अशोक जी पोरवाल केंद्रीय संघ कार्यालय प्रमुख: संघ नींव में ज्ञात - अज्ञात विर्सजित पुष्प श्रृंखला 157 = परिवर्तन के योद्धा राजेश्वर जी - भारतवर्ष के सभी मुसलमानों व ईसाइयों के पूर्वज हिन्दू हैं। उन्हें अपने पूर्वजों के पवित्र धर्म में वापस लाने के महान कार्य को अपने जीवन का लक्ष्य बनाने वाले श्री राजेश्वर जी का जन्म 16 फरवरी, 1916 को दिल्ली में श्री भगवानदास जी के घर में हुआ था । वे कक्षा में हमेशा प्रथम आते थे। धनाभाव के कारण पिताजी ने उन्हें कक्षा 10 के बाद पढ़ाने से मना कर दिया, परन्तु उनके बड़े भाई श्री लुभाया राम के आग्रह पर पिताजी मान गये और फिर राजेश्वर जी ने ट्यूशन पढ़ाते हुए बी.एस-सी. किया। उन दिनों छुआछूत और जन्मना जातिभेद का जोर था, परन्तु उन्होंने अपनी मां और भाभी को समझाकर रसोई में एक सफाइकर्मी के बेटे को काम पर रखा। इससे पड़ोसियों ने 2 वर्ष तक उनके घर से खानपान का बहिष्कार किया। 1934 में उन्होंने पञ्चकुइया मार्ग पर देखा कि एक मुसलमान कुएं से पानी लेकर हरिजन महिलाओं की बाल्टियों में डाल रहा है। साथ ही वह उनसे गन्दे मजाक भी कर रहा था । उन दिनों हरिजन कुएं की मुंडेर पर अपने घड़े नहीं रख सकते थे। यह देखकर राजेश्वर जी प्रतिदिन वहां आकर घड़ों में पानी भरने लगे। इस पर उस मुसलमान से झगड़ा भी हुआ, परन्तु राजेश्वर जी डटे रहे और फिर धीरे-धीरे वे महिलाएं स्वयं ही कुएं से पानी लेने लगीं। उन दिनों सफाइकर्मी सिर पर मैला ढोकर ले जाते थे। 1939 में राजेश्वर जी शिमला में रहते थे। उन्होंने एक दिन सफाइकर्मियों के नेता सोहनलाल के साथ खाना बनाकर खाया। उसने बताया कि हिन्दुओं के व्यवहार से दुखी होकर वे सब धर्मान्तरण करने वाले थे, परन्तु अब वे यह नहीं करेंगे। पहाड़गंज (दिल्ली) में अंधविश्वास के कारण कई हिन्दू महिलाएं नमाज से लौटते हुए मुसलमानों से बच्चों के मुंह पर फूंक लगवाती थीं। राजेश्वर जी ने अपने मित्रों के साथ 'हिन्दू धर्म संघ' नामक संस्था बनाकर इस कुप्रथा को बन्द कराया। राजेश्वर जी कालबाह्य हो चुकी रूढ़ियों के विरोधी थे। 1941 में उन्होंने प्रतीकात्मक दहेज लेकर अन्तरजातीय विवाह किया। इसके लिए जानबूझ कर वह तिथि चुनी, जिसमें विवाह वर्जित है। इसके बाद आर्य समाज के माध्यम से उन्होंने बड़ी संख्या में अन्तरजातीय और दहेज रहित विवाह कराये। 1946 में पहाड़गंज में मुसलमानों ने बकरीद पर गाय का जुलूस निकालकर उसे काटने की योजना बनाई। राजेश्वर जी ने अपने भाई बंसीलाल तथा एक स्वयंसेवक पूरनचंद के साथ उस जुलूस पर हमला कर गाय को छुड़ा लिया। राजेश्वर जी सभी सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं में सक्रिय रहते थे । वे दक्षिण दिल्ली के विभाग संघचालक थे। 1983 में वि.हि.प. की बैठक में एक कार्यकर्ता ने कहा कि सब हिन्दुओं को एक-एक हरिजन महिला को बहिन बनाना चाहिए। राजेश्वर जी उसी दिन राममनोहर लोहिया अस्पताल की एक सफाइकर्मी महिला शान्तिदेवी को अपनी धर्म बहिन बनाकर घर लौटे। हिन्दुओं की घटती जनसंख्या से चिंतित राजेश्वर जी छुआछूत मिटाने और परावर्तन की गति बढ़ाने पर जोर देते थे। उन्होंने 4 पूर्णकालिक कार्यकर्ता रखकर सैकड़ों मुसलमानों और ईसाइयों को समझाकर, बिना लालच के हिन्दू बनाया । कई हिन्दू कन्याओं को मुसलमानों के चंगुल में फंसने से भी बचाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण हेतु 'परावर्तन क्यों और कैसे' नामक पुस्तक लिखी। उन्होंने अपनी पूरी सम्पत्ति अपने और पत्नी के नाम पर बनाये 'राजेश्वर चंद्रकांता धर्मार्थ न्यास' के नाम कर दी, जिससे उनके देहांत के बाद भी परावर्तन कार्य में बाधा न आये। उन्होंने संघ के तत्कालीन सरकार्यवाह श्री हो. वे. शेषाद्रि से आग्रह कर संघ को भी परावर्तन कार्य में सक्रिय किया । कहने की बजाय करने में अधिक विश्वास रखने वाले परावर्तन के इस महान योद्धा का स्वर्गवास 11 फरवरी, 1999 को हुआ । इस प्रकार एक ओर पुष्प संघ नींव में विसर्जित हो गया। ।। भारत माता जी जय।। सन्दर्भ : जीवन दीप जले भाग -1 लेखक विजय कुमार संकलन : स्वयंसेवक टीम प्रस्तुति अशोक जी पोरवाल केंद्रीय संघ कार्यालय प्रमुख: संघ नींव में ज्ञात - अज्ञात विसर्जित पुष्प श्रृंखला 189 = हरिकृष्ण जोशी - अप्पा जी जोशी के नाम से सुप्रसिद्ध हरिकृष्ण जोशी जी का जन्म 30 मार्च, 1897 को वर्धा महाराष्ट्र में हुआ था। एक बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार ने कार्यकर्ता बैठक में कहा कि क्या केवल संघकार्य किसी के जीवन का ध्येय नहीं बन सकता? यह सुनकर हरिकृष्ण जोशी ने 56 संस्थाओं से त्यागपत्र दे दिया। अप्पा जी ने क्रांतिकारियों तथा कांग्रेस के साथ रहकर काम किया। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष जमनालाल बजाज के वे निकट सहयोगी थे पर डा. हेडगेवार के सम्पर्क में आने पर उन्होंने बाकी सबको छोड़ दिया। डा. हेडगेवार, श्री गुरुजी और बालासाहब देवरस, इन तीनों सरसंघचालकों के दायित्व ग्रहण के समय वे उपस्थित थे । उनका बचपन बहुत गरीबी में बीता । उनके पिता एक वकील के पास मुंशी थे। उनके 12 वर्ष की अवस्था में पहुँचने तक पिताजी, चाचाजी और तीन भाई दिवंगत हो गये। ऐसे में बड़ी कठिनाई से उन्होंने कक्षा 10 तक पढ़ाई की। 1905 में बंग-भंग आन्दोलन से प्रभावित होकर वे स्वाधीनता समर में कूद गये। 1906 में लोकमान्य तिलक के दर्शन हेतु जब वे विद्यालय छोड़कर रेलवे स्टेशन गये, तो अगले दिन अध्यापक ने उन्हें बहुत मारा पर इससे उनके अन्तःकरण में देशप्रेम की ज्वाला और धधक उठी । 14 वर्ष की अवस्था में उनका विवाह हो गया और वे भी एक वकील के पास मुंशी बन गये पर सामाजिक कार्यों के प्रति उनकी सक्रियता बनी रही। वे नियमित अखाड़े में जाते थे। वहीं उनका सम्पर्क संघ के स्वयंसेवक श्री अण्णा सोहनी और उनके माध्यम से डा. हेडगेवार से हुआ। डा. जी बिना किसी को बताये देश भर में क्रान्तिकारियों को विभिन्न प्रकार की सहायता सामग्री भेजते थे, उसमें अप्पा जी उनके विश्वस्त सहयोगी बन गये। कई बार तो उन्होंने स्त्री वेष धारणकर यह कार्य किया। दिन-रात कांग्रेस के लिए काम करने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। यह देखकर कांग्रेस के कोषाध्यक्ष जमनालाल बजाज ने इन्हें कांग्रेस के कोष से वेतन देना चाहा पर इन्होंने मना कर दिया। 1947 के बाद जहाँ अन्य कांग्रेसियों ने ताम्रपत्र और पेंशन ली, वहीं अप्पा जी ने यह स्वीकार नहीं किया। आपातकाल में वे मीसा में बन्द रहे पर उससे भी उन्होंने कुछ लाभ नहीं लिया। वे देशसेवा की कीमत वसूलने को पाप मानते थे। एक बार कांग्रेस के काम से अप्पा जी नागपुर आये। तब डा. हेडगेवार के घर में ही बैठक के रूप में शाखा लगती थी। अप्पा जी ने उसे देखा और वापस आकर 18 फ़रवरी, 1926 को वर्धा में शाखा प्रारम्भ कर दी। यह नागपुर के बाहर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहली शाखा थी। डा. हेडगेवार ने स्वयं उन्हें वर्धा जिला संघचालक का दायित्व दिया था। नवम्बर, 1929 में नागपुर में प्रमुख कार्यकर्ताओं की एक बैठक में सबसे परामर्श कर अप्पा जी ने निर्णय लिया कि डा. हेडगेवार संघ के सरसंघचालक होने चाहिए। 10 नवम्बर शाम को जब सब संघस्थान पर आये, तो अप्पा जी ने सबको दक्ष देकर 'सरसंघचालक प्रणाम एक-दो तीन' की आज्ञा दी। सबके साथ डा. जी ने भी प्रणाम किया। इसके बाद अप्पा जी ने घोषित किया कि आज से डा. जी सरसंघचालक बन गये हैं। 1934 में गांधी जी को वर्धा के संघ शिविर में अप्पा जी ही लाये थे। 1946 में उनको सरकार्यवाह का दायित्व दिया गया । अन्त समय तक सक्रिय रहते हुए 21 दिसम्बर, 1979 को अप्पा जी जोशी का स्वर्गवास हो गया । इस प्रकार एक ओर पुष्प संघ नींव में विसर्जित हो गया। ।। भारत माता की जय।। सन्दर्भ : जीवन दीप जले भाग - 1 लेखक विजय कुमार संकलन - स्वयंसेवक एवं टीम
अशोक जी पोरवाल केंद्रीय संघ कार्यालय प्रमुख: संघ नींव में ज्ञात - अज्ञात विर्सजित पुष्प श्रृंखला 157 = परिवर्तन के योद्धा राजेश्वर जी - भारतवर्ष के सभी मुसलमानों व ईसाइयों के पूर्वज हिन्दू हैं। उन्हें अपने पूर्वजों के पवित्र धर्म में वापस लाने के महान कार्य को अपने जीवन का लक्ष्य बनाने वाले श्री राजेश्वर जी का जन्म 16 फरवरी, 1916 को दिल्ली में श्री भगवानदास जी के घर में हुआ था । वे कक्षा में हमेशा प्रथम आते थे। धनाभाव के कारण पिताजी ने उन्हें कक्षा 10 के बाद पढ़ाने से मना कर दिया, परन्तु उनके बड़े भाई श्री लुभाया राम के आग्रह पर पिताजी मान गये और फिर राजेश्वर जी ने ट्यूशन पढ़ाते हुए बी.एस-सी. किया। उन दिनों छुआछूत और जन्मना जातिभेद का जोर था, परन्तु उन्होंने अपनी मां और भाभी को समझाकर रसोई में एक सफाइकर्मी के बेटे को काम पर रखा। इससे पड़ोसियों ने 2 वर्ष तक उनके घर से खानपान का बहिष्कार किया। 1934 में उन्होंने पञ्चकुइया मार्ग पर देखा कि एक मुसलमान कुएं से पानी लेकर हरिजन महिलाओं की बाल्टियों में डाल रहा है। साथ ही वह उनसे गन्दे मजाक भी कर रहा था । उन दिनों हरिजन कुएं की मुंडेर पर अपने घड़े नहीं रख सकते थे। यह देखकर राजेश्वर जी प्रतिदिन वहां आकर घड़ों में पानी भरने लगे। इस पर उस मुसलमान से झगड़ा भी हुआ, परन्तु राजेश्वर जी डटे रहे और फिर धीरे-धीरे वे महिलाएं स्वयं ही कुएं से पानी लेने लगीं। उन दिनों सफाइकर्मी सिर पर मैला ढोकर ले जाते थे। 1939 में राजेश्वर जी शिमला में रहते थे। उन्होंने एक दिन सफाइकर्मियों के नेता सोहनलाल के साथ खाना बनाकर खाया। उसने बताया कि हिन्दुओं के व्यवहार से दुखी होकर वे सब धर्मान्तरण करने वाले थे, परन्तु अब वे यह नहीं करेंगे। पहाड़गंज (दिल्ली) में अंधविश्वास के कारण कई हिन्दू महिलाएं नमाज से लौटते हुए मुसलमानों से बच्चों के मुंह पर फूंक लगवाती थीं। राजेश्वर जी ने अपने मित्रों के साथ 'हिन्दू धर्म संघ' नामक संस्था बनाकर इस कुप्रथा को बन्द कराया। राजेश्वर जी कालबाह्य हो चुकी रूढ़ियों के विरोधी थे। 1941 में उन्होंने प्रतीकात्मक दहेज लेकर अन्तरजातीय विवाह किया। इसके लिए जानबूझ कर वह तिथि चुनी, जिसमें विवाह वर्जित है। इसके बाद आर्य समाज के माध्यम से उन्होंने बड़ी संख्या में अन्तरजातीय और दहेज रहित विवाह कराये। 1946 में पहाड़गंज में मुसलमानों ने बकरीद पर गाय का जुलूस निकालकर उसे काटने की योजना बनाई। राजेश्वर जी ने अपने भाई बंसीलाल तथा एक स्वयंसेवक पूरनचंद के साथ उस जुलूस पर हमला कर गाय को छुड़ा लिया। राजेश्वर जी सभी सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं में सक्रिय रहते थे । वे दक्षिण दिल्ली के विभाग संघचालक थे। 1983 में वि.हि.प. की बैठक में एक कार्यकर्ता ने कहा कि सब हिन्दुओं को एक-एक हरिजन महिला को बहिन बनाना चाहिए। राजेश्वर जी उसी दिन राममनोहर लोहिया अस्पताल की एक सफाइकर्मी महिला शान्तिदेवी को अपनी धर्म बहिन बनाकर घर लौटे। हिन्दुओं की घटती जनसंख्या से चिंतित राजेश्वर जी छुआछूत मिटाने और परावर्तन की गति बढ़ाने पर जोर देते थे। उन्होंने 4 पूर्णकालिक कार्यकर्ता रखकर सैकड़ों मुसलमानों और ईसाइयों को समझाकर, बिना लालच के हिन्दू बनाया । कई हिन्दू कन्याओं को मुसलमानों के चंगुल में फंसने से भी बचाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण हेतु 'परावर्तन क्यों और कैसे' नामक पुस्तक लिखी। उन्होंने अपनी पूरी सम्पत्ति अपने और पत्नी के नाम पर बनाये 'राजेश्वर चंद्रकांता धर्मार्थ न्यास' के नाम कर दी, जिससे उनके देहांत के बाद भी परावर्तन कार्य में बाधा न आये। उन्होंने संघ के तत्कालीन सरकार्यवाह श्री हो. वे. शेषाद्रि से आग्रह कर संघ को भी परावर्तन कार्य में सक्रिय किया । कहने की बजाय करने में अधिक विश्वास रखने वाले परावर्तन के इस महान योद्धा का स्वर्गवास 11 फरवरी, 1999 को हुआ । इस प्रकार एक ओर पुष्प संघ नींव में विसर्जित हो
गया। ।। भारत माता जी जय।। सन्दर्भ : जीवन दीप जले भाग -1 लेखक विजय कुमार संकलन : स्वयंसेवक टीम प्रस्तुति अशोक जी पोरवाल केंद्रीय संघ कार्यालय प्रमुख: संघ नींव में ज्ञात - अज्ञात विसर्जित पुष्प श्रृंखला 189 = हरिकृष्ण जोशी - अप्पा जी जोशी के नाम से सुप्रसिद्ध हरिकृष्ण जोशी जी का जन्म 30 मार्च, 1897 को वर्धा महाराष्ट्र में हुआ था। एक बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार ने कार्यकर्ता बैठक में कहा कि क्या केवल संघकार्य किसी के जीवन का ध्येय नहीं बन सकता? यह सुनकर हरिकृष्ण जोशी ने 56 संस्थाओं से त्यागपत्र दे दिया। अप्पा जी ने क्रांतिकारियों तथा कांग्रेस के साथ रहकर काम किया। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष जमनालाल बजाज के वे निकट सहयोगी थे पर डा. हेडगेवार के सम्पर्क में आने पर उन्होंने बाकी सबको छोड़ दिया। डा. हेडगेवार, श्री गुरुजी और बालासाहब देवरस, इन तीनों सरसंघचालकों के दायित्व ग्रहण के समय वे उपस्थित थे । उनका बचपन बहुत गरीबी में बीता । उनके पिता एक वकील के पास मुंशी थे। उनके 12 वर्ष की अवस्था में पहुँचने तक पिताजी, चाचाजी और तीन भाई दिवंगत हो गये। ऐसे में बड़ी कठिनाई से उन्होंने कक्षा 10 तक पढ़ाई की। 1905 में बंग-भंग आन्दोलन से प्रभावित होकर वे स्वाधीनता समर में कूद गये। 1906 में लोकमान्य तिलक के दर्शन हेतु जब वे विद्यालय छोड़कर रेलवे स्टेशन गये, तो अगले दिन अध्यापक ने उन्हें बहुत मारा पर इससे उनके अन्तःकरण में देशप्रेम की ज्वाला और धधक उठी । 14 वर्ष की अवस्था में उनका विवाह हो गया और वे भी एक वकील के पास मुंशी बन गये पर सामाजिक कार्यों के प्रति उनकी सक्रियता बनी रही। वे नियमित अखाड़े में जाते थे। वहीं उनका सम्पर्क संघ के स्वयंसेवक श्री अण्णा सोहनी और उनके माध्यम से डा. हेडगेवार से हुआ। डा. जी बिना किसी को बताये देश भर में क्रान्तिकारियों को विभिन्न प्रकार की सहायता सामग्री भेजते थे, उसमें अप्पा जी उनके विश्वस्त सहयोगी बन गये। कई बार तो उन्होंने स्त्री वेष धारणकर यह कार्य किया। दिन-रात कांग्रेस के लिए काम करने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। यह देखकर कांग्रेस के कोषाध्यक्ष जमनालाल बजाज ने इन्हें कांग्रेस के कोष से वेतन देना चाहा पर इन्होंने मना कर दिया। 1947 के बाद जहाँ अन्य कांग्रेसियों ने ताम्रपत्र और पेंशन ली, वहीं अप्पा जी ने यह स्वीकार नहीं किया। आपातकाल में वे मीसा में बन्द रहे पर उससे भी उन्होंने कुछ लाभ नहीं लिया। वे देशसेवा की कीमत वसूलने को पाप मानते थे। एक बार कांग्रेस के काम से अप्पा जी नागपुर आये। तब डा. हेडगेवार के घर में ही बैठक के रूप में शाखा लगती थी। अप्पा जी ने उसे देखा और वापस आकर 18 फ़रवरी, 1926 को वर्धा में शाखा प्रारम्भ कर दी। यह नागपुर के बाहर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पहली शाखा थी। डा. हेडगेवार ने स्वयं उन्हें वर्धा जिला संघचालक का दायित्व दिया था। नवम्बर, 1929 में नागपुर में प्रमुख कार्यकर्ताओं की एक बैठक में सबसे परामर्श कर अप्पा जी ने निर्णय लिया कि डा. हेडगेवार संघ के सरसंघचालक होने चाहिए। 10 नवम्बर शाम को जब सब संघस्थान पर आये, तो अप्पा जी ने सबको दक्ष देकर 'सरसंघचालक प्रणाम एक-दो तीन' की आज्ञा दी। सबके साथ डा. जी ने भी प्रणाम किया। इसके बाद अप्पा जी ने घोषित किया कि आज से डा. जी सरसंघचालक बन गये हैं। 1934 में गांधी जी को वर्धा के संघ शिविर में अप्पा जी ही लाये थे। 1946 में उनको सरकार्यवाह का दायित्व दिया गया । अन्त समय तक सक्रिय रहते हुए 21 दिसम्बर, 1979 को अप्पा जी जोशी का स्वर्गवास हो गया । इस प्रकार एक ओर पुष्प संघ नींव में विसर्जित हो गया। ।। भारत माता की जय।। सन्दर्भ : जीवन दीप जले भाग - 1 लेखक विजय कुमार संकलन - स्वयंसेवक एवं टीम
- बैतूल चोरी के मोबाइल का सौदागर गिरफ्तार! कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मेडिकल के बाद भेजा गया जेल” बैतूल से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कोतवाली पुलिस ने चोरी के मोबाइल खरीदने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी का नाम दयाराम है, जो तीगांव का रहने वाला बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस को लगातार चोरी के मोबाइल की खरीद-फरोख्त की सूचना मिल रही थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जाल बिछाकर आरोपी को धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद सोमवार दोपहर करीब 3 बजे आरोपी का जिला चिकित्सालय में मेडिकल परीक्षण कराया गया। मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है, और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। फिलहाल इस कार्रवाई को लेकर इलाके में चर्चा का माहौल है, और पुलिस की इस सख्त कार्रवाई से अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।1
- मुलताई पुलिस ने रंगे हाथों को तस्करों को क्या गिरफ्तार1
- एसडीएम ने किया उद्घाटन, पालकों से बच्चों के साथ अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील3
- आठनेर क्षेत्र के किसानों को समर्थन मूल्य पर अपनी गेहूं की उपज बेचने के लिए और इंतजार करना पड़ेगा मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 1 अप्रैल से होने वाली गेहूं खरीदी की तारीख बढ़ाकर अब 10 अप्रैल कर दी है। ऐसे में किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। किसानों द्वारा बैंक से लिए ऋण और आवश्कताओ के लिए अपनी उपज कम दामों में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हैं ऐसे में किसानों पर फिर आर्थिक संकट का बोझ बढ़ेगा। किसानों ने बताया कि वर्तमान समय में आगजनी की घटना और ख़राब मौसम की वजह से गेहूं की फसल की सुरक्षा कर पाना मुश्किल है। गेहूं खरीदी में हो रही देरी से बैंक से लिए ऋण पर ब्याज लग रहा है और मंडियों में गेहूं के दाम कम है। किसानों ने सरकार से प्राथमिक सहकारिता समिति से लिए ऋण की अवधि 30 मार्च तक करने की मांग की है जिससे हजारों किसान ब्याज से बच सकें।1
- भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सली राहुल के साथ दिखे बोले शाह, सरकार युद्ध पर चर्चा से भाग रही प्रियंका का जवाब, धर्मेंद्र यादव ने बताया मोदीजी की साख घट रही है, मेरी मां को केरल की नर्सों के भरोसे छोड़कर आया हूं बोले राहुल, शाह, ज्ञानेंद्र को हराकर रहेंगे- अभिषेक बनर्जी और अमेरिकी प्रवक्ता का बयान युद्ध रोकने के लिए बातचीत चल रही है.... देखिए देश दुनिया की छ बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर....1
- न्यूज़ ऐसीपी भारत से गोपाल मालवीय की खास रिपोर्ट समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को सौंपे प्रमाण (न्यूज़ ऐसीपी भारत छिंदवाड़ा)- छिंदवाड़ा। जिला मुख्यालय में आज 31 मार्च 2026 दिन मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में उस समय हड़कंप मच गया, जब क्षेत्र के सुप्रसिद्ध प्रखर समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने लायंस क्लब, लायंस आई हॉस्पिटल परासिया के विरुद्ध अवैध मानव अंग प्रत्यारोपण, मानव अंग आंख तस्करी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर साक्ष्यों के साथ जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक (SP) को शिकायत पत्र सौंपा। आरटीआई (RTI) से प्राप्त चौंकाने वाले दस्तावेजों के आधार पर चौरसिया ने संस्थान के पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही और एफ.आई. आर. दर्ज करने की मांग की है। क्या है पूरा मामला? •• शिकायत के अनुसार, यह प्रकरण 20 मई 2016 को समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया के स्वर्गीय मामा श्री अशोक चौरसिया के निधन से जुड़ा है। आरोप है कि लायंस आई हॉस्पिटल के पदाधिकारियों ने बिना किसी अधिकृत डॉक्टर, विशेषज्ञ या पुलिस की उपस्थिति के, एक निजी कंपाउंडर के माध्यम से अवैध रूप से नेत्र निष्कर्षण (Removal) करवाया। जब परिवार ने इन नेत्रों के उपयोग और प्राप्तकर्ता की जानकारी मांगी, तो अस्पताल प्रबंधन ने कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया। संस्था के द्वारा बनाए प्रमाण पत्र में नेत्रदान प्रमाण पत्र दिया एवं संस्था के लेटर पैड में पदाधिकारी द्वारा लिखित रूप से स्वीकार किया की आंखें प्राप्त हुई थी, आंख किसी कारण से आंख खराब हुई जो की यह सिद्ध करता है कि संस्था नेत्रदान का काम कर रही है। आरटीआई से हुए सनसनीखेज खुलासे •• समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार:पंजीकरण का अभाव: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला छिंदवाड़ा द्वारा सूचना का अधिकार आरटीआई में लिखित सत्यापित प्रमाणित जानकारी दी गई उक्त संस्था के पास मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम (THOTA), 1994 के तहत नेत्र निष्कर्षण या प्रत्यारोपण के लिए कोई वैधानिक पंजीकरण नहीं है। •• नेत्रदान लेने से संस्था का अस्वीकार किया जाना: आरटीआई से प्राप्त जानकारी अनुसार स्वास्थ्य विभाग छिंदवाड़ा द्वारा पूर्व में कि जांच में उक्त संस्था ने नेत्रदान लेने से अस्वीकार किया है। जबकि संस्था नेत्रदान एवं नेत्र प्रत्यारोपण की खबरें अखबार समाचार पत्रों और टीवी न्यूज़ समाचारों में दम में भरते हुए प्रकाशित करवाई गई है। इसके समस्त साक्ष्य समाज सेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने एकत्रित किया है। अंग तस्करी की आशंका: •• जिला छिंदवाड़ा में विगत 25 वर्षों से लायंस क्लब लाइंस आई हॉस्पिटल संस्था गैर पंजीकृत संस्था द्वारा बिना रिकॉर्ड के आँखों का निकाला जाना एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी गिरोह की ओर इशारा करता है,जिसकी कड़ियाँ भोपाल और अन्य बड़े शहरों से जुड़ी होने की आशंका है। •• राष्ट्रीय स्तर पर हुई जांच के निर्देश: समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया के कठोर परिश्रम एवं निरंतर प्रयासों के कारण यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) और देश के प्रमुख 14 विभागों सहित मानव अधिकार आयोग, तक पहुँच चुका है। •• प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार द्वारा मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को 'यथोचित कार्यवाही' के निर्देश दिए हैं। NOTTO ने स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से THOTA अधिनियम के उल्लंघन की गहन जांच कर 'कार्रवाई रिपोर्ट' (ATR) मांगी है। कठोर धाराओं मे एफ. आई.आर.की मांग! •• आज सौंपे गए आवेदन में समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2), 211, 238, 316, 318(4) और THOTA अधिनियम की धारा 14, 18, 19 व 20 के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। ••समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने कहा "यह लड़ाई केवल मेरे परिवार की नहीं, बल्कि मानवता की है। सेवा के नाम पर मानव अंगों का व्यापार करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। प्रशासन के पास अब पर्याप्त साक्ष्य हैं कि लायंस आई हॉस्पिटल परासिया बिना अनुमति के यह अवैध कार्य कई वर्षों से कर रहा था। जब तक दोषियों को जेल नहीं होती, यह संघर्ष जारी रहेगा।" •• पूर्व में भी समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया की शिकायत के आधार पर राष्ट्रीय अंधतत्व मुक्त निवारण मिशन भारत सरकार की योजना में उक्त संस्था द्वारा फर्जी बिलों को लगाकर गवन करने पर संस्था के विरुद्ध अपराध क्रमांक 12/2025 दिनांक 10 जनवरी 2025 को थाना परसिया में मध्य प्रदेश शासन द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई है। जिसमें संस्था के सात पदाधिकारियों पर 420,409,34 के तहत मामला पंजीबद्ध हुआ है अभी मामला माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में विचाराधीन है। इसके साथ ही संस्था के द्वारा गवन की हुई लगभग 2 करोड़ कि राशि की वसूली के लिए लायंस क्लब लायंस आई हॉस्पिटल परासिया संस्था की संपत्ति पर कुर्की चश्पा की कार्रवाई की जा चुकी है। •• जिला कलेक्टर कार्यालय में आज बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे, जिन्होंने इस भ्रष्टाचार और अवैध कृत्य के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन पुख्ता सबूतों के आधार पर क्या ठोस कार्यवाही करता है। माननीय जिला कलेक्टर ने मामले की गंभीरता एवं समस्त साक्ष्य प्रमाणों को देखते हुए तत्काल अनुविभागीय राजस्व अधिकारी परासिया को फोन पर जानकारी देते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच एवं कठोर दंडात्मक कार्यवाही करवाने के निर्देश दिए है, एवं जिला कलेक्टर छिंदवाड़ा ने शिकायत को टी.एल. पर लिया है।4
- सिवनी मालवा में प्रवीण तोगड़िया का अल्प प्रवास: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव पर की टिप्पणी, हिंदू एकता और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रखे विचार सिवनी मालवा तहसील में प्रवीण तोगड़िया (संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद) सोमवार को अल्प प्रवास पर पहुंचे। इस दौरान वे भिलट देव स्थित एक निजी रिसोर्ट में ठहरे, जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। प्रवास के दौरान उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों, किसानों की समस्याओं और वर्तमान राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कार्यकर्ताओं से विस्तार से चर्चा की। बैठक के दौरान तोगड़िया ने क्षेत्र में गेहूं उपार्जन में हो रही देरी को गंभीर विषय बताते हुए चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में विलंब होने से किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि खरीदी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से सुचारू किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य समय पर प्राप्त हो। हिंदू एकता के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद द्वारा देशभर में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य गांव-गांव और शहर-शहर जाकर हिंदू समाज को संगठित करना और उनमें जागरूकता लाना है, ताकि सामाजिक एकता मजबूत हो सके। अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर प्रतिक्रिया देते हुए तोगड़िया ने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव, विशेष रूप से ईरान, इजराइल सहित अन्य देशों के बीच विवाद का उल्लेख किया। प्रवीण तोगड़िया ने कहा इरान-इजराइल और अन्य देशों के बीच चल रहे तनाव में हिन्दुस्तान में बैठे जो लोग छाती पीट रहे है उन्हें छाती पीटना चाहिए। पहली बार मिडिल ईस्ट में एक दूसरे को पीट रहे है, इरान ईराक को पीट रहा है, इरान कुवैत को पीट रहा है। ये 14 शताब्दी में पहली बार एक दूसरे को पीट रहे है। तो थोड़ी पीटने दो उनके पिटने से हमें गैस पेट्रोल की तकलीफ हो रही है पर सरकार उसे देख लेगी। इसके अलावा तोगड़िया ने हिंदू समाज की सुरक्षा और एकजुटता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हिंदुओं को सतर्क और संगठित रहने की आवश्यकता है। हाल के कुछ घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने देश और पड़ोसी देशों में हिंदू समाज को लेकर चिंता व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने, जन-जन तक पहुंचने और समाजहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इस दौरान स्थानीय पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- बैतूल सड़क पर अचानक आया कुत्ता बना हादसे की वजह! बाइक सवार गिरा, टांग टूटी — हालत गंभीर”जिला चिकित्सालय में भर्ती मुलताई थाना क्षेत्र के के दुनावा रोड से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है, जहां एक बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। मिली जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 9 बजे संदीप नागवंशी अपनी बाइक से जा रहे थे, तभी अचानक एक कुत्ता बाइक के सामने आ गया। कुत्ते को बचाने की कोशिश में बाइक अनियंत्रित हो गई और संदीप सड़क पर गिर पड़े। हादसा इतना गंभीर था कि गिरने से उनकी एक टांग टूट गई और उन्हें गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत मदद करते हुए घायल को जिला चिकित्सालय पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन चोटें गंभीर हैं। यह हादसा एक बार फिर सड़क पर सावधानी बरतने की जरूरत को दर्शाता है, खासकर तब जब अचानक कोई जानवर सामने आ जाए।1