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झूठ बोलना भी कोई इनसे सीखे बोल रहे है लोगो को मारा पुलिस ने मारा । आखिर कितना झूठ बोलेंगे राहुल गांधी । देश ने देखा कि दिल्ली पुलिस ने कितने शांति से कल का बिना परमिशन के आंदोलन पर काबू किया और जनता को परेशानी से बचाया । जहां पुलिस की तारीफ होनी चाहिए वहां विपक्ष के नेता से यह सुन झूठ बोलना भी कोई इनसे सीखे बोल रहे है लोगो को मारा पुलिस ने मारा । आखिर कितना झूठ बोलेंगे राहुल गांधी । देश ने देखा कि दिल्ली पुलिस ने कितने शांति से कल का बिना परमिशन के आंदोलन पर काबू किया और जनता को परेशानी से बचाया । जहां पुलिस की तारीफ होनी चाहिए वहां विपक्ष के नेता से यह सुन कर दुख हुआ ।
Mamta singh Up beuro chief namo TV live
झूठ बोलना भी कोई इनसे सीखे बोल रहे है लोगो को मारा पुलिस ने मारा । आखिर कितना झूठ बोलेंगे राहुल गांधी । देश ने देखा कि दिल्ली पुलिस ने कितने शांति से कल का बिना परमिशन के आंदोलन पर काबू किया और जनता को परेशानी से बचाया । जहां पुलिस की तारीफ होनी चाहिए वहां विपक्ष के नेता से यह सुन झूठ बोलना भी कोई इनसे सीखे बोल रहे है लोगो को मारा पुलिस ने मारा । आखिर कितना झूठ बोलेंगे राहुल गांधी । देश ने देखा कि दिल्ली पुलिस ने कितने शांति से कल का बिना परमिशन के आंदोलन पर काबू किया और जनता को परेशानी से बचाया । जहां पुलिस की तारीफ होनी चाहिए वहां विपक्ष के नेता से यह सुन कर दुख हुआ ।
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- Post by Suresh Kumar1
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- 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति1
- लापता बच्चे को खोजने में मदद करे आपका एक शेयर परिवार मिल जाएगा ज्यादा से ज्यादा शेयर करे1
- आज देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी और न्याय योद्धा श्री Rahul Gandhi जी जो लड़ाई लड़ रहे हैं, उसमें मैं सभी कांग्रेसजनों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और आम नागरिकों से आह्वान करती हूं कि 12 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचकर इस संघर्ष में हमारा साथ दें श्रीमती आराधना मिश्रा मोना जी1
- झूठ बोलना भी कोई इनसे सीखे बोल रहे है लोगो को मारा पुलिस ने मारा । आखिर कितना झूठ बोलेंगे राहुल गांधी । देश ने देखा कि दिल्ली पुलिस ने कितने शांति से कल का बिना परमिशन के आंदोलन पर काबू किया और जनता को परेशानी से बचाया । जहां पुलिस की तारीफ होनी चाहिए वहां विपक्ष के नेता से यह सुन झूठ बोलना भी कोई इनसे सीखे बोल रहे है लोगो को मारा पुलिस ने मारा । आखिर कितना झूठ बोलेंगे राहुल गांधी । देश ने देखा कि दिल्ली पुलिस ने कितने शांति से कल का बिना परमिशन के आंदोलन पर काबू किया और जनता को परेशानी से बचाया । जहां पुलिस की तारीफ होनी चाहिए वहां विपक्ष के नेता से यह सुन कर दुख हुआ ।1
- 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति 🔥 कांग्रेस कार्यालय में जूते-चप्पल की राजनीति! आखिर जनता को क्या संदेश देना चाहते हैं नेता? 🔥 लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में अजय राय और आराधना मिश्रा ‘मोना’ के समर्थकों के बीच कथित धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना ने राजनीति की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल सीधा है—जब राजनीतिक दलों के अपने कार्यालयों में ही अनुशासन और आपसी सम्मान कायम नहीं रह पा रहा, तो जनता उनसे सुशासन की उम्मीद कैसे करे? राजनीति जनता की सेवा का माध्यम है, व्यक्तिगत वर्चस्व दिखाने, अपमान करने और आपसी टकराव का अखाड़ा नहीं! किसी भी नेता या समर्थक को यह अधिकार नहीं कि वह राजनीतिक मतभेदों की आड़ में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार करे। ब्राह्मण समाज हो या कोई अन्य समाज, **किसी भी समाज के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।** पंडित कमलापति त्रिपाठी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विरासत का सम्मान होना चाहिए। विचारों का विरोध कीजिए, नीतियों पर सवाल उठाइए, लेकिन व्यक्तिगत अपमान और हिंसा को राजनीति का हथियार मत बनाइए। ⚡ याद रखिए! जनता सब देखती है, सब सुनती है और समय आने पर अपने मताधिकार से जवाब भी देती है। 2027 का विधानसभा चुनाव केवल नारों और भाषणों का नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण, जनसम्मान और जवाबदेही का भी इम्तिहान होगा। जनता को ऐसी राजनीति चाहिए जो बेरोजगारी, महँगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के मुद्दों पर बात करे—न कि ऐसी राजनीति, जिसकी चर्चा मारपीट और जूते-चप्पलों के कारण हो! मेरा स्पष्ट सवाल है—क्या राजनीति में सत्ता और पद की लालसा, सिद्धांतों और संस्कारों से बड़ी हो गई है? अगर जनता के बीच जाना है, तो पहले अपने आचरण से जनता का विश्वास जीतना होगा। लोकतंत्र में ताकत बाहुबल से नहीं, जनबल से साबित होती है। कुर्सी का रास्ता हिंसा से नहीं, जनता के विश्वास और सम्मान से होकर गुजरता है। ✍️ सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जनहित सर्व समाज सेवा समिति लेखिका एवं कवयित्री | लखनऊ, उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #उत्तरप्रदेशराजनीति #राजनीतिकमर्यादा #ब्राह्मणसम्मान #जनताकीआवाज #लोकतंत्र #2027विधानसभा_चुनाव #सोनीशुक्लाक्रांति1