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*यूपी एसआईआर में सभी 75 जिलों मे कहां कितने वोट कटे??* 1. सहारनपुर - 4,32,534 (16.37%) 2. मुजफ्फरनगर - 3,44,217 (16.29%) 3. मेरठ - 6,65,635 (24.65%) 4. गाजियाबाद - 8,18,139 (28.83%) 5. बुलन्दशहर - 4,03,369 (15.14%) 6. गौतम बुद्ध नगर - 44,74,71 (23.98%) 7. बागपत - 177299 (18.15%) 8. आगरा - 8,36,943 (23.25%) 9. अलीगढ - 5,20,189 (18.60%) 10. मथुरा - 3,73,793 (19.19%) 11. फिरोजाबाद - 3,44,752 (18.13%) 12.मैनपुरी - 2,26,875 (16.17%) 13. एटा - 2,20,426 (16.80%) 14. हाथरस - 1,89,616 (16.30%) 15. बरेली - 7,14,753 (20.99%) 16. बदायूं - 4,92,995 (20.39%) 17. शाहजहांपुर - 5,03,922 (21.76%) 18. पीलीभीत - 1,99,772 (13.61%) 19. मुरादाबाद - 3,87,611 (15.76%) 20. रामपुर - 3,21,571 (18.29%) 21.बिजनौर- 4,27,159 (15.53%) 22.अमरोहा - 1,81,177 (13.22%) 23. कानपुर नगर - 9,02,148 (25.50%) 24. कानपुर देहात - 2,03,957 (15.26%) 25. इटावा - 2,33,018 (18.95%) 26. फर्रुखाबाद - 2,90,824 (20.80%) 27. कन्नौज - 2,78,095 (21.57%) 28. औरैया - 1,58,055 (15.36%) 29. प्रयागराज - 11,56,305 (24.64%) 30. फ़तेहपुर - 3,15,468 (16.32%) 31. प्रतापगढ़ - 5,00,109 (19.81%) 32. कौशांबी - 2,19,698 (18.00%) 33. झांसी - 2,19,612 (13.92%) 34. ललितपुर - 95,447 (9.95%) 35. जालौन - 2,12,059 (16.34%) 36. हमीरपुर - 90,560 (10.78%) 37. महोबा - 85,352 (12.42%) 38. बांदा - 1,75,421 (13.00%) 39.चित्रकूट - 1,00,092 (13.67%) 40. वाराणसी - 5,73,203 (18.18%) 41. जौनपुर - 5,89,543 (16.51%) 42. गाजीपुर - 4,08,689 (13.85%) 43. चंदौली - 2,30,086 (15.45%) 44. मिर्जापुर - 3,42,761 (17.94%) 45. सोनभद्र - 2,51,964 (17.93%) 46. ​​भदोही - 2,06,320 (16.73%) 47. आजमगढ़ - 5,66,606 (15.25%) 48. मऊ - 3,00,223 (17.52%) 49. बलिया - 4,55,976 (18.16%) 50. गोरखपुर - 6,45,625 (17.61%) 51. महाराजगंज - 3,01,022 (15.11%) 52.देवरिया - 4,14,799 (17.22%) 53.कुशीनगर - 5,02,640 (18.65%) 45. सोनभद्र - 2,51,964 (17.93%) 46. ​​भदोही - 2,06,320 (16.73%) 47. आजमगढ़ - 5,66,606 (15.25%) 48. मऊ - 3,00,223 (17.52%) 49. बलिया - 4,55,976 (18.16%) 50. गोरखपुर - 6,45,625 (17.61%) 51. महाराजगंज - 3,01,022 (15.11%) 52.देवरिया - 4,14,799 (17.22%) 53.कुशीनगर - 5,02,640 (18.65%) 54. बस्ती - 2,98,287 (15.70%) 55. सिद्धार्थनगर - 3,98,900 (20.33%) 56. संत कबीर नगर - 2,66,870 (19.96%) 57. लखनऊ - 12,00,138 (30.04%) 58.उन्नाव - 4,07,171 (17.51%) 59. रायबरेली - 3,48,862 (16.35%) 60.सीतापुर - 6,23,772 (19.55%) 61.हरदोई - 5,44,682 (18.04%) 62. खीरी (लखीमपुर) – 5,05,802 (17.50%) 63. गोंडा - 4,69,637 (18.40%) 64.बहराइच - 5,41,328 (20.44%) 65.बलरामपुर - 4,11,200 (25.98%) 66. श्रावस्ती - 1,34,992 (16.51%) 67. अयोध्या - 3,35,742 (17.69%) 68. सुल्तानपुर - 3,16,947 (17.19%) 69. बाराबंकी - 3,73,154 (16.00%) 70. अम्बेडकर नगर - 2,58,547 (13.82%) 71. कासगंज - 1,72,238 (16.28%) 72.अमेठी - 2,67,241 (18.60%) 73. हापुड - 2,57,903 (22.30%) 74. शामली - 1,63,458 (16.75%) 75. संभल - 3,18,601 (20.29%)

2 days ago
user_बीरेन्द्र जीत शर्मा
बीरेन्द्र जीत शर्मा
Kasganj, Uttar Pradesh•
2 days ago

*यूपी एसआईआर में सभी 75 जिलों मे कहां कितने वोट कटे??* 1. सहारनपुर - 4,32,534 (16.37%) 2. मुजफ्फरनगर - 3,44,217 (16.29%) 3. मेरठ - 6,65,635 (24.65%) 4. गाजियाबाद - 8,18,139 (28.83%) 5. बुलन्दशहर - 4,03,369 (15.14%) 6. गौतम बुद्ध नगर - 44,74,71 (23.98%) 7. बागपत - 177299 (18.15%) 8. आगरा - 8,36,943 (23.25%) 9. अलीगढ - 5,20,189 (18.60%) 10. मथुरा - 3,73,793 (19.19%) 11. फिरोजाबाद - 3,44,752 (18.13%) 12.मैनपुरी - 2,26,875 (16.17%) 13. एटा - 2,20,426 (16.80%) 14. हाथरस - 1,89,616 (16.30%) 15. बरेली - 7,14,753 (20.99%) 16. बदायूं - 4,92,995 (20.39%) 17. शाहजहांपुर - 5,03,922 (21.76%) 18. पीलीभीत - 1,99,772 (13.61%) 19. मुरादाबाद - 3,87,611 (15.76%) 20. रामपुर - 3,21,571 (18.29%) 21.बिजनौर- 4,27,159 (15.53%) 22.अमरोहा - 1,81,177 (13.22%) 23. कानपुर नगर - 9,02,148 (25.50%) 24. कानपुर देहात - 2,03,957 (15.26%) 25. इटावा - 2,33,018 (18.95%) 26. फर्रुखाबाद - 2,90,824 (20.80%) 27. कन्नौज - 2,78,095 (21.57%) 28. औरैया - 1,58,055 (15.36%) 29. प्रयागराज - 11,56,305 (24.64%) 30. फ़तेहपुर - 3,15,468 (16.32%) 31. प्रतापगढ़ - 5,00,109 (19.81%) 32. कौशांबी - 2,19,698 (18.00%) 33. झांसी - 2,19,612 (13.92%) 34. ललितपुर - 95,447 (9.95%) 35. जालौन - 2,12,059 (16.34%) 36. हमीरपुर - 90,560 (10.78%) 37. महोबा - 85,352 (12.42%) 38. बांदा - 1,75,421 (13.00%) 39.चित्रकूट - 1,00,092 (13.67%) 40. वाराणसी - 5,73,203 (18.18%) 41. जौनपुर - 5,89,543 (16.51%) 42. गाजीपुर - 4,08,689 (13.85%) 43. चंदौली - 2,30,086 (15.45%) 44. मिर्जापुर - 3,42,761 (17.94%) 45. सोनभद्र - 2,51,964 (17.93%) 46. ​​भदोही - 2,06,320 (16.73%) 47. आजमगढ़ - 5,66,606 (15.25%) 48. मऊ - 3,00,223 (17.52%) 49. बलिया - 4,55,976 (18.16%) 50. गोरखपुर - 6,45,625 (17.61%) 51. महाराजगंज - 3,01,022 (15.11%) 52.देवरिया - 4,14,799 (17.22%) 53.कुशीनगर - 5,02,640 (18.65%) 45. सोनभद्र - 2,51,964 (17.93%) 46. ​​भदोही - 2,06,320 (16.73%) 47. आजमगढ़ - 5,66,606 (15.25%) 48. मऊ - 3,00,223 (17.52%) 49. बलिया - 4,55,976 (18.16%) 50. गोरखपुर - 6,45,625 (17.61%) 51. महाराजगंज - 3,01,022 (15.11%) 52.देवरिया - 4,14,799 (17.22%) 53.कुशीनगर - 5,02,640 (18.65%) 54. बस्ती - 2,98,287 (15.70%) 55. सिद्धार्थनगर - 3,98,900 (20.33%) 56. संत कबीर नगर - 2,66,870 (19.96%) 57. लखनऊ - 12,00,138 (30.04%) 58.उन्नाव - 4,07,171 (17.51%) 59. रायबरेली - 3,48,862 (16.35%) 60.सीतापुर - 6,23,772 (19.55%) 61.हरदोई - 5,44,682 (18.04%) 62. खीरी (लखीमपुर) – 5,05,802 (17.50%) 63. गोंडा - 4,69,637 (18.40%) 64.बहराइच - 5,41,328 (20.44%) 65.बलरामपुर - 4,11,200 (25.98%) 66. श्रावस्ती - 1,34,992 (16.51%) 67. अयोध्या - 3,35,742 (17.69%) 68. सुल्तानपुर - 3,16,947 (17.19%) 69. बाराबंकी - 3,73,154 (16.00%) 70. अम्बेडकर नगर - 2,58,547 (13.82%) 71. कासगंज - 1,72,238 (16.28%) 72.अमेठी - 2,67,241 (18.60%) 73. हापुड - 2,57,903 (22.30%) 74. शामली - 1,63,458 (16.75%) 75. संभल - 3,18,601 (20.29%)

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    *पर्यावरण व विद्युत नियमों का खुला उल्लंघन: एटा के आराजीवीरहार गांव में हरे पीपल-बरगद के पेड़ों में मोटी कीलें ठोंककर गुजारी जा रही 11KV हाई टेंशन लाइन* 
*रवेन्द्र जादौन की खास रिपोर्ट एटा ✍️* 
एटा, 09 जनवरी 2026 ~ जनपद  के उपखंड जलेसर अंतर्गत तखावन विद्युत उपकेंद्र के क्षेत्र में आने वाले गांव आराजी वीरहार में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही व नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक आश्रम परिसर के विशाल हरे-भरे पीपल और बरगद के पवित्र वृक्षों में लोहे की मोटी कीलें ठोंककर 11KV हाई टेंशन लाइन गुजारी जा रही है। इस अमानवीय व पर्यावरण-विरोधी कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे जनपद भर में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों व पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि यह कार्य न केवल पेड़ों की जान लेने वाला है, बल्कि मानव जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। विद्युत विभाग के ठेकेदारों व कर्मियों द्वारा बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे जीवित वृक्षों में कीलें गाड़कर तार खींचना भारतीय विद्युत नियमों (Indian Electricity Rules, 1956) का सीधा उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, ओवरहेड लाइनों के लिए पेड़ों को नुकसान पहुंचाना या उनमें कीलें ठोंकना सख्त वर्जित है। विभाग की जिम्मेदारी है कि लाइनें पोल्स या सुरक्षित संरचनाओं से गुजारी जाएं, न कि जीवित पेड़ों को मारकर या जख्मी कर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी कई मामलों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेड़ों पर तार लपेटना या कीलें ठोंकना बंद किया जाए, क्योंकि इससे पेड़ों की सेहत बिगड़ती है और पक्षियों सहित जीव-जंतुओं को खतरा होता है। इसके अलावा, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार व संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। पवित्र पीपल व बरगद जैसे वृक्षों को जान बूझकर नुकसान पहुंचाना इस अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है, जो प्रदूषण नियंत्रण व पर्यावरण सुधार पर जोर देता है। ऐसे कृत्य से पेड़ सूख सकते हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी, मिट्टी का क्षरण और जैव विविधता को गहरा नुकसान होगा। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम परिसर में ये विशाल वृक्ष दशकों पुराने हैं और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। कीलें ठोंकने से पेड़ों में संक्रमण फैल सकता है, जिससे वे धीरे-धीरे मर जाएंगे। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे मजदूर बेखौफ होकर यह कार्य कर रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। 
*कठोर कार्रवाई की मांग*  पर्यावरणविदों व स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी एटा, अधीक्षण अभियंता विद्युत व वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दोषी ठेकेदारों व कर्मियों पर IPC की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम व विद्युत नियमों के उल्लंघन में FIR दर्ज कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, लाइन को वैकल्पिक पोल्स से गुजारकर पेड़ों को बचाया जाए। विद्युत विभाग की यह लापरवाही नई नहीं है। जनपद में पहले भी हाई टेंशन लाइनों से दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सबक नहीं लिया जाता। यदि शीघ्र कार्यवाही  नहीं हुई तो ग्रामीण बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। यह मामला योगी सरकार के 'हरियाली अभियान' व 'पर्यावरण संरक्षण' के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर कब तक विभागीय मनमानी से प्रकृति व जनता को खतरे में डाला जाता रहेगा ?
    user_Ravendra Jadon पत्रकार
    Ravendra Jadon पत्रकार
    Journalist Jalesar, Etah•
    13 hrs ago
  • *पर्यावरण व विद्युत नियमों का खुला उल्लंघन: एटा के आराजीवीरहार गांव में हरे पीपल-बरगद के पेड़ों में मोटी कीलें ठोंककर गुजारी जा रही 11KV हाई टेंशन लाइन* एटा, 09 जनवरी 2026: जनपद एटा के उपखंड जलेसर अंतर्गत तखावन विद्युत उपकेंद्र के क्षेत्र में आने वाले गांव आराजीवीरहार में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही व नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक आश्रम परिसर के विशाल हरे-भरे पीपल और बरगद के पवित्र वृक्षों में लोहे की मोटी कीलें ठोंककर 11KV हाई टेंशन लाइन गुजारी जा रही है। इस अमानवीय व पर्यावरण-विरोधी कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे जनपद भर में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों व पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि यह कार्य न केवल पेड़ों की जान लेने वाला है, बल्कि मानव जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। विद्युत विभाग के ठेकेदारों व कर्मियों द्वारा बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे जीवित वृक्षों में कीलें गाड़कर तार खींचना भारतीय विद्युत नियमों (Indian Electricity Rules, 1956) का सीधा उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, ओवरहेड लाइनों के लिए पेड़ों को नुकसान पहुंचाना या उनमें कीलें ठोंकना सख्त वर्जित है। विभाग की जिम्मेदारी है कि लाइनें पोल्स या सुरक्षित संरचनाओं से गुजारी जाएं, न कि जीवित पेड़ों को मारकर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी कई मामलों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेड़ों पर तार लपेटना या कीलें ठोंकना बंद किया जाए, क्योंकि इससे पेड़ों की सेहत बिगड़ती है और पक्षियों सहित जीव-जंतुओं को खतरा होता है।इसके अलावा, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार व संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। पवित्र पीपल व बरगद जैसे वृक्षों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना इस अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है, जो प्रदूषण नियंत्रण व पर्यावरण सुधार पर जोर देता है। ऐसे कृत्य से पेड़ सूख सकते हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी, मिट्टी का क्षरण और जैव विविधता को गहरा नुकसान होगा। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम परिसर में ये विशाल वृक्ष दशकों पुराने हैं और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। कीलें ठोंकने से पेड़ों में संक्रमण फैल सकता है, जिससे वे धीरे-धीरे मर जाएंगे। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे मजदूर बेखौफ होकर यह कार्य कर रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।कठोर कार्रवाई की मांग: पर्यावरणविदों व स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी एटा, अधीक्षण अभियंता विद्युत व वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दोषी ठेकेदारों व कर्मियों पर IPC की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम व विद्युत नियमों के उल्लंघन में FIR दर्ज कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, लाइन को वैकल्पिक पोल्स से गुजारकर पेड़ों को बचाया जाए। विद्युत विभाग की यह लापरवाही नई नहीं है। जनपद में पहले भी हाई टेंशन लाइनों से दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सबक नहीं लिया जाता। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।यह मामला योगी सरकार के 'हरियाली अभियान' व 'पर्यावरण संरक्षण' के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर कब तक विभागीय मनमानी से प्रकृति व जनता को खतरे में डाला जाता रहेगा?
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    *पर्यावरण व विद्युत नियमों का खुला उल्लंघन: एटा के आराजीवीरहार गांव में हरे पीपल-बरगद के पेड़ों में मोटी कीलें ठोंककर गुजारी जा रही 11KV हाई टेंशन लाइन* 
एटा, 09 जनवरी 2026: जनपद एटा के उपखंड जलेसर अंतर्गत तखावन विद्युत उपकेंद्र के क्षेत्र में आने वाले गांव आराजीवीरहार में विद्युत विभाग की घोर लापरवाही व नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक आश्रम परिसर के विशाल हरे-भरे पीपल और बरगद के पवित्र वृक्षों में लोहे की मोटी कीलें ठोंककर 11KV हाई टेंशन लाइन गुजारी जा रही है। इस अमानवीय व पर्यावरण-विरोधी कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे जनपद भर में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीणों व पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि यह कार्य न केवल पेड़ों की जान लेने वाला है, बल्कि मानव जीवन को भी खतरे में डाल रहा है। विद्युत विभाग के ठेकेदारों व कर्मियों द्वारा बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे जीवित वृक्षों में कीलें गाड़कर तार खींचना भारतीय विद्युत नियमों (Indian Electricity Rules, 1956) का सीधा उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, ओवरहेड लाइनों के लिए पेड़ों को नुकसान पहुंचाना या उनमें कीलें ठोंकना सख्त वर्जित है। विभाग की जिम्मेदारी है कि लाइनें पोल्स या सुरक्षित संरचनाओं से गुजारी जाएं, न कि जीवित पेड़ों को मारकर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने भी कई मामलों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेड़ों पर तार लपेटना या कीलें ठोंकना बंद किया जाए, क्योंकि इससे पेड़ों की सेहत बिगड़ती है और पक्षियों सहित जीव-जंतुओं को खतरा होता है।इसके अलावा, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत केंद्र सरकार व संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है। पवित्र पीपल व बरगद जैसे वृक्षों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना इस अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है, जो प्रदूषण नियंत्रण व पर्यावरण सुधार पर जोर देता है। ऐसे कृत्य से पेड़ सूख सकते हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी, मिट्टी का क्षरण और जैव विविधता को गहरा नुकसान होगा। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम परिसर में ये विशाल वृक्ष दशकों पुराने हैं और धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। कीलें ठोंकने से पेड़ों में संक्रमण फैल सकता है, जिससे वे धीरे-धीरे मर जाएंगे। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे मजदूर बेखौफ होकर यह कार्य कर रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।कठोर कार्रवाई की मांग: पर्यावरणविदों व स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी एटा, अधीक्षण अभियंता विद्युत व वन विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दोषी ठेकेदारों व कर्मियों पर IPC की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम व विद्युत नियमों के उल्लंघन में FIR दर्ज कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, लाइन को वैकल्पिक पोल्स से गुजारकर पेड़ों को बचाया जाए। विद्युत विभाग की यह लापरवाही नई नहीं है। जनपद में पहले भी हाई टेंशन लाइनों से दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सबक नहीं लिया जाता। यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।यह मामला योगी सरकार के 'हरियाली अभियान' व 'पर्यावरण संरक्षण' के दावों पर भी सवाल खड़े करता है। आखिर कब तक विभागीय मनमानी से प्रकृति व जनता को खतरे में डाला जाता रहेगा?
    user_आदित्य कुमार  पत्रकार
    आदित्य कुमार पत्रकार
    Journalist जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • प्रजापति समाज से ही भारत का मंगल प्रारम्भ होता है माहनवई जलेसर गिरीश दक्ष सेनाध्यक्ष जलेसर
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    प्रजापति समाज  से ही भारत  
का मंगल प्रारम्भ होता है
माहनवई जलेसर  गिरीश दक्ष सेनाध्यक्ष जलेसर
    user_गिरीश प्रजापति Prajapati
    गिरीश प्रजापति Prajapati
    जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में बिसौली कस्बे में इस्लामनगर चौराहे पर मोबाइल विक्रेता भुवनेश कुमार ने बीमे की राशि पानी के लिए अपनी ही मोबाइल की दुकान में रची चोरी की साजिश पुलिस ने किया बेनकाब और भेजा सलाखों के पीछे। इस पूरे प्रकरण पर जानकारी देते हुए सीओ बिसौली सुनील कुमार सिंह
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    उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में बिसौली कस्बे में इस्लामनगर चौराहे पर मोबाइल विक्रेता भुवनेश कुमार ने बीमे की राशि पानी के लिए अपनी ही मोबाइल की दुकान में रची चोरी की साजिश पुलिस ने किया बेनकाब और भेजा सलाखों के पीछे। इस पूरे प्रकरण पर जानकारी देते हुए सीओ बिसौली सुनील कुमार सिंह
    user_Journalist
    Journalist
    Journalist बदायूँ, बदायूँ, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • एटा Big ब्रोकिंग ग्राम सचिवालय पर बच्चों को खेलने को लेकर हुआ विवाद बच्चों को खेलने को लेकर दो पक्षों में चले लाठी डंडे, पथराव लाठी डंडे का पथराव का वीडियो हुआ सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में युवक पथराव करते हुए दिख रहा है दो समुदायों में चले लाठी डंडे और पथराव थाना कोतवाली अवागढ़ ग्राम तिसार पंचायत सचिवालय को लेकर हुआ था विवाद
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    एटा Big ब्रोकिंग 
ग्राम सचिवालय पर बच्चों को खेलने को लेकर हुआ विवाद
बच्चों को खेलने को लेकर दो पक्षों में चले लाठी डंडे, पथराव
लाठी डंडे का पथराव का वीडियो हुआ सोशल मीडिया पर वायरल
वीडियो में युवक पथराव करते हुए दिख रहा है
दो समुदायों में चले लाठी डंडे और पथराव
थाना कोतवाली अवागढ़ ग्राम तिसार पंचायत सचिवालय को लेकर हुआ था विवाद
    user_आदित्य कुमार  पत्रकार
    आदित्य कुमार पत्रकार
    Journalist जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
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