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Live Telecast of कन्हैया मित्तल, खाटूश्याम संकीर्तन यमुनानगर
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- ओपन स्कूल pathed पेज 21
- Post by Dharamvir Singh1
- Post by Rajkumar mehra press reporter1
- ICOPJournalist Janata ki Awaaz Vishal Sharma journalist ✍🏻 🙏🏻 अन्नदाता के आंसुओं की दास्तां – 'जट दी जून बुरी, तड़प-तड़प मर जाना' कुरुक्षेत्र/हरियाणा: आज जब आसमान में काले बादल घिरते हैं, तो शहर में रहने वालों को सुहाना मौसम नजर आता है, लेकिन खेत में खड़े उस किसान की रूह कांप जाती है जिसकी साल भर की मेहनत कनक (गेहूं) की शक्ल में कटने को तैयार खड़ी है। हरियाणा के खेतों से आज खुशी की महक नहीं, बल्कि एक अनकहे डर की गूँज सुनाई दे रही है। कुदरत की मार और अनिश्चितता का साया एक तरफ फसल की कटाई शुरू हो चुकी है, तो दूसरी तरफ कुदरत अपना कहर बरसाने को बेताब दिखती है। किसान की नजरें बार-बार आसमान की तरफ उठती हैं—ऊपर काले बादलों का साया है और नीचे जेब खाली है। ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने पहले ही फसल को काफी हद तक तबाह कर दिया है। अब किसान इस कशमकश में है कि जो बचा-कुचा अनाज है, उसे समेटे या अपनी किस्मत को रोए? मंडियों का हाल और कर्ज का बोझ किसान की दास्तां सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है। फसल कटने के बाद असली परीक्षा मंडियों में शुरू होती है। वहां जाने के बाद फसल की सही कीमत मिलेगी या नहीं, सरकारी खरीद समय पर होगी या नहीं, और क्या पैसा वक्त पर खाते में आएगा? ये वो सवाल हैं जो किसान को रात भर सोने नहीं देते। किसान आज एक भयावह गणित के बीच फंसा है: आढ़ती का कर्ज: जिससे खाद और बीज के लिए पैसा लिया था। कंबाइन का किराया: फसल काटने वाली मशीन के पैसे कहाँ से आएंगे? घर की जरूरतें: क्या बच्चों की पढ़ाई और घर का राशन इस बार नसीब होगा? दर्द भरी दास्तां: जट दी जून बुरी... हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि किसान यह सोचने पर मजबूर है कि वह घर क्या लेकर जाएगा? क्या वह सिर्फ खाली हाथ और कर्ज की पोटली लेकर लौटेगा? बुजुर्गों की कही वो बात आज हकीकत बनकर सीने में चुभती है कि— 'जट दी जून बुरी, तड़प-तड़प मर जाना'। यह सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि आज के अन्नदाता की वह कड़वी सच्चाई है जो समाज के हर संवेदनशील व्यक्ति को रोने पर मजबूर कर देती है। सरकार से गुहार क्या व्यवस्था को किसान की सिसकियां सुनाई देंगी? क्या सरकार समय रहते कनक की खरीद सुनिश्चित करेगी और किसानों को तत्काल राहत राशि प्रदान करेगी? आज देश का पेट भरने वाला खुद खाली पेट आसमान की ओर देख रहा है। यदि वक्त रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह सोना उगलने वाली मिट्टी किसान की उम्मीदों की कब्रगाह बन जाएगी। प्रस्तुति: विशाल शर्मा फ्रीलांस जर्नलिस्ट व शोधकर्ता2
- Post by Anoopshukla1
- 🔥 देहरादून में बड़ा हादसा! कांरगी मुस्लिम बस्ती में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब असम के निवासियों की झुग्गियों में अचानक भीषण आग लग गई। बिना सत्यापन के रह रहे लोगों की बस्ती चंद मिनटों में आग की चपेट में आ गई। 🚒 मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम 😱 स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल1
- Post by HR02 City News1
- Post by Anoopshukla1
- Post by Rajkumar mehra press reporter1