीयत डोल गई। बताया जा रहा है कि बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए चाचा-ताऊ ने कथित तौर पर मौजा नौगांव खसरा संख्या 683 के लिए एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली, जिसमें वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब बच्चियों के पिता जीवित ही नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है। उन्हें जानबूझकर बेघर और बेसहारा कर दिया गया है।

इस धोखाधड़ी के बाद तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं। उनके पास न तो रहने के लिए छत बची है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित नाबालिग बच्चियों ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है, यह मांग करते हुए कि अगर इस सरकार में कहीं न्याय है तो इन बेसहारा मासूमों को मिलना चाहिए।
    user_Lokesh Garg
    Lokesh Garg
    छाता, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • मथुरा स्थित ग्रीन विलो पब्लिक स्कूल, जो एक सीबीएसई संबद्ध विद्यालय है, पर आयोजित परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायतकर्ता ने परीक्षा समय पर शुरू न होने और परीक्षा संचालन के दौरान कई गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए दिनांक 25 जून से परीक्षा समाप्ति तक के सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है। परीक्षा निर्धारित समय पर प्रारम्भ न होने के कारण परीक्षार्थियों को अनावश्यक मानसिक तनाव और असुविधा का सामना करना पड़ा। प्राप्त शिकायतों के मुख्य बिंदुओं में परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू न होना, परीक्षा केंद्र पर नकल और अनुचित साधनों के प्रयोग की शिकायतें, तथा कक्ष निरीक्षकों, पर्यवेक्षकों एवं अन्य ड्यूटी कर्मियों द्वारा कर्तव्यों का समुचित निर्वहन न किए जाने की संभावना शामिल है। विद्यालय द्वारा स्वयं सीसीटीवी व्यवस्था उपलब्ध होने का उल्लेख किया गया है, अतः शिकायतकर्ता ने परीक्षा दिवस की संपूर्ण सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखकर उसकी जांच कराने पर जोर दिया है। विशेष रूप से, सभी परीक्षाओं के शुरू होने से 3 घंटे पहले से प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा कक्षों की निगरानी और परीक्षा अवधि के दौरान हुई समस्त गतिविधियों का सत्यापन सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर के आधार पर कराने का निवेदन किया गया है। इसके अतिरिक्त, परीक्षा केंद्र पर तैनात समस्त शिक्षकों, कक्ष निरीक्षकों, केंद्र व्यवस्थापक और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या परीक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि ड्यूटी पर तैनात परीक्षकों का किसी संस्थान से संबंध पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए। इस संबंध में, शिकायतकर्ता ने प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने का निवेदन किया है। इसमें तत्काल परीक्षा दिवस की संपूर्ण सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित कर जब्त करना, ड्यूटी पर तैनात सभी शिक्षकों और अधिकारियों के बयान दर्ज करना, और नकल या अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होने पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही करना शामिल है। भविष्य में निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा संचालन सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। जनहित और शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्यवाही करने की अपील की गई है।
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    मथुरा स्थित ग्रीन विलो पब्लिक स्कूल, जो एक सीबीएसई संबद्ध विद्यालय है, पर आयोजित परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायतकर्ता ने परीक्षा समय पर शुरू न होने और परीक्षा संचालन के दौरान कई गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए दिनांक 25 जून से परीक्षा समाप्ति तक के सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की है। परीक्षा निर्धारित समय पर प्रारम्भ न होने के कारण परीक्षार्थियों को अनावश्यक मानसिक तनाव और असुविधा का सामना करना पड़ा।

प्राप्त शिकायतों के मुख्य बिंदुओं में परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू न होना, परीक्षा केंद्र पर नकल और अनुचित साधनों के प्रयोग की शिकायतें, तथा कक्ष निरीक्षकों, पर्यवेक्षकों एवं अन्य ड्यूटी कर्मियों द्वारा कर्तव्यों का समुचित निर्वहन न किए जाने की संभावना शामिल है। विद्यालय द्वारा स्वयं सीसीटीवी व्यवस्था उपलब्ध होने का उल्लेख किया गया है, अतः शिकायतकर्ता ने परीक्षा दिवस की संपूर्ण सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखकर उसकी जांच कराने पर जोर दिया है। विशेष रूप से, सभी परीक्षाओं के शुरू होने से 3 घंटे पहले से प्रश्नपत्र वितरण, परीक्षार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा कक्षों की निगरानी और परीक्षा अवधि के दौरान हुई समस्त गतिविधियों का सत्यापन सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर के आधार पर कराने का निवेदन किया गया है। इसके अतिरिक्त, परीक्षा केंद्र पर तैनात समस्त शिक्षकों, कक्ष निरीक्षकों, केंद्र व्यवस्थापक और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या परीक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि ड्यूटी पर तैनात परीक्षकों का किसी संस्थान से संबंध पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाए।

इस संबंध में, शिकायतकर्ता ने प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने का निवेदन किया है। इसमें तत्काल परीक्षा दिवस की संपूर्ण सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित कर जब्त करना, ड्यूटी पर तैनात सभी शिक्षकों और अधिकारियों के बयान दर्ज करना, और नकल या अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होने पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही करना शामिल है। भविष्य में निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा संचालन सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। जनहित और शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्यवाही करने की अपील की गई है।
    user_RPR NEWS TV
    RPR NEWS TV
    Court reporter Mathura, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव में रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी ही तीन अनाथ भतीजियों, कुमारी संध्या और चांदनी, का हक छीन लिया है। इन कलयुगी चाचा-ताऊ पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर एक फर्जी वसीयत तैयार करवाकर इन मासूम बच्चियों को पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की इन तीन मासूम बच्चियों पर पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और वे पूरी तरह अनाथ व असहाय हो गईं। नियम और नैतिकता के आधार पर पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था। हालाँकि, बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए, चाचा-ताऊ की नीयत डोल गई और उन्होंने मौज नौगांव खसरा संख्या 683 की संपत्ति के लिए दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली। इस वसीयत में वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि "जब बच्चियों के पिता जीवित ही नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है" और बच्चियों को जानबूझकर बेघर व बेसहारा किया गया है। इस धोखाधड़ी के कारण तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं; उनके पास न तो रहने के लिए छत है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। इस घिनौने कृत्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भी गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही इन मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की गहन जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।
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    जनपद मथुरा के थाना छाता क्षेत्र के नौगांव में रिश्तों को शर्मसार करने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ सगे चाचा और ताऊ ने मिलकर अपनी ही तीन अनाथ भतीजियों, कुमारी संध्या और चांदनी, का हक छीन लिया है। इन कलयुगी चाचा-ताऊ पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर एक फर्जी वसीयत तैयार करवाकर इन मासूम बच्चियों को पाई-पाई के लिए मोहताज कर बेघर कर दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, नौगांव निवासी वीरेंद्र की कुछ समय पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी रजनी ने सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते दूसरा विवाह कर लिया। वीरेंद्र और रजनी की इन तीन मासूम बच्चियों पर पिता की मौत और माँ के चले जाने के बाद दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और वे पूरी तरह अनाथ व असहाय हो गईं। नियम और नैतिकता के आधार पर पिता वीरेंद्र के हिस्से की संपत्ति पर उनकी इन तीन बेटियों का हक था। हालाँकि, बच्चियों के दादा (बाबा) की मृत्यु से पहले ही उनके पिता वीरेंद्र की मौत हो चुकी थी। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए, चाचा-ताऊ की नीयत डोल गई और उन्होंने मौज नौगांव खसरा संख्या 683 की संपत्ति के लिए दादा के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार करवा ली। इस वसीयत में वीरेंद्र के हिस्से को गायब कर पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि "जब बच्चियों के पिता जीवित ही नहीं थे, तो दादा की संपत्ति में से पोतियों का हक मारना सीधे तौर पर जालसाजी और धोखाधड़ी है" और बच्चियों को जानबूझकर बेघर व बेसहारा किया गया है।

इस धोखाधड़ी के कारण तीनों बच्चियां पूरी तरह से बेघर हो चुकी हैं; उनके पास न तो रहने के लिए छत है और न ही भरण-पोषण का कोई साधन। इस घिनौने कृत्य को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भी गहरा आक्रोश है कि सगे खून ने ही इन मासूमों के साथ इतना बड़ा विश्वासघात किया। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मामले की गहन जांच कर जालसाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों को उनका हक दिलाने की गुहार लगाई है।
    user_राष्ट्र की आवाज न्यूज मीडिया
    राष्ट्र की आवाज न्यूज मीडिया
    Media company गोवर्धन, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा से पूर्णतः मुक्त कराने की अपनी मांग को लेकर इंदुलेखा देवी वृंदावन में यमुना के घाटों पर जलसमाधि लेने पहुंचीं। उन्होंने वृज के 84 कोस क्षेत्र को अंडा, मांस, मदिरा और गांजा से मुक्त करने की पुरजोर मांग उठाई। इस दौरान, मौके पर पहुंची पुलिस ने इंदुलेखा देवी को समझाने का लगातार प्रयास किया। अपनी मांगों को लेकर, इंदुलेखा देवी ने जिलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन वृंदावन कोतवाली प्रभारी को सौंपा।
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    ब्रज क्षेत्र को मांस और मदिरा से पूर्णतः मुक्त कराने की अपनी मांग को लेकर इंदुलेखा देवी वृंदावन में यमुना के घाटों पर जलसमाधि लेने पहुंचीं। उन्होंने वृज के 84 कोस क्षेत्र को अंडा, मांस, मदिरा और गांजा से मुक्त करने की पुरजोर मांग उठाई।

इस दौरान, मौके पर पहुंची पुलिस ने इंदुलेखा देवी को समझाने का लगातार प्रयास किया।

अपनी मांगों को लेकर, इंदुलेखा देवी ने जिलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन वृंदावन कोतवाली प्रभारी को सौंपा।
    user_Kamal saini  राष्ट्रीय सचिव
    Kamal saini राष्ट्रीय सचिव
    Local News Reporter गोवर्धन, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    31 min ago
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