माँ की जिंदगी हो रही महफूज, सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव में 13% का उछाल माँ की जिंदगी हो रही महफूज, सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव में 13% का उछाल • माताओं की जिंदगी हो रही सुरक्षित • जब घर में प्रसव कराना पड़ता था भारी, अब सारण की माँएं चुन रही हैं अस्पताल • प्रसव पूर्व जांच में 10% की बढ़त छपरा। मातृ मृत्यु दर किसी भी देश और समाज की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि उन महिलाओं की जिंदगी की कहानी है, जो गर्भावस्था या प्रसव के दौरान समय पर इलाज, जागरूकता या संसाधनों के अभाव में अपनी जान गंवा बैठती हैं। ऐसे में मातृ मृत्यु दर को कम करना न केवल स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी भी बन चुकी है। सारण जिले में हाल के वर्षों में इस दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो उम्मीद जगाता है कि आने वाले समय में स्थिति और बेहतर होगी। विश्व स्तर पर निर्धारित सतत विकास लक्ष्य (SDG) के तहत मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को 70 प्रति एक लाख जीवित जन्म से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2014-16 में जहां देश का एमएमआर 130 था, वहीं 2018-20 में यह घटकर 97 और 2020-22 में 88 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गया है। यह गिरावट बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता में वृद्धि का परिणाम है। बिहार की स्थिति में सुधार बिहार, जो कभी उच्च मातृ मृत्यु दर के लिए जाना जाता था, अब तेजी से सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य का एमएमआर घटकर 91 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गया है, जो पहले 118 से अधिक था। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत 88 से थोड़ा अधिक है, लेकिन अंतर तेजी से कम हो रहा है। सारण में सकारात्मक बदलाव सारण जिले में भी मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार देखने को मिला है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-20) के अनुसार, जिले में 73 प्रतिशत प्रसव अब स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं, जबकि 2015-16 में यह आंकड़ा 62 प्रतिशत था। यानी 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी संस्थानों में प्रसव की संख्या में 13.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही, चार प्रसव पूर्व जांच (ANC) कराने वाली महिलाओं की संख्या में भी लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बदलाव के पीछे सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की बड़ी भूमिका है। वर्ष 2005 में शुरू की गई जननी सुरक्षा योजना ने गरीब और वंचित वर्ग की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहित किया। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे बेहतर पोषण और देखभाल सुनिश्चित कर सकें। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को मुफ्त इलाज, दवा, जांच और अस्पताल आने-जाने की सुविधा मिल रही है, जिससे उनके ऊपर आर्थिक बोझ कम हुआ है। हर गर्भवती महिला को मिल रही है सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं इसके अलावा, सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) योजना के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर गर्भवती महिला को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की जाती है, जिससे हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान हो सके। लक्ष्य कार्यक्रम के तहत प्रसव कक्षों और ऑपरेशन थिएटर की गुणवत्ता में सुधार किया गया है, जिससे प्रसव के दौरान जोखिम कम हुआ है। जमीनी स्तर पर आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविकाएं और एएनएम की भूमिका भी बेहद अहम रही है। ये स्वास्थ्यकर्मी गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कराती हैं, उन्हें समय पर जांच के लिए प्रेरित करती हैं और जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करती हैं। इसके साथ ही मातृ मृत्यु निगरानी प्रणाली (एमडीएसआर) के जरिए हर मृत्यु की समीक्षा कर कारणों की पहचान की जाती है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सदर अस्पताल की पूर्व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीला सिंह बताती हैं, संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी और नियमित एएनसी जांच से मातृ मृत्यु दर में काफी कमी आई है। अब हाई-रिस्क गर्भावस्था की पहचान समय पर हो जाती है, जिससे जटिल मामलों को संभालना आसान हुआ है। हालांकि अभी भी एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। वहीं, आशा कार्यकर्ता सीमा देवी कहती हैं कि पहले गांव की महिलाएं घर पर ही प्रसव कराती थीं, लेकिन अब हम उन्हें अस्पताल जाने के लिए समझाते हैं। सरकार की योजनाओं का लाभ मिलने से भी महिलाओं का रुझान बढ़ा है। अब लोग जागरूक हो रहे हैं और सुरक्षित प्रसव को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके बावजूद चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, एनीमिया और कुपोषण की समस्या, समय पर अस्पताल पहुंचने में दिक्कत और कुछ जगहों पर अब भी जागरूकता की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। इन पर ध्यान देना जरूरी है ताकि मातृ मृत्यु दर को और कम किया जा सके। निजी अस्पताल से बेहतर व्यवस्था सदर प्रखंड के करिंगा निवासी रीना देवी बताती है कि पहले सोचती थी सरकारी अस्पताल में क्या होगा। लेकिन MCH वार्ड में कदम रखते ही भरोसा हो गया। साफ-सफाई, अच्छा खाना, समय पर दवा और सुरक्षित प्रसव सब कुछ मिला। जाते वक्त पोषण किट भी दी। मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा सुधार:- सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि सारण जिले में मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा सुधार एक सकारात्मक संकेत है। यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता और समाज की भागीदारी इसी तरह जारी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाकर हर मां और नवजात के जीवन को सुरक्षित किया जा सकेगा।
माँ की जिंदगी हो रही महफूज, सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव में 13% का उछाल माँ की जिंदगी हो रही महफूज, सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव में 13% का उछाल • माताओं की जिंदगी हो रही सुरक्षित • जब घर में प्रसव कराना पड़ता था भारी, अब सारण की माँएं चुन रही हैं अस्पताल • प्रसव पूर्व जांच में 10% की बढ़त छपरा। मातृ मृत्यु दर किसी भी देश और समाज की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि उन महिलाओं की जिंदगी की कहानी है, जो गर्भावस्था या प्रसव के दौरान समय पर इलाज, जागरूकता या संसाधनों के अभाव में अपनी जान गंवा बैठती हैं। ऐसे में मातृ मृत्यु दर को कम करना न केवल स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी भी बन चुकी है। सारण जिले में हाल के वर्षों में इस दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो उम्मीद जगाता है कि आने वाले समय में स्थिति और बेहतर होगी। विश्व स्तर पर निर्धारित सतत विकास लक्ष्य (SDG) के तहत मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को 70 प्रति एक लाख जीवित जन्म से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2014-16 में जहां देश का एमएमआर 130 था, वहीं 2018-20 में यह घटकर 97 और 2020-22 में 88 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गया है। यह गिरावट बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी योजनाओं के
प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता में वृद्धि का परिणाम है। बिहार की स्थिति में सुधार बिहार, जो कभी उच्च मातृ मृत्यु दर के लिए जाना जाता था, अब तेजी से सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य का एमएमआर घटकर 91 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गया है, जो पहले 118 से अधिक था। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत 88 से थोड़ा अधिक है, लेकिन अंतर तेजी से कम हो रहा है। सारण में सकारात्मक बदलाव सारण जिले में भी मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार देखने को मिला है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (2019-20) के अनुसार, जिले में 73 प्रतिशत प्रसव अब स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं, जबकि 2015-16 में यह आंकड़ा 62 प्रतिशत था। यानी 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी संस्थानों में प्रसव की संख्या में 13.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही, चार प्रसव पूर्व जांच (ANC) कराने वाली महिलाओं की संख्या में भी लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बदलाव के पीछे सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की बड़ी भूमिका है। वर्ष 2005 में शुरू की गई जननी सुरक्षा योजना ने गरीब और वंचित वर्ग की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव के लिए प्रोत्साहित किया। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे बेहतर पोषण और देखभाल सुनिश्चित कर सकें। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को मुफ्त इलाज, दवा, जांच और
अस्पताल आने-जाने की सुविधा मिल रही है, जिससे उनके ऊपर आर्थिक बोझ कम हुआ है। हर गर्भवती महिला को मिल रही है सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं इसके अलावा, सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) योजना के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर गर्भवती महिला को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की जाती है, जिससे हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान हो सके। लक्ष्य कार्यक्रम के तहत प्रसव कक्षों और ऑपरेशन थिएटर की गुणवत्ता में सुधार किया गया है, जिससे प्रसव के दौरान जोखिम कम हुआ है। जमीनी स्तर पर आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविकाएं और एएनएम की भूमिका भी बेहद अहम रही है। ये स्वास्थ्यकर्मी गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कराती हैं, उन्हें समय पर जांच के लिए प्रेरित करती हैं और जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करती हैं। इसके साथ ही मातृ मृत्यु निगरानी प्रणाली (एमडीएसआर) के जरिए हर मृत्यु की समीक्षा कर कारणों की पहचान की जाती है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सदर अस्पताल की पूर्व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीला सिंह बताती हैं, संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी और नियमित एएनसी जांच से मातृ मृत्यु दर में काफी कमी आई है। अब हाई-रिस्क गर्भावस्था की पहचान समय पर हो जाती है, जिससे जटिल मामलों को संभालना आसान हुआ है। हालांकि अभी भी एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याएं बड़ी
चुनौती बनी हुई हैं। वहीं, आशा कार्यकर्ता सीमा देवी कहती हैं कि पहले गांव की महिलाएं घर पर ही प्रसव कराती थीं, लेकिन अब हम उन्हें अस्पताल जाने के लिए समझाते हैं। सरकार की योजनाओं का लाभ मिलने से भी महिलाओं का रुझान बढ़ा है। अब लोग जागरूक हो रहे हैं और सुरक्षित प्रसव को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके बावजूद चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, एनीमिया और कुपोषण की समस्या, समय पर अस्पताल पहुंचने में दिक्कत और कुछ जगहों पर अब भी जागरूकता की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। इन पर ध्यान देना जरूरी है ताकि मातृ मृत्यु दर को और कम किया जा सके। निजी अस्पताल से बेहतर व्यवस्था सदर प्रखंड के करिंगा निवासी रीना देवी बताती है कि पहले सोचती थी सरकारी अस्पताल में क्या होगा। लेकिन MCH वार्ड में कदम रखते ही भरोसा हो गया। साफ-सफाई, अच्छा खाना, समय पर दवा और सुरक्षित प्रसव सब कुछ मिला। जाते वक्त पोषण किट भी दी। मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा सुधार:- सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि सारण जिले में मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहा सुधार एक सकारात्मक संकेत है। यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता और समाज की भागीदारी इसी तरह जारी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाकर हर मां और नवजात के जीवन को सुरक्षित किया जा सकेगा।
- सारण के एकमा स्थित फुचटीकला पंचायत के पूर्व मुखिया सुरेश राय उर्फ काका जी ने एक औपचारिक प्रेसवार्ता की। इस घोषणा से स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है।1
- बिहटा के कन्हौली के पास एक युवक की सड़क हादसे में मौत .... बिहटा थाना क्षेत्र के बिहटा-सरेरा रोड स्थित कन्हौली गांव के पास रविवार शाम करीब 7:30 बजे तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से एक युवक की मौ'त हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। मृतक की पहचान भगवतीपुर निवासी कुणाल कुमार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह सड़क किनारे पैदल जा रहा था, तभी तेज गति से आ रहे ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद चालक ट्रक छोड़कर फरार हो गया। सूचना मिलने पर बिहटा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को जब्त कर लिया है। थानाध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया कराई जा रही है। वहीं फरार चालक की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।1
- शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठी चार्ज के विरोध में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का किया गया पुतला दहन शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठी चार्ज के विरोध में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का किया गया पुतला दहन आरा में रविवार को भाकपा-माले ने पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज, महिला अभ्यर्थियों के साथ क्रुरता पूर्ण अभद्र व्यवहार और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले के खिलाफ आक्रोश मार्च और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया गया। ऐपवा नगर सचिव संगिता सिंह ने कहां की सम्राट चौधरी की सरकार में महा जंगल राज आ गया है । जिस तरह से लाठी चार्ज अभ्यर्थियों पर किया गया है वह निंदनीय है। यह मार्च भाकपा-माले जिला कार्यालय से पटेल बस स्टैंड आरा तक पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। मार्च का संचालन जिला कमिटी सदस्य अमित कुमार बंटी ने किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने छात्रों पर जुल्म बंद करों, दरभंगा के छात्र नेता दिलीप कुमार सहीत सहरसा के शशि शेखर, कटिहार के शहबाज़ आलम, और कैमूर के नवीन कुमार को जल्द रिहा करों, पांच हज़ार अज्ञात छात्रों को नाम देना बंद करों जैसे नारे लगाएं गए। भाकपा-माले, आइसा और आरवाईए ने आठ मई को अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षक बहाली की मांग को लेकर लाठीचार्ज भाजपा- जदयू सरकार की दमनकारी मानसिकता का खुला प्रदर्शन है। जिन युवाओं के हाथों में कल देश और समाज की जिम्मेदारी होगी आज उसे अपराधियों की तरह पीटा जा रहा हैं। यह केवल प्रशासनिक करवाईं नहीं बल्कि रोजगार और अधिकार की मांग उठाने वाले नौजवानों के खिलाफ राज्य प्रायोजित दमन है। जब देश और बिहार की राजनीतिक परिस्थितियां अत्यंत गंभीर दौर से गुजर रही है । भाजपा ने नीतीश कुमार को किनारे कर बिहार की सत्ता पर पूरी तरह कब्ज़ा जमाकर यूपी माॅडल व दमनकारी नीति चलाने पर उतारू है। मार्च में भाकपा-माले नगर सचिव सुधीर सिंह, जिला कार्यालय सचिव दिलराज प्रीतम, , नगर कमिटी सदस्य शोभा मंडल, मिल्टन कुशवाहा, रणधीर राणा, संतविलास राम, विकास कुमार राजा, रितेश कुमार, अजय कुमार, राजु प्रसाद आदि कई लोग शामिल थे।1
- आरा, 10 मई 2026 – भारत के अग्रणी ओम्नी-चैनल ज्वेलरी ब्रांड CaratLane ने आरा शहर के शिवगंज स्थित नए स्टोर का भव्य शुभारंभ किया। यह ब्रांड का 374वां स्टोर है, जिसका उद्घाटन पारंपरिक कोयला तोड़ने की रस्म के साथ किया गया, जो नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर ब्रांड के कई सम्मानित एवं पुराने ग्राहक उपस्थित रहे। CaratLane देशभर में आधुनिक और आकर्षक ज्वेलरी को ग्राहकों तक आसान पहुंच देने के अपने उद्देश्य के साथ लगातार विस्तार कर रहा है। आज ब्रांड की देशभर में 350 से अधिक स्टोर्स के साथ मजबूत उपस्थिति है। आरा में नए स्टोर के खुलने से अब स्थानीय ग्राहकों को भी ट्रेंडी और प्रीमियम डायमंड ज्वेलरी का शानदार अनुभव मिलेगा।1
- बिहार: कथित तौर पर पटना में ब्लैक स्कॉर्पियो सवार कुछ लोगों ने एक ट्रक चालक को ओवरटेक कर बीच रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि इसके बाद चालक को धमकाया गया और इसी दौरान एक युवक ने पत्थर उठाकर ट्रक के फ्रंट शीशे पर दे मारा। शीशा टूटते ही ड्राइवर दर्द से चिल्लाया, "अरे आंख फोड़ दिया यार..." वायरल वीडियो में दिख रही स्कॉर्पियो का नंबर BR01JF3633 है, जिसके आधार पर घटना पटना, बिहार की होने की आशंका जताई जा रही है। (वीडियो कब का है और कहां का है इस बात की पुष्टीकरण हमारे पास नहीं है बिहार: कथित तौर पर पटना में ब्लैक स्कॉर्पियो सवार कुछ लोगों ने एक ट्रक चालक को ओवरटेक कर बीच रास्ते में रोक लिया। आरोप है कि इसके बाद चालक को धमकाया गया और इसी दौरान एक युवक ने पत्थर उठाकर ट्रक के फ्रंट शीशे पर दे मारा। शीशा टूटते ही ड्राइवर दर्द से चिल्लाया, "अरे आंख फोड़ दिया यार..." वायरल वीडियो में दिख रही स्कॉर्पियो का नंबर BR01JF3633 है, जिसके आधार पर घटना पटना, बिहार की होने की आशंका जताई जा रही है। (वीडियो कब का है और कहां का है इस बात की पुष्टीकरण हमारे पास नहीं है1
- बड़हरा के पूर्व विधायक प्रत्याशी रामबाबू ने भोजपुर-बक्सर एमएलसी उपचुनाव में राजद प्रत्याशी सोनू राय की जीत का बड़ा दावा किया है। उनके अनुसार, सोनू राय जनप्रतिनिधियों के पूरे समर्थन के साथ सबसे आगे चल रहे हैं। इस बयान के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।1
- बंगाल में शुभेन्दु अधिकारी ने 'बंगाल तिलक' किया और माँ कालका का आशीर्वाद लेकर प्रसाद बांटा। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रिमंडल को आशीर्वाद दिया और बंगाल की जनता का दंडवत धन्यवाद किया। राजपथ न्यूज़ के अनुसार, सबसे बड़ी चर्चा दस साल पहले मोदीजी द्वारा भ्रष्टाचारी कहे गए व्यक्ति के अब सीएम बनने की है।1
- सारण के कटेया लहलादपुर में विशेषज्ञों ने सुबह टहलने के स्वास्थ्य लाभ बताए। नियमित सैर से न सिर्फ कई बीमारियां दूर रहती हैं, बल्कि यह स्वस्थ जीवन का आधार भी है।1