महाशिवरात्रि पर उमड़ा स्नानर्थी का जन सैलाब मेजा के सिरसा घाट पर महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर वाकई में अद्भुत और भक्तिमय नजारा देखने को मिलता है। हर साल की तरह इस बार भी आस्था का भारी सैलाब गंगा के तट पर उमड़ा है। यहाँ इस उत्सव की कुछ खास झलकियां दी गई हैं: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ * ब्रह्म मुहूर्त से स्नान: भक्त सुबह 4 बजे से ही गंगा में डुबकी लगाने के लिए जुटने लगते हैं। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन सिरसा घाट पर स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। * हर-हर महादेव का उद्घोष: पूरे घाट परिसर में बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों से माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया है। * दूर-दराज से आगमन: न केवल मेजा, बल्कि मांडा, कोरांव और पड़ोसी जनपद मिर्जापुर से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ पहुँचते हैं। प्रमुख गतिविधियाँ * जलाभिषेक: स्नान के बाद श्रद्धालु सिरसा के प्राचीन शिव मंदिरों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और दूध चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद ले रहे हैं। * मेला और सुरक्षा: घाटों पर छोटे-बड़े मेलों का आयोजन होता है। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने गोताखोरों और पुलिस बल की तैनाती भी की है ताकि कोई अनहोनी न हो। > एक रोचक तथ्य: सिरसा घाट अपनी ऐतिहासिकता और चौड़े पाट के लिए प्रसिद्ध है, जिससे यहाँ हजारों लोग एक साथ सुरक्षित स्नान कर पाते हैं।
महाशिवरात्रि पर उमड़ा स्नानर्थी का जन सैलाब मेजा के सिरसा घाट पर महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर वाकई में अद्भुत और भक्तिमय नजारा देखने को मिलता है। हर साल की तरह इस बार भी आस्था का भारी सैलाब गंगा के तट पर उमड़ा है। यहाँ इस उत्सव की कुछ खास झलकियां दी गई हैं: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ * ब्रह्म मुहूर्त से स्नान: भक्त सुबह 4 बजे से ही गंगा में डुबकी लगाने के लिए जुटने लगते हैं। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन सिरसा घाट पर स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। * हर-हर महादेव का उद्घोष: पूरे घाट परिसर में बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों से माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया है। * दूर-दराज से आगमन: न केवल मेजा, बल्कि मांडा, कोरांव और पड़ोसी जनपद मिर्जापुर से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ पहुँचते हैं। प्रमुख गतिविधियाँ * जलाभिषेक: स्नान के बाद श्रद्धालु सिरसा के प्राचीन शिव मंदिरों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और दूध चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद ले रहे हैं। * मेला और सुरक्षा: घाटों पर छोटे-बड़े मेलों का आयोजन होता है। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने गोताखोरों और पुलिस बल की तैनाती भी की है ताकि कोई अनहोनी न हो। > एक रोचक तथ्य: सिरसा घाट अपनी ऐतिहासिकता और चौड़े पाट के लिए प्रसिद्ध है, जिससे यहाँ हजारों लोग एक साथ सुरक्षित स्नान कर पाते हैं।
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- मेजा के सिरसा घाट पर महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर वाकई में अद्भुत और भक्तिमय नजारा देखने को मिलता है। हर साल की तरह इस बार भी आस्था का भारी सैलाब गंगा के तट पर उमड़ा है। यहाँ इस उत्सव की कुछ खास झलकियां दी गई हैं: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ * ब्रह्म मुहूर्त से स्नान: भक्त सुबह 4 बजे से ही गंगा में डुबकी लगाने के लिए जुटने लगते हैं। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन सिरसा घाट पर स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। * हर-हर महादेव का उद्घोष: पूरे घाट परिसर में बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों से माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया है। * दूर-दराज से आगमन: न केवल मेजा, बल्कि मांडा, कोरांव और पड़ोसी जनपद मिर्जापुर से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ पहुँचते हैं। प्रमुख गतिविधियाँ * जलाभिषेक: स्नान के बाद श्रद्धालु सिरसा के प्राचीन शिव मंदिरों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और दूध चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद ले रहे हैं। * मेला और सुरक्षा: घाटों पर छोटे-बड़े मेलों का आयोजन होता है। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने गोताखोरों और पुलिस बल की तैनाती भी की है ताकि कोई अनहोनी न हो। > एक रोचक तथ्य: सिरसा घाट अपनी ऐतिहासिकता और चौड़े पाट के लिए प्रसिद्ध है, जिससे यहाँ हजारों लोग एक साथ सुरक्षित स्नान कर पाते हैं।1