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पुणे के लोहागढ़ किला मर्डर केस की जांच के सिलसिले में बुधवार को पुलिस मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को घटनास्थल पर लेकर पहुंची। जांच दल ने 350 फीट गहरी खाई में डमी फेंककर पूरे घटनाक्रम का बारीकी से रीक्रिएशन किया, ताकि वारदात की कड़ियों को जोड़ा जा सके। जांच में सामने आया है कि पिछले छह महीनों में दोनों आरोपियों के बीच 2,000 से अधिक बार बातचीत हुई थी, और वारदात से ठीक एक दिन पहले कथित तौर पर हत्या की योजना बनाई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, सरकार ने इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का निर्णय लिया है और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को सरकारी वकील नियुक्त करने का भी फैसला किया है।
Yogesh jangar
पुणे के लोहागढ़ किला मर्डर केस की जांच के सिलसिले में बुधवार को पुलिस मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को घटनास्थल पर लेकर पहुंची। जांच दल ने 350 फीट गहरी खाई में डमी फेंककर पूरे घटनाक्रम का बारीकी से रीक्रिएशन किया, ताकि वारदात की कड़ियों को जोड़ा जा सके। जांच में सामने आया है कि पिछले छह महीनों में दोनों आरोपियों के बीच 2,000 से अधिक बार बातचीत हुई थी, और वारदात से ठीक एक दिन पहले कथित तौर पर हत्या की योजना बनाई गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, सरकार ने इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का निर्णय लिया है और वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को सरकारी वकील नियुक्त करने का भी फैसला किया है।
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- गुरुग्राम के फर्रुखनगर स्थित पुरातत्व विभाग की गोल बावड़ी के पास हो रहे अवैध निर्माण को सील करने और तोड़ने के लिए डीसी गुरुग्राम ने नोडल अधिकारी आर.एस. भट्ट को 06.05.2026 को ड्यूटी पर नियुक्त किया था। जब डीटीपी फर्रुखनगर आर.एस. बठ निर्माण को सील करने और तोड़ने पहुँचे, तो नगर पालिका के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर 15 दिन का अतिरिक्त समय मांग लिया। इस मामले में डीसी गुरुग्राम ने 50 दिन पहले ही आदेश जारी किए थे, लेकिन तब भी नगर पालिका के अधिकारियों ने निर्माणकर्ताओं को कोई नोटिस जारी नहीं किए। चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माणकर्ताओं को नोटिस केवल 2 दिन पहले ही दिए गए थे, जिसके बाद दुकानदार आत्मविश्वास से कह रहे हैं कि उनके निर्माण नहीं टूटेंगे और उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से 'मिलीभगत' की ओर इशारा करती है, जहाँ डीसी गुरुग्राम के आदेशों का कोई महत्व नहीं रह गया है। फर्रुखनगर नगर पालिका के अधिकारियों, अध्यक्ष और पार्षदों के सामने डीसी गुरुग्राम के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं।1
- बिहार से आईं महिला रसोइयों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने उचित वेतन न मिलने का मुद्दा उठाया है। उनका दर्द छलका है कि उन्हें अपने काम के लिए पर्याप्त मेहनताना नहीं मिल रहा है।1
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