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एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति को, जो कभी मुखिया का चुनाव हार गए थे, आज देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक, पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। यह पूरी कहानी संघर्ष, समर्पण और समाज सेवा का प्रतीक है, जो यह संदेश देती है कि हार कभी अंत नहीं होती, बल्कि यह वास्तव में एक नई शुरुआत का रास्ता बनाती है।
Sunil Kumar journalist
एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति को, जो कभी मुखिया का चुनाव हार गए थे, आज देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक, पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। यह पूरी कहानी संघर्ष, समर्पण और समाज सेवा का प्रतीक है, जो यह संदेश देती है कि हार कभी अंत नहीं होती, बल्कि यह वास्तव में एक नई शुरुआत का रास्ता बनाती है।
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- नवादा शहर के सोनारपट्टी स्थित आर्य समाज मंदिर में सोमवार को स्वर्गीय श्रीमती अनीता देवी की आत्मा की शांति के लिए ब्रह्मभोज और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन, शुभचिंतक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी। श्रद्धांजलि सभा में नवादा के लोकप्रिय विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अशोक यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने दिवंगत अनीता देवी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। अशोक यादव ने कहा कि किसी प्रियजन का निधन परिवार के लिए अपूरणीय क्षति होती है और ऐसे कठिन समय में समाज को एकजुट होकर परिवार का मनोबल बढ़ाना चाहिए। कार्यक्रम में पूर्व सांसद प्रत्याशी श्रवण कुशवाहा, राष्ट्रीय जनता दल के जिला अध्यक्ष उदय यादव सहित जिले के कई राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए, जिन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। श्रीमती अनीता देवी का निधन 10 जून 2026 को हुआ था, जिसके उपरांत निर्धारित धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में 22 जून को ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम स्थल पर दिनभर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। शोकाकुल परिवार की ओर से कार्यक्रम में शामिल हुए सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, मित्रों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। श्रद्धांजलि सभा का समापन दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना के साथ हुआ।1
- नवादा जिला के हिसुआ प्रखंड के तहत आने वाले मंझवे, तुंगी, चक, चितरघट्टी, पंडुइ और उमराव बीघा गांवों में रविवार रात मोहर्रम के पांचवें दिन इमामबाड़ा पर मिट्टी की रस्म अदा की गई। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान था जिसे पारंपरिक रूप से निभाया गया। इस दौरान, धार्मिक सद्भाव की मिसाल पेश करते हुए, हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने मिलकर इस रस्म में भाग लिया। लोगों ने ढोल बजाकर 'या अली या हुसैन' के नारे लगाए, जिससे पूरे क्षेत्र में एकता और सौहार्द का माहौल बना रहा।1
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