मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर दूर मुंगेर : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से जिले में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग की 27 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 10 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.83 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 39.33 मीटर है। इस तरह नदी का जलस्तर डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। वहीं, चेतावनी स्तर 38.33 मीटर है, जिसके मुकाबले गंगा का पानी 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। फिलहाल जलस्तर का ट्रेंड स्थिर बताया गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर जिले के निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में दिखने लगा है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी खेतों और निचले भूभाग में फैल गया है। कुछ इलाकों में घरों और संपर्क मार्गों के आसपास भी पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। दियारा क्षेत्र में पानी फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी जमा होने के कारण फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में दोबारा तेजी से वृद्धि हुई तो कई गांवों और संपर्क मार्गों पर बाढ़ का दबाव बढ़ सकता है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ आधा मीटर नीचे रहने के कारण प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। जलस्तर में मामूली वृद्धि होने पर नदी खतरे के निशान के और करीब पहुंच जाएगी। इधर, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। जिला पदाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने अधिकारियों को अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग को भी सतर्क रखा गया है। मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर दूर मुंगेर : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से जिले में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग की 27 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 10 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.83 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 39.33 मीटर है। इस तरह नदी का जलस्तर डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। वहीं, चेतावनी स्तर 38.33 मीटर है, जिसके मुकाबले गंगा का पानी 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। फिलहाल जलस्तर का ट्रेंड स्थिर बताया गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर जिले के निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में दिखने लगा है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी खेतों और निचले भूभाग में फैल गया है। कुछ इलाकों में घरों और संपर्क मार्गों के आसपास भी पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। दियारा क्षेत्र में पानी फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी जमा होने के कारण फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में दोबारा तेजी से वृद्धि हुई तो कई गांवों और संपर्क मार्गों पर बाढ़ का दबाव बढ़ सकता है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ आधा मीटर नीचे रहने के कारण प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। जलस्तर में मामूली वृद्धि होने पर नदी खतरे के निशान के और करीब पहुंच जाएगी। इधर, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। जिला पदाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने अधिकारियों को अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग को भी सतर्क रखा गया है।
मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर दूर मुंगेर : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से जिले में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग की 27 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 10 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.83 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 39.33 मीटर है। इस तरह नदी का जलस्तर डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। वहीं, चेतावनी स्तर 38.33 मीटर है, जिसके मुकाबले गंगा का पानी 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। फिलहाल जलस्तर का ट्रेंड स्थिर बताया गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर जिले के निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में दिखने लगा है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी खेतों और निचले भूभाग में फैल गया है। कुछ इलाकों में घरों और संपर्क मार्गों के आसपास भी पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। दियारा क्षेत्र में पानी फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी जमा होने के कारण फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में दोबारा तेजी से वृद्धि हुई तो कई गांवों और संपर्क मार्गों पर बाढ़ का दबाव बढ़ सकता है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ आधा मीटर नीचे रहने के कारण प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। जलस्तर में मामूली वृद्धि होने पर नदी खतरे के निशान के और करीब पहुंच जाएगी। इधर, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। जिला पदाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने अधिकारियों को अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग को भी सतर्क रखा गया है। मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर दूर मुंगेर : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से जिले में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग की 27 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 10 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.83 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 39.33 मीटर है। इस तरह नदी का जलस्तर डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। वहीं, चेतावनी स्तर 38.33 मीटर है, जिसके मुकाबले गंगा का पानी 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। फिलहाल जलस्तर का ट्रेंड स्थिर बताया गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर जिले के निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में दिखने लगा है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी खेतों और निचले भूभाग में फैल गया है। कुछ इलाकों में घरों और संपर्क मार्गों के आसपास भी पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। दियारा क्षेत्र में पानी फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी जमा होने के कारण फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में दोबारा तेजी से वृद्धि हुई तो कई गांवों और संपर्क मार्गों पर बाढ़ का दबाव बढ़ सकता है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ आधा मीटर नीचे रहने के कारण प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। जलस्तर में मामूली वृद्धि होने पर नदी खतरे के निशान के और करीब पहुंच जाएगी। इधर, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। जिला पदाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने अधिकारियों को अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग को भी सतर्क रखा गया है।
- मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर दूर मुंगेर : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से जिले में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग की 27 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 10 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.83 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 39.33 मीटर है। इस तरह नदी का जलस्तर डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। वहीं, चेतावनी स्तर 38.33 मीटर है, जिसके मुकाबले गंगा का पानी 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। फिलहाल जलस्तर का ट्रेंड स्थिर बताया गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर जिले के निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में दिखने लगा है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी खेतों और निचले भूभाग में फैल गया है। कुछ इलाकों में घरों और संपर्क मार्गों के आसपास भी पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। दियारा क्षेत्र में पानी फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी जमा होने के कारण फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में दोबारा तेजी से वृद्धि हुई तो कई गांवों और संपर्क मार्गों पर बाढ़ का दबाव बढ़ सकता है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ आधा मीटर नीचे रहने के कारण प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। जलस्तर में मामूली वृद्धि होने पर नदी खतरे के निशान के और करीब पहुंच जाएगी। इधर, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। जिला पदाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने अधिकारियों को अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग को भी सतर्क रखा गया है। मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब, डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर दूर मुंगेर : गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि से जिले में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग की 27 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह 10 बजे मुंगेर में गंगा का जलस्तर 38.83 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 39.33 मीटर है। इस तरह नदी का जलस्तर डेंजर लेवल से महज 50 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। वहीं, चेतावनी स्तर 38.33 मीटर है, जिसके मुकाबले गंगा का पानी 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। फिलहाल जलस्तर का ट्रेंड स्थिर बताया गया है। गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर जिले के निचले इलाकों और दियारा क्षेत्रों में दिखने लगा है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी खेतों और निचले भूभाग में फैल गया है। कुछ इलाकों में घरों और संपर्क मार्गों के आसपास भी पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। दियारा क्षेत्र में पानी फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पानी जमा होने के कारण फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में दोबारा तेजी से वृद्धि हुई तो कई गांवों और संपर्क मार्गों पर बाढ़ का दबाव बढ़ सकता है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ आधा मीटर नीचे रहने के कारण प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। जलस्तर में मामूली वृद्धि होने पर नदी खतरे के निशान के और करीब पहुंच जाएगी। इधर, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है। जिला पदाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने अधिकारियों को अलर्ट रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी रखने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग को भी सतर्क रखा गया है।1
- शिक्षक अभ्यर्थी की योग्यता पर सवाल उठाने वाले CM व शिक्षा मंत्री के योग्यता को जन सुराज ने दी चुनौती शिक्षक अभ्यर्थियों की योग्यता पर सवाल उठाने वाले मुख्यमंत्री तथा शिक्षा मंत्री के योग्यता पर जन सुराज ने दी चुनौती जन सुराज संघर्ष वाहिनी ने आंदोलनरत छात्रों को दिया नैतिक समर्थन वित्तरहित शिक्षकों के मुद्दों के साथ खड़ा है जन सुराज शिक्षा और रोजगार की मिसाल पेश करेगा बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र1
- गोगरी प्रखंड अंतर्गत बोरना के उत्क्रमित उच्च विद्यालय व मध्य विद्यालय परिसर में घुसा बाढ़ का पानी। गोगरी (खगड़िया)। गंगा और बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि के बाद गोगरी प्रखंड के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने के बाद अब इसका असर शिक्षण संस्थानों पर भी पड़ने लगा है। गोगरी प्रखंड के बोरना गांव स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय एवं मध्य विद्यालय के परिसर में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। स्कूल परिसर में पानी जमा होने के कारण फिलहाल पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है। गुरुवार को दोपहर करीब 12 बजे तक विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी जमा था। विद्यालय के प्रधानाध्यापक सहित अन्य शिक्षक स्कूल भवन के समीप अपेक्षाकृत ऊंचे स्थान पर बैठे नजर आए। वहीं, बाढ़ की स्थिति को देखते हुए विद्यालय में आने वाले छात्र-छात्राओं को छुट्टी दे दी गई है। पानी बढ़ने के कारण बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यालय में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं की जा रही हैं। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका गुंजन कुमारी ने बताया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए फिलहाल विद्यालय में पठन-पाठन बंद है। विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी जमा हो जाने के कारण बच्चों को विद्यालय बुलाना सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग से प्राप्त होने वाले अगले आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जाता है कि गंगा और बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद गोगरी प्रखंड के विभिन्न निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल रहा है। खेतों, बहियारों और निचले भू-भागों में पानी पहुंचने के बाद अब आबादी वाले क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है। बोरना विद्यालय परिसर में पानी प्रवेश करना भी इसी बाढ़ की स्थिति का परिणाम बताया जा रहा है। विद्यालय परिसर में पानी जमा होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी पानी फैलने की आशंका है। ऐसे में प्रशासन और शिक्षा विभाग को बाढ़ प्रभावित विद्यालयों की स्थिति पर नजर रखने तथा बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत है। फिलहाल बोरना के दोनों विद्यालयों में पठन-पाठन बंद है और शिक्षक विभागीय निर्देश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ग्रामीणों की नजर भी गंगा और बूढ़ी गंडक के जलस्तर पर बनी हुई है।1
- गोगरी जमालपुर में जावेद हबीब हेयर एंड ब्यूटी शोरूम का उद्घाटन के मौके पर ममता कुमारी ने क्या कुछ कहा सुनिए1
- मुंबई में तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश मुंबई में अभी-अभी तेज हवाओं के साथ जोरदार मुंबई में तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश मुंबई में अभी-अभी तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई है। मुंबई में मानसून की बारिश जून महीने से शुरू होकर सितंबर में गणेश पूजा तक अपना असर दिखाती रहती है। यहां बारिश का कोई निश्चित समय नहीं होता। कभी सुबह अचानक बारिश शुरू हो जाती है, तो कभी शाम में और कई बार दिन के बीच में ही बिना किसी पूर्व सूचना के झमाझम बारिश होने लगती है। मुंबई की बारिश की सबसे खास बात यह है कि कई बार आसमान में ज्यादा बादल दिखाई नहीं देते और न ही बिजली कड़कने की आवाज सुनाई देती है। अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश दनादन बरसने लगती है। कुछ ही मिनटों में सड़कें पानी से भीग जाती हैं और लोगों को बारिश से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों का सहारा लेना पड़ता है। फिलहाल मुंबई में तेज बारिश और हवाओं का दौर जारी है।1
- बाढ़ प्रभावित इलाकों का CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण। पटना, भागलपुर, कटिहार, नवगछिया, बेगूसराय एवं खगड़िया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। CM ने प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तत्परता बरतने और प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बाढ़ प्रभावित इलाकों का CM सम्राट चौधरी ने किया हवाई सर्वेक्षण। पटना, भागलपुर, कटिहार, नवगछिया, बेगूसराय एवं खगड़िया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। CM ने प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तत्परता बरतने और प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।1
- हवेली खड़गपुर में बालू लदा हाईवा पलटा, चालक-उपचालक सुरक्षित मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में बुधवार सुबह मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में बुधवार सुबह खड़गपुर-बरियारपुर एनएच-333 पर नंदलाल बसु चौक के पास एक बड़ा सड़क हादसा हुआ। जमुई से बालू लेकर मुंगेर की ओर जा रहा हाईवा हाट चौक के मोड़ पर अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। हादसे में हाईवा के चालक और उपचालक को मामूली चोटें आईं, लेकिन दोनों सुरक्षित हैं। दुर्घटना के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही हवेली खड़गपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी है। बताया जाता है कि जिस जगह हादसा हुआ, वहां दुर्गा स्थान और मेडिकल हॉल होने के कारण दिनभर लोगों और यात्रियों की आवाजाही रहती है। गनीमत रही कि हादसे में कोई बड़ा जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। वहीं, घटना के बाद स्थानीय कांग्रेस नेता विशाल चौरसिया, राजद युवा नेता ईशु यादव और खड़गपुर विकास मंच के सदस्य शशि सौरभ सहित कई लोगों ने नगर क्षेत्र में बाईपास निर्माण की मांग फिर उठाई है। उनका कहना है कि बाईपास बनने से एनएच-333 पर भारी वाहनों का दबाव कम होगा और जाम के साथ सड़क दुर्घटनाओं पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।1
- सदर अस्पताल में महिला डॉक्टर पर पति का हमला, जूते से पीटा और आंखों में डाला स्प्रे मुंगेर। सदर अस्पताल परिसर में बुधवार को एक महिला चिकित्सक पर उनके पति द्वारा कथित रूप से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई। सुरक्षा गार्डों ने आरोपित को पकड़कर 112 नंबर पर सूचना दी और पुलिस के हवाले कर दिया। सदर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत डा. निधि ने कोतवाली थाना में दिए आवेदन में अपने पति डा. कृष्ण गोपाल पर मारपीट, दुर्व्यवहार और आंखों व चेहरे पर स्प्रे करने का आरोप लगाया है। डा. निधि के अनुसार, उनके पति अस्पताल परिसर पहुंचे और अचानक उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि उन्होंने चेहरे और शरीर के कई हिस्सों पर जूते से प्रहार किया। इसके बाद आंखों और चेहरे पर स्प्रे कर दिया, जिससे दोनों आंखों में तेज जलन और परेशानी होने लगी। मारपीट के दौरान शोर सुनकर अस्पताल के सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचे और हस्तक्षेप कर आरोपित को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। डा. निधि ने बताया कि वर्ष 2018 में उनकी शादी डा. कृष्ण गोपाल से हुई थी। उनका आरोप है कि शादी के बाद से ही उन्हें प्रताड़ित और मारपीट की जाती रही। इससे परेशान होकर उन्होंने वर्ष 2026 में न्यायालय की शरण ली और दोनों के बीच मामला न्यायालय में चल रहा है। उन्होंने पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। डा. निधि ने बताया कि उनके पति जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ट्यूटर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने पति पर दो आपराधिक मामले दर्ज होने की भी बात कही है। इधर, महिला चिकित्सक के आवेदन के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने डा. कृष्ण गोपाल को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। सदर अस्पताल में महिला डॉक्टर पर पति का हमला, जूते से पीटा और आंखों में डाला स्प्रे मुंगेर। सदर अस्पताल परिसर में बुधवार को एक महिला चिकित्सक पर उनके पति द्वारा कथित रूप से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई। सुरक्षा गार्डों ने आरोपित को पकड़कर 112 नंबर पर सूचना दी और पुलिस के हवाले कर दिया। सदर अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के पद पर कार्यरत डा. निधि ने कोतवाली थाना में दिए आवेदन में अपने पति डा. कृष्ण गोपाल पर मारपीट, दुर्व्यवहार और आंखों व चेहरे पर स्प्रे करने का आरोप लगाया है। डा. निधि के अनुसार, उनके पति अस्पताल परिसर पहुंचे और अचानक उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि उन्होंने चेहरे और शरीर के कई हिस्सों पर जूते से प्रहार किया। इसके बाद आंखों और चेहरे पर स्प्रे कर दिया, जिससे दोनों आंखों में तेज जलन और परेशानी होने लगी। मारपीट के दौरान शोर सुनकर अस्पताल के सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचे और हस्तक्षेप कर आरोपित को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। डा. निधि ने बताया कि वर्ष 2018 में उनकी शादी डा. कृष्ण गोपाल से हुई थी। उनका आरोप है कि शादी के बाद से ही उन्हें प्रताड़ित और मारपीट की जाती रही। इससे परेशान होकर उन्होंने वर्ष 2026 में न्यायालय की शरण ली और दोनों के बीच मामला न्यायालय में चल रहा है। उन्होंने पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। डा. निधि ने बताया कि उनके पति जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ट्यूटर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने पति पर दो आपराधिक मामले दर्ज होने की भी बात कही है। इधर, महिला चिकित्सक के आवेदन के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने डा. कृष्ण गोपाल को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है।1