“शिक्षा सिस्टम का काला सच: करोड़ों का स्कूल, एक भी टीचर नहीं — पांगी के कुलाल में आखिरी छात्र ने भी छोड़ा साथ!” पांगी घाटी के कुलाल गांव से शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां करोड़ों रुपये खर्च कर राजकीय माध्यमिक पाठशाला का भवन तो तैयार किया जा रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि स्कूल में पढ़ाने के लिए पर्याप्त अध्यापक ही मौजूद नहीं हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि एकमात्र शास्त्री के सहारे स्कूल चलाने की कोशिश नाकाम साबित हो रही है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार प्रशासन और सरकार से अध्यापकों की नियुक्ति की मांग की गई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। शुरुआत में अच्छी संख्या में बच्चों ने इस स्कूल में प्रवेश लिया था, लेकिन लगातार अध्यापकों की कमी के चलते अभिभावकों ने अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया। अब हालात यह हैं कि स्कूल का आंगन पूरी तरह सूना हो चुका है और आखिरी बचा छात्र भी स्कूल छोड़ने को मजबूर हो गया है। कुलाल गांव के वार्ड पंच कोल सिंह के अनुसार, बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अभिभावकों को दूसरे स्थानों पर किराए के कमरे तक लेने पड़ रहे हैं। कुलाल से मिंधल की दूरी करीब 6 किलोमीटर है और गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है, जिससे बच्चों का रोजाना सफर बेहद जोखिम भरा बन जाता है। स्थानीय लोगों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुलाल जैसे दुर्गम गांवों की लगातार अनदेखी की जा रही है। जब स्कूल में स्टाफ ही उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे में स्कूल खोलने का क्या औचित्य रह जाता है? एक ओर सरकार शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है और ऑनलाइन संवाद के जरिए अपनी उपलब्धियां गिनाती है, वहीं जमीनी स्तर पर हकीकत बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाती है या फिर कुलाल के बच्चों का भविष्य यूं ही अधर में लटका रहेगा।
“शिक्षा सिस्टम का काला सच: करोड़ों का स्कूल, एक भी टीचर नहीं — पांगी के कुलाल में आखिरी छात्र ने भी छोड़ा साथ!” पांगी घाटी के कुलाल गांव से शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां करोड़ों रुपये खर्च कर राजकीय माध्यमिक पाठशाला का भवन तो तैयार किया जा रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि स्कूल में पढ़ाने के लिए पर्याप्त अध्यापक ही मौजूद नहीं हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि एकमात्र शास्त्री के सहारे स्कूल चलाने की कोशिश नाकाम साबित हो रही है। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार प्रशासन और सरकार से अध्यापकों की नियुक्ति की मांग की गई, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। शुरुआत में अच्छी संख्या में बच्चों ने इस स्कूल में प्रवेश लिया था, लेकिन लगातार अध्यापकों की कमी के चलते अभिभावकों ने अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में भेजना शुरू कर दिया। अब हालात यह हैं कि स्कूल का आंगन पूरी तरह सूना हो चुका है और आखिरी बचा छात्र भी स्कूल छोड़ने को मजबूर हो गया है। कुलाल गांव के वार्ड पंच कोल सिंह के अनुसार, बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अभिभावकों को दूसरे स्थानों पर किराए के कमरे तक लेने पड़ रहे हैं। कुलाल से मिंधल की दूरी करीब 6 किलोमीटर है और गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है, जिससे बच्चों का रोजाना सफर बेहद जोखिम भरा बन जाता है। स्थानीय लोगों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुलाल जैसे दुर्गम गांवों की लगातार अनदेखी की जा रही है। जब स्कूल में स्टाफ ही उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे में स्कूल खोलने का क्या औचित्य रह जाता है? एक ओर सरकार शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है और ऑनलाइन संवाद के जरिए अपनी उपलब्धियां गिनाती है, वहीं जमीनी स्तर पर हकीकत बिल्कुल उलट नजर आ रही है। यह मामला सिर्फ एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाती है या फिर कुलाल के बच्चों का भविष्य यूं ही अधर में लटका रहेगा।
- 📍 चंबा | 28 अप्रैल जिला चंबा में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, राष्ट्रीय जल विद्युत निगम की विद्युत परियोजना-2 एवं 3 के संयुक्त तत्वावधान में एक मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस मॉक ड्रिल में भारी बारिश और बादल फटने के चलते रावी नदी में अचानक आई बाढ़ तथा एनएच-154ए पर भूस्खलन की काल्पनिक स्थिति को आधार बनाया गया। इसके साथ ही रजेरा स्थित पावर स्टेशन में नुकसान और चमेरा-2 परियोजना में शॉर्ट सर्किट से आग लगने जैसी संभावित आपदाओं को ध्यान में रखते हुए बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों का पूर्वाभ्यास किया गया। सुबह 10 बजे सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों द्वारा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को अलर्ट किया गया। इसके बाद सीआईएसएफ, एनडीआरएफ, अग्निशमन, होमगार्ड, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस सहित विभिन्न एजेंसियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। करियां हेलीपैड को स्टेजिंग एरिया बनाकर रजेरा और चमेरा-2 क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बचाव दलों ने तेज बहाव के बीच निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत समन्वित कार्यवाही का प्रदर्शन किया। इस दौरान महाप्रबंधक पंकज कुमार सिंह, परियोजना प्रमुख अजय श्रीवास्तव, टीकेश्वर प्रसाद, कार्यकारी निरीक्षक अमर उज्जेयन और होमगार्ड कंपनी कमांडेंट मानसिंह ठाकुर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह मॉक ड्रिल आपदा के समय विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखने का एक महत्वपूर्ण अभ्यास साबित हुई।1
- Post by Shivinder singh Bhadwal1
- Post by Munishkoundal1
- सुजानपुर भाजपा प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता राजिंदर राणा व प्रदेश प्रवक्ता व विधायक आशीष शर्मा पर ऊँगली उठाने से पहले आपने गिरेवान पर झाँक कर देखे कुलदीप सिंह पठानिया उनके चेयरमैन रहते जो भरष्टाचार हुआ था तब KCCB के इतिहास में BOD ही भग हुई यें हिमाचल के लिएशर्मनाक था ऐसा क्या हुआ था जनता को बताये कुलदीप सिंह पठानिया किन-किन राजनीतीक लोगों को फायदा दिया गया kccb से.1
- Post by Till The End News1
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- Post by Munishkoundal1
- Post by Till The End News1
- सुजानपुर जयसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र से एक अनजान व्यक्ति का फोन आया, जिसने बातचीत की शुरुआत ही बड़े अपनत्व से की। उसने कहा—“मैं आपका बहुत बड़ा फैन हूँ।” बातचीत के दौरान उसने विधायक कैप्टन रणजीत सिंह के कार्यों की खुलकर सराहना की।उसने बताया कि क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य, जनता के प्रति उनकी संवेदनशीलता और हर समय उपलब्ध रहने की उनकी आदत ने उसे काफी प्रभावित किया है। ऐसे ही स्नेह और विश्वास ही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं, जो यह दिखाते हैं कि उनके काम लोगों के दिल तक पहुंच रहे हैं।1