देवघर जिले के मारगोमुंडा प्रखंड अंतर्गत सलमंद्रा और बलवा गांव में मंगलवार को श्रद्धा और सम्मान के साथ हूल दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सूबे के अल्पसंख्यक कल्याण एवं जल संसाधन विभाग के मंत्री हफीजुल हसन कार्यक्रम में शामिल हुए। मंत्री हफीजुल हसन ने सलमंद्रा गांव स्थित सिद्धो-कान्हू चौक और बलवा गांव स्थित सिद्धो-कान्हू चौक पहुंचकर हूल क्रांति के महानायक सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान मौजूद सभी लोगों ने वीर सिद्धो-कान्हू, चांद, भेरव, फूलो और झानो को याद करते हुए उन्हें नमन किया। मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि वीर शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और हूल दिवस हमें अन्याय तथा शोषण के खिलाफ संघर्ष करने वाले वीर शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। इस मौके पर प्रखंड अध्यक्ष सोहन मुर्मू, दिनेश्वर किस्कू, मुर्शीद अली, मुखिया अनीता सोरेन, सुधीर मंडल, डुग्गू टुडू, सुशील हेंब्रम, छोटू किस्कू, मो शमीम, जगदीश हांसदा, लाबाराम हेंब्रम, बिहुलाल हांसदा, रामलाल मरांडी, छोटेलाल टुडू, कृष्णा हेंब्रम, नदीम आलम, जयनारायण मंडल, खुर्शीद अंसारी, विनोद मंडल, विजय सोरेन, बोगन टुडू, श्यामलाल हेंब्रम और पति राम किस्कू सहित कई झामुमो कार्यकर्ता व ग्रामीण मौजूद रहे।
देवघर जिले के मारगोमुंडा प्रखंड अंतर्गत सलमंद्रा और बलवा गांव में मंगलवार को श्रद्धा और सम्मान के साथ हूल दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सूबे के अल्पसंख्यक कल्याण एवं जल संसाधन विभाग के मंत्री हफीजुल हसन कार्यक्रम में शामिल हुए। मंत्री हफीजुल हसन ने सलमंद्रा गांव स्थित सिद्धो-कान्हू चौक और बलवा गांव स्थित सिद्धो-कान्हू चौक पहुंचकर हूल क्रांति के महानायक सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान मौजूद सभी लोगों ने वीर सिद्धो-कान्हू, चांद, भेरव, फूलो और झानो को याद करते हुए उन्हें नमन किया। मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि वीर शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और हूल दिवस हमें अन्याय तथा शोषण के खिलाफ संघर्ष करने वाले वीर शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। इस मौके पर प्रखंड अध्यक्ष सोहन मुर्मू, दिनेश्वर किस्कू, मुर्शीद अली, मुखिया अनीता सोरेन, सुधीर मंडल, डुग्गू टुडू, सुशील हेंब्रम, छोटू किस्कू, मो शमीम, जगदीश हांसदा, लाबाराम हेंब्रम, बिहुलाल हांसदा, रामलाल मरांडी, छोटेलाल टुडू, कृष्णा हेंब्रम, नदीम आलम, जयनारायण मंडल, खुर्शीद अंसारी, विनोद मंडल, विजय सोरेन, बोगन टुडू, श्यामलाल हेंब्रम और पति राम किस्कू सहित कई झामुमो कार्यकर्ता व ग्रामीण मौजूद रहे।
- दोस्तों से आग्रह किया गया है कि वे मेले में जल्द से जल्द पहुँचें और समय पर उपस्थित हों, ताकि किसी भी तरह की देरी से बचा जा सके।1
- हरियाणा के अंबाला में एक मासूम बच्चा 250 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया है। इस घटना के सामने आने के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव कार्य बड़े पैमाने पर जारी है।1
- जामताड़ा जिले से स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। अब जिले में थैलेसीमिया और हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों को अपने इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सदर अस्पताल में एक डे-केयर सेंटर का उद्घाटन कर इन मरीजों को एक बड़ी सौगात दी है।1
- निरसा में, जिला परिषद सदस्य संजय सिंह पिंटू ने घुरजोड़ा गांव में वीर सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा कि हूल दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, साहस और स्वतंत्रता का अमर प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 30 जून 1855 को झारखंड की धरती से सिदो-कान्हू और उनके साथियों द्वारा ब्रिटिश हुकूमत तथा शोषक जमींदारों के खिलाफ शुरू किया गया यह संघर्ष आज भी अत्यधिक प्रासंगिक है। पिंटू ने बताया कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा हूल आंदोलन का मूल आधार था। वर्तमान समय में जब वन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन तथा विस्थापन का संकट गहरा रहा है, हूल दिवस हमें जल-जंगल-जमीन बचाने के लिए एकजुट होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने आगे कहा कि यह विद्रोह केवल अंग्रेजों के खिलाफ ही नहीं था, बल्कि उस व्यवस्था के विरुद्ध भी था जहां महाजन, साहूकार और भ्रष्ट जमींदार आदिवासियों का आर्थिक शोषण कर रहे थे, और यह आज भी शोषितों, वंचितों व आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा तथा उन्हें समान अधिकार दिलाने की आवश्यकता को याद दिलाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस क्रांति के परिणामस्वरूप आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम जैसे कई महत्वपूर्ण कानून बने। हूल दिवस हमें ऐसे संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करने तथा उन्हें मजबूत करने के लिए सचेत करता है। इस क्रांति का मुख्य संदेश 'करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो' था, और यह दिन आदिवासियों को अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और ऐतिहासिक पहचान पर गर्व करने का अवसर प्रदान करता है। यह इतिहास का वह अध्याय है जो सिखाता है कि जब अधिकार छीने जाएं, तो एकजुट होकर संघर्ष ही समाधान है, और यह अन्याय तथा दमन के सामने झुकने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से या अपनी रक्षा के लिए आवाज बुलंद करने का हौसला देता है। इससे पूर्व, आदिवासी समाज के लोगों ने माझी थान में पूजा-अर्चना कर कलश यात्रा के साथ सिद्धू-कान्हू के प्रतिमा स्थल पाल पहुंचे और पूरे आदिवासी रीति-रिवाज के साथ प्रतिमा का अनावरण किया।8
- गिरिडीह जिले के जमुआ में समाज सेवी सूरज ने एक ट्रांसफार्मर का भव्य उद्घाटन किया। इस महत्वपूर्ण कार्य के साथ ही क्षेत्र के लोगों को अंधेरे से उजाले की रौनक मिली, जिससे उनके जीवन में रोशनी फैल गई।2
- धनबाद जिले के निरसा में स्थित एक पीजी लॉज में देह व्यापार का गोरखधंधा उजागर हुआ है। निरसा पुलिस ने इस पीजी लॉज में चल रहे अवैध व्यापार का खुलासा किया है, जिसके बाद पीजी लॉज का मालिक इकबाल अहमद फरार हो गया है। जानकारी के अनुसार, इस पीजी लॉज में पिछले छह महीने से अवैध गतिविधियां संचालित हो रही थीं। पुलिस ने पीजी लॉज को सील कर दिया है।1
- झारखंड के जामताड़ा जिले में हूल दिवस को पूरे श्रद्धा, उत्साह और गौरव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिलेभर में महान क्रांतिकारी सिदो-कान्हू को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक भव्य जुलूस निकालकर सिदो-कान्हू के बलिदान को याद किया।1
- निरसा के पुराने थाना क्षेत्र के समीप स्थित एक पीजी लॉज में कथित तौर पर देह व्यापार संचालित होने के आरोपों के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले करीब एक वर्ष से इस लॉज में संदिग्ध गतिविधियां चल रही थीं। जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने लॉज में मौजूद दो युवक-युवतियों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन धक्का-मुक्की के दौरान वे दोनों जोड़े मौके से फरार हो गए। यह पूरी घटना पास के एक मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह लॉज इकबाल अहमद का है, जहाँ पहले एक रेस्टोरेंट भी संचालित होता था। सूचना मिलते ही एसडीपीओ लीलेश्वर महतो, थाना प्रभारी अजीत कुमार भारती और पुलिस बल मौके पर पहुँचे। पुलिस ने तुरंत लॉज को सील कर मुख्य द्वार और कमरों में ताला लगा दिया और अपनी जाँच शुरू की। पुलिस की तलाशी के दौरान लॉज से कुछ आपत्तिजनक सामग्री और सजने-संवरने से संबंधित सामान भी बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने लॉज मालिक के आवास पर भी छापेमारी की, लेकिन वह वहाँ नहीं मिला। फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहनता से जाँच कर रही है, और इस जाँच के निष्कर्षों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।6
- झारखंड में निरसा विधायक अरूप चटर्जी और सांसद ढुल्लू महतो के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इसी कड़ी में विधायक अरूप चटर्जी ने सांसद ढुल्लू महतो को 'अनपढ़' करार दिया है। अरूप चटर्जी ने अपने बयान में कहा है कि "40000 करोड़ का मालिक अनपढ़ है ढुल्लू महतो", जिससे दोनों नेताओं के बीच यह विवाद और गर्मा गया है।1