बिहार के मधेपुरा में आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों आशा कार्यकर्ता सदर अस्पताल परिसर में अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए हैं, जिसका मुख्य कारण बिना कोई स्पष्टीकरण दिए उन्हें चयनमुक्त किया जाना है। इस दौरान उन्होंने अपनी सेवा स्थायी करने से लेकर मानदेय बढ़ाने तक की कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। सोमवार को बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ के बैनर तले आयोजित इस एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल होने पर कई आशा कार्यकर्ताओं को बिना कारण बताए चयनमुक्त किया जा रहा है, जिसे वे पूरी तरह अन्यायपूर्ण मानते हैं। संघ की महामंत्री सुधा सुमन ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। धरने के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने सेवा आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने, सेवा स्थायी करने, सरकारी कर्मी का दर्जा देने और जब तक सेवा स्थायी न हो, तब तक 26 हजार रुपये मासिक मानदेय देने की मांग की। आशा फैसिलिटेटरों के लिए सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि और 10 हजार रुपये मासिक पेंशन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई, साथ ही पीएचसी में बैठने की समुचित व्यवस्था की मांग भी की गई। वहीं, जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम प्रिंस ने बताया कि कुछ प्रखंडों से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों ने प्रशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। विभाग की ओर से कहा गया है कि सभी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक व्यापक व तेज करेंगे।
बिहार के मधेपुरा में आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों आशा कार्यकर्ता सदर अस्पताल परिसर में अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए हैं, जिसका मुख्य कारण बिना कोई स्पष्टीकरण दिए उन्हें चयनमुक्त किया जाना है। इस दौरान उन्होंने अपनी सेवा स्थायी करने से लेकर मानदेय बढ़ाने तक की कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। सोमवार को बिहार राज्य आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ के
बैनर तले आयोजित इस एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल होने पर कई आशा कार्यकर्ताओं को बिना कारण बताए चयनमुक्त किया जा रहा है, जिसे वे पूरी तरह अन्यायपूर्ण मानते हैं। संघ की महामंत्री सुधा सुमन ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। धरने के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने सेवा आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने, सेवा स्थायी करने, सरकारी कर्मी का दर्जा देने
और जब तक सेवा स्थायी न हो, तब तक 26 हजार रुपये मासिक मानदेय देने की मांग की। आशा फैसिलिटेटरों के लिए सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि और 10 हजार रुपये मासिक पेंशन की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई, साथ ही पीएचसी में बैठने की समुचित व्यवस्था की मांग भी की गई। वहीं, जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम प्रिंस ने बताया कि कुछ प्रखंडों से प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों
ने प्रशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। विभाग की ओर से कहा गया है कि सभी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक व्यापक व तेज करेंगे।
- कुनौली के निवासियों ने अपने बाजार के लिए एकजुट होकर यह मांग की है कि इसे विकसित और व्यवस्थित बनाया जाए। उनकी प्रमुख मांगों में बाजार के दोनों ओर पक्के नाले का निर्माण, बाइक पार्किंग की उचित व्यवस्था, और जलजमाव तथा कीचड़ से स्थायी मुक्ति शामिल है। निवासियों का कहना है कि वे एक स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बाजार चाहते हैं। कुनौली वासियों की यह साझा आवाज है कि उन्हें "ऐसा कुनौली चाहिए, जिस पर हर कुनौलीवासी को गर्व हो।" सुपौल मीडिया के रिपोर्टर देव राज द्वारा प्रस्तुत इस खबर में जिला प्रशासन सुपौल, विक्रम पासवान, अमन भास्कर और सम्राट चौधरी को टैग किया गया है, जो इन जनहित की मांगों पर ध्यान देने का संकेत देता है।1
- नवहट्टा प्रखंड में रात 8 बजे जोरदार बारिश हुई। इस बारिश से क्षेत्र के किसानों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।1
- जो लोग मुसलमानों के तीन तलाक के विषय पर लगातार 'ज्ञान' देते रहे हैं, वही अब यह दावा कर रहे हैं कि राम मंदिर का मुद्दा उनका अपना निजी मामला है।1
- चिकना में सड़क की मौजूदा स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया गया है।1
- यह संदेश बुराई की प्रवृत्ति और सामाजिक विकृतियों पर गहरा चिंतन प्रस्तुत करता है। इसमें कहा गया है कि बुरा व्यक्ति हमेशा दूसरों की बुराई करता है, जबकि अपनी कमियों को उजागर करने से बचता है। संदेश में 'जाति बोल बाला' की सहायक भूमिका और 'सत्य कर्मों' के शोषक 'हैवान' जैसी बुराई पर तीखी आलोचना की गई है, जो दिखाता है कि कैसे समाज में वास्तविक अच्छे कर्मों को दबाया जाता है। इसके विपरीत, संदेश कर्मठ व्यक्ति की महिमा का बखान करता है, जो लगातार अच्छे कर्मों में लीन रहता है और केवल अपने कर्मों पर ही निर्भर करता है। इस विचार को सूर्य और चंद्रमा के उदाहरण से समझाया गया है, जो बिना अपनी बड़ाई किए ही संसार में प्रकाश फैलाते हैं। यह रेखांकित करता है कि सच्चे कर्मशील को अपनी प्रशंसा की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि उसके कार्य स्वयं ही प्रकाशित होते हैं।1
- बिहार के मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड स्थित जीतापुर गाँव में युवा समाजसेवी कृष्ण मोहन ठाकुर के निधन पर एक भावुक श्रद्धांजलि सह संकल्प सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने भारी संख्या में एकत्रित होकर दिवंगत कृष्ण मोहन ठाकुर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने उनके सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया, जिसे उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया गया। राजद के वरिष्ठ नेता गोसांय ठाकुर के ज्येष्ठ पुत्र और आदर्श युवक संघ, जीतापुर के कोषाध्यक्ष रहे कृष्ण मोहन ठाकुर को उपस्थित लोगों ने एक सरल, ईमानदार और समाज के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के रूप में याद किया। भाकपा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने उनके जीवन को समाज सेवा के लिए समर्पित बताया, जबकि जदयू व्यावसायिक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि कृष्ण मोहन ठाकुर अपने व्यवहार और सामाजिक योगदान से लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे। जीतापुर स्थित सोनाय महाराज स्थान परिसर में आयोजित इस सभा की शुरुआत कृष्ण मोहन ठाकुर के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता आदर्श युवक संघ, जीतापुर के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रेम लाल मंडल ने की। सभा में पूर्व मुखिया जीवछ मंडल, मुखिया दयानंद यादव, प्रोफेसर प्रेम लाल मंडल, राजेश्वर प्रसाद यादव, विमल भारती, रमेश कुमार शर्मा, शंभू सिंह सहित कई सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। श्रद्धांजलि सभा का समापन दो मिनट के मौन और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना के साथ हुआ, जहाँ पूरे गाँव ने नम आँखों से अपने युवा समाजसेवी को विदाई दी।4
- सुपौल जिले का कुनौली बॉर्डर आज भी एक व्यवस्थित बस स्टैंड की सुविधा से वंचित है, जिससे यहाँ से प्रतिदिन आवाजाही करने वाले हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित इस कुनौली बॉर्डर पर रोज़ाना हजारों लोगों का आना-जाना लगा रहता है और बसें भी चलती हैं, लेकिन यात्रियों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए अब तक कोई सुव्यवस्थित बस स्टैंड नहीं बन पाया है। इस कमी के कारण यात्रियों को रोज़मर्रा की आवाजाही में गंभीर असुविधा हो रही है। सुपौल मीडिया के देव राज द्वारा रिपोर्ट की गई जानकारी के अनुसार, अब यह समय आ गया है कि सरकार इस महत्वपूर्ण सीमा क्षेत्र की जरूरतों को समझे और जनहित में कुनौली में शीघ्र ही बस स्टैंड का निर्माण सुनिश्चित करे। जनता की एकमात्र और स्पष्ट माँग है कि कुनौली में तत्काल बस स्टैंड का निर्माण किया जाए, ताकि इस क्षेत्र का विकास हो सके और यात्रियों की परेशानी दूर हो।1
- दरभंगा जिले के कोरहरम चौक की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई गई है। वहाँ हर तरफ केवल अवैध कब्ज़ा और बेरोकटोक वसूली का ही राज व्याप्त है।1
- अरवल जिले के जनकपुर धाम स्थित रेड लाइट एरिया में पुलिस टीम द्वारा एक छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से कई लड़कियों को बरामद किया।1