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उत्तर पूर्वी दिल्ली के खजूरी इलाके में 38 साल के अजहरुद्दीन की हत्या से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
Faiz news
उत्तर पूर्वी दिल्ली के खजूरी इलाके में 38 साल के अजहरुद्दीन की हत्या से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।
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- मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया है। सोनिया विहार के कई पुश्ता क्रिकेट ग्राउंड में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री और दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी और कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने और विकास को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे उत्तर-पूर्वी दिल्ली को विकास की बड़ी सौगात मिली है।1
- उपयोगकर्ता alam_malik143143 ने लोगों से उनके YouTube, Instagram और Facebook चैनलों को फॉलो करने का आग्रह किया है।1
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, और अब विधायकों की बगावत के बाद पार्टी में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। टीएमसी के 14 सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है, जिसका प्रभाव न केवल बंगाल बल्कि देश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। इन 14 टीएमसी सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी नेता व त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब भी मौजूद थे। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने सोमवार को अपनी राज्यसभा सदस्यता और टीएमसी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद टीएमसी के पांच सांसद सुखेंदु शेखर से मिलने पहुंचे, और फिर यह खबर आई कि टीएमसी के 14 सांसद भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये 14 सांसद सुखेंदु शेखर की तरह इस्तीफा देंगे या पार्टी को तोड़ने का प्रयास करेंगे? इन बागी सांसदों के सामने पहला और कानूनी रूप से स्पष्ट रास्ता यह है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दें, जैसा कि सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा सभापति को किया है। इस्तीफा देने से उन पर दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने का खतरा नहीं रहेगा, और वे अपनी मर्जी से भाजपा या किसी अन्य दल में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, इस्तीफा देने का मतलब यह होगा कि उनकी सांसदी तुरंत चली जाएगी और उन सीटों पर उपचुनाव होंगे। भले ही बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी के पक्ष में माहौल है, लेकिन उपचुनाव में दोबारा जीत दर्ज करना इन सांसदों के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। अगर वे उपचुनाव हारते हैं तो संसद से बाहर हो जाएंगे, लेकिन जीतने पर सत्ता में भागीदार बन सकते हैं। दूसरा विकल्प टीएमसी को तोड़कर एक नया गुट बनाना है। भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी पार्टी को कानूनी रूप से तोड़ने के लिए दो-तिहाई (2/3) सांसदों का एक साथ आना अनिवार्य है। संसद में टीएमसी के पास वर्तमान में 28 लोकसभा सांसद हैं, ऐसे में पार्टी तोड़ने या नया गुट बनाने के लिए 19 लोकसभा सांसदों की आवश्यकता होगी। 14 लोकसभा सांसदों की यह संख्या दो-तिहाई के आंकड़े को छूने के लिए नाकाफी है। इसलिए, इस संख्या बल के साथ 'पार्टी तोड़ना' कानूनी रूप से संभव नहीं दिख रहा है, और यदि ये सांसद बिना पर्याप्त बहुमत के अलग गुट बनाने का दावा करते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष उन्हें अयोग्य घोषित कर सकते हैं, जिससे उनका मामला फंस सकता है। तीसरा विकल्प यह है कि ये लोकसभा सदस्य सदन के भीतर टीएमसी के आधिकारिक व्हिप (आदेश) का उल्लंघन करें, जैसे किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर सरकार के पक्ष में वोट करना। ऐसा करने पर टीएमसी नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष से इनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करेगा। अयोग्य घोषित होने के बाद, इन सांसदों को अगले 6 महीने के भीतर चुनाव लड़कर वापस आना होगा। कई बागी नेता इस विकल्प को चुनते हैं ताकि वे खुद को 'शहीद' के रूप में पेश कर सकें। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन 14 टीएमसी सांसदों के पीछे देश की सत्ताधारी पार्टी का हाथ हो सकता है, जिससे उनकी रणनीति बेहद सोची-समझी होने की संभावना है। बागी गुट के नेता फिलहाल कानूनी जानकारों से सलाह ले रहे हैं ताकि उनकी सदस्यता तुरंत न जाए, और वे संसद सत्र के दौरान अपनी रणनीति का खुलासा कर सकते हैं। इन 14 बागी सांसदों के लिए आगे की राह कांटों भरी है, क्योंकि बिना दो-तिहाई बहुमत के पार्टी तोड़ना नामुमकिन है, और इस्तीफा देने का मतलब अपने राजनीतिक जीवन को दांव पर लगाना है। अब देखना यह होगा कि ये सांसद 'एकला चलो' की रणनीति अपनाते हैं या फिर किसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी की छत्रछाया में अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हैं।1
- दिल्ली क्राइम ब्रांच की WR2 टीम ने एक आदतन वांछित लुटेरे को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। यह गिरफ्तारी दिल्ली के महावीर एनक्लेव इलाके में की गई, जहाँ टीम ने एक विशेष जाल बिछाया था। डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा के अनुसार, क्राइम ब्रांच को आरोपी के संबंध में एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। इसी सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम ने लुटेरे को धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए आरोपी पर कई मामले दर्ज होने की जानकारी भी दी गई है।1
- गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र की जनता मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण बेहद परेशान है और इन सुविधाओं के लिए तरस रही है। लोगों द्वारा यह सवाल लगातार उठाया जा रहा है कि आखिर इन आवश्यक निर्माण कार्यों को कब पूरा किया जाएगा।1
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- थाना बहादुरगढ़ पुलिस ने ग्राम नगला गंदू में दो मकानों में हुई चोरी की घटनाओं का सफलतापूर्वक अनावरण किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए चोरों के कब्जे से कुल 2,01,200 रुपये नकद, एक अवैध असलहा और चोरी की घटना में इस्तेमाल की गई एक ईको कार बरामद की गई है।1
- तृणमूल कांग्रेस में बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है, जहाँ पार्टी के 14 बागी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। यह महत्वपूर्ण बैठक बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई, जिसमें बीजेपी नेता और त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब देब भी शामिल थे। पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी आज ही दिल्ली पहुंचे थे, और सूत्रों के अनुसार उन्होंने दोपहर 1 बजे के बाद भूपेंद्र यादव के घर जाकर इन सांसदों से मुलाकात की। दोपहर 2 बजे के बाद शुभेंदु अधिकारी वहां से निकल गए। इस घटनाक्रम से पहले, आज ही राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देने वाले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय से भी दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के पांच सांसदों ने मुलाकात की। सुखेंदु शेखर रॉय एक दशक से अधिक समय तक राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे पुराने सदस्यों में से एक थे। उनसे मिलने वाले सांसदों में बर्दमान पूर्व से शर्मिला सरकार, हावड़ा से प्रसून बनर्जी, कूचबिहार से जगदीश बसुनिया, झारग्राम से कालिपद सोरेन और बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती शामिल थे। इन मुलाकातों से टीएमसी की राजनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि पार्टी में पहले से ही सांसदों के बीच विभाजन की खबरें हैं और ममता बनर्जी की विधायकों पर पकड़ ढीली पड़ने के बाद अब संसदीय खेमे को भी झटका लगा है। बंगाल में ममता के खिलाफ बगावत करने वाले बागी विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुखेंदु के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुखेंदु से बात नहीं की है, लेकिन वे उनकी अधिकांश बातों से सहमत हैं, खासकर संसद के उच्च सदन के कामकाज को लेकर। उन्होंने इसे निराशाजनक बताया कि सुखेंदु जैसे कद के सांसद को पिछली कतार में धकेल दिया गया और भविष्यवाणी की कि, “आज सुखेंदु आवाज़ उठा रहे हैं; कल दूसरे भी ऐसा ही करेंगे।” यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ममता बनर्जी स्वयं इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में हैं, और अभिषेक बनर्जी भी उनके साथ हैं। आज सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच गर्मजोशी से मुलाकात भी हुई। टीएमसी के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं, और पार्टी में किसी भी संवैधानिक विभाजन को मान्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम 19 सांसदों का एक गुट में आना आवश्यक है। हालांकि, सांसद इस्तीफा देने के लिए स्वतंत्र हैं।2
- दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित धर्म संसद कार्यक्रम में डॉ स्वामी कृष्णानंद महाराज जी ने एक बड़ा बयान दिया।1