रावी नदी में बाढ़ आपदा को लेकर चंबा में मेगा मॉक ड्रिल, राहत एवं बचाव कार्यों का हुआ बड़ा पूर्वाभ्यास 📍 चंबा | 28 अप्रैल जिला चंबा में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, राष्ट्रीय जल विद्युत निगम की विद्युत परियोजना-2 एवं 3 के संयुक्त तत्वावधान में एक मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल में भारी बारिश और बादल फटने के चलते रावी नदी में अचानक आई बाढ़ तथा एनएच-154ए पर भूस्खलन की काल्पनिक स्थिति को आधार बनाया गया। इसके साथ ही रजेरा स्थित पावर स्टेशन में नुकसान और चमेरा-2 परियोजना में शॉर्ट सर्किट से आग लगने जैसी संभावित आपदाओं को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों का पूर्वाभ्यास किया गया। सुबह 10 बजे सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों द्वारा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को अलर्ट किया गया। इसके बाद सीआईएसएफ, एनडीआरएफ, अग्निशमन, होमगार्ड, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस सहित विभिन्न एजेंसियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। करियां हेलीपैड को स्टेजिंग एरिया बनाकर रजेरा और चमेरा-2 क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव दलों ने तेज बहाव के बीच निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत समन्वित कार्यवाही का प्रदर्शन किया। इस दौरान महाप्रबंधक पंकज कुमार सिंह, परियोजना प्रमुख अजय श्रीवास्तव, टीकेश्वर प्रसाद, कार्यकारी निरीक्षक अमर उज्जेयन और होमगार्ड कंपनी कमांडेंट मानसिंह ठाकुर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह मॉक ड्रिल आपदा के समय विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखने का एक महत्वपूर्ण अभ्यास साबित हुई।
रावी नदी में बाढ़ आपदा को लेकर चंबा में मेगा मॉक ड्रिल, राहत एवं बचाव कार्यों का हुआ बड़ा पूर्वाभ्यास 📍 चंबा | 28 अप्रैल जिला चंबा में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, राष्ट्रीय जल विद्युत निगम की विद्युत परियोजना-2 एवं 3 के संयुक्त तत्वावधान में एक मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल में भारी बारिश और बादल फटने के चलते रावी नदी में अचानक आई बाढ़ तथा एनएच-154ए पर भूस्खलन की काल्पनिक स्थिति को आधार बनाया गया। इसके साथ ही रजेरा स्थित पावर स्टेशन में नुकसान और चमेरा-2 परियोजना में शॉर्ट सर्किट से आग लगने जैसी संभावित आपदाओं को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों का पूर्वाभ्यास किया गया। सुबह 10 बजे सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों द्वारा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को अलर्ट किया गया। इसके बाद सीआईएसएफ, एनडीआरएफ, अग्निशमन, होमगार्ड, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस सहित विभिन्न एजेंसियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। करियां हेलीपैड को स्टेजिंग एरिया बनाकर रजेरा और चमेरा-2 क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव दलों ने तेज बहाव के बीच निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत समन्वित कार्यवाही का प्रदर्शन किया। इस दौरान महाप्रबंधक पंकज कुमार सिंह, परियोजना प्रमुख अजय श्रीवास्तव, टीकेश्वर प्रसाद, कार्यकारी निरीक्षक अमर उज्जेयन और होमगार्ड कंपनी कमांडेंट मानसिंह ठाकुर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह मॉक ड्रिल आपदा के समय विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखने का एक महत्वपूर्ण अभ्यास साबित हुई।
- Post by Surender Thakur1
- पांगी घाटी के कुलाल गांव से शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां करोड़ों रुपये खर्च कर राजकीय माध्यमिक पाठशाला का भवन तो तैयार किया जा रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि स्कूल में पढ़ाने के लिए पर्याप्त अध्यापक ही मौजूद नहीं हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि एकमात्र शास्त्री के सहारे स्कूल चलाने की कोशिश नाकाम साबित हो रही है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार प्रशासन और सरकार से अध्यापकों की नियुक्ति की मांग की गई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। शुरुआत में अच्छी संख्या में बच्चों ने इस स्कूल में प्रवेश लिया था, लेकिन लगातार अध्यापकों की कमी के चलते अभिभावकों ने अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया। अब हालात यह हैं कि स्कूल का आंगन पूरी तरह सूना हो चुका है और आखिरी बचा छात्र भी स्कूल छोड़ने को मजबूर हो गया है। कुलाल गांव के वार्ड पंच कोल सिंह के अनुसार, बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अभिभावकों को दूसरे स्थानों पर किराए के कमरे तक लेने पड़ रहे हैं। कुलाल से मिंधल की दूरी करीब 6 किलोमीटर है और गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है, जिससे बच्चों का रोजाना सफर बेहद जोखिम भरा बन जाता है। स्थानीय लोगों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुलाल जैसे दुर्गम गांवों की लगातार अनदेखी की जा रही है। जब स्कूल में स्टाफ ही उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे में स्कूल खोलने का क्या औचित्य रह जाता है? एक ओर सरकार शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है और ऑनलाइन संवाद के जरिए अपनी उपलब्धियां गिनाती है, वहीं जमीनी स्तर पर हकीकत बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाती है या फिर कुलाल के बच्चों का भविष्य यूं ही अधर में लटका रहेगा।1
- Post by Ram chand1
- गगल:-(28 अप्रैल 2026) मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू गगल (कांगड़ा) हवाई अड्डे पर पहुंचे थे, लेकिन खराब मौसम के कारण उन्हें अपना शिमला जाने का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। शिमला वापसी रद: खराब मौसम और दृश्यता (visibility) की कंशमी के चलते मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, जिसके कारण उन्हें धर्मशाला वापस लौटना पड़ा। राष्ट्रपति की अगवानी: इससे पहले, 27 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिमला में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भव्य स्वागत किया था, जो हिमाचल प्रदेश के पांच दिवसीय दौरे पर आई हैं। मुख्यमंत्री हाल ही में कांगड़ा जिले के दो दिवसीय दौरे पर आए थे, जहाँ उन्होंने ज्वालामुखजी और गगल क्षेत्र के लोगों से मुलाकात की थी। गगल हवाई अड्डे पर रुकने के दौरान उन्होंने एयरपोर्ट विस्तार से प्रभावित होने वाले परिवारों से भी मुलाकात की और उन्हें उचित मुआवजा व भूमि नियमित करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री वर्तमान में धर्मशाला में ही रुक सकते हैं जब तक मौसम में सुधार नहीं होता। 30 अप्रैल को राहुल गांधी के धर्मशाला दौरे के संबंध में एएसएल बैठक शाम 5:00 बजे गग्गल हवाई अड्डे पर कांगड़ा के वर्तमान उपायुक्त हेमराज बैरवा के नेतृत्व में संपन्न हुई। इस बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें राहुल गांधी के धर्मशाला दौरे की सुरक्षा के संबंध में विभिन्न पहलुओं पर बात करके हर एक विभाग को कड़े दिशानिर्देश दिए गए। गगल से तेजस्वी चौधरी की रिपोर्ट1
- Post by Rakesh Kumar4
- Post by Shivinder singh Bhadwal1
- बुधवार को दि जोगिंदर नगर उपमंडलीय सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ सीमित के अध्यक्ष पद के लिये चुनाव हुए। जिसमें 5 जोन से आए निदेशकों ने भाग लिया। निदेशक वर्ग में जगमोहन सिंह ठाकुर, मोहन सिंह ठाकुर, काहन सिंह ठाकुर, होशियार सिंह व भीम सिंह ठाकुर शामिल रहे। सर्व सम्मति से भीम सिंह ठाकुर को अध्यक्ष और काहन सिंह ठाकुर को उपाध्यक्ष चुना गया। भीम सिंह ठाकुर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस सोसाईटी को आगे बढ़ाने के लिये शीघ्र ही नई रूप रेखा तैयार होगी।1
- Post by Surender Thakur1