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महराजगंज में निपुण आकलन बना बड़ी चुनौती | 6 दिनों में 499 स्कूलों का लक्ष्य महराजगंज जनपद में परिषदीय स्कूलों में चल रहा निपुण आकलन अब निर्णायक मोड़ पर है। अंतिम 6 दिनों में 499 स्कूलों का आकलन पूरा करना डायट के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। 92 डीएलएड प्रशिक्षु और 48 मॉनिटरिंग टीमें लगातार निगरानी में जुटी हैं।
Aapan Maharajganj
महराजगंज में निपुण आकलन बना बड़ी चुनौती | 6 दिनों में 499 स्कूलों का लक्ष्य महराजगंज जनपद में परिषदीय स्कूलों में चल रहा निपुण आकलन अब निर्णायक मोड़ पर है। अंतिम 6 दिनों में 499 स्कूलों का आकलन पूरा करना डायट के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। 92 डीएलएड प्रशिक्षु और 48 मॉनिटरिंग टीमें लगातार निगरानी में जुटी हैं।
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- 📍 महराजगंज से परिवहन विभाग से जुड़ी बड़ी खबर। नए वित्तीय सत्र 2026–27 से उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली 1998 का 32वां संशोधन लागू होगा। अप्रैल से ड्राइविंग लाइसेंस में जन्मतिथि बदलने की सेवा पूरी तरह ऑनलाइन और फेसलेस हो जाएगी। अब RTO/ARTO कार्यालय जाने की जरूरत नहीं, डिजिटल प्रपत्र घर बैठे डाउनलोड करें।1
- जिलाधिकारी/ जिला निर्वाचन अधिकारी श्री संतोष कुमार शर्मा द्वारा विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR)-2026 के अंतर्गत दावे एवं आपत्तियों की सुनवाई प्रक्रिया को लेकर ऑनलाइन समीक्षा की गई। इस अवसर पर जिलाधिकारी महोदय ने ईआरओ, एईआरओ एवं अतिरिक्त एईआरओ की उपस्थिति की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की, ताकि सुनवाई कार्य को पारदर्शी, निष्पक्ष एवं प्रभावी ढंग से संपन्न कराया जा सके। जिलाधिकारी महोदय ने समीक्षा के दौरान सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे निर्धारित समय से पूर्व अपने-अपने सुनवाई स्थलों पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें तथा सुनवाई प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत ही स्थल से प्रस्थान करें। निर्देशित किया कि सुनवाई के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा विलंब स्वीकार्य नहीं होगा। कहा कि जिन मतदाताओं द्वारा आवश्यक प्रपत्र प्रस्तुत किया जा रहा है, उनकी मैपिंग प्रत्येक दशा में उसी दिवस में सुनिश्चित कराएं। सुनवाई स्थलों पर उपस्थित मतदाताओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पेयजल, शौचालय एवं बैठने जैसी मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही, यह भी कहा कि यदि किसी सुनवाई स्थल पर मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक हो, तो सुनवाई को सुव्यवस्थित एवं सुचारु रूप से संचालित करने हेतु टोकन प्रणाली लागू की जाए, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक दशा में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर निर्गत समस्त निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। दावे एवं आपत्तियों की सुनवाई प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं संवेदनशीलता बनाए रखते हुए मतदाताओं की समस्याओं का समयबद्ध एवं विधिसम्मत निस्तारण किया जाए, ताकि मतदाता सूची का शुद्धीकरण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सके। समीक्षा के दौरान अपर जिलाधिकारी (वि/रा) डॉ प्रशांत कुमार भी उपस्थित रहे।2
- आस्था और भाईचारे का संगम मदार बाबा मेला 15 दिन तक चलने वाले इस मेले में हिंदू-मुस्लिम श्रद्धालु मिलकर करते हैं मनौती, पत्थर उठाने की परंपरा बनी आकर्षण नेपाल के नवलपरासी जिले में स्थित मदार पहाड़ी पर लगने वाला प्रसिद्ध मदार बाबा मेला इस वर्ष भी आस्था, परंपरा और सांप्रदायिक सौहार्द का अनोखा संदेश दे रहा है। हर साल फरवरी माह में आयोजित होने वाला यह मेला करीब 15 दिनों तक चलता है, जिसमें नेपाल और भारत के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले की खास बात यह है कि इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग समान श्रद्धा के साथ भाग लेते हैं। मदार बाबा, जिनका वास्तविक नाम बदीउद्दीन कुतबुल मदार बताया जाता है, एक सूफी संत थे। मान्यता है कि वह लगभग 600 वर्ष पूर्व ईरान से यहां आए और मदार पहाड़ी पर तपस्या व साधना की। उनकी आध्यात्मिक शक्ति से प्रभावित होकर स्थानीय राजा ने उन्हें साधना स्थल के लिए भूमि दान दी थी। तभी से यह स्थान आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।मेले में श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति के लिए पत्थर उठाने की परंपरा निभाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद यहां जरूर पूरी होती है, विशेषकर नि:संतान दंपतियों के लिए यह स्थल अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है। मेले के दौरान नेपाली प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक और कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में दर्शन कर सकें।1
- जिंदा शाह मदार मदरिया पहाड़ मेला नेपाल में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो हर साल फरवरी महीने में आयोजित किया जाता है। यह मेला लगभग 15 दिनों तक चलता है और इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग भाग लेते हैं। मदरिया पहाड़ मेला का इतिहास लगभग 600 वर्ष पुराना है, जब हजरत बदीउद्दीन कुतबुल मदार, जिन्हें जिंदा शाह मदार के नाम से भी जाना जाता है, ने इस स्थान पर अपनी साधना की थी। वह एक महान सूफी संत थे, जिन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारे का संदेश दिया। मदरिया पहाड़ मेला में भाग लेने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए मदरिया पहाड़ पर स्थित बाबा बदीउद्दीन की मजार पर जाते हैं और वहां प्रार्थना करते हैं। यह मेला नेपाल के नवलपरासी जिले में स्थित है और भारतीय सीमा से लगभग 14 किमी दूर है।1
- Post by Kishan Kumar1
- करंट लगने से सूरजकुंड विद्युत उपकेंद्र पर तैनात संविदा लाइनमैन की मौत | Gorakhpur News1
- नया अंदाज अभिनेता डी आनंद1
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