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Dhirendra Shukla
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- 9 मार्च को 78वीं जयंती पर 52वीं बार रक्त से लिखा जाएगा प्रधानमंत्री को पत्र फतेहपुर | बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के जनक शंकर लाल मेहरोत्रा की 78वीं जयंती 9 मार्च को समस्त बुंदेलखंड में “बुंदेलखंड दिवस” के रूप में मनाई जाएगी। इस अवसर पर कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 52वीं बार अपने रक्त से पत्र लिखकर बुंदेलखंड को पृथक राज्य का दर्जा प्रदान करने की मांग करेंगे। बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पाण्डेय ने अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सहित झांसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा एवं चित्रकूट जनपदों में तथा मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, दमोह, सागर एवं दतिया जिलों में व्यापक स्तर पर बुंदेलखंड दिवस मनाया जाएगा। इन सभी जनपदों में सार्वजनिक स्थलों पर एकत्र होकर समर्थक प्रधानमंत्री के नाम अपने रक्त से पत्र लिखेंगे और पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को पुनः दृढ़ता से प्रस्तुत करेंगे। प्रवीण पाण्डेय के नेतृत्व में एक लाख से अधिक राखी-पत्र बुंदेली बहनों द्वारा प्रधानमंत्री को प्रेषित किए जा चुके हैं, जिनमें पृथक बुंदेलखंड राज्य को रक्षास्वरूप उपहार के रूप में प्रदान करने का भावपूर्ण निवेदन किया गया है। इसके अतिरिक्त, नई दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर भी बुंदेलखंड राष्ट्र समिति द्वारा राज्य निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन संपन्न किया जा चुका है। प्रवीण पाण्डेय ने कहा कि अब यह आंदोलन ग्राम-ग्राम तक पहुँच चुका है। “ग्राम-ग्राम जन-संपर्क” अभियान के माध्यम से छात्र एवं युवा वर्ग अपनी शिक्षा और आजीविका के अधिकारों के प्रति सजग एवं जागरूक हो रहा है। बुंदेलखंड के युवक-युवतियाँ अपने भविष्य, रोजगार, शिक्षा तथा क्षेत्रीय विकास के प्रश्नों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक दृष्टि से विशिष्ट पहचान रखने वाला बुंदेलखंड विगत लगभग 65 वर्षों से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे दो बड़े राज्यों के मध्य उपेक्षा का दंश सहन कर रहा है। क्षेत्र को पृथक राजनीतिक पहचान दिलाने हेतु स्वर्गीय शंकर लाल मेहरोत्रा ने सर्वाधिक संघर्ष किया तथा अलग राज्य आंदोलन को संगठित स्वरूप प्रदान किया। स्वर्गीय मेहरोत्रा ने आंदोलन को गति देने के लिए बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की और उसे राष्ट्रीय स्तर तक प्रतिष्ठित किया। उनके योगदान के सम्मान में बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति ने उनकी जयंती को विगत वर्ष की भांति बुंदेलखंड दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।4
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