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स्पेशल इन्वेस्टिगेशन : जशपुर में मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़; बिना डिग्री धड़ल्ले से चल रहा अवैध 'झोलाछाप' क्लीनिक... जशपुर। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन : जशपुर में मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़; बिना डिग्री धड़ल्ले से चल रहा अवैध 'झोलाछाप' क्लीनिक...। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक चौकसी की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। यहाँ ‘माँ भगवती मेडिकल स्टोर’ की आड़ में खुलेआम एक अवैध क्लीनिक का संचालन किया जा रहा था। बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के, मरीजों को इंजेक्शन लगाने से लेकर ड्रिप (सलाइन) चढ़ाने का काम धड़ल्ले से जारी था। ​स्थानीय पत्रकारों और जागरूक नागरिकों की जमीनी पड़ताल में इस पूरे काले कारोबार का भांडाफोड़ हुआ है। स्टिंग जैसी पड़ताल: 'विक्स' माँगने के बहाने घुसे, अंदर खुला सच : मामले की शुरुआत तब हुई जब पत्रकार की टीम सामान्य ग्राहक बनकर मेडिकल स्टोर पर पहुँची। शुरुआत में साधारण बातचीत के दौरान दुकान संचालक ने क्लीनिक या इलाज की बात से साफ इनकार कर दिया और दावा किया कि "यहाँ कोई डॉक्टर आते हैं जो इलाज करते हैं।" ​हालाँकि, जब पड़ताल करने वाली टीम ने दुकान के अंदरूनी हिस्से और डस्टबिन की जाँच की, तो सच्चाई सामने आ गई: बायो-मेडिकल कचरे का अंबार : डस्टबिन और रैक के पीछे भारी मात्रा में इस्तेमाल की गई सिरिंज (सुइयां), ग्लूकोज व सलाइन की खाली बोतलें, और इस्तेमाल किए गए कॉटन बरामद हुए। * इलाज के उपकरण : दुकान के भीतर एक टेबल पर बीपी मॉनिटर, कैंची और मरीजों को भर्ती कर ड्रिप लगाने का पूरा सेटअप मौजूद था। डिग्री माँगी तो खुली पोल: फार्मेसी की पढ़ाई पर चला रहे थे क्लीनिक - जब टीम ने दुकान संचालक से मरीजों को सुई लगाने, ड्रिप चढ़ाने और इलाज करने का लाइसेंस या योग्यता (MBBS/BAMS डिग्री) दिखाने को कहा, तो संचालक कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका। * स्वीकारोक्ति : संचालक ने केवल B.Pharma/D.Pharma (फार्मेसी) की पढ़ाई करने की बात स्वीकार की। * कानूनी स्थिति : भारतीय चिकित्सा परिषद (NMC) और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अनुसार, फार्मेसी की डिग्री केवल दवाइयाँ बेचने की अनुमति देती है; इसके आधार पर किसी मरीज को इंजेक्शन लगाना, भर्ती करना या क्लिनिकल इलाज करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और संज्ञेय अपराध है। बहस और भीड़ जुटाकर मामला दबाने का प्रयास - जब संचालक से किसी अधिकृत डॉक्टर का नाम, समय या रजिस्ट्रेशन नंबर पूछा गया, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। पोल खुलते ही संचालक ने फोन करके अपने परिचितों और आसपास के लोगों को मौके पर बुला लिया। ​देखते ही देखते दुकान के बाहर दर्जनों लोगों की भीड़ जमा हो गई। दबाव बनाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, लेकिन मौके पर मौजूद साक्ष्यों और वीडियो फुटेज ने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर दी। किन नियमों की उड़ रही हैं धज्जियाँ? - * ​छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम एक्ट: किसी भी स्थान पर मरीज को भर्ती करने या क्लिनिकल प्रक्रिया अपनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से पंजीयन अनिवार्य है। * ​ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट: बिना रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की पर्ची (Prescription) के गंभीर दवाइयाँ, एंटीबायोटिक्स और सलाइन देना प्रतिबंधित है। * ​बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स: प्रयुक्त सुइयों और बोतलों को खुले डस्टबिन में फेंकना संक्रामक बीमारियों (जैसे हेपेटाइटिस, एचआईवी) को न्योता देना है। ग्रामीणों का गुस्सा, CMHO और कलेक्टर से कड़ी कार्रवाई की माँग - ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच कम होने का फायदा उठाकर इस तरह के अवैध क्लीनिक ग्रामीणों की जेब काटने के साथ-साथ उनकी जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। किसी गलत इंजेक्शन या दवा के ओवरडोज से किसी मरीज की जान भी जा सकती है। ​नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मुख्य माँगें: > ​जशपुर CMHO (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) और ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त टीम तुरंत 'माँ भगवती मेडिकल स्टोर' पर छापा मारे। ​दुकान को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए और लाइसेंस रद्द हो। ​अवैध रूप से डॉक्टरी अभ्यास (Quackery) करने के जुर्म में संचालक के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।

2 hrs ago
user_RISHIKESH MISHRA
RISHIKESH MISHRA
Local News Reporter Raigarh, Chhattisgarh•
2 hrs ago

स्पेशल इन्वेस्टिगेशन : जशपुर में मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़; बिना डिग्री धड़ल्ले से चल रहा अवैध 'झोलाछाप' क्लीनिक... जशपुर। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन : जशपुर में मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़; बिना डिग्री धड़ल्ले से चल रहा अवैध 'झोलाछाप' क्लीनिक...। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक चौकसी की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। यहाँ ‘माँ भगवती मेडिकल स्टोर’ की आड़ में खुलेआम एक अवैध क्लीनिक का संचालन किया जा रहा था। बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के, मरीजों को इंजेक्शन लगाने से लेकर ड्रिप (सलाइन) चढ़ाने का काम धड़ल्ले से जारी था। ​स्थानीय पत्रकारों और जागरूक नागरिकों की जमीनी पड़ताल में इस पूरे काले कारोबार का भांडाफोड़ हुआ है। स्टिंग जैसी पड़ताल: 'विक्स' माँगने के बहाने घुसे, अंदर खुला सच : मामले की शुरुआत तब हुई जब पत्रकार की टीम सामान्य ग्राहक बनकर मेडिकल स्टोर पर पहुँची। शुरुआत में साधारण बातचीत के दौरान दुकान संचालक ने क्लीनिक या इलाज की बात से साफ इनकार कर दिया और दावा किया कि "यहाँ कोई डॉक्टर आते हैं जो इलाज करते हैं।" ​हालाँकि, जब पड़ताल करने वाली टीम ने दुकान के अंदरूनी हिस्से और डस्टबिन की जाँच की, तो सच्चाई सामने आ गई: बायो-मेडिकल कचरे का अंबार : डस्टबिन और रैक के पीछे

भारी मात्रा में इस्तेमाल की गई सिरिंज (सुइयां), ग्लूकोज व सलाइन की खाली बोतलें, और इस्तेमाल किए गए कॉटन बरामद हुए। * इलाज के उपकरण : दुकान के भीतर एक टेबल पर बीपी मॉनिटर, कैंची और मरीजों को भर्ती कर ड्रिप लगाने का पूरा सेटअप मौजूद था। डिग्री माँगी तो खुली पोल: फार्मेसी की पढ़ाई पर चला रहे थे क्लीनिक - जब टीम ने दुकान संचालक से मरीजों को सुई लगाने, ड्रिप चढ़ाने और इलाज करने का लाइसेंस या योग्यता (MBBS/BAMS डिग्री) दिखाने को कहा, तो संचालक कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका। * स्वीकारोक्ति : संचालक ने केवल B.Pharma/D.Pharma (फार्मेसी) की पढ़ाई करने की बात स्वीकार की। * कानूनी स्थिति : भारतीय चिकित्सा परिषद (NMC) और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अनुसार, फार्मेसी की डिग्री केवल दवाइयाँ बेचने की अनुमति देती है; इसके आधार पर किसी मरीज को इंजेक्शन लगाना, भर्ती करना या क्लिनिकल इलाज करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और संज्ञेय अपराध है। बहस और भीड़ जुटाकर मामला दबाने का प्रयास - जब संचालक से किसी अधिकृत डॉक्टर का नाम, समय या रजिस्ट्रेशन नंबर पूछा गया, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। पोल खुलते ही संचालक ने फोन करके अपने परिचितों और आसपास के लोगों को मौके पर बुला लिया। ​देखते ही देखते दुकान के बाहर दर्जनों लोगों की भीड़ जमा हो गई।

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दबाव बनाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, लेकिन मौके पर मौजूद साक्ष्यों और वीडियो फुटेज ने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर दी। किन नियमों की उड़ रही हैं धज्जियाँ? - * ​छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम एक्ट: किसी भी स्थान पर मरीज को भर्ती करने या क्लिनिकल प्रक्रिया अपनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से पंजीयन अनिवार्य है। * ​ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट: बिना रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की पर्ची (Prescription) के गंभीर दवाइयाँ, एंटीबायोटिक्स और सलाइन देना प्रतिबंधित है। * ​बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स: प्रयुक्त सुइयों और बोतलों को खुले डस्टबिन में फेंकना संक्रामक बीमारियों (जैसे हेपेटाइटिस, एचआईवी) को न्योता देना है। ग्रामीणों का गुस्सा, CMHO और कलेक्टर से कड़ी कार्रवाई की माँग - ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच कम होने का फायदा उठाकर इस तरह के अवैध क्लीनिक ग्रामीणों की जेब काटने के साथ-साथ उनकी जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। किसी गलत इंजेक्शन या दवा के ओवरडोज से किसी मरीज की जान भी जा सकती है। ​नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मुख्य माँगें: > ​जशपुर CMHO (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) और ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त टीम तुरंत 'माँ भगवती मेडिकल स्टोर' पर छापा मारे। ​दुकान को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए और लाइसेंस रद्द हो। ​अवैध रूप से डॉक्टरी अभ्यास (Quackery) करने के जुर्म में संचालक के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।

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    स्पेशल इन्वेस्टिगेशन : जशपुर में मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़; बिना डिग्री धड़ल्ले से चल रहा अवैध 'झोलाछाप' क्लीनिक...
जशपुर। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन : जशपुर में मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़; बिना डिग्री धड़ल्ले से चल रहा अवैध 'झोलाछाप' क्लीनिक...। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक चौकसी की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। यहाँ ‘माँ भगवती मेडिकल स्टोर’ की आड़ में खुलेआम एक अवैध क्लीनिक का संचालन किया जा रहा था। बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के, मरीजों को इंजेक्शन लगाने से लेकर ड्रिप (सलाइन) चढ़ाने का काम धड़ल्ले से जारी था।
​स्थानीय पत्रकारों और जागरूक नागरिकों की जमीनी पड़ताल में इस पूरे काले कारोबार का भांडाफोड़ हुआ है।
स्टिंग जैसी पड़ताल: 'विक्स' माँगने के बहाने घुसे, अंदर खुला सच : मामले की शुरुआत तब हुई जब पत्रकार की टीम सामान्य ग्राहक बनकर मेडिकल स्टोर पर पहुँची। शुरुआत में साधारण बातचीत के दौरान दुकान संचालक ने क्लीनिक या इलाज की बात से साफ इनकार कर दिया और दावा किया कि "यहाँ कोई डॉक्टर आते हैं जो इलाज करते हैं।"
​हालाँकि, जब पड़ताल करने वाली टीम ने दुकान के अंदरूनी हिस्से और डस्टबिन की जाँच की, तो सच्चाई सामने आ गई:
बायो-मेडिकल कचरे का अंबार : डस्टबिन और रैक के पीछे भारी मात्रा में इस्तेमाल की गई सिरिंज (सुइयां), ग्लूकोज व सलाइन की खाली बोतलें, और इस्तेमाल किए गए कॉटन बरामद हुए।
* इलाज के उपकरण : दुकान के भीतर एक टेबल पर बीपी मॉनिटर, कैंची और मरीजों को भर्ती कर ड्रिप लगाने का पूरा सेटअप मौजूद था।
डिग्री माँगी तो खुली पोल: फार्मेसी की पढ़ाई पर चला रहे थे क्लीनिक - जब टीम ने दुकान संचालक से मरीजों को सुई लगाने, ड्रिप चढ़ाने और इलाज करने का लाइसेंस या योग्यता (MBBS/BAMS डिग्री) दिखाने को कहा, तो संचालक कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
* स्वीकारोक्ति : संचालक ने केवल B.Pharma/D.Pharma (फार्मेसी) की पढ़ाई करने की बात स्वीकार की।
* कानूनी स्थिति : भारतीय चिकित्सा परिषद (NMC) और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के अनुसार, फार्मेसी की डिग्री केवल दवाइयाँ बेचने की अनुमति देती है; इसके आधार पर किसी मरीज को इंजेक्शन लगाना, भर्ती करना या क्लिनिकल इलाज करना पूरी तरह से गैर-कानूनी और संज्ञेय अपराध है।
बहस और भीड़ जुटाकर मामला दबाने का प्रयास - जब संचालक से किसी अधिकृत डॉक्टर का नाम, समय या रजिस्ट्रेशन नंबर पूछा गया, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। पोल खुलते ही संचालक ने फोन करके अपने परिचितों और आसपास के लोगों को मौके पर बुला लिया।
​देखते ही देखते दुकान के बाहर दर्जनों लोगों की भीड़ जमा हो गई। दबाव बनाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई, लेकिन मौके पर मौजूद साक्ष्यों और वीडियो फुटेज ने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर दी।
किन नियमों की उड़ रही हैं धज्जियाँ? -
* ​छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम एक्ट: किसी भी स्थान पर मरीज को भर्ती करने या क्लिनिकल प्रक्रिया अपनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से पंजीयन अनिवार्य है।
* ​ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट: बिना रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की पर्ची (Prescription) के गंभीर दवाइयाँ, एंटीबायोटिक्स और सलाइन देना प्रतिबंधित है।
* ​बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स: प्रयुक्त सुइयों और बोतलों को खुले डस्टबिन में फेंकना संक्रामक बीमारियों (जैसे हेपेटाइटिस, एचआईवी) को न्योता देना है।
ग्रामीणों का गुस्सा, CMHO और कलेक्टर से कड़ी कार्रवाई की माँग - ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच कम होने का फायदा उठाकर इस तरह के अवैध क्लीनिक ग्रामीणों की जेब काटने के साथ-साथ उनकी जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। किसी गलत इंजेक्शन या दवा के ओवरडोज से किसी मरीज की जान भी जा सकती है।
​नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मुख्य माँगें:
> ​जशपुर CMHO (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) और ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त टीम तुरंत 'माँ भगवती मेडिकल स्टोर' पर छापा मारे।
​दुकान को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए और लाइसेंस रद्द हो।
​अवैध रूप से डॉक्टरी अभ्यास (Quackery) करने के जुर्म में संचालक के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
    user_RISHIKESH MISHRA
    RISHIKESH MISHRA
    Local News Reporter Raigarh, Chhattisgarh•
    2 hrs ago
  • अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि 'हे अर्जुन ! यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था।' सिद्ध हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है। अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि 'हे अर्जुन ! यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था।' सिद्ध हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है।
    1
    अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि 'हे अर्जुन ! यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था।'

सिद्ध हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है।
अध्याय 11 श्लोक 47 में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि 'हे अर्जुन ! यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था।'
सिद्ध हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है।
    user_Akkena Chinababu
    Akkena Chinababu
    बरमकेला, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
    45 min ago
  • *✰अन्नपूर्णा मुहिम की शुरुआत कैसे हुई?✰* अवश्य देखिए पूरी वीडियो *SA NEWS* YouTube Channel पर *✰अन्नपूर्णा मुहिम की शुरुआत कैसे हुई?✰* अवश्य देखिए पूरी वीडियो *SA NEWS* YouTube Channel पर
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    *✰अन्नपूर्णा मुहिम की शुरुआत कैसे हुई?✰*

अवश्य देखिए पूरी वीडियो *SA NEWS* YouTube Channel पर
*✰अन्नपूर्णा मुहिम की शुरुआत कैसे हुई?✰*
अवश्य देखिए पूरी वीडियो *SA NEWS* YouTube Channel पर
    user_Belalsen Das
    Belalsen Das
    बरमकेला, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • सांप के काटने से हुई पत्नी की मौत,मुआवजा दिलाने के बदले 50 हजार का चेक लेते दबोचा रायगढ़ कलेक्ट्रेट का बाबू।
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    सांप के काटने से हुई पत्नी की मौत,मुआवजा दिलाने के बदले 50 हजार का चेक लेते दबोचा रायगढ़ कलेक्ट्रेट का बाबू।
    user_Raigarh Chhattisgarh
    Raigarh Chhattisgarh
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • रायगढ़ में अंडरपास में भरा पानी,गिर रहे लोग नाले का पानी भरने से बार-बार हट रहा चेंबर का ढक्कन स्थायी समाधान नहीं।
    1
    रायगढ़ में अंडरपास में भरा पानी,गिर रहे लोग नाले का पानी भरने से बार-बार हट रहा चेंबर का ढक्कन स्थायी समाधान नहीं।
    user_Raigarh Chhattisgarh
    Raigarh Chhattisgarh
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
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