अपनी गर्भवती बेटी की जान बचाने के लिए एक माँ ने 11 दिन पहले पुलिस से गुहार लगाई थी, लेकिन समय पर कार्रवाई न होने के कारण आज वही बेटी कब्र में है। माँ ने लिखित शिकायत में दहेज प्रताड़ना, जान के खतरे और अपनी गर्भवती बेटी की सुरक्षा की मांग की थी। हालांकि, इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते 11 दिन बाद रेशमा की मौत हो गई। इस घटना ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि प्रशासन तब क्या कर रहा था जब एक माँ अपनी बेटी की जान बचाने के लिए गुहार लगा रही थी। रेशमा के परिवार ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है और अब वे दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने, उनकी गिरफ्तारी करने और मामले की निष्पक्ष जांच शुरू करने की मांग कर रहे हैं। परिवार का सवाल है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और अगर समय रहते कार्रवाई की जाती तो क्या रेशमा आज जीवित होती।
अपनी गर्भवती बेटी की जान बचाने के लिए एक माँ ने 11 दिन पहले पुलिस से गुहार लगाई थी, लेकिन समय पर कार्रवाई न होने के कारण आज वही बेटी कब्र में है। माँ ने लिखित शिकायत में दहेज प्रताड़ना, जान के खतरे और अपनी गर्भवती बेटी की सुरक्षा की मांग की थी। हालांकि, इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते 11 दिन बाद रेशमा की मौत हो गई। इस घटना ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि प्रशासन तब क्या कर रहा था जब एक माँ अपनी बेटी की जान बचाने के लिए गुहार लगा रही थी। रेशमा के परिवार ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है और अब वे दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने, उनकी गिरफ्तारी करने और मामले की निष्पक्ष जांच शुरू करने की मांग कर रहे हैं। परिवार का सवाल है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और अगर समय रहते कार्रवाई की जाती तो क्या रेशमा आज जीवित होती।
- Post by Deshi dashtak1
- बांकीपुर में यह प्रस्ताव सामने आया है कि प्रशांत किशोर को वोट देकर किसी कथित गलती को सुधारा जा सकता है। इस संभावना को लेकर प्रबुद्ध जनों के साथ एक सभा में चर्चा किए जाने पर विचार हो रहा है।1
- Post by CHANDAN KUMAR1
- ब्रह्मपुर प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि दुर्गा चरण मिश्रा ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर अपनी बात रखी है। उनका बयान सामने आया है, जिसे सुना जा सकता है।1
- सिवान जिले के आंदर थाना क्षेत्र अंतर्गत हसनपुरवा गांव में बीते 17 मई को हुई महिला की हत्या के मामले में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस ने इस हत्याकांड में संलिप्त एक आरोपी को हसनपुरवा गांव से गिरफ्तार कर मंगलवार दोपहर 1 बजे न्यायिक हिरासत में सिवान जेल भेज दिया है। थानाध्यक्ष सुनील कुमार के अनुसार, हसनपुरवा गांव निवासी पनमती देवी की हत्या के इस मामले में गिरफ्तार आरोपी की पहचान उत्तिम चौधरी उर्फ उत्तिम यादव के रूप में हुई है, जो स्वयं भी हसनपुरवा गांव का ही निवासी है।1
- दहेज प्रताड़ना की शिकायत, जान का खतरा, और गर्भवती बेटी की सुरक्षा की मांग सहित सभी बातें प्रशासन को लिखित में दी गई थीं, इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी निष्क्रियता के 11 दिन बाद रेशमा की मौत हो गई, जिसके बाद से परिवार न्याय की मांग कर रहा है। यह घटना व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि जब एक माँ अपनी बेटी की जान बचाने की गुहार लगा रही थी, तब प्रशासन क्या कर रहा था। पीड़ित परिवार ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनकी मांग है कि नामजद आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए, उनकी गिरफ्तारी हो और मामले की निष्पक्ष जांच शुरू की जाए। परिवार का सवाल है कि यदि समय रहते शिकायत पर कार्रवाई होती, तो क्या रेशमा आज जीवित न होती?1
- Post by CHANDAN KUMAR1
- जगदीशपुर नगर भाजपा द्वारा डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर कई लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।1
- लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए एक भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है, जिसमें 15 छात्रों/युवाओं की जान चली गई और अनेक परिवारों के सपने टूट गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद भवन में फंसे लोगों को बाहर निकलने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा था। इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले छात्रों में सागर, नीलेश, अनामिका, संयम, अनुचा, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज भाह, भाहजान, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अम्मार और सुमल्या शामिल थे। वहीं, जयंत, लवप्रीत, मोहम्मद आसिफ, भुवन श्रीवास्तव, पंकज, शैलेन्द्र, अभिषेक, पंकज जोशी और गौरव कुमार घायल बताए गए हैं। प्रारंभिक जांच में भवन की सुरक्षा व्यवस्था, फायर सेफ्टी मानकों के पालन और निर्माण संबंधी अनियमितताओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भवन मालिक समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है और छह लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, सरकार ने मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। हादसे के बाद यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि इस त्रासदी के लिए केवल भवन मालिक ही जिम्मेदार हैं या वे अधिकारी भी, जिनकी कथित अनदेखी के कारण सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गईं। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि बचाव कार्य के दौरान आवश्यक संसाधनों और उपकरणों की कमी महसूस की गई, जिसने इस त्रासदी को और भी गहरा कर दिया। अब पूरे देश की नजर SIT की जांच पर टिकी है। पीड़ितों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी मानी जाएगी जब इस अग्निकांड के लिए असली जिम्मेदारी तय हो और सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।1