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भारत में जल्द ही प्लास्टिक नोटों के प्रचलन को लेकर चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स दावा कर रही हैं कि आने वाले समय में देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल शुरू हो सकता है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, पॉलीमर नोटों की बढ़ती माँग को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इस दिशा में तैयारियाँ कर रहा है। RBI देश में प्लास्टिक नोटों को प्रचलन में लाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श कर रहा है। इस कदम के साथ ही, पुराने नोटों को बंद किए जाने की भी बात कही जा रही है।
Naresh Bajaj
भारत में जल्द ही प्लास्टिक नोटों के प्रचलन को लेकर चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स दावा कर रही हैं कि आने वाले समय में देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल शुरू हो सकता है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, पॉलीमर नोटों की बढ़ती माँग को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इस दिशा में तैयारियाँ कर रहा है। RBI देश में प्लास्टिक नोटों को प्रचलन में लाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श कर रहा है। इस कदम के साथ ही, पुराने नोटों को बंद किए जाने की भी बात कही जा रही है।
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- उत्तराखंड में जोशीमठ के पास बद्रीनाथ यात्रा मार्ग पर कई किलोमीटर लंबा और हैरान कर देने वाला भीषण ट्रैफिक जाम देखा गया है। यात्रा में अत्यधिक भीड़ के कारण लोग कई-कई घंटों तक धूप में फंसे रहे। बार-बार यह सलाह दी जाती है कि मई-जून के पीक सीज़न में, खासकर वीकेंड पर, पहाड़ों पर जाने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पहाड़ों पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं होतीं और रास्ते भर दुकानों पर पीने का पानी या भोजन सामग्री जैसी चीजें हर जगह उपलब्ध नहीं होतीं। जाम में फंसने पर गाड़ी को वापस मोड़ना भी संभव नहीं होता। इसके बावजूद, लोग इन चेतावनियों को मानने को तैयार नहीं होते और पढ़े-लिखे तथा समझदार होने के बाद भी, खासकर शनिवार और रविवार को, बिना सोचे-समझे निकल पड़ते हैं। फिर जब वे घंटों जाम में फंसे रहते हैं, तो व्यवस्थाओं और सिस्टम को दोष देते हैं।1
- कटनी जिले के बहोरीबंद तहसील क्षेत्र के ग्राम अमाड़ी में आंगनवाड़ी भवन वर्षों से बेहद जर्जर हालत में पड़ा हुआ है। भवन की दीवारें जगह-जगह से दरक चुकी हैं और छत का प्लास्टर गिर रहा है, जिसके कारण कभी भी कोई बड़ा और गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। भवन के असुरक्षित होने की वजह से, छोटे बच्चों को तेज धूप और मौसम की मार के बीच खुले आसमान के नीचे ही पढ़ाई करनी पड़ रही है और वहीं पोषण आहार लेना भी पड़ रहा है। यहां तक कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी बच्चों को पेड़ों की छांव में या खुले मैदान में संभालने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर स्थिति को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग और स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अभिभावकों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों की यह मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही एक नया आंगनवाड़ी भवन बनाया जाए या फिर इस जर्जर भवन का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए।1
- मध्य प्रदेश के मैहर में चल रहे विकास कार्यों के कारण स्थानीय नागरिक पहले से ही धूल-धक्कड़ से परेशान हैं, और अब पहली बारिश उनकी समस्या को और बढ़ा चुकी है। यह स्थिति मैहर में चल रहे विकास कार्यों और नगर पालिका की घोर उदासीनता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। जनता में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। नागरिक यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ये काम कब तक चलेंगे और उन्हें कब तक इस परेशानी से राहत मिल पाएगी, लेकिन इंजीनियर साहब इतने लापरवाह हो चुके हैं कि जवाब देना तो दूर, कड़क धूप में बाहर निकलने के बजाय वे एयर कंडीशनर में आराम फरमाने को अपना काम मानते हैं। मैहर में हुई इस बारिश को लेकर शहर की गलियों में यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- जगत जननी राजराजेश्वरी माँ शारदा भवानी जी के आज, रविवार, 31 मई 2026 को प्रातः काल के श्रृंगार दर्शन हुए। इस अवसर पर भक्तों ने 'जय हो माई की' का जयघोष किया।2
- जिला कलेक्टर के निर्देश पर एक वार्डन को शो काज नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई कलेक्टर के सीधे आदेश पर की गई।1
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- चंद घंटों के एक अबोध बच्चे के सामने ही उसकी माँ का गला रेतकर उसे तड़प-तड़पकर मरने के लिए छोड़ दिया गया। वह मासूम बच्चा, जो केवल अपनी माँ को ही जानता है और उसी का दूध पीकर अपना पेट भरता है, असहाय होकर अपनी तड़पती माँ को 'माँ-माँ' कहकर पुकारता रहा, जबकि माँ की जान तड़प-तड़पकर निकल रही थी। इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि यह कैसी निर्दयता है और यह कैसा त्योहार है, जहाँ गर्दनें काटकर जश्न मनाया जा रहा है।1
- पूरा पटेल समाज मनीष पटेल के लिए न्याय की मांग कर रहा है। उनकी स्पष्ट चेतावनी है कि यदि मनीष पटेल को न्याय नहीं मिलता है, तो 'शुद्ध प्रदेश' में शासन-प्रशासन पर से जनता का भरोसा उठ जाएगा। समाज का कहना है कि जातिवाद के आधार पर एफ.आई.आर. दर्ज की जा रही हैं, जिसके खिलाफ आवाज उठाई गई है। पटेल समाज ने दृढ़ संकल्प लिया है कि जब तक मनीष पटेल को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। इस मांग के समर्थन में "पटेल एकता जिंदाबाद जिंदाबाद जय सरदार पटेल" के नारे भी लगाए गए हैं।1