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VIJAY Kumar Sharma Vijay Paswan
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- Post by VIJAY Kumar Sharma Vijay Paswan1
- ya patel nager ansari masjid ka picha na hi roade hay na hi nali bana hoa hay1
- Post by UP 42 Ayodhya Live1
- वनवीरपुर गांव के पास नगर निगम का कूड़ा डंप हुआ है जिसमें आग लग गई है और पांच दिनों से लगातार जल रहा है जिससे वहां रहने वाले लोगों को सांस लेने की समस्या हो रही है खासकर बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने की समस्या हो रही है। लगातार डर बना हुआ है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। कृपया अयोध्या प्रशासन अयोध्या नगर निगम अतिशीघ्र संज्ञान ले और जल्द से जल्द उचित कार्यवाही करने की कृपा करे4
- अगर आप अदालतों के चक्कर काटकर थक चुके हैं या किसी पुराने कानूनी विवाद से तुरंत छुटकारा पाना चाहते हैं, तो 14 मार्च 2026 की तारीख आपके लिए बेहद खास है। इस दिन देशभर में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जहां आपसी सहमति के आधार पर सालों से लंबित मामलों का निपटारा कुछ ही मिनटों में किया जा सकता है। लोक अदालत एक ऐसी जगह है जहां न तो किसी की जीत होती है और न ही किसी की हार, बल्कि दोनों पक्ष सम्मानजनक समझौते के साथ हाथ मिलाते हैं। बैंक लोन रिकवरी, बिजली बिल विवाद, चेक बाउंस और छोटे-मोटे सिविल मामलों के लिए यह एक सुनहरा मौका है, जहां आप बिना किसी कानूनी फीस के अपना बोझ हल्का कर सकते हैं।1
- अयोध्या जिले के थाना बीकापुर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत पूरे नंदा तिवारी असकरनपुर गांव में पालतू बैल न होने से गांव के युवक देसी कोल्हू के बैल बनकर देसी कोल्हू से गन्ने की पेराई करते देखे गए। होली के त्योहार पर दही मेंवा और अन्य सामग्री डालकर गन्ने के शरबत का ग्रामीणों द्वारा जमकर लुफ्त उठाया गया तथा गांव के लोगों को पिलाया गया। गांव के बुजुर्ग छोटेलाल तिवारी,शत्रुघ्न प्रसाद द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया कि मशीनीकरण के चलते गांव में चलने वाला देसी कोल्हू का जमाना अब खत्म हो चला है। मुंशी प्रेमचंद जी के बैलों की जोड़ी भी अब इस गांव में न के बराबर रह गई है।असकरन पुर गांव में स्थित देसी कोल्हू पुराने जमाने की याद ताजा कर रहा है। गांव में कई देसी कोल्हू मौजूद थे बैलों से गन्ने की पेराई होती थी। गांव में बने देसी गुड़ की खुशबू पूरे मोहल्ले में फैल गुड बनने का आभार कराती थी लेकिन अब वह बात नहीं रह गई है। अब गांव में सिर्फ एक देसी कोल्हू अभी मौजूद है। जिसमें ग्रामीण गन्ने का रस निकालने के लिए बैलों की जगह खुद लगकर एक दूसरे का सहयोग करते हैं।1
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- Post by UP 42 Ayodhya Live1