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यह आवाज़ उठाती है कि कैसे नेता के बेटे बिना चुनाव लड़े मंत्री बन जाते हैं. वहीं, पढ़े-लिखे किसान के बेटे को नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है. यह असमानता समाज में न्याय और अवसरों पर सवाल खड़े करती है.
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यह आवाज़ उठाती है कि कैसे नेता के बेटे बिना चुनाव लड़े मंत्री बन जाते हैं. वहीं, पढ़े-लिखे किसान के बेटे को नौकरी के लिए संघर्ष करना पड़ता है. यह असमानता समाज में न्याय और अवसरों पर सवाल खड़े करती है.
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- कटिहार शहर स्थित अग्रसेन भवन में गुरुवार से चार दिवसीय बिहार राज्य शतरंज प्रतियोगिता का शानदार शुभारंभ हुआ है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की मेजबानी लगातार तीसरी बार कटिहार को मिली है, जिससे खिलाड़ियों और खेलप्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। इस आयोजन की जिम्मेदारी कटिहार जिला शतरंज संघ ने ली है। प्रतियोगिता का उद्घाटन महापौर उषा देवी अग्रवाल, डॉ. शंभू नाथ, गीत अविनाश, डॉ. आलोक राज, पीयूष कुमार, संजीव सुरेखा और विकास खंडेलिया सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। आयोजकों ने इस अवसर पर कहा कि शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि बौद्धिक क्षमता, धैर्य और रणनीति का एक अद्भुत संगम है। संघ के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने जानकारी दी कि इस प्रतियोगिता में विजयी होने वाले खिलाड़ियों को पुडुचेरी में होने वाली राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इस आयोजन को बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। प्रतियोगिता में राज्य के 19 जिलों से 13 वर्ष आयु वर्ग के कुल 109 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें पूर्णिया, पटना, किशनगंज, छपरा, बांका, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, सहरसा, पश्चिम चंपारण, बेगूसराय, समस्तीपुर, सारण, खगड़िया, मुंगेर, भोजपुर, भागलपुर, मधुबनी और वैशाली जैसे कई जिलों के खिलाड़ी शामिल हैं। संघ के संयुक्त सचिव सत्यम समदर्शी ने इस बात पर जोर दिया कि संगठन हर साल ऐसी प्रतियोगिताओं का आयोजन जारी रखेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इन आयोजनों से ऐसी प्रतिभाएं निकलेंगी जो ग्रैंडमास्टर बनकर न केवल कटिहार जिले, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करेंगी। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों, उनके अभिभावकों और पूरे शहरवासियों में हर्ष और उत्साह का माहौल बना हुआ है।1
- कटिहार जिले के आजमनगर में पिछले 15 सालों से एक प्रमुख सड़क की स्थिति दयनीय बनी हुई है, जहाँ रोड जर्जर हालत में है और पानी के निकास की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। यह सड़क आजमनगर मार्केट को जोड़ने वाली मुख्य मार्ग है, जिसकी बदहाली के कारण वार्ड नंबर 5 और 7/8 के निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महलदार टोला ठाकुरबाड़ी क्षेत्र में, ग्रामीणों को घर से निकलते ही जलभराव की समस्या झेलनी पड़ती है। इस जलभराव के कारण आए दिन स्कूल जाने वाले बच्चे भी गिर जाते हैं। पिछले डेढ़ दशक से चली आ रही यह समस्या स्थानीय लोगों के लिए लगातार गंभीर परेशानी का कारण बनी हुई है।2
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- राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन के फैसले को ऐतिहासिक बताया। मरांडी के अनुसार, यह कदम न केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन की हकीकत को उजागर करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पाकुड़ में आयोजित दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के समापन सत्र में भाग लेते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वजह से संथाल परगना प्रमंडल और झारखंड के कई जिलों में आदिवासियों की आबादी में भारी कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से झारखंड और संथाल परगना में, आदिवासियों की संस्कृति, उनकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हो गए हैं। मरांडी ने संथाल परगना प्रमंडल के आंकड़े देते हुए बताया कि 1951 में आदिवासियों की जो आबादी थी, वह जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण घटकर आज 25 प्रतिशत रह गई है, जबकि मुसलमानों की आबादी इसी अवधि में 9 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार की यह उच्च-स्तरीय समिति मामले की गहनता से जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को निश्चित रूप से भागना पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आदिवासियों के जीवन में बदलाव आएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़ मचने का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड में होने वाले एसआईआर (SIR) से भी इन घुसपैठियों की हकीकत सामने आएगी।1
- मथुरापुर और प्यालापुर क्षेत्रों में सड़कें पूरी तरह से बारिश के पानी से भर गई हैं। यह स्थिति कल शाम लगभग 5:30 बजे आई जोरदार बारिश और आंधी-तूफान के कारण उत्पन्न हुई, जिसमें गरज के साथ पानी बरसा। लोगों और बच्चों को आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, साथ ही यह भी अपील की गई है कि बारिश होने पर घर से बाहर न निकलें।1
- लोगों ने सरकार से अत्यंत भावुक निवेदन किया है कि उन्हें 'जाने आने की रस्म' प्रदान की जाए। यह मार्मिक अपील इसलिए की गई है क्योंकि उन्हें 'जाने आने' के लिए अनुमति नहीं दी जा रही है।2
- प्रेम प्रसंग के चलते घर छोड़ने वाली एक बेटी का उसके परिवार ने जीते जी अंतिम संस्कार कर दिया है। यह चौंकाने वाली घटना गांव में सामने आई, जहां जीवित बेटी के लिए बाकायदा अर्थी निकाली गई। परिवार द्वारा उठाए गए इस कदम से रिश्ते की मर्यादा और सामाजिक प्रतिक्रिया की गंभीरता स्पष्ट होती है।1
- एक तीखा सवाल उठाया गया है कि क्या बिहार के मुख्यमंत्री का ध्यान गुजरात से संबंधित चिंताओं पर अधिक केंद्रित है। इस प्रश्न के साथ इस बात पर भी जोर दिया गया है कि प्रशांत किशोर ने पहले जो कहा था, वह अब बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में सच होता दिख रहा है। यह पूरी चर्चा प्रशांत किशोर के जन सुराज अभियान और बिहार के संदर्भ में की गई है।1
- PMCH में खबर कवरेज करने पहुंचे एक पत्रकार के साथ मारपीट की घटना सामने आई है। इस घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।1