वृंदावन में गंगा दशहरा का पावन पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर सहित सभी प्रमुख देवालयों में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा, जहाँ श्रद्धालुओं ने आराध्य के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। पवित्र स्नान की विशेष महत्ता के कारण यमुना घाटों पर भी आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जहाँ भक्तों ने यमुना नदी में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस पर्व को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर था, और नगर निगम तथा पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विशेष रूप से, 6 प्रमुख घाटों पर स्नान की व्यवस्था की गई थी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गोताखोरों की 8 टीमें तैनात की गईं। इसके अतिरिक्त, गहरे पानी वाले क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड और बल्लियां लगाई गईं, जबकि घाटों पर स्थायी चेंजिंग रूम और खोया-पाया केंद्र भी स्थापित किए गए। सहायक नगर आयुक्त अनुज कौशिश ने इस संबंध में एक बाइट दी। यह जानकारी मथुरा वृंदावन के जिला संवाददाता जगदीश यदुवंशी द्वारा रिपोर्ट की गई है, जिसमें गंगा दशहरा पर मथुरा वृंदावन के मंदिरों में एवं यमुना में स्नान करने वालों की उमड़ी भीड़ और यमुना के घाटों पर शासन-प्रशासन द्वारा किए गए कड़े इंतजामों पर जोर दिया गया है।
वृंदावन में गंगा दशहरा का पावन पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर सहित सभी प्रमुख देवालयों में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा, जहाँ श्रद्धालुओं ने आराध्य के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। पवित्र स्नान की विशेष महत्ता के कारण यमुना घाटों पर भी
आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जहाँ भक्तों ने यमुना नदी में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस पर्व को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर था, और नगर निगम तथा पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विशेष रूप से, 6 प्रमुख घाटों पर स्नान की व्यवस्था की
गई थी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गोताखोरों की 8 टीमें तैनात की गईं। इसके अतिरिक्त, गहरे पानी वाले क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड और बल्लियां लगाई गईं, जबकि घाटों पर स्थायी चेंजिंग रूम और खोया-पाया केंद्र भी स्थापित किए गए। सहायक नगर आयुक्त अनुज कौशिश ने इस संबंध में एक
बाइट दी। यह जानकारी मथुरा वृंदावन के जिला संवाददाता जगदीश यदुवंशी द्वारा रिपोर्ट की गई है, जिसमें गंगा दशहरा पर मथुरा वृंदावन के मंदिरों में एवं यमुना में स्नान करने वालों की उमड़ी भीड़ और यमुना के घाटों पर शासन-प्रशासन द्वारा किए गए कड़े इंतजामों पर जोर दिया गया है।
- मथुरा जनपद के छाता क्षेत्र स्थित ग्राम दौताना में मोहर्रम के पावन अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने रक्तदान किया। इस रक्तदान शिविर में मुख्य रूप से युवा वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे यह पर्व सेवा भाव से मनाया गया।1
- वृंदावन में गंगा दशहरा का पावन पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर सहित सभी प्रमुख देवालयों में दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा, जहाँ श्रद्धालुओं ने आराध्य के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। पवित्र स्नान की विशेष महत्ता के कारण यमुना घाटों पर भी आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जहाँ भक्तों ने यमुना नदी में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस पर्व को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर था, और नगर निगम तथा पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। विशेष रूप से, 6 प्रमुख घाटों पर स्नान की व्यवस्था की गई थी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गोताखोरों की 8 टीमें तैनात की गईं। इसके अतिरिक्त, गहरे पानी वाले क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड और बल्लियां लगाई गईं, जबकि घाटों पर स्थायी चेंजिंग रूम और खोया-पाया केंद्र भी स्थापित किए गए। सहायक नगर आयुक्त अनुज कौशिश ने इस संबंध में एक बाइट दी। यह जानकारी मथुरा वृंदावन के जिला संवाददाता जगदीश यदुवंशी द्वारा रिपोर्ट की गई है, जिसमें गंगा दशहरा पर मथुरा वृंदावन के मंदिरों में एवं यमुना में स्नान करने वालों की उमड़ी भीड़ और यमुना के घाटों पर शासन-प्रशासन द्वारा किए गए कड़े इंतजामों पर जोर दिया गया है।4
- अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय ने भरत तिवारी एनकाउंटर से जुड़े अहम सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि इस घटना में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ आखिरकार कब कार्रवाई की जाएगी।1
- मथुरा जनपद के कोसीकलां स्थित ग्राम कोटवन इंडस्ट्रीज एरिया में फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित कर रहा है, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोग गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। आरोप है कि कोटवन औद्योगिक क्षेत्र में कुछ फैक्ट्रियां बिना मानकों का पालन किए चल रही हैं। इन इकाइयों से निकलने वाले जहरीले-काले धुएं और बदबू से क्षेत्र के 3 हजार से अधिक ग्रामीण परेशान हैं। सैकड़ों वृद्ध, महिलाएं और बच्चे एलर्जी, खुजली, सांस फूलने और फेफड़ों में संक्रमण जैसी बीमारियों से पीड़ित हो चुके हैं। विशेष रूप से, एक टायर प्लांट के खिलाफ कोटवन नबीपुर के ग्रामीण कई बार आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन हर बार कुछ दिनों के लिए फैक्ट्री बंद होकर फिर से चालू हो जाती है। प्रदूषण विभाग द्वारा इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इन औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला जहरीला धुआं सिर्फ ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि यहां काम करने वाले मजदूरों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। दिनभर कंडम टायरों को बॉयलर में डालकर उनसे निकलने वाले तेल, तार और कार्बन को इकट्ठा करने वाले मजदूरों का जीवन भी खतरे में है। टायर प्लांट के भीतर काम करने वाले मजदूर सिर से लेकर पैर तक कार्बन से काले पड़े रहते हैं। यह देखना बाकी है कि योगी सरकार इन ग्रामीण वासियों की पुकार सुनती है या नहीं, क्योंकि टायर प्लांट से निकलने वाला धुआं लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बन गया है और एनजीटी व सरकार दोनों ही खामोश हैं।2
- मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में मौजा-मगोरा के नगला लठाकुरी में एक सरकारी तालाब की भूमि पर अवैध निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में स्थानीय निवासी बहादुर सिंह ने गोवर्धन के तहसीलदार को लिखित शिकायत सौंपी है, जिसमें कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता बहादुर सिंह (पुत्र लक्ष्मण सिंह) का आरोप है कि मौजा-मगोरा के खसरा संख्या 841 पर स्थित सरकारी तालाब की भूमि पर अवैध रूप से निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि तहसील के पटवारी ने इस मामले में गलत रिपोर्ट पेश की है, जिससे अवैध निर्माण करने वालों को बढ़ावा मिल रहा है। प्रार्थना पत्र के माध्यम से पीड़ित और ग्रामीणों ने तहसीलदार से इस अवैध निर्माण को तुरंत रुकवाने की गुहार लगाई है। इसके साथ ही, गलत रिपोर्ट पेश करने वाले तहसील कर्मियों के खिलाफ उचित और दंडात्मक कार्रवाई की भी मांग की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, संबंधित अधिकारियों, जिनमें एसएचओ मगोरा और रा.नि./लेखपाल शामिल हैं, को मौके पर शांति-व्यवस्था बनाए रखते हुए अवैध निर्माण रोकने और मामले की सही जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। हालाँकि, समय 05:57 मिनट पर तहसीलदार महोदय का फोन नंबर बंद पाया गया।1
- मथुरा जनपद के कोसीकलां स्थित ग्राम कोटवान इंडस्ट्रीज एरिया में टायर प्लांट और अन्य कारखानों से निकलने वाला जहरीला धुआँ और बदबू न केवल पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोग भी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। आरोप है कि ये औद्योगिक इकाइयां बिना किसी मानक के चल रही हैं, जिससे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सरकार की खामोशी पर सवाल खड़े हो गए हैं। इन इकाइयों से निकलने वाले काले धुएँ और दुर्गंध के कारण कोटवन के 3,000 से अधिक ग्रामीण परेशान हैं। सैकड़ों वृद्ध, महिलाएं और बच्चे एलर्जी, खुजली, सांस फूलने और फेफड़ों में संक्रमण जैसी बीमारियों से पीड़ित हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कोटवन नबीपुर के निवासियों ने टायर प्लांट के खिलाफ कई बार आंदोलन किए हैं, जिसके बाद फैक्ट्री कुछ दिन के लिए बंद हो जाती है, लेकिन फिर से शुरू हो जाती है। प्रदूषण विभाग भी इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता। यह जहरीला धुआँ सिर्फ ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। कंडम टायरों को बॉयलर में डालकर तेल, तार और कार्बन इकट्ठा करने वाले मजदूर दिनभर कार्बन से सने रहते हैं, जिससे उनका जीवन भी खतरे में है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि योगी सरकार इन ग्रामीण वासियों की गंभीर समस्या पर ध्यान देती है या नहीं।1
- बदायूं ज़िले की गौशाला में व्यवस्थाओं के अभाव के कारण गौमाताएं बीमार हो रही हैं। इस गंभीर स्थिति के मद्देनज़र, बदायूं के जिला अध्यक्ष विभाष चंद्र सक्सेना ने एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) से बातचीत की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगले 10 से 15 दिनों के भीतर गौशाला में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर दी जाएंगी। अब गौमाता के हित में इस वादे के पूरा होने का बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा है।1