एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम में यादव समाज और समाजवादी पार्टी पर कथित टिप्पणी, प्रोफेसर के बयान पर उठे सवाल एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में एंकर चित्रा त्रिपाठी की मौजूदगी में यादव समाज और समाजवादी पार्टी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि भाजपा के प्रवक्ता संगीत रागी प्रोफेसर ने यादव समाज के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के लोगों के लिए भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। आरोप यह भी है कि प्रोफेसर ने मनोज काका और उनके माता-पिता के प्रति अभद्र शब्दों का प्रयोग किया। इस कथित बयान को लेकर यादव समाज और समाजवादी पार्टी के समर्थकों में नाराजगी है। यादव समाज और समाजवादी पार्टी के अपमान का आरोप किसी भी जाति, समाज या राजनीतिक दल के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादा के खिलाफ है। एक प्रोफेसर जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से समाज को सभ्य और मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा होती है। यदि सार्वजनिक मंच पर किसी समाज या राजनीतिक दल के लोगों को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानूनी कार्रवाई की मांग इस मामले में संबंधित अधिकारियों से मांग की जाती है कि एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम में दिए गए बयान की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जातिसूचक टिप्पणी या अन्य आपत्तिजनक भाषा की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए। यादव समाज और समाजवादी पार्टी के लोगों के सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोकतंत्र में विचारों का विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन किसी जाति, समाज या राजनीतिक दल के लोगों का अपमान करना उचित नहीं है। सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक मंचों पर जाति और राजनीतिक विचारधारा के नाम पर अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी? समाज में नफरत नहीं, बल्कि सम्मान, भाईचारा और लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम में यादव समाज और समाजवादी पार्टी पर कथित टिप्पणी, प्रोफेसर के बयान पर उठे सवाल एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में एंकर चित्रा त्रिपाठी की मौजूदगी में यादव समाज और समाजवादी पार्टी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि भाजपा के प्रवक्ता संगीत रागी प्रोफेसर ने यादव समाज के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के लोगों के लिए भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। आरोप यह भी है कि प्रोफेसर ने मनोज काका और उनके माता-पिता के प्रति अभद्र शब्दों का प्रयोग किया। इस कथित बयान को लेकर यादव समाज और समाजवादी पार्टी के समर्थकों में नाराजगी है। यादव समाज और समाजवादी पार्टी के अपमान का आरोप किसी भी जाति, समाज या राजनीतिक दल के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादा के खिलाफ है। एक प्रोफेसर जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से समाज को सभ्य और मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा होती है। यदि सार्वजनिक मंच पर किसी समाज या राजनीतिक दल के लोगों को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानूनी कार्रवाई की मांग इस मामले में संबंधित अधिकारियों से मांग की जाती है कि एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम में दिए गए बयान की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जातिसूचक टिप्पणी या अन्य आपत्तिजनक भाषा की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए। यादव समाज और समाजवादी पार्टी के लोगों के सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोकतंत्र में विचारों का विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन किसी जाति, समाज या राजनीतिक दल के लोगों का अपमान करना उचित नहीं है। सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक मंचों पर जाति और राजनीतिक विचारधारा के नाम पर अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी? समाज में नफरत नहीं, बल्कि सम्मान, भाईचारा और लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
- *(SD) बांकेबिहारी मंदिर में 11 नवंबर (भाईदूज) से शीतकालीन समय लागू: अब 1 घंटे देरी से जागेंगे ठाकुरजी, दर्शन समय में हुआ बदलाव......!!* *(SD) बांकेबिहारी मंदिर में 11 नवंबर (भाईदूज) से शीतकालीन समय लागू: अब 1 घंटे देरी से जागेंगे ठाकुरजी, दर्शन समय में हुआ बदलाव......!!*1
- आरओबी के नए नक्शे का विरोध, पुराने प्रस्ताव पर निर्माण की मांग इटावा में रेलवे के 26बी यानी महेवा फाटक पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के नए नक्शे को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर नए नक्शे को निरस्त करने और पुराने स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्माण कराने की मांग की है। प्रार्थना पत्र में बताया गया कि इटावा और एकदिल रेलवे स्टेशन के बीच महेवा फाटक पर प्रस्तावित आरओबी के पुराने नक्शे में पुल को मडैया मार्ग पर उतारने की योजना थी। इससे मडैया मार्ग से जुड़े करीब 40 गांवों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नए नक्शे में बदलाव कर पुल को मडैया मार्ग की जगह एनएच-19 की सर्विस रोड पर उतारने की योजना बनाई जा रही है। उनका कहना है कि सर्विस रोड पर पहले से ही वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में यहां पुल का निकास बनने से जाम की समस्या और बढ़ सकती है। लोगों का कहना है कि नए प्रस्ताव से मडैया मार्ग के ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर नए नक्शे को निरस्त कराने और पुराने स्वीकृत नक्शे के आधार पर मडैया मार्ग पर ही आरओबी का निर्माण कराने की मांग की है।1
- पत्रकारों के साथ किया अपराध तो खैरना हम सभी की जिम्मेदारी 8 राजस्थान पुलिस | Rajasthan Police | Shocking Case || TFI पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता एवं न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक #Rajasthan Policeों में त्वरित कार्रवाई, निष्पक्ष जाँच और 20 #Journalist Protectionई के लिए राजस्थान पुलिस प्रतिबद्ध #PressFreedom #RajasthanNews1
- एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम में यादव समाज और समाजवादी पार्टी पर कथित टिप्पणी, प्रोफेसर के बयान पर उठे सवाल एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में एंकर चित्रा त्रिपाठी की मौजूदगी में यादव समाज और समाजवादी पार्टी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि भाजपा के प्रवक्ता संगीत रागी प्रोफेसर ने यादव समाज के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के लोगों के लिए भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। आरोप यह भी है कि प्रोफेसर ने मनोज काका और उनके माता-पिता के प्रति अभद्र शब्दों का प्रयोग किया। इस कथित बयान को लेकर यादव समाज और समाजवादी पार्टी के समर्थकों में नाराजगी है। यादव समाज और समाजवादी पार्टी के अपमान का आरोप किसी भी जाति, समाज या राजनीतिक दल के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादा के खिलाफ है। एक प्रोफेसर जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से समाज को सभ्य और मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा होती है। यदि सार्वजनिक मंच पर किसी समाज या राजनीतिक दल के लोगों को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानूनी कार्रवाई की मांग इस मामले में संबंधित अधिकारियों से मांग की जाती है कि एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम में दिए गए बयान की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जातिसूचक टिप्पणी या अन्य आपत्तिजनक भाषा की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए। यादव समाज और समाजवादी पार्टी के लोगों के सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोकतंत्र में विचारों का विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन किसी जाति, समाज या राजनीतिक दल के लोगों का अपमान करना उचित नहीं है। सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक मंचों पर जाति और राजनीतिक विचारधारा के नाम पर अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी? समाज में नफरत नहीं, बल्कि सम्मान, भाईचारा और लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।1
- *इटावा में लगा मेगा विधिक सहायता शिविर, 56 विभागों ने एक छत के नीचे दी योजनाओं की जानकारी; किसान को मिला ट्रैक्टर और दो लाख की सहायता*1
- चाक पर दीपक बनाकर पुस्तैनी परंपरा को जिंदा रखे हैं कन्हैया लाल महेवा ब्लॉक क्षेत्र में दीपावली के पावन पर्व पर जहां घर-आंगन को रोशन करने के लिए दीपों का विशेष महत्व है, वहीं मिट्टी के दीपक बनाने वाले कुम्हार परिवार आज भी अपनी पुस्तैनी कला और परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। आधुनिकता के इस दौर में भी कुम्हारों के चाक पर मिट्टी को आकार देकर दीपक बनाने की कला लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ रही है। इसी परंपरा को महेवा क्षेत्र के कन्हैया लाल आगे बढ़ा रहे हैं। कन्हैया लाल अपने पिता श्याम सुंदर और दादा स्वर्गीय मन्नी लाल से विरासत में मिली मिट्टी के बर्तन एवं दीपक बनाने की कला को आज भी संजोए हुए हैं। इस पुस्तैनी कार्य में उनकी पत्नी रीना (35 वर्ष) भी पूरा सहयोग करती हैं। उनके दो पुत्र अर्पित और साहिल तथा पुत्री राधा भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। कन्हैया लाल अपने बच्चों को भी इस पारंपरिक कला से परिचित करा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी तक यह विरासत पहुंचती रहे। कन्हैया लाल ने बताया कि वह सुबह से ही पूरे परिवार के साथ दीपक बनाने के काम में जुट जाते हैं। बाजार में बिक्री के लिए जाने तक वह प्रतिदिन करीब 700 से 800 मिट्टी के दीपक तैयार कर लेते हैं। यदि किसी व्यापारी की ओर से विशेष ऑर्डर मिल जाता है तो उसे पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत भी करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि दीपावली पर मिट्टी के दीपकों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटने की खुशी में नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली पर दीपोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है। कन्हैया लाल ने आमजन से अपील की कि दीपावली पर रेडीमेड सजावटी दीपों के साथ मिट्टी के देशी दीपकों को भी प्राथमिकता दें। इससे पारंपरिक तरीके से दीपावली मनाने की परंपरा कायम रहेगी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मिट्टी के दीपक खरीदकर लोग मेहनतकश कुम्हार परिवारों की आजीविका में सहयोग कर सकते हैं।4
- *ब्रेकिंग न्यूज़* *इटावा पत्नी से विवाद के बाद युवक का हाईवोल्टेज ड्रामा, रेलवे ओवरब्रिज पर चढ़कर पति लटकने लगा!* *इटावा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग ओवरब्रिज पर युवक ने मचाया हड़कंप!* *पत्नी पर कई लड़के-लड़कियों के संपर्क में रहने का आरोप लगाकर जताई नाराजगी, खुद को बताया परेशान!* *ओवरब्रिज के निचले हिस्से पर चढ़कर लटकने लगा युवक, मौके पर जुटी राहगीरों की भारी भीड़!* *सूचना पर पहुंची पुलिस ने राहगीरों की मदद से काफी मशक्कत के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारा!* *युवक की पहचान अब्दुल आसिम के रूप में हुई, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी!* *इटावा में पारिवारिक विवाद के चलते ओवरब्रिज पर युवक के इस हाईवोल्टेज ड्रामे से इलाके में मचा रहा हड़कंप!*1
- एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम में यादव समाज और समाजवादी पार्टी पर कथित टिप्पणी, प्रोफेसर के बयान पर उठे सवाल एबीपी न्यूज़ के एक कार्यक्रम में एंकर चित्रा त्रिपाठी की मौजूदगी में यादव समाज और समाजवादी पार्टी को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि भाजपा के प्रवक्ता संगीत रागी प्रोफेसर ने यादव समाज के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के लोगों के लिए भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। आरोप यह भी है कि प्रोफेसर ने मनोज काका और उनके माता-पिता के प्रति अभद्र शब्दों का प्रयोग किया। इस कथित बयान को लेकर यादव समाज और समाजवादी पार्टी के समर्थकों में नाराजगी है। यादव समाज और समाजवादी पार्टी के अपमान का आरोप किसी भी जाति, समाज या राजनीतिक दल के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक मर्यादा के खिलाफ है। एक प्रोफेसर जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से समाज को सभ्य और मर्यादित व्यवहार की अपेक्षा होती है। यदि सार्वजनिक मंच पर किसी समाज या राजनीतिक दल के लोगों को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानूनी कार्रवाई की मांग इस मामले में संबंधित अधिकारियों से मांग की जाती है कि एबीपी न्यूज़ के कार्यक्रम में दिए गए बयान की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जातिसूचक टिप्पणी या अन्य आपत्तिजनक भाषा की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए। यादव समाज और समाजवादी पार्टी के लोगों के सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोकतंत्र में विचारों का विरोध करना सभी का अधिकार है, लेकिन किसी जाति, समाज या राजनीतिक दल के लोगों का अपमान करना उचित नहीं है। सवाल यह है कि क्या सार्वजनिक मंचों पर जाति और राजनीतिक विचारधारा के नाम पर अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी? समाज में नफरत नहीं, बल्कि सम्मान, भाईचारा और लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।1