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रोहतक के गाँधी कैंप में पकड़ा मनचला: 12 वर्षीय नाबालिग को कॉल कर करता था परेशान, रोहतक के गाँधी कैंप में पकड़ा मनचला: 12 वर्षीय नाबालिग को कॉल कर करता था परेशान, दूसरे समुदाय का बताया जा रहा युवक
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रोहतक के गाँधी कैंप में पकड़ा मनचला: 12 वर्षीय नाबालिग को कॉल कर करता था परेशान, रोहतक के गाँधी कैंप में पकड़ा मनचला: 12 वर्षीय नाबालिग को कॉल कर करता था परेशान, दूसरे समुदाय का बताया जा रहा युवक
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- #breakingnews #1
- Post by Radhe Radhe1
- लोग गंगा नदी में कपड़े धोते है,गंगा के किनारे वाले होटल का गंदा पानी गंगा में जाता है, टॉयलेट लोग गंगा में करते है, और जानवरों को पशुपति कहने वाले लोग अब सवाल कर रहे हैं कि कुत्ते को गंगा नदी में क्यों नहला रहे हो! आप जवाब दीजिए क्या एक कुत्ते को नहला देने से सबके पाप धोने वाली गंगा मां अपवित्र हो जाएगी! comment Karo......!!!!!1
- Post by Bhajan Lal1
- सादड़ी में ट्रक की टक्कर से टूटा विद्युत पोल, घंटों बिजली गुल रिपोर्टर भीकाराम कंडारा की रिपोर्ट सादड़ी/पाली। देसूरी राजमार्ग पर बारली-सादड़ी में बुधवार रात बड़ा हादसा टल गया, जब जाम में फंसे एक टर्बो ट्रक ने बिजली के पोल को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि पोल का ऊपरी हिस्सा टूटकर ट्रक पर जा गिरा और पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। घटना के दौरान संयोगवश लाइन में स्पार्क के साथ ही बिजली सप्लाई बंद हो गई, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। हादसे के बाद सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और स्थिति बिगड़ गई। सूचना मिलते ही डिस्कॉम के कनिष्ठ अभियंता तौकीर हुसैन टीम सहित मौके पर पहुंचे और एफआरटी की मदद से बिजली के तार हटवाकर पोल दुरुस्त करने का काम शुरू किया। वहीं पुलिस ने मशक्कत कर जाम खुलवाया और यातायात सामान्य किया। बताया जा रहा है कि पालिका क्षेत्र में बाइपास के अभाव और शादियों के सीजन के चलते भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से आए दिन जाम की स्थिति बन रही है। बस स्टैंड, आखरिया चौक, गांछवाड़ा ढलान से ब्रजभाटा चौक तक वाहन एक-दूसरे को साइड देकर निकलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। डिस्कॉम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि नुकसान की भरपाई नहीं की गई तो संबंधित वाहन चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल नया पोल लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल करने का कार्य जारी है।1
- 8वें वेतन आयोग में सेना का प्रतिनिधित्व क्यों जरूरी? सैनिकों की आवाज़, सम्मान और भविष्य से जुड़ा बड़ा सवाल भारत सरकार द्वारा 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की तैयारी शुरू होने के साथ ही देशभर के सैनिकों, पूर्व सैनिकों और सैन्य परिवारों के बीच एक बड़ा प्रश्न उठ रहा है — क्या इस बार सेना की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित होगी? सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे पोस्टरों और चर्चाओं में यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आ रहा है कि अब तक के वेतन आयोगों में सेना की परिस्थितियों और जरूरतों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं समझा गया। यही कारण है कि सैनिक समुदाय के भीतर असंतोष और उपेक्षा की भावना बढ़ती दिखाई दे रही है। आखिर विवाद क्या है? 8वां केंद्रीय वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। लेकिन सेना से जुड़े कई संगठनों और पूर्व सैनिकों का कहना है कि: आयोग में सैन्य पृष्ठभूमि वाले विशेषज्ञों की भागीदारी स्पष्ट नहीं है। सेना की सेवा-शर्तें बाकी सरकारी नौकरियों से पूरी तरह अलग हैं। पिछले कई वर्षों में सैनिकों से जुड़े मुद्दे अधूरे या विवादित रहे हैं। यही कारण है कि अब मांग उठ रही है कि “बिना सैनिक प्रतिनिधित्व के कोई भी वेतन आयोग अधूरा है।”1
- रोहतक में खौफ: स्कूल संचालक से मांगे ₹2 करोड़, विदेश नंबर से आया मैसेज1
- डीसीपी ने कहा- परिवार के सहयोग से ही संभव है निष्ठापूर्ण सेवा वर्षों तक समर्पण, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने वाले पंचकूला पुलिस के पाँच कर्मचारियों को आज पुलिस लाइन में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्ति दी गई।1
- हिन्दू महासभा ने बौद्ध पंथ को सनातन धर्म का अविभाज्य अंग और गौरव बताया - बी एन तिवारी नई दिल्ली, अखिल भारत हिन्दू महासभा ने भगवान बुद्ध जयंती और श्रमिक दिवस पर समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे महात्मा बुद्ध के उपदेशों और शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का आह्वान किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि भगवान बुद्ध भगवान विष्णु के नवें अवतार के रूप में महाराजा शुद्धोधन के पुत्र के रूप क्षत्रिय जाति में पृथ्वी पर मानवता और जीव कल्याण के लिए अवतरित हुए थे। भगवान बुद्ध ने बौद्ध पंथ की स्थापना कर सत्य, अहिंसा और प्रेम का संदेश दिया। भगवान बुद्ध का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है और मानव जाति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने आज जारी बयान में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध ने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों और अमानवीय नीतियों के निवारण हेतु बौद्ध पंथ की स्थापना की थी। उनके अनुसार हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में बौद्ध पंथ के अंदर नवबौद्ध संस्कृति के नाम से एक नया वर्ग उभर रहा है, जो बौद्ध पंथ को बौद्ध धर्म के रूप में मान्यता देते हुए बौद्ध पंथ को सनातन धर्म के विरोधी पंथ के रूप में स्थापित करने का दुष्प्रयास कर रहा है। कांग्रेस और वामपंथ की राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित नवबौद्ध संस्कृति सनातन धर्म को समाप्त करने का प्रयास कर रही हैं, जबकि वास्तव में बौद्ध पंथ सनातन धर्म का अविभाज्य अंग और सनातन धर्म का गौरव है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सनातनी भगवान बुद्ध को विष्णु भगवान के नवें अवतार के रूप में मान्यता देता है और उनकी उपासना करता है । इसके विपरीत नवबौद्ध संस्कृति के अनुयायियों ने सनातन धर्म के देवी देवताओं के विरुद्ध दुष्प्रचार करना और उन्हें अपमानित करना ही अपना परम धर्म स्वीकार कर लिया है। ऐसे नवबौद्ध वास्तव में भगवान बुद्ध की नीतियों, शिक्षाओं और आदर्शों के विरुद्ध आचरण कर रहे हैं। उनका यह आचरण उनका अक्षम्य अपराध है। राष्ट्रीय प्रवक्ता बी एन तिवारी ने बताया कि सनातन धर्म बौद्ध पंथ की जननी है और अपनी जननी के विरुद्ध विषवमन को किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सनातन धर्म के विरुद्ध विषवमन करने वाले नवबौद्धों को भगवान बुद्ध से सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल सिंह ने देशवासियों को श्रमिक दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए " श्रमेव जयते " का नारा दिया। उन्होंने कहा कि भारत के श्रमिकों की आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति के बिना भारत को पुनः विश्वगुरु बनाना दिवास्वप्न देखने के समान है। प्रोफेसर यशपाल सिंह ने कहा कि श्रम एक ऐसी पूंजी है, जिसके विस्तार और सशक्तिकरण से राष्ट्र और समाज का कल्याण और उन्नति संभव है। उन्होंने कहा कि भारत में श्रमिक समाज, विशेषकर महिला श्रमिकों की दशा और दिशा निर्धारित करने के लिए आज भी बहुत कुछ किया जाना शेष है। निजी क्षेत्रों से जुड़े श्रमिकों और असंगठित कामगारों की आर्थिक और सामाजिक दशा स्वतंत्रता प्राप्ति के 79 वर्ष बाद भी शोचनीय बनी हुई है। उन्हें भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल पाती। श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और उनकी आर्थिक उन्नति और समृद्धि के लिए देश में अनेक कानून विद्यमान हैं, किंतु उन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पाना और पूंजीवादी व्यवस्था के सामने श्रम कानूनों का निष्प्रभावी होना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने भारत सरकार को श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 25 हजार रूपए प्रतिमाह निर्धारित कर भारतीय श्रमिकों को आर्थिक उन्नति और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने का परामर्श दिया है।1