रूपवास उपखंड कार्यालय के बाहर कुशवाहा आरक्षण संघर्ष समिति का दो दिवसीय धरना विधायक डॉ. ऋतु बनावत के ठोस आश्वासन के बाद शुक्रवार शाम को स्थगित कर दिया गया। विधायक के हस्तक्षेप से यह मामला सुलझा, जबकि इससे पहले प्रशासन के साथ हुई दो दौर की वार्ता विफल रही थी। प्रदेश कुशवाह आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों महिला-पुरुष गुरुवार से धरने पर बैठे थे। उनकी मुख्य मांगें 12 प्रतिशत आरक्षण, लव-कुश छात्रावास के लिए भूमि आवंटन और अंबेडकर पार्क के लिए जमीन उपलब्ध कराना थीं। गुरुवार को प्रशासन की ओर से कोई पहल न होने के कारण शुक्रवार को भी धरना जारी रहा। धरना लंबा खिंचता देख उपखंड अधिकारी विष्णु बंसल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीराम कुमावत और वृताधिकारी नीरज भारद्वाज ने संघर्ष समिति को वार्ता के लिए बुलाया। उपखंड कार्यालय में सुबह शुरू हुई पहली दौर की बातचीत आधे घंटे बाद किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, और दोपहर 2:30 बजे निर्धारित दूसरा दौर भी बेनतीजा रहा, जिससे आंदोलन और तेज होने की आशंका बन गई थी। शाम को विधायक डॉ. ऋतु बनावत धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगें विस्तार से सुनीं और उपखंड अधिकारी विष्णु बंसल से चर्चा की। इसके बाद समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर समाधान निकालने का प्रयास किया। विधायक ने मौके से ही संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया, समाज कल्याण विभाग के निदेशक और संबंधित मंत्री से फोन पर बात की। अधिकारियों द्वारा बताए गए नियमों के आधार पर विधायक ने आश्वासन दिया कि वह स्वयं मंत्री से मिलकर लव-कुश छात्रावास के लिए भूमि आवंटन का मामला उठाएंगी। साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि भूमि आवंटित होने पर विधायक निधि से छात्रावास के निर्माण के लिए 30 लाख रुपये दिए जाएंगे। विधायक के इस ठोस आश्वासन के बाद संघर्ष समिति ने धरना स्थगित करने का निर्णय लिया। इस दौरान संघर्ष समिति के संयोजक वासुदेव कुशवाह, बदन सिंह, मनोज गौतम, मदन मोहन भंडारी, देवेन्द्र, तोताराम, परसराम, रामदुलारा, सुरेश, गोविंद, राजाराम, रामप्रसाद, परमानंद, रोशन, राजेन्द्र सहित कई महिला-पुरुष मौजूद थे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानाधिकारी विनोद मीणा पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर तैनात रहे।
रूपवास उपखंड कार्यालय के बाहर कुशवाहा आरक्षण संघर्ष समिति का दो दिवसीय धरना विधायक डॉ. ऋतु बनावत के ठोस आश्वासन के बाद शुक्रवार शाम को स्थगित कर दिया गया। विधायक के हस्तक्षेप से यह मामला सुलझा, जबकि इससे पहले प्रशासन के साथ हुई दो दौर की वार्ता विफल रही थी। प्रदेश कुशवाह आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों महिला-पुरुष गुरुवार से धरने पर बैठे थे। उनकी मुख्य मांगें 12 प्रतिशत आरक्षण, लव-कुश छात्रावास के लिए भूमि आवंटन और अंबेडकर पार्क के लिए जमीन उपलब्ध कराना थीं। गुरुवार को प्रशासन की ओर से कोई पहल न होने के कारण शुक्रवार को भी धरना जारी रहा। धरना लंबा खिंचता देख उपखंड अधिकारी विष्णु बंसल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीराम कुमावत और वृताधिकारी नीरज भारद्वाज ने संघर्ष समिति को वार्ता के लिए बुलाया। उपखंड कार्यालय में सुबह शुरू हुई पहली दौर की बातचीत आधे घंटे बाद किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, और दोपहर 2:30 बजे निर्धारित दूसरा दौर भी बेनतीजा रहा, जिससे आंदोलन और तेज होने की आशंका बन गई थी। शाम को विधायक डॉ. ऋतु बनावत धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगें विस्तार से सुनीं और उपखंड अधिकारी विष्णु बंसल से चर्चा की। इसके बाद समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर समाधान निकालने का प्रयास किया। विधायक ने मौके से ही संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया, समाज कल्याण विभाग के निदेशक और संबंधित मंत्री से फोन पर बात की। अधिकारियों द्वारा बताए गए नियमों के आधार पर विधायक ने आश्वासन दिया कि वह स्वयं मंत्री से मिलकर लव-कुश छात्रावास के लिए भूमि आवंटन का मामला उठाएंगी। साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि भूमि आवंटित होने पर विधायक निधि से छात्रावास के निर्माण के लिए 30 लाख रुपये दिए जाएंगे। विधायक के इस ठोस आश्वासन के बाद संघर्ष समिति ने धरना स्थगित करने का निर्णय लिया। इस दौरान संघर्ष समिति के संयोजक वासुदेव कुशवाह, बदन सिंह, मनोज गौतम, मदन मोहन भंडारी, देवेन्द्र, तोताराम, परसराम, रामदुलारा, सुरेश, गोविंद, राजाराम, रामप्रसाद, परमानंद, रोशन, राजेन्द्र सहित कई महिला-पुरुष मौजूद थे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानाधिकारी विनोद मीणा पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर तैनात रहे।
- रूपवास उपखंड कार्यालय के बाहर कुशवाहा आरक्षण संघर्ष समिति का दो दिवसीय धरना विधायक डॉ. ऋतु बनावत के ठोस आश्वासन के बाद शुक्रवार शाम को स्थगित कर दिया गया। विधायक के हस्तक्षेप से यह मामला सुलझा, जबकि इससे पहले प्रशासन के साथ हुई दो दौर की वार्ता विफल रही थी। प्रदेश कुशवाह आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों महिला-पुरुष गुरुवार से धरने पर बैठे थे। उनकी मुख्य मांगें 12 प्रतिशत आरक्षण, लव-कुश छात्रावास के लिए भूमि आवंटन और अंबेडकर पार्क के लिए जमीन उपलब्ध कराना थीं। गुरुवार को प्रशासन की ओर से कोई पहल न होने के कारण शुक्रवार को भी धरना जारी रहा। धरना लंबा खिंचता देख उपखंड अधिकारी विष्णु बंसल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीराम कुमावत और वृताधिकारी नीरज भारद्वाज ने संघर्ष समिति को वार्ता के लिए बुलाया। उपखंड कार्यालय में सुबह शुरू हुई पहली दौर की बातचीत आधे घंटे बाद किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, और दोपहर 2:30 बजे निर्धारित दूसरा दौर भी बेनतीजा रहा, जिससे आंदोलन और तेज होने की आशंका बन गई थी। शाम को विधायक डॉ. ऋतु बनावत धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगें विस्तार से सुनीं और उपखंड अधिकारी विष्णु बंसल से चर्चा की। इसके बाद समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर समाधान निकालने का प्रयास किया। विधायक ने मौके से ही संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया, समाज कल्याण विभाग के निदेशक और संबंधित मंत्री से फोन पर बात की। अधिकारियों द्वारा बताए गए नियमों के आधार पर विधायक ने आश्वासन दिया कि वह स्वयं मंत्री से मिलकर लव-कुश छात्रावास के लिए भूमि आवंटन का मामला उठाएंगी। साथ ही, उन्होंने घोषणा की कि भूमि आवंटित होने पर विधायक निधि से छात्रावास के निर्माण के लिए 30 लाख रुपये दिए जाएंगे। विधायक के इस ठोस आश्वासन के बाद संघर्ष समिति ने धरना स्थगित करने का निर्णय लिया। इस दौरान संघर्ष समिति के संयोजक वासुदेव कुशवाह, बदन सिंह, मनोज गौतम, मदन मोहन भंडारी, देवेन्द्र, तोताराम, परसराम, रामदुलारा, सुरेश, गोविंद, राजाराम, रामप्रसाद, परमानंद, रोशन, राजेन्द्र सहित कई महिला-पुरुष मौजूद थे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए थानाधिकारी विनोद मीणा पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर तैनात रहे।1
- एक बच्चा पिछले सात महीने से लापता है, जिसकी अब तक कोई खबर नहीं मिल पाई है। बताया गया है कि वह बच्चा मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर है।1
- गौ रक्षा दल रुदावल के जिला सचिव सचिन वाल्मीकि ने जानकारी दी है कि उनकी टीम ने गांव जहरीले में एक गड्ढे में फंसी हुई नीलगाय को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है। उन्हें सुबह इस घटना की सूचना मिली, जिसके बाद गौ रक्षा दल रुदावल की टीम तुरंत सक्रिय हुई और मौके पर पहुंचकर नीलगाय को सुरक्षित बाहर निकाला। इस बचाव अभियान में सचिन वाल्मीकि के साथ मनीष कोली भी गौ रक्षा दल रुदावल से शामिल थे। दल ने जनता से अपील की है कि अगर उन्हें कहीं भी गाय से संबंधित ऐसी कोई समस्या दिखे, जैसे गाय का एक्सीडेंट हो गया हो या वह गड्ढे या कुएं में गिर गई हो, तो वे उनसे संपर्क करें। यह जानकारी 'जय श्री राम जय गौ माता' के जयघोष के साथ समाप्त होती है, जो उनकी सेवा भावना को दर्शाता है।1
- ग्राम पंचायत घड़ी चंदरमन के किरैया गांव के निवासी विपिन ने गांव की सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि गांव की प्रधान अनुप कुमारी ने अपने मोहल्ले में तो अच्छी सड़क बनवाई है, लेकिन उनकी तरफ की सड़क पर भारी जलभराव और अनगिनत गड्ढे हैं। बारिश के मौसम में इस सड़क से गुजरना अत्यंत कठिन हो जाता है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विपिन ने जानकारी दी कि उन्होंने इस समस्या को लेकर प्रधान जी से कई बार शिकायत की है, लेकिन उनकी गुहार पर कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि जनहित में इस सड़क का निर्माण जल्द से जल्द कराया जाए।2
- भरतपुर किले में विराजित श्री बाके बिहारी जी महाराज के ग्यारस के पावन अवसर पर भव्य श्रृंगार दर्शन आयोजित किए गए। इस दौरान, भक्तों ने मनमोहक श्रृंगार से सजे महाराज जी के दर्शन का लाभ उठाया।2
- शुरू एेप द्वारा प्रकाशित खबर का सकारात्मक असर देखने को मिला है। खबर के प्रभाव से स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और तुरंत कार्रवाई करते हुए नालों की साफ-सफाई कराई गई।1
- समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आगरा के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। अपने इस प्रवास के दौरान, अखिलेश यादव सबसे पहले सांसद रामजीलाल सुमन के आवास पर पहुंचकर शोक व्यक्त करेंगे। इसके बाद, आगरा में रुकने के दौरान, वे शहर के सभ्रांत लोगों के साथ एक बैठक भी करेंगे।1
- भरतपुर जिले के रूपवास कस्बे से रुदावल और जटमासी को जोड़ने वाली सड़क ठेकेदार की घोर लापरवाही और प्रशासन की बेरुखी के चलते अब 'मौत का रास्ता' बन गई है। यह मार्ग महीनों से अधूरा पड़ा है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण के लिए डामर उखाड़ने के बाद संवेदक ने काम को बीच में ही छोड़ दिया। पहली ही बारिश में यह पूरा मार्ग दलदल में तब्दील हो गया, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है। स्थिति इतनी खराब है कि रोजाना दर्जनों दुपहिया वाहन चालक सड़क पर बने गहरे गड्ढों और फिसलन के कारण गिरकर चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद सिर्फ पुरानी डामर हटाई गई और उसके बाद से ठेकेदार साइट से गायब हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को इस पूरी स्थिति की जानकारी होने के बावजूद, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस लापरवाही से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उनका स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण नहीं हुआ, तो किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। जनता के मन में यही सवाल है कि क्या इस गंभीर खबर के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटेगी, या फिर ठेकेदार की लापरवाही और प्रशासन की चुप्पी के कारण लोग इसी तरह कीचड़ और जान के खतरे के बीच जीने को मजबूर रहेंगे।1