तेज आंधी-बारिश से हाईवे पर अफरा-तफरी, दर्जनों पेड़ गिरने से लगा लंबा जाम सोहागपुर थाना पुलिस ने जेसीबी की मदद से हटवाया पेड़, यातायात हुआ बहाल नर्मदापुरम। जिले के सोहागपुर क्षेत्र में शनिवार शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली। तेज हवा के साथ करीब आधे घंटे तक जमकर बारिश हुई। आंधी और बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हो गया। तेज हवा के कारण नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर कई जगह पेड़ गिर गए। सोहागपुर के पास सड़क किनारे स्थित एक बड़ा नीम का पेड़ अचानक सड़क पर गिर गया, जिससे हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। करीब एक किलोमीटर तक जाम की स्थिति बन गई और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही सोहागपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने जेसीबी मशीन बुलवाकर सड़क पर गिरे नीम के पेड़ को हटवाने की कार्रवाई शुरू कराई। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद पेड़ को सड़क से हटाया गया, जिसके बाद यातायात दोबारा सुचारू हो सका। बारिश और तेज हवा के कारण क्षेत्र में कई जगह बिजली आपूर्ति भी प्रभावित रही। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी तेज हवा और बारिश की संभावना जताई है।
तेज आंधी-बारिश से हाईवे पर अफरा-तफरी, दर्जनों पेड़ गिरने से लगा लंबा जाम सोहागपुर थाना पुलिस ने जेसीबी की मदद से हटवाया पेड़, यातायात हुआ बहाल नर्मदापुरम। जिले के सोहागपुर क्षेत्र में शनिवार शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली। तेज हवा के साथ करीब आधे घंटे तक जमकर बारिश हुई।
आंधी और बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हो गया। तेज हवा के कारण नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर कई जगह पेड़ गिर गए। सोहागपुर के पास सड़क किनारे स्थित एक बड़ा नीम का पेड़ अचानक सड़क पर गिर गया, जिससे हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। करीब
एक किलोमीटर तक जाम की स्थिति बन गई और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही सोहागपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने जेसीबी मशीन बुलवाकर सड़क पर गिरे नीम के पेड़ को हटवाने की कार्रवाई शुरू कराई। करीब आधे घंटे
की मशक्कत के बाद पेड़ को सड़क से हटाया गया, जिसके बाद यातायात दोबारा सुचारू हो सका। बारिश और तेज हवा के कारण क्षेत्र में कई जगह बिजली आपूर्ति भी प्रभावित रही। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी तेज हवा और बारिश की संभावना जताई है।
- जबलपुर में बड़ा हादसा: बरगी डैम में दर्दनाक घटना, इलाके में मचा हड़कंप डैम क्षेत्र में अचानक हुए हादसे से दहशत, राहत-बचाव कार्य जारी, प्रशासन अलर्ट1
- Post by Suresh tiwari1
- Post by PS24NEWS1
- भोपाल में हुई कांग्रेस की अहम बैठक ने एक बार फिर पार्टी की अंदरूनी राजनीति को उजागर कर दिया है। बाहर से यह बैठक सामान्य दिखी, लेकिन अंदर के संवादों में सियासी संकेत और संदेश साफ नजर आए। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने संगठन को लेकर अपनी बात रखते हुए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की तारीफ भी की, लेकिन उसी तारीफ में छिपा तंज अब चर्चा का विषय बन गया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि “दिल्ली दरबार में आपकी पकड़ हमसे ज्यादा मजबूत है, आप के.सी. वेणुगोपाल से कुछ भी लिखवा सकते हैं।” माहौल हल्का करने के लिए पटवारी ने खुद को उनका चेला बताया, लेकिन इसके बाद दिग्विजय का जवाब—“गुरु गुड़ रह गया, चेला शक्कर हो गया”—ने पूरे राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। इस एक लाइन को सिर्फ मजाक मानना आसान है, लेकिन इसके पीछे छिपे संदेश को नजरअंदाज करना मुश्किल है। यह बयान न केवल संगठन में शक्ति संतुलन को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। दिन में हुई इस बातचीत के बाद शाम को जीतू पटवारी का दिग्विजय सिंह के घर पहुंचना इस बात का इशारा करता है कि अंदरूनी मतभेदों को संभालने की कोशिश जारी है। राजनीति में अक्सर ऐसे बयान रिश्तों की गहराई और खींचतान दोनों को एक साथ उजागर करते हैं। अब सवाल यही है कि क्या यह केवल हल्का-फुल्का मजाक था, या फिर इसके पीछे सत्ता संतुलन और नेतृत्व की खामोश लड़ाई छिपी है। 👉 केके का सवाल: क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक है, या फिर “मिठास” के पीछे सियासी कड़वाहट बढ़ रही है?1
- Post by Vineet maheshwari1
- Post by Dushyant dhurvey1
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- एक तो मैं किसान भाइयों और बहनों को आश्वस्त करना चाहता हूं, मुख्यमंत्री जी ने भी आश्वस्त किया है, कि हर एक किसान से खरीदी होगी और अब खरीदी तेजी से चल रही है। एक समस्या पहले आ रही थी स्लॉट बुकिंग की। उसमें देरी लग रही थी, धीमा चल रहा था सिस्टम। लेकिन हमने अब किसानों से भी बात की, समीक्षा की, तो तेजी से स्लॉट बुक करने का काम चल रहा है और अब स्लॉट बुकिंग में कोई समस्या बची नहीं है। लेकिन आपकी जानकारी में और आपके माध्यम से मैं किसान भाइयों-बहनों से कहना चाहता हूं कि अभी भी स्लॉट बुकिंग 23 तारीख तक हो सकता है, 23 मई तक। हालांकि जाएगा नहीं क्योंकि मैक्सिमम स्लॉट बुक हो चुके हैं अब। अपवाद स्वरूप बचे होंगे, तो मेरा विश्वास है कि दो-तीन दिन में सारे किसानों के स्लॉट बुक हो जाएंगे। दूसरी चीज थी कि जिनने कौली या लीज पर ली है (जो अपन कहते हैं अपने यहां कौली कहते हैं, वैसे टेनेंट किसान कहते हैं) जो खुद की जमीन नहीं है लेकिन दूसरे से लेकर खेती करते हैं। तो उनकी भी कोई समस्या नहीं है। जिसका भूमि स्वामित्व है, जो मालिक है जमीन का, वो अगर कह देता है कि मैंने इनको जमीन बेची है, तो उनका उत्पाद भी 'कौली जमीन मैंने बेची' तो वो उत्पाद भी खरीदा जा रहा है। एक समस्या ये आ रही थी पहले कि स्लॉट में सत्यापित नहीं हो रहा है कि गेहूं है कि नहीं। कुछ और लिख के आ जाता था पहले। लेकिन अब उस समस्या का समाधान भी हो गया है। कहीं इक्का-दुक्का मामले आते हैं तो उसके लिए भी हमने यहां फैसला किया है कि कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट में रहेगा। अगर किसी किसान को ये समस्या आ रही है कि सत्यापित नहीं हो रहा, तो वो यहां पर जानकारी दे दे। तो वो सही किसान है तो सत्यापित करके उसकी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। एक थी पहले बारदानों की कमी की समस्या। लेकिन आज पूरी समीक्षा में ये आया है कि बारदाने अब निरंतर आ रहे हैं। और अगले तीन दिन तक की खरीद के लिए बारदाने पर्याप्त हैं। और उनकी आपूर्ति लगातार हो रही है। कुछ जगह चूंकि सरकार ने भारी उत्पादन को देखते हुए पुराने बारदाने भी मैनेज किए थे, अब अगर वो बारदाने काम के हैं तो उनको उपयोग में लेंगे, नहीं तो उनकी जगह दूसरे भी रिप्लेस करने का काम लगातार हो रहा है। फिर तौल कांटे कहीं कम थे, उस तरह की समस्या थी। पहले तो आपको पता है कि 1000 क्विंटल ही खरीदी हो सकती थी एक खरीद केंद्र पे। अब वो बढ़ के 2250 क्विंटल हो गई है। और उसके हिसाब से जहां-जहां कांटों को बढ़ाने की भी आवश्यकता थी, वहां कांटे भी बढ़ाए जा रहे हैं ताकि जल्दी खरीदी का काम संपन्न हो सके। अब तक जो आज समीक्षा की है, जैसे विदिशा जिले में ही जिन किसानों ने पंजीकरण करवाया था (पंजीकृत किसान), उनकी संख्या 87,913 थी। उनमें से स्लॉट बुक हो गए 72,027 के। कई बार जितना पंजीयन करवाते हैं उतना सब स्लॉट बुक नहीं करवाते, ये हमेशा से होता आया है, कुछ कम ही होते हैं। लेकिन फिर भी 82% (अगर इस हिसाब से भी देखें) तो किसानों के स्लॉट बुक हो चुके हैं और स्लॉट बुकिंग लगातार चल रही है, जारी है। अब तक जिन किसानों ने अपना गेहूं बेचा है (विक्रेता कृषक), उनकी संख्या 36,442 है और उनसे 1,99,563 मीट्रिक टन कुल 174 केंद्रों से अभी तक गेहूं खरीदा जा चुका है। रायसेन जिले का अगर हम देखें, तो 77,117 किसानों ने पंजीकरण करवाया था। उनमें से 68,639 किसानों के स्लॉट बुक हो चुके हैं और उनमें से 32,374 किसान अपना गेहूं बेच चुके हैं और 1,80,199 मीट्रिक टन खरीदी हो चुकी है।1