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उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान शांति और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। इस संबंध में बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग आर्य ने सुरक्षा के दृष्टिगत की गई आवश्यक तैयारियों को लेकर अपना बयान जारी किया है। एसएसपी ने आगामी यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए इंतजामों के बारे में जानकारी दी है।
ख़बर जंक्शन बरेली
उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान शांति और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। इस संबंध में बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री अनुराग आर्य ने सुरक्षा के दृष्टिगत की गई आवश्यक तैयारियों को लेकर अपना बयान जारी किया है। एसएसपी ने आगामी यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा किए गए इंतजामों के बारे में जानकारी दी है।
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- बरेली के किला थाना क्षेत्र की रहने वाली समाजवादी पार्टी की नेता और एडवोकेट मनीषा सक्सेना ने अपने ही पड़ोसियों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। मनीषा सक्सेना का कहना है कि जैसे ही उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली, तभी से उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा है। उनका आरोप है कि पड़ोसी उन्हें धमकाते हुए कहते हैं कि अब समाजवादी पार्टी जॉइन कर ली है तो "अस्सलाम वालेकुम" कहना पड़ेगा, और विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस मामले में उनके पिता ने पहले किला थाना पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय पुलिस से निराश होकर अब एडवोकेट मनीषा सक्सेना सीधे बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य के पास गुहार लगाने पहुंची हैं और अपनी सुरक्षा के साथ-साथ आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। गुरुवार दोपहर करीब 2:00 बजे पीड़िता ने खुद इस मामले की जानकारी दी। फिलहाल यह पूरा मामला अब राजनीतिक रंग पकड़ता दिखाई दे रहा है और देखना होगा कि एसएसपी इस पर क्या कदम उठाते हैं।1
- बरेली के थाना कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत रास्ते के विवाद से क्षुब्ध होकर एक व्यक्ति ने कलेक्ट्रेट गेट पर आकर ज्वलनशील पदार्थ डाल दिया। इस मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इस पूरे प्रकरण और की जा रही पुलिसिया कार्रवाई के संबंध में बरेली के सीओ सिटी 1 (CO CITY 1) आशुतोष शिवम ने आधिकारिक तौर पर जानकारी साझा की है।1
- ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस पार्टी के उत्तर प्रदेश संगठन मंत्री, प्रवक्ता और विधानसभा अध्यक्ष मुख्तार अहमद ने विधानसभा में मौजूद दागी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने मांग की है कि वर्तमान में विधानसभा के भीतर जितने भी दागी जनप्रतिनिधि मौजूद हैं, उनके मामलों की जांच के लिए एक विशेष कोर्ट (स्पेशल कोर्ट) का गठन किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि सभी राजनीतिक दल आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में साफ-सुथरी छवि वाले प्रतिनिधियों को ही टिकट का आवंटन करें। मुख्तार अहमद का कहना है कि विधानसभा, जिला पंचायत और नगर पंचायत में मौजूद ऐसे दागी जनप्रतिनिधि और विधायक जिन पर 10 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, उन पर इस विशेष कोर्ट के माध्यम से मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष तौर पर मांग की है कि जिन प्रतिनिधियों पर हत्या, बलात्कार और राजकीय कोष के धन की लूट के मुकदमे हैं, उनके खिलाफ विशेष कोर्ट में तत्काल मुकदमा चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाए।2
- बरेली में जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर गुरुवार को एक बड़ा हादसा टल गया, जब थाना मीरगंज क्षेत्र के ग्राम खमरिया साहनी निवासी 47 वर्षीय लालसिंह गंगवार ने अपनी 46 वर्षीय पत्नी राजरानी और 8 वर्षीय बेटी नंदनी के साथ खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद इंटेलिजेंस के ओमपाल सिंह, एलआईयू के अमित कुमार और होमगार्ड संदीप मिश्रा ने सतर्कता दिखाते हुए तुरंत दौड़कर पूरे परिवार को काबू में लिया और उन्हें आग लगाने से रोक दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के अनुसार, यदि कुछ ही सेकंड की भी देरी होती तो परिसर में बड़ी अनहोनी हो सकती थी। यह पूरा विवाद मीरगंज तहसील के ग्राम खमरिया सानी में एक सरकारी खड़ंजा मार्ग को लेकर है। पीड़ित लाल सिंह और सुंदर लाल का आरोप है कि मीरगंज एसडीएम के यहां तैनात होमगार्ड रामप्रकाश और चन्द्रपाल ने मंडनपुर रोड से जुड़ने वाले इस सरकारी रास्ते पर अपने वाहन खड़े करके, पशु बांधकर और लकड़ी रखकर रास्ता बंद कर दिया है। राजस्व विभाग की स्थलीय जांच में मौके पर अस्थाई कब्जा होने की बात सामने आई थी, जबकि विपक्षी चंद्रपाल और रामप्रकाश इसे 1959 के बैनामे से खरीदी गई अपनी निजी जमीन बता रहे हैं। जांच के दौरान विपक्षी पक्ष का कोई व्यक्ति मौके पर उपस्थित नहीं हुआ। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 1959 के बाद 1986 में इस क्षेत्र में चकबंदी हो चुकी है, जिसके कारण पुराने बैनामे की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। रास्ते के इस विवाद को लेकर गांव में लगातार तनाव बना हुआ है और रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस बल की मौजूदगी में ही इसका समाधान निकाला जा सकता है। इससे पहले वर्ष 2023 में दोनों पक्षों के बीच समझौता भी कराया गया था और वर्ष 2025 में रास्ते से अतिक्रमण हटाया गया था। वहीं, राजस्व विभाग की एक अन्य जांच रिपोर्ट में इसे आबादी भूमि का विवाद बताया गया है, जिसके अनुसार मानचित्र में यह रास्ता दर्ज ही नहीं है और शिकायतकर्ता के पास वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध है।1