शाहाबाद में छाया खौफ का साया कोई दुकानदार दुकान खोलने नहीं आया,पुलिस तैनात… फिर भी बाजार बंद,व्यापारियों में डर कर गया घर,आरोपी कई बार “आए, भिड़े, और चले भी गए”,प्रशासन, सत्ता और भूमाफिया कनेक्शन की चर्चा तेज, अफसरों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल, “चाक-चौबंद सुरक्षा” या “डर का पहरा”? 3 दिन में 3 मुकदमे दर्ज, चौथे की तैयारी, कुल मिलाकर भूमाफियायों के सिर्फ एक खेमे के सिर्फ एक गुट पर हो रही कार्यवाही जबकि संलिप्त हैँ कई संगठित भूमाफिया जिसमें कोई पर्दे के पीछे सफेदपोश है तो कोई सत्ता के नशे में अब भी मदहोश है, आजकल इधर जितने भी अवैध प्लॉटिंग, अवैध कब्जो, अवैध खरीद फरोख्त के लिए चर्चित नाम हैँ, वह सभी भाजपाई हैँ जिनमें सबसे प्रभावशाली नाम सीधे क्षेत्रीय मंत्री से जुड़ते मालुम हो रहे हैँ शाहाबाद (हरदोई) मंडी गेट पर रविवार को हुआ हमला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता संरक्षण, प्रशासनिक शिथिलता और दबे हुए खौफ की कहानी बन गया है, इसीलिए सवाल कि सोमवार क्यों कोई दुकानदार अपनी दुकान खोलने नहीं आया, यद्वपि अपर पुलिस अधीक्षक शाहाबाद आलोक राज नारायण ने व्यापरियों को बहुत समझाया परन्तु व्यापारियों को उनके ऊपर भरोसा नहीं रहा क्योंकि पुलिस के सामने दबंगों का सरदार जाहिर घटना के बाद दुस्साहसपूर्ण ढंग से घटनास्थल पर लौटा और फिर घटना के बाद से हालात यह हैं कि पुलिस की कड़ी तैनाती के बावजूद मंडी के निकट का पूरा बाजार सहमा हुआ है। सामने से सब सामान्य दिखाने की कोशिश जरूर हो रही है, लेकिन अंदरूनी सच कुछ और ही बयां कर रहा है। हालांकि मंगलवार को सिर्फ दो दुकानदारों ने दुकानें खोलीं हैँ। आरोपियों पर अब भी सत्ता संरक्षण के आरोप हैँ, पुलिस तैनाती के बावजूद 18 दुकानें बंद होने से तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैँ और एसडीएम की चुप्पी पर भी सवाल उठे हैँ। पुलिस तैनात… फिर भी बाजार बंद शाहाबाद (हरदोई) सूत्रों के मुताबिक, डकैती जैसी घटना के बाद से मंडी गेट के पास की करीब 18 दुकानें पूरी तरह बंद हैं। सोमवार को एक भी दुकान नहीं खुली। मंगलवार को पुलिस के कहने पर सिर्फ 2 दुकानदारों ने बमुश्किल शटर उठाया, बाकी दुकानदार अब भी नदारद हैं। यानी पुलिस मौजूद है, लेकिन भरोसा गायब है। व्यापारियों में डर कर गया घर शाहाबाद (हरदोई) स्थानीय व्यापारी खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। बाहर से माहौल सामान्य दिखाने की कोशिश हो रही है, लेकिन अंदर और डर साफ महसूस किया जा सकता है। यह वही बाजार है, जहां रविवार को सुबह 11 बजे दिनदहाड़े हमला हुआ और आरोपी खुलेआम लौटकर चले गए लेकिन वह पुलिस की मौजूदगी में पुनः आए और व्यापारियों को धमकाकर चले गए लेकिन पीड़ित व्यापारियों ने पुनः तहरीर नहीं दी क्योंकि अंदर ही अंदर आरोपियों के पैरवकार समझौते का दबाव बना रहे हैँ जिसमें प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है अन्यथा अब आरोपियों की गिरफ्तारी हो जाती और सभी दुकानें खुल जातीं। आरोपी कई बार “आए, भिड़े, और चले भी गए” शाहाबाद (हरदोई) घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यही है कि हमलावर घटना के बाद दोबारा लौटे, पुलिस बल की मौजूदगी में दुकानदारों से भिड़े और फिर उसी अंदाज में चले गए। तभी सवाल उठे कि अगर प्रशासन सक्रिय होता तो क्या यह संभव था? प्रशासन, सत्ता और भूमाफिया कनेक्शन की चर्चा तेज शाहाबाद (हरदोई) स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हैं कि क्षेत्र में भूमाफियाओं के हौसले बढ़े हुए हैं। कुछ प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों का संरक्षण उन्हें मिला हुआ है। लोग खुलकर तो नहीं बोल रहे, लेकिन इशारे बहुत कुछ कह रहे हैं। “समझदारों के लिए इशारा ही काफी” वाली स्थिति यहां साफ नजर आ रही है। अफसरों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल शाहाबाद (हरदोई) मौके पर आईपीएस अधिकारी, क्षेत्राधिकारी स्तर के स्थानीय अफसर एएसपी आलोक राज नारायण ने प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण अधिकारी के तौर पर औपचारिकता निभाई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल बनी एसडीएम शाहाबाद की चुप्पी क्योंकि उनके आवास की दूरी घटनास्थल से महज कुछ कदम की है, फिर भी वे तीसरे दिन की शाम तक मौके पर नहीं पहुंचे। यह न सिर्फ लापरवाही, बल्कि उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। “चाक-चौबंद सुरक्षा” या “डर का पहरा”? शाहाबाद (हरदोई) रविवार से मंगलवार तक विवादित स्थल पर पुलिस की भारी तैनाती है। प्रशासन इसे सुरक्षा बता रहा है, लेकिन यह सुरक्षा ही आरोपियों के खौफनाक मंजर की बानगी है! इसीलिए अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद बाजार क्यों बंद है? क्या दुकानदारों पर दबाव है? हमलावर दोबारा लौटे, यह किसकी विफलता है? एसडीएम मौके पर क्यों नहीं पहुंचे? क्या भूमाफिया और सत्ता के गठजोड़ ने सिस्टम को कमजोर कर दिया है? कुल मिलाकर खामोश बाजार, बहुत कुछ बोल रहा है।शाहाबाद का यह बंद बाजार सिर्फ दुकानें नहीं, बल्कि व्यापारियों का टूटा भरोसा दिखा रहा है और व्यापार मंडल की डांवाडोल स्तिथि का नतीजा है! अगर पुलिस तैनात होने के बाद भी लोग दुकान खोलने से दुकानदार डर रहे हैं तो सवाल उठते हैँ। और लोग कहते हैँ कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी की कहानी है। 3 दिन में 3 मुकदमे दर्ज, चौथे की तैयारी शाहाबाद (हरदोई) जमीन, पैसा और दबंगई के सत्ता से जुड़े तार, फिर भी एसपी हरदोई की शख्ती से सत्ताई नेताओं की पैरवी हो रही बेकार और पुलिस की तेज होती कार्रवाई बता रही है कि फिलहाल इस एक ग्रुप के संगठित भूमाफियाओं पर शिकंजा कसता जा रहा है हालांकि फिर भी सवाल उठ रहे हैँ कि क्या भूमाफिया जाहिर के साथ इलाके की अन्य संपत्तियों की खरीद फरोख्त में शामिल सफेदपोश भूमाफियाओं के विरुद्ध भी एफआईआर और कठोर कार्यवाही होगी कि नहीं? फिलहाल मंडी गेट कांड अब एक बड़ी आपराधिक श्रृंखला का रूप लेता दिख रहा है। तीन दिन के भीतर तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज होने से साफ है कि मामला सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन कब्जा, पैसों के विवाद और धमकियों से जुड़ा है। दर्ज मुकदमों के अनुसार, आरोपियों पर जमीन बेचने का दबाव बनाने, 11 लाख रुपये के लेनदेन में धोखाधड़ी व मारपीट, अवैध हथियार से धमकी देने, जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इन मामलों में जाहिर, हारिश और उनके साथियों के नाम सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार भूमाफिया जाहिर की दहशत उसकी फरारी के बाद कहीं न कहीं कम हुई तभी पहले से पीड़ितगण बढ़ बढ़कर पुलिस के सामने अपना मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगा रहे हैँ आखिर इसीलिए मुख्य आरोपियों पर चौथे मुकदमे की भी तैयारी चल रही है जिसकी तहरीर कोतवाली पहुंचने के सूत्र मिल रहे हैँ। जानकारी मिली है कि एसपी के निर्देशन में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। प्रभारी निरीक्षक अरविन्द कुमार राय ने कहा कि “जल्द गिरफ्तारी होगी” “किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा”
शाहाबाद में छाया खौफ का साया कोई दुकानदार दुकान खोलने नहीं आया,पुलिस तैनात… फिर भी बाजार बंद,व्यापारियों में डर कर गया घर,आरोपी कई बार “आए, भिड़े, और चले भी गए”,प्रशासन, सत्ता और भूमाफिया कनेक्शन की चर्चा तेज, अफसरों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल, “चाक-चौबंद सुरक्षा” या “डर का पहरा”? 3 दिन में 3 मुकदमे दर्ज, चौथे की तैयारी, कुल मिलाकर भूमाफियायों के सिर्फ एक खेमे के सिर्फ एक गुट पर हो रही कार्यवाही जबकि संलिप्त हैँ कई संगठित भूमाफिया जिसमें कोई पर्दे के पीछे सफेदपोश है तो कोई सत्ता के नशे में अब भी मदहोश है, आजकल इधर जितने भी अवैध प्लॉटिंग, अवैध कब्जो, अवैध खरीद फरोख्त के लिए चर्चित नाम हैँ, वह सभी भाजपाई हैँ जिनमें सबसे प्रभावशाली नाम सीधे क्षेत्रीय मंत्री से जुड़ते मालुम हो रहे हैँ शाहाबाद (हरदोई) मंडी गेट पर रविवार को हुआ हमला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता संरक्षण, प्रशासनिक शिथिलता और दबे हुए खौफ की कहानी बन गया है, इसीलिए सवाल कि सोमवार क्यों कोई दुकानदार अपनी दुकान खोलने नहीं आया, यद्वपि अपर पुलिस अधीक्षक शाहाबाद आलोक राज नारायण ने व्यापरियों को बहुत समझाया परन्तु व्यापारियों को उनके ऊपर भरोसा नहीं रहा क्योंकि पुलिस के सामने दबंगों का सरदार जाहिर घटना के बाद दुस्साहसपूर्ण ढंग से घटनास्थल पर लौटा और फिर घटना के बाद से हालात यह हैं कि पुलिस की कड़ी तैनाती के बावजूद मंडी के निकट का पूरा बाजार सहमा हुआ है। सामने से सब सामान्य दिखाने की कोशिश जरूर हो रही है, लेकिन अंदरूनी सच कुछ और ही बयां कर रहा है। हालांकि मंगलवार को सिर्फ दो दुकानदारों ने दुकानें खोलीं हैँ। आरोपियों पर अब भी सत्ता संरक्षण
के आरोप हैँ, पुलिस तैनाती के बावजूद 18 दुकानें बंद होने से तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैँ और एसडीएम की चुप्पी पर भी सवाल उठे हैँ। पुलिस तैनात… फिर भी बाजार बंद शाहाबाद (हरदोई) सूत्रों के मुताबिक, डकैती जैसी घटना के बाद से मंडी गेट के पास की करीब 18 दुकानें पूरी तरह बंद हैं। सोमवार को एक भी दुकान नहीं खुली। मंगलवार को पुलिस के कहने पर सिर्फ 2 दुकानदारों ने बमुश्किल शटर उठाया, बाकी दुकानदार अब भी नदारद हैं। यानी पुलिस मौजूद है, लेकिन भरोसा गायब है। व्यापारियों में डर कर गया घर शाहाबाद (हरदोई) स्थानीय व्यापारी खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। बाहर से माहौल सामान्य दिखाने की कोशिश हो रही है, लेकिन अंदर और डर साफ महसूस किया जा सकता है। यह वही बाजार है, जहां रविवार को सुबह 11 बजे दिनदहाड़े हमला हुआ और आरोपी खुलेआम लौटकर चले गए लेकिन वह पुलिस की मौजूदगी में पुनः आए और व्यापारियों को धमकाकर चले गए लेकिन पीड़ित व्यापारियों ने पुनः तहरीर नहीं दी क्योंकि अंदर ही अंदर आरोपियों के पैरवकार समझौते का दबाव बना रहे हैँ जिसमें प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है अन्यथा अब आरोपियों की गिरफ्तारी हो जाती और सभी दुकानें खुल जातीं। आरोपी कई बार “आए, भिड़े, और चले भी गए” शाहाबाद (हरदोई) घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यही है कि हमलावर घटना के बाद दोबारा लौटे, पुलिस बल की मौजूदगी में दुकानदारों से भिड़े और फिर उसी अंदाज में चले गए। तभी सवाल उठे कि अगर प्रशासन सक्रिय होता तो क्या यह संभव था? प्रशासन, सत्ता और भूमाफिया कनेक्शन की चर्चा तेज शाहाबाद (हरदोई) स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हैं कि क्षेत्र में भूमाफियाओं
के हौसले बढ़े हुए हैं। कुछ प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों का संरक्षण उन्हें मिला हुआ है। लोग खुलकर तो नहीं बोल रहे, लेकिन इशारे बहुत कुछ कह रहे हैं। “समझदारों के लिए इशारा ही काफी” वाली स्थिति यहां साफ नजर आ रही है। अफसरों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल शाहाबाद (हरदोई) मौके पर आईपीएस अधिकारी, क्षेत्राधिकारी स्तर के स्थानीय अफसर एएसपी आलोक राज नारायण ने प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण अधिकारी के तौर पर औपचारिकता निभाई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल बनी एसडीएम शाहाबाद की चुप्पी क्योंकि उनके आवास की दूरी घटनास्थल से महज कुछ कदम की है, फिर भी वे तीसरे दिन की शाम तक मौके पर नहीं पहुंचे। यह न सिर्फ लापरवाही, बल्कि उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। “चाक-चौबंद सुरक्षा” या “डर का पहरा”? शाहाबाद (हरदोई) रविवार से मंगलवार तक विवादित स्थल पर पुलिस की भारी तैनाती है। प्रशासन इसे सुरक्षा बता रहा है, लेकिन यह सुरक्षा ही आरोपियों के खौफनाक मंजर की बानगी है! इसीलिए अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद बाजार क्यों बंद है? क्या दुकानदारों पर दबाव है? हमलावर दोबारा लौटे, यह किसकी विफलता है? एसडीएम मौके पर क्यों नहीं पहुंचे? क्या भूमाफिया और सत्ता के गठजोड़ ने सिस्टम को कमजोर कर दिया है? कुल मिलाकर खामोश बाजार, बहुत कुछ बोल रहा है।शाहाबाद का यह बंद बाजार सिर्फ दुकानें नहीं, बल्कि व्यापारियों का टूटा भरोसा दिखा रहा है और व्यापार मंडल की डांवाडोल स्तिथि का नतीजा है! अगर पुलिस तैनात होने के बाद भी लोग दुकान खोलने से दुकानदार डर रहे हैं तो सवाल उठते हैँ। और लोग कहते हैँ कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी की कहानी है। 3 दिन में 3
मुकदमे दर्ज, चौथे की तैयारी शाहाबाद (हरदोई) जमीन, पैसा और दबंगई के सत्ता से जुड़े तार, फिर भी एसपी हरदोई की शख्ती से सत्ताई नेताओं की पैरवी हो रही बेकार और पुलिस की तेज होती कार्रवाई बता रही है कि फिलहाल इस एक ग्रुप के संगठित भूमाफियाओं पर शिकंजा कसता जा रहा है हालांकि फिर भी सवाल उठ रहे हैँ कि क्या भूमाफिया जाहिर के साथ इलाके की अन्य संपत्तियों की खरीद फरोख्त में शामिल सफेदपोश भूमाफियाओं के विरुद्ध भी एफआईआर और कठोर कार्यवाही होगी कि नहीं? फिलहाल मंडी गेट कांड अब एक बड़ी आपराधिक श्रृंखला का रूप लेता दिख रहा है। तीन दिन के भीतर तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज होने से साफ है कि मामला सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन कब्जा, पैसों के विवाद और धमकियों से जुड़ा है। दर्ज मुकदमों के अनुसार, आरोपियों पर जमीन बेचने का दबाव बनाने, 11 लाख रुपये के लेनदेन में धोखाधड़ी व मारपीट, अवैध हथियार से धमकी देने, जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इन मामलों में जाहिर, हारिश और उनके साथियों के नाम सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार भूमाफिया जाहिर की दहशत उसकी फरारी के बाद कहीं न कहीं कम हुई तभी पहले से पीड़ितगण बढ़ बढ़कर पुलिस के सामने अपना मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगा रहे हैँ आखिर इसीलिए मुख्य आरोपियों पर चौथे मुकदमे की भी तैयारी चल रही है जिसकी तहरीर कोतवाली पहुंचने के सूत्र मिल रहे हैँ। जानकारी मिली है कि एसपी के निर्देशन में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। प्रभारी निरीक्षक अरविन्द कुमार राय ने कहा कि “जल्द गिरफ्तारी होगी” “किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा”
- शाहाबाद (हरदोई) मंडी गेट पर रविवार को हुआ हमला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता संरक्षण, प्रशासनिक शिथिलता और दबे हुए खौफ की कहानी बन गया है, इसीलिए सवाल कि सोमवार क्यों कोई दुकानदार अपनी दुकान खोलने नहीं आया, यद्वपि अपर पुलिस अधीक्षक शाहाबाद आलोक राज नारायण ने व्यापरियों को बहुत समझाया परन्तु व्यापारियों को उनके ऊपर भरोसा नहीं रहा क्योंकि पुलिस के सामने दबंगों का सरदार जाहिर घटना के बाद दुस्साहसपूर्ण ढंग से घटनास्थल पर लौटा और फिर घटना के बाद से हालात यह हैं कि पुलिस की कड़ी तैनाती के बावजूद मंडी के निकट का पूरा बाजार सहमा हुआ है। सामने से सब सामान्य दिखाने की कोशिश जरूर हो रही है, लेकिन अंदरूनी सच कुछ और ही बयां कर रहा है। हालांकि मंगलवार को सिर्फ दो दुकानदारों ने दुकानें खोलीं हैँ। आरोपियों पर अब भी सत्ता संरक्षण के आरोप हैँ, पुलिस तैनाती के बावजूद 18 दुकानें बंद होने से तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैँ और एसडीएम की चुप्पी पर भी सवाल उठे हैँ। पुलिस तैनात… फिर भी बाजार बंद शाहाबाद (हरदोई) सूत्रों के मुताबिक, डकैती जैसी घटना के बाद से मंडी गेट के पास की करीब 18 दुकानें पूरी तरह बंद हैं। सोमवार को एक भी दुकान नहीं खुली। मंगलवार को पुलिस के कहने पर सिर्फ 2 दुकानदारों ने बमुश्किल शटर उठाया, बाकी दुकानदार अब भी नदारद हैं। यानी पुलिस मौजूद है, लेकिन भरोसा गायब है। व्यापारियों में डर कर गया घर शाहाबाद (हरदोई) स्थानीय व्यापारी खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। बाहर से माहौल सामान्य दिखाने की कोशिश हो रही है, लेकिन अंदर और डर साफ महसूस किया जा सकता है। यह वही बाजार है, जहां रविवार को सुबह 11 बजे दिनदहाड़े हमला हुआ और आरोपी खुलेआम लौटकर चले गए लेकिन वह पुलिस की मौजूदगी में पुनः आए और व्यापारियों को धमकाकर चले गए लेकिन पीड़ित व्यापारियों ने पुनः तहरीर नहीं दी क्योंकि अंदर ही अंदर आरोपियों के पैरवकार समझौते का दबाव बना रहे हैँ जिसमें प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है अन्यथा अब आरोपियों की गिरफ्तारी हो जाती और सभी दुकानें खुल जातीं। आरोपी कई बार “आए, भिड़े, और चले भी गए” शाहाबाद (हरदोई) घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यही है कि हमलावर घटना के बाद दोबारा लौटे, पुलिस बल की मौजूदगी में दुकानदारों से भिड़े और फिर उसी अंदाज में चले गए। तभी सवाल उठे कि अगर प्रशासन सक्रिय होता तो क्या यह संभव था? प्रशासन, सत्ता और भूमाफिया कनेक्शन की चर्चा तेज शाहाबाद (हरदोई) स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हैं कि क्षेत्र में भूमाफियाओं के हौसले बढ़े हुए हैं। कुछ प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों का संरक्षण उन्हें मिला हुआ है। लोग खुलकर तो नहीं बोल रहे, लेकिन इशारे बहुत कुछ कह रहे हैं। “समझदारों के लिए इशारा ही काफी” वाली स्थिति यहां साफ नजर आ रही है। अफसरों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल शाहाबाद (हरदोई) मौके पर आईपीएस अधिकारी, क्षेत्राधिकारी स्तर के स्थानीय अफसर एएसपी आलोक राज नारायण ने प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण अधिकारी के तौर पर औपचारिकता निभाई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल बनी एसडीएम शाहाबाद की चुप्पी क्योंकि उनके आवास की दूरी घटनास्थल से महज कुछ कदम की है, फिर भी वे तीसरे दिन की शाम तक मौके पर नहीं पहुंचे। यह न सिर्फ लापरवाही, बल्कि उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। “चाक-चौबंद सुरक्षा” या “डर का पहरा”? शाहाबाद (हरदोई) रविवार से मंगलवार तक विवादित स्थल पर पुलिस की भारी तैनाती है। प्रशासन इसे सुरक्षा बता रहा है, लेकिन यह सुरक्षा ही आरोपियों के खौफनाक मंजर की बानगी है! इसीलिए अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद बाजार क्यों बंद है? क्या दुकानदारों पर दबाव है? हमलावर दोबारा लौटे, यह किसकी विफलता है? एसडीएम मौके पर क्यों नहीं पहुंचे? क्या भूमाफिया और सत्ता के गठजोड़ ने सिस्टम को कमजोर कर दिया है? कुल मिलाकर खामोश बाजार, बहुत कुछ बोल रहा है।शाहाबाद का यह बंद बाजार सिर्फ दुकानें नहीं, बल्कि व्यापारियों का टूटा भरोसा दिखा रहा है और व्यापार मंडल की डांवाडोल स्तिथि का नतीजा है! अगर पुलिस तैनात होने के बाद भी लोग दुकान खोलने से दुकानदार डर रहे हैं तो सवाल उठते हैँ। और लोग कहते हैँ कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी की कहानी है। 3 दिन में 3 मुकदमे दर्ज, चौथे की तैयारी शाहाबाद (हरदोई) जमीन, पैसा और दबंगई के सत्ता से जुड़े तार, फिर भी एसपी हरदोई की शख्ती से सत्ताई नेताओं की पैरवी हो रही बेकार और पुलिस की तेज होती कार्रवाई बता रही है कि फिलहाल इस एक ग्रुप के संगठित भूमाफियाओं पर शिकंजा कसता जा रहा है हालांकि फिर भी सवाल उठ रहे हैँ कि क्या भूमाफिया जाहिर के साथ इलाके की अन्य संपत्तियों की खरीद फरोख्त में शामिल सफेदपोश भूमाफियाओं के विरुद्ध भी एफआईआर और कठोर कार्यवाही होगी कि नहीं? फिलहाल मंडी गेट कांड अब एक बड़ी आपराधिक श्रृंखला का रूप लेता दिख रहा है। तीन दिन के भीतर तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज होने से साफ है कि मामला सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन कब्जा, पैसों के विवाद और धमकियों से जुड़ा है। दर्ज मुकदमों के अनुसार, आरोपियों पर जमीन बेचने का दबाव बनाने, 11 लाख रुपये के लेनदेन में धोखाधड़ी व मारपीट, अवैध हथियार से धमकी देने, जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इन मामलों में जाहिर, हारिश और उनके साथियों के नाम सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार भूमाफिया जाहिर की दहशत उसकी फरारी के बाद कहीं न कहीं कम हुई तभी पहले से पीड़ितगण बढ़ बढ़कर पुलिस के सामने अपना मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगा रहे हैँ आखिर इसीलिए मुख्य आरोपियों पर चौथे मुकदमे की भी तैयारी चल रही है जिसकी तहरीर कोतवाली पहुंचने के सूत्र मिल रहे हैँ। जानकारी मिली है कि एसपी के निर्देशन में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। प्रभारी निरीक्षक अरविन्द कुमार राय ने कहा कि “जल्द गिरफ्तारी होगी” “किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा”4
- क्यों खोदनी पड़ी उज्जवल की कब्र? हरदोई से झकझोर देने वाली खबर........सुकून की नींद भी नसीब न हुई,हरदोई में कानूनी कागजों के लिए कब्र से निकाला गया किशोर का शव,मिट्टी देने के बाद फिर उठानी पड़ी मिट्टी एक बदनसीब पिता की आखिरी उम्मीद........ #Hardoi #HardoiNews #UPNews #BreakingNews #JusticeForUjjwal #EmotionalStory #SocialJustice #HardoiPolice #Humanity #SadNews #PostMortem #AdministrativeAction #ViralNews #GroundReport #Pihani #UjjwalHardoi #Cemetery #PihaniPolice #Justice #System1
- पिहानी (हरदोई): प्रदेश में जहां एक ओर सरकार स्वच्छता और धार्मिक स्थलों के विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं कस्बा पिहानी के एकमात्र प्राचीन भूरेश्वर शिव मंदिर में हालात इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर गंदे पानी का जलभराव और कीचड़ ने श्रद्धालुओं की आस्था के मार्ग को कठिन बना दिया है। मंदिर में दर्शन करने आने वाले सैकड़ों भक्तों को रोजाना कीचड़ और गंदगी से होकर गुजरना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि भगवान भोलेनाथ का दरबार खुद उपेक्षा का शिकार नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नगर पालिका प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान का असर केवल कागजों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। क्या बोले स्थानीय लोग “जब भोले बाबा ही कीचड़ में फंसे हैं, तो आम आदमी की क्या बिसात। नगर पालिका पूरी तरह लापरवाह बनी हुई है।” — एक स्थानीय श्रद्धालु “स्वच्छता अभियान सिर्फ कागजों पर दौड़ रहा है, जमीनी स्तर पर कहीं कोई व्यवस्था नजर नहीं आती।” — व्यापारी वर्ग ----- प्रशासन से मांग: श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों ने तत्काल जल निकासी, सफाई व्यवस्था और मार्ग सुधार की मांग की है, ताकि आस्था के केंद्र को सम्मानजनक स्थिति मिल सके। --- अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कब ध्यान देते हैं और ‘भोले बाबा’ को इस बदहाल स्थिति से कब राहत मिलती है।1
- हरदोई: उत्तर प्रदेश शासन के महत्वाकांक्षी और दूरगामी अभियान 'मिशन शक्ति' के पांचवें चरण (मिशन शक्ति 5.0) के अंतर्गत, हरदोई जिले के अल्लीपुर स्थित वृद्धाश्रम में एक वृहद, ज्ञानवर्धक और प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम नारी सुरक्षा, नारी सम्मान और नारी स्वावलंबन के मूल मंत्र को समाज के हर तबके तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम ने समाज के उस संवेदनशील वर्ग को भी मुख्यधारा के विमर्श से जोड़ा, जो अक्सर नेपथ्य में रह जाता है—हमारे वयोवृद्ध नागरिक। यह गरिमामयी आयोजन विशेष रूप से उस वृद्धाश्रम में संपन्न हुआ, जिसका कुशल संचालन 'सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान' द्वारा किया जा रहा है। ज्ञात हो कि समाज सेवा, शिक्षा और विशेषकर बेसहारा वृद्धजनों के कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट और अनुकरणीय योगदान के लिए इस संस्थान को भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा 'वयोश्रेष्ठ सम्मान' (राष्ट्रीय पुरस्कार) से अलंकृत किया जा चुका है। अल्लीपुर स्थित यह वृद्धाश्रम उत्तर प्रदेश शासन के 'समाज कल्याण विभाग' द्वारा पूरी तरह से प्रायोजित है। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि शासन और प्रशासन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति और बेसहारा वृद्धजनों के प्रति कितनी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। नारी शक्ति और स्वावलंबन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरदोई की उप जिलाधिकारी (SDM) श्रीमती अरुणिमा श्रीवास्तव ने शिरकत की। अपने सारगर्भित, ओजस्वी और ऊर्जावान उद्बोधन में एसडीएम श्रीमती अरुणिमा श्रीवास्तव ने 'मिशन शक्ति 5.0' के व्यापक उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक सशक्त, सभ्य और विकसित समाज की कल्पना तब तक नहीं की जा सकती, जब तक उस समाज की महिलाएं पूरी तरह से सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर न हों।उन्होंने उपस्थित मातृशक्ति और वृद्धजनों को संबोधित करते हुए कहा कि 'मिशन शक्ति' केवल एक सरकारी अभियान नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक क्रांति है। इसका उद्देश्य महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास जगाना और उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, महिला हेल्पलाइन नंबरों (जैसे 1090- वीमेन पावर लाइन, 112- आपातकालीन सेवा, 181- महिला हेल्पलाइन, और 1076- मुख्यमंत्री हेल्पलाइन) की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया। उन्होंने यह भी जोर दिया कि वृद्ध माताओं का सम्मान करना हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है और प्रशासन उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर है। साइबर अपराधों से बचाव की अनिवार्यता कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं हरदोई की क्षेत्राधिकारी (CO) श्रीमती प्रभा पटेल ने वर्तमान परिदृश्य की सबसे बड़ी चुनौती—डिजिटल और साइबर अपराध पर अपना अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। वर्तमान युग में तेजी से बढ़ रहे तकनीकी अपराधों को ध्यान में रखते हुए, सीओ श्रीमती प्रभा पटेल ने श्रोताओं को साइबर ठगों के नए-नए तरीकों से अवगत कराया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को आगाह किया कि आज के समय में अपराधी इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के माध्यम से किस प्रकार आम जनता, विशेषकर महिलाओं और वृद्धजनों को अपना शिकार बना रहे हैं। उन्होंने बैंक फ्रॉड, एटीएम कार्ड क्लोनिंग, अनजान नंबरों से आने वाली फर्जी कॉल, लॉटरी या इनाम का लालच देने वाले मैसेज और ओटीपी (OTP) शेयरिंग के गंभीर खतरों के प्रति लोगों को सतर्क किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि बैंक या पुलिस कभी भी फोन पर आपसे आपका पासवर्ड, पिन या ओटीपी नहीं मांगती। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी व्यक्तिगत या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें। उन्होंने सभी को जागरूक करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराने के बजाय तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उनकी इस जानकारी से वहां उपस्थित वृद्धजनों, आश्रम के कर्मचारियों और स्थानीय महिलाओं को काफी राहत और नई तकनीकी सीख मिली। स्थानीय पुलिस का सहयोग कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में कोतवाली देहात क्षेत्र की उप निरीक्षक (SI) सुश्री डोली शर्मा भी उपस्थित रहीं। उन्होंने स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से महिलाओं और वृद्धजनों को यह दृढ़ विश्वास दिलाया कि 'मिशन शक्ति' के तहत पुलिस प्रशासन की कार्यशैली में व्यापक बदलाव आया है। अब थानों में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है जहाँ महिलाएं बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के अन्याय, घरेलू हिंसा या उत्पीड़न को चुपचाप न सहें, बल्कि निडर होकर पुलिस से संपर्क करें। देहात कोतवाली पुलिस उनकी सुरक्षा और न्याय के लिए 24 घंटे. तत्पर है। कुशल मंच संचालन इस पूरे गरिमामयी और विस्तृत कार्यक्रम का अत्यंत कुशल और प्रभावी संचालन सुश्री पारुल गुप्ता द्वारा किया गया। आभार ज्ञापन एवं समापन कार्यक्रम के अंतिम चरण में वृद्धाश्रम की प्रबंधक पूजा शर्मा ने सभी मंचासीन अतिथियों और उपस्थित जनसमूह का हृदय से आभार ज्ञापित किया। अपने धन्यवाद ज्ञापन में उन्होंने कहा कि प्रशासन के इतने वरिष्ठ और व्यस्त अधिकारियों (SDM और CO महोदया) का अपना बहुमूल्य समय निकालकर वृद्धाश्रम में आना और 'मिशन शक्ति' एवं साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सीधा संवाद करना, यहाँ निवासरत वृद्ध माताओं और पिताओं के लिए एक बहुत बड़ा संबल और सम्मान की बात है। उन्होंने 'समाज कल्याण विभाग' और 'सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान' के प्रति भी अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की, जिनके निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से यह आश्रम बेसहारा वृद्धजनों के लिए मात्र एक ईंट-पत्थर का भवन न रहकर एक सुरक्षित, संस्कारवान और सुखद 'घर' बना हुआ है।इस अवसर पर वृद्धाश्रम के सभी संवासी (वृद्धजन), सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान के विभिन्न पदाधिकारी, कर्मचारीगण और स्थानीय संभ्रांत नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अत्यंत सफल, ज्ञानवर्धक और उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।4
- Post by SV भारत न्यूज़ संवाददाता रामबाबू1
- दिव्य दर्शन ✍️ सुधीर अवस्थी ‘परदेशी’ …………………………………..........… हरदोई जनपद के बघौली थाना क्षेत्र अंतर्गत सुन्नी गांव में स्थित प्राचीन महिषासुर मर्दिनी मंदिर में प्रातःकालीन भोले बाबा श्रृंगार दर्शन का अद्भुत एवं अलौकिक दृश्य।1
- शाहाबाद, हरदोई। जनपद हरदोई की तहसील शाहाबाद क्षेत्र के ग्राम पंचायत सरायरानक में स्थित सरकारी स्वास्थ्य उप केंद्र बदहाली और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। जहां एक ओर इस केंद्र का उद्देश्य ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, वहीं दूसरी ओर यहां की स्थिति पूरी तरह विपरीत नजर आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य उप केंद्र पर न तो नियमित रूप से डॉक्टर आते हैं और न ही मरीजों की कोई व्यवस्था दिखाई देती है। केंद्र परिसर में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के बजाय उपले (गोबर के कंडे) और भूसे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि इस सरकारी भवन का दुरुपयोग हो रहा है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्वास्थ्य केंद्र अब शराबियों और नशा करने वालों का अड्डा बन गया है। परिसर में गांजा और भांग जैसी नशीली घास आसानी से देखने को मिल जाती है, जिससे क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है और आमजन में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।1
- 👉हरदोई में दबंगई का तांडव—12 घंटे बाद बौखलाई पुलिस 👉उच्चस्तरीय अफसरों के संज्ञान लेने के बाद बैकफुट पर आए प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण अफसर 👉 इसीलिए अब बढ़ेंगी कथित भूमाफिया जाहिर की मुश्किलें हरदोई। शाहाबाद कोतवाली से महज 5 सौ मीटर की दूरी पर स्तिथि नवीन मंडी गेट के पास नेशनल हाइवे पर खुली 4 दुकानों पर दबंगई का ताबड़तोड़ तांडव तब अत्याधिक तूल पकड़ गया, जब कोतवाली में पीड़ित व्यापारियों द्वारा दी गई तहरीर के घंटों बाद भी बारिश के आसार देखकर जैसे ही दुकानदारों ने अपनी दुकानों का बाहर बिखरा पड़ा सामान अंदर रखना शुरू किया वैसे ही पुलिस की मौजूदगी के मध्य दबंगों ने दुकानदारों को जबरदस्ती सामान रखने से रोंक दिया, जिसमें ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों का भी सहयोग दबंगों की ओर से साफ दिखा और आईपीएस सीओ की चर्चा भी चली किन्तु कुछ देर बाद ही कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर माहौल को एक बार फिर मुट्ठी में लेने की कोशिश करते हुए पीड़ित व्यापारियों का सामान तेज बारिश के बीच उनकी दुकानों में रखवाया लेकिन हैरत यह कि पुलिस की मौजूदगी में भी मुख्य आरोप जाहिर और उसके भाई समेत उसके साथी अपनी फॉर्चूनर गाड़ी से मौके पर डटे रहे और कानून के मानकों का मजाक उड़ाते रहे। सवाल : तहरीर के बाद भी घटनास्थल पर भी लौटे हमलावर • पुलिस की मौजूदगी में धमकियां • बारिश में भीगा कीमती सामान 👉 बड़ा सवाल आखिर किसकी शह पर आरोपियों ने दिखाया इतना बड़ा दुस्साहस 👉 सबसे बड़ा सवाल कि सत्ताई नेता और प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण अफसर पर यदि कोई दबाब या प्रलोभन हावी नहीं था तो आखिर उसी वक़्त क्यों नहीं हुई आरोपियों की गिरफ्तारी? 👉 पुलिस के सामने मौजूद दबंगों को हिरासत में भी नहीं लिया गया —आखिर क्यों? 👉घटनास्थल से कुछ दूरी पर रहने बाले एसडीएम शाहाबाद ने आखिर क्यों नहीं पहुँचे और क्यों घटना को नजरन्दाज कर निकल गए? 👉 क्या कानून एवं व्यवस्था से और भूमाफियाओं की गतिविधियों से एसडीएम शाहाबाद का कोई वास्ता व सरोकार तथा उनकी डियूटी नहीं बनती? 👉 सवाल इससे भी बड़े और हैरतअंगेज खड़े हैं, जो अगली खबर में आएंगे सामने?4