किशनगंज स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज (जीईसी) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर ऋग्वेन्द्र कुमार वर्धन का प्रतिष्ठित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में वैज्ञानिक पद पर चयन हुआ है। उनकी इस बड़ी उपलब्धि से कॉलेज परिवार में खुशी और गर्व का माहौल है। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. भगवान श्री राम ने इस अवसर को संस्थान के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया, और कहा कि यह सफलता जीईसी किशनगंज की उत्कृष्ट शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है। अनुसंधान एवं विकास संकायाध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार ने भी प्रो. वर्धन की उपलब्धि को संस्थान के लिए सम्मानजनक बताते हुए कहा कि यह कॉलेज की क्षमता को दर्शाता है, जहाँ से राष्ट्रीय शोध और रक्षा क्षेत्र में योगदान देने वाली प्रतिभाएं तैयार होती हैं। ईसीई विभागाध्यक्ष प्रो. देवा नंद पटेल ने प्रो. ऋग्वेन्द्र कुमार वर्धन द्वारा विभाग के विकास में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की और उनके चयन को छात्रों व अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक बताया। इस खुशी के अवसर पर कॉलेज के कई प्राध्यापकों और कर्मियों ने प्रो. वर्धन को शुभकामनाएं दीं, जिनमें प्रो. विकास कुमार, प्रो. विकास चंद्र दिनकर, प्रो. अभिषेक कुमार रवि, डॉ. संदीप अग्रवाल, प्रो. करिश्मा प्रवीण, प्रो. दीपक कुमार, प्रो. दीपक कुमार सिंह, प्रो. ओज़ैर अहमद, प्रो. मनीता कुमारी, प्रो. ओम प्रकाश, प्रो. सलीम अहमद, प्रो. मीनल विजय, प्रो. मुकेश कुमार, प्रो. साकेत सौरेभ, प्रो. ललन कुमार राम, प्रो. राजीव रंजन, डॉ. सांची रंजन, प्रो. विवेका बसु, साथ ही इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स लैब असिस्टेंट ब्यूटी कुमारी, लवकुश कुमार, रोहितास्व कुमार, मुकेंद्र कुमार और राहुल कुमार शामिल थे। प्रो. ऋग्वेन्द्र कुमार वर्धन ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि डीआरडीओ में वैज्ञानिक के रूप में कार्य करना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा जीईसी किशनगंज से जुड़े रहेंगे और आवश्यकता पड़ने पर संस्थान की हर संभव मदद करते रहेंगे।
किशनगंज स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज (जीईसी) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर ऋग्वेन्द्र कुमार वर्धन का प्रतिष्ठित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में वैज्ञानिक पद पर चयन हुआ है। उनकी इस बड़ी उपलब्धि से कॉलेज परिवार में खुशी और गर्व का माहौल है। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. भगवान श्री राम ने इस अवसर को संस्थान के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया, और कहा कि यह सफलता जीईसी किशनगंज की उत्कृष्ट शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है। अनुसंधान एवं विकास संकायाध्यक्ष डॉ. नीरज कुमार ने भी प्रो. वर्धन की उपलब्धि को संस्थान के लिए सम्मानजनक बताते हुए कहा कि यह कॉलेज की क्षमता को दर्शाता है, जहाँ से राष्ट्रीय शोध और रक्षा क्षेत्र में योगदान देने वाली प्रतिभाएं तैयार होती हैं। ईसीई विभागाध्यक्ष प्रो. देवा नंद पटेल ने प्रो. ऋग्वेन्द्र कुमार वर्धन द्वारा विभाग के विकास में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की और उनके चयन को छात्रों व
अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक बताया। इस खुशी के अवसर पर कॉलेज के कई प्राध्यापकों और कर्मियों ने प्रो. वर्धन को शुभकामनाएं दीं, जिनमें प्रो. विकास कुमार, प्रो. विकास चंद्र दिनकर, प्रो. अभिषेक कुमार रवि, डॉ. संदीप अग्रवाल, प्रो. करिश्मा प्रवीण, प्रो. दीपक कुमार, प्रो. दीपक कुमार सिंह, प्रो. ओज़ैर अहमद, प्रो. मनीता कुमारी, प्रो. ओम प्रकाश, प्रो. सलीम अहमद, प्रो. मीनल विजय, प्रो. मुकेश कुमार, प्रो. साकेत सौरेभ, प्रो. ललन कुमार राम, प्रो. राजीव रंजन, डॉ. सांची रंजन, प्रो. विवेका बसु, साथ ही इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स लैब असिस्टेंट ब्यूटी कुमारी, लवकुश कुमार, रोहितास्व कुमार, मुकेंद्र कुमार और राहुल कुमार शामिल थे। प्रो. ऋग्वेन्द्र कुमार वर्धन ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि डीआरडीओ में वैज्ञानिक के रूप में कार्य करना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा जीईसी किशनगंज से जुड़े रहेंगे और आवश्यकता पड़ने पर संस्थान की हर संभव मदद करते रहेंगे।
- किशनगंज जिले की कोल्था पंचायत के वार्ड नंबर 3 में स्थित नन्नाकुरी से सिंघमारी बेलबारी तक की सड़क का निर्माण आजादी के बाद से अब तक नहीं हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि वे 1950 से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक पक्की सड़क की सुविधा नहीं मिल पाई है।1
- बहादुरगंज स्थित दरनिया हाट एक बेहद अच्छी स्थानीय मंडी है। यह बाज़ार अपनी विविधता के लिए जाना जाता है, जहाँ सभी तरह का सामान उपलब्ध है। यह विशेष हाट प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को लगता है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए खरीदारी की सुविधा बनी रहती है।1
- बिहार के किशनगंज जिले के पोठिया क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और हृदय विदारक ख़बर सामने आई है, जहाँ स्थानीय लोग अपने मृतकों का जनाज़ा लेकर आज भी नदी पार करने को मजबूर हैं। रियाज़ ज़ेहन किशनगंज/पोठिया द्वारा साझा की गई इस रिपोर्ट में उस दर्दनाक मजबूरी को उजागर किया गया है जो लोगों को मौत के बाद भी नहीं छोड़ रही। यह स्थिति उन ग्रामीणों के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिन्हें अंतिम संस्कार के लिए अपने प्रियजनों के पार्थिव शरीर को नदी के उस पार ले जाना पड़ता है। इस दुखद वास्तविकता को 'जनाज़े का दर्द' बताया गया है और इसे एक बड़ा 'सार्वजनिक मुद्दा' माना जा रहा है, जो 'इंसानियत पहले' के सिद्धांत पर भी सवाल खड़े करता है। लोगों की यह मजबूरी वर्षों से चली आ रही है और वे लगातार एक स्थायी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसी के मद्देनजर, प्रभावित समुदाय द्वारा 'पुल की मांग' को लेकर पुरज़ोर आवाज़ उठाई जा रही है। लोग लगातार सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस दर्द का रास्ता कब बनेगा और 'कब मिलेगा इंसाफ'। 'कब्रिस्तान तक सड़क' और 'पुल कब बनेगा' जैसी मांगों के साथ, यह 'आम जनता की पुकार' है कि उनकी इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान दिया जाए और उन्हें इस कठिन परिस्थिति से मुक्ति मिले।1
- संगठित पंचायत विश्वमाता का मंदिर बिहार के चंपारण में स्थित है और यह अपनी प्रसिद्धि के लिए जाना जाता है।2
- झामुमो जिला अध्यक्ष बीरेंद्र पांडेय ने रविवार को 11 बजे अपने चंदवारा आवास में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर भाजपा पर जेजे कॉलेज मुद्दे पर छात्रों को राजनीतिक मोहरा बनाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भोले-भाले विद्यार्थियों को आगे करके राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है, जो अत्यंत निंदनीय है। पांडेय ने प्रशासन से कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की, जो छात्रों को भड़काकर सड़क जाम तथा अन्य गतिविधियों में शामिल करा रहे हैं। झामुमो ने स्पष्ट किया कि पार्टी जेजे कॉलेज को विनोबा भावे विश्वविद्यालय के अधीन बनाए रखने के पक्ष में है और इस दिशा में लगातार प्रयासरत है। साथ ही, उन्होंने भाजपा नेताओं पर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए बल दिया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों का समाधान केवल संवाद और सकारात्मक पहल से ही संभव है।1
- बहादुरगंज के दरनिया नदी के पास ग्राम पंचायत देशयाटोली में एक खूबसूरत बगान स्थित है। यह स्थान चिलचिलाती धूप से बचने और आराम करने के लिए एक आदर्श तथा आरामदायक जगह है। यह देशयाटोली दरनिया, किशनगंज, बिहार का एक ठंडा और शांत स्थान है।1
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