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राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी जी,को मारवाड़ जंक्शन दौरा,के अवसर पर महाराणा प्रताप जन्म स्थली विकास समिति द्वारा दिया ज्ञापन। पाली।पाली जिला के विधायक कैसाराम चौधरी, मारवाड़ जंक्शन पर करोड़ों की विकास योजनाओं का शुभारंभ के अवसर पर जूनी कचहरी परिसर में महाराणा प्रताप जन्म स्थली विकास समिति के अध्यक्ष शैतान सिंह सौनीगरा, पूर्व सांसद पुष्प जैन, उगमराज सांड, महेंद्र बौहरा, पूर्व सभापति,नगर परिषद्,पाली, चंपालाल सिसोदिया,रितिक छाजेड़ आदि ने महाराणा प्रताप जन्म स्थली विकास हेतु लिखित में ज्ञापन दिया गया।लैक्मे है,कि ऊंट किस करवट बैठता है? (छगनलाल भारद्वाज प्रधान संपादक)
CHHAGANLAL BHARDWAJ
राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी जी,को मारवाड़ जंक्शन दौरा,के अवसर पर महाराणा प्रताप जन्म स्थली विकास समिति द्वारा दिया ज्ञापन। पाली।पाली जिला के विधायक कैसाराम चौधरी, मारवाड़ जंक्शन पर करोड़ों की विकास योजनाओं का शुभारंभ के अवसर पर जूनी कचहरी परिसर में महाराणा प्रताप जन्म स्थली विकास समिति के अध्यक्ष शैतान सिंह सौनीगरा, पूर्व सांसद पुष्प जैन, उगमराज सांड, महेंद्र बौहरा, पूर्व सभापति,नगर परिषद्,पाली, चंपालाल सिसोदिया,रितिक छाजेड़ आदि ने महाराणा प्रताप जन्म स्थली विकास हेतु लिखित में ज्ञापन दिया गया।लैक्मे है,कि ऊंट किस करवट बैठता है? (छगनलाल भारद्वाज प्रधान संपादक)
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- रक्षाबंधन पर डाक विभाग की विशेष सौगात अब राखी और उपहार भेजें सुरक्षित, सस्ते और समय पर मनोज शर्मा, वॉइस ऑफ मारवाड़ पाली, 01 अगस्त। आगामी रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए डाक विभाग ने भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के इस पावन पर्व को यादगार बनाने के लिए विशेष "राखी स्पेशल सेवा" शुरू की है। अधीक्षक डाकघर, पाली श्री तरुण कुमार शर्मा ने बताया कि बहनों द्वारा अपने भाइयों को सुरक्षित एवं समय पर राखी पहुँचाने के उद्देश्य से डाक विभाग द्वारा विशेष राखी स्पेशल कवर उपलब्ध कराए गए हैं। छोटे राखी कवर का मूल्य मात्र ₹10 तथा बड़े राखी कवर का मूल्य ₹15 निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त राखी के साथ उपहार एवं अन्य सामग्री भेजने के लिए विशेष राखी गिफ्ट बॉक्स भी उपलब्ध है, जिसकी कीमत ₹30 है। उन्होंने बताया कि डाक विभाग की यह विशेष सुविधा देश के किसी भी कोने में रहने वाले भाई-बहनों के प्रेम और विश्वास को समय पर एक-दूसरे तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। विभाग ने रक्षाबंधन के अवसर पर डाक के त्वरित निस्तारण एवं समयबद्ध वितरण के लिए विशेष व्यवस्थाएँ भी की हैं। श्री शर्मा ने आमजन से अपील की है कि वे रक्षाबंधन से पूर्व अपनी राखी एवं उपहार निकटतम डाकघर से समय रहते बुक कराएं, ताकि भाई-बहन के स्नेह का यह पावन संदेश समय पर अपने गंतव्य तक पहुँच सके। "डाक विभाग – रिश्तों की डोर, विश्वास के साथ हर घर तक।"1
- बारिश से मौसम हुआ सुहावना, गर्मी व उमस से मिली राहत..... बारिश से मौसम हुआ सुहावना, गर्मी व उमस से मिली राहत रानी/नाडोल। कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों को शनिवार शाम हुई बारिश ने बड़ी राहत दी। शाम करीब 5 से 6 बजे तक लगभग एक घंटे तक लगातार हुई बारिश से नाडोल सहित आसपास के गांवों का मौसम सुहावना हो गया। बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। काफी दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के चेहरों पर भी खुशी लौट आई। जिन किसानों ने पहले ही बुवाई कर दी थी, उनके लिए यह बारिश किसी संजीवनी से कम नहीं रही। बारिश से खेतों में नमी बढ़ने से फसलों को लाभ मिलने की उम्मीद है। लगातार उमस भरे मौसम से परेशान आमजन ने बारिश का आनंद लिया। कई स्थानों पर लोगों ने घरों से बाहर निकलकर ठंडी फुहारों का आनंद उठाया। मौसम में आए इस बदलाव से क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह खुशनुमा हो गया।1
- स्व. श्री राजकुमार सिंह भण्डारी की प्रतिमा अनावरण समारोह दिव्यलोक सेवा संस्थान, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, जोधपुर में स्वर्गीय श्री राजकुमार सिंह भण्डारी की प्रतिमा का अनावरण अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। दिव्यलोक सेवा संस्थान, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, जोधपुर में स्वर्गीय श्री राजकुमार सिंह भण्डारी की प्रतिमा का अनावरण अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह अवसर केवल एक प्रतिमा के अनावरण का नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व के आदर्शों, सेवा-भाव और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को स्मरण करने का था, जिन्होंने अपने जीवन से अनेक लोगों को प्रेरणा प्रदान की। समारोह में उपस्थित अतिथियों ने स्व. भण्डारी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा, समर्पण, सादगी और मानवीय मूल्यों का अनुपम उदाहरण था। वक्ताओं ने उनके द्वारा समाजहित में किए गए कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियाँ और आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।1
- भारत वासियो को सम्बोधित करती एक महिला शक्ति,नीट परीक्षा मे पास होना जरूरी है माता, पिता । लोग किया कहेगें ,इज्जत चली जाएगी । कृपया अपने बच्चों पर घ्यान दे स्नेह करे किसी प्रकार का दबाव नही बनाए समझाये जीवन बहुत अनमोल है इनको सही रास्ता दिखाएं कोनसा सही है कोनसा गलत । माता पिता इस वीडियो को अवश्य देखें सुने ओर समझें वेसे आप सभी बहुत अनुभवी एवं ज्ञानी है समझदार है किया अच्छा है किया बुरा । महेश पंचारिया पत्रकार कुछ ग़लत लिखा हो तो आप सभी से क्षमा चाहता हूं।1
- पुलिस ने केबल चोरी के दो आरोपियों को किया गिरफ्तार; तांबे के तार और बाइक बरामद, पुछताछ जारी: राजसमंद के आमेट थाना क्षेत्र का मामला1
- बेंगलुरु से लिखी जाएगी प्रवासी राजस्थानियों के स्वर्णिम भविष्य की नई इबारत 60 दिनों के सामूहिक संकल्प ने रचा इतिहास, पहली बार एक मंच पर आएंगे वैश्विक राजस्थानी, सरकार, उद्योग और समाज; ₹3,000 करोड़ के संभावित निवेश को मिलेगी नई दिशा बेंगलुरु/दलपतसिंह भायल। राजस्थान फाउंडेशन, बेंगलुरु चैप्टर की पहल पर बेंगलुरु में पहली बार देश-विदेश में बसे प्रवासी राजस्थानियों, उद्योगपतियों, सामाजिक संगठनों, विभिन्न धर्मों एवं समाजों के प्रतिनिधियों तथा राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का ऐतिहासिक महासंगम आयोजित होने जा रहा है। यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि राजस्थान के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और वैश्विक भविष्य को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अभियान माना जा रहा है। महज 60 दिनों की अथक मेहनत, सुनियोजित रणनीति और सामूहिक संकल्प के बल पर इस विशाल आयोजन को साकार किया गया है। सीमित समय में हजारों लोगों को एक मंच से जोड़ते हुए व्यापक तैयारियां पूरी करना अपने आप में एक मिसाल है। आयोजन यह संदेश देता है कि जब समाज किसी बड़े उद्देश्य के लिए एकजुट होता है, तब समय और संसाधन भी सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बनते। कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के प्रमुख सचिव, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, नीति-निर्माता तथा देश-विदेश से आए प्रवासी राजस्थानी भाग लेंगे। इस दौरान लगभग ₹3,000 करोड़ के संभावित निवेश प्रस्तावों (एमओयू) पर चर्चा होने की संभावना है, जिससे राजस्थान में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। राजस्थान फाउंडेशन, बेंगलुरु चैप्टर के अध्यक्ष सचिन पांडिया ने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हजारों लोगों के सामूहिक विश्वास, सहयोग और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने बताया कि समाज ने केवल एक संदेश और एक फोन कॉल पर भरोसा जताते हुए एक करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक सहयोग प्रदान किया। उनके अनुसार समाज का विश्वास और नैतिक समर्थन ही इस आयोजन की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का संदेश 'संगच्छध्वं संवदध्वं' अर्थात साथ चलने और मिलकर आगे बढ़ने की भावना इस आयोजन की आधारशिला है। समाज जब परिवार बनकर कार्य करता है, तब असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी सहजता से प्राप्त हो जाते हैं। आयोजन को सफल बनाने में बेंगलुरु की युवा टीम, महिला टीम, विभिन्न समितियों के सदस्य तथा 100 से अधिक समर्पित स्वयंसेवकों ने दिन-रात मेहनत की है। हजारों लोगों की सहभागिता और लाखों प्रवासी राजस्थानी परिवारों का उत्साह इस आयोजन की सबसे बड़ी पूंजी बनकर उभरा है। सचिन पांडिया ने आयोजन में सहयोग देने वाले उद्योगपतियों, सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवकों, दानदाताओं और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रत्येक सहयोग समाज के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला अमूल्य योगदान है। उन्होंने मीडिया सहयोगी ज़ी टीवी राजस्थान, गंगौर टीवी और सिम्प्लिसिटी मैगज़ीन का भी विशेष धन्यवाद दिया, जिन्होंने आयोजन को देश-विदेश में बसे प्रवासी राजस्थानियों तक पहुंचाने और लाइव प्रसारण के माध्यम से इसकी वैश्विक पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह आयोजन केवल निवेश और उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और प्रवासी समाज की एकजुटता का भी भव्य उत्सव बनेगा। राजस्थान फाउंडेशन, बेंगलुरु चैप्टर का उद्देश्य समाज को जोड़ना, नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से परिचित कराना तथा राजस्थान के समग्र विकास के लिए एक सशक्त और स्थायी मंच तैयार करना है। बेंगलुरु से शुरू हो रही यह पहल आने वाले वर्षों में प्रवासी राजस्थानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। यदि यह अभियान अपने उद्देश्यों को प्राप्त करता है, तो यह पूरे देश के लिए उदाहरण बनेगा कि जब समाज, सरकार और उद्योग एक साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं, तब विकास केवल योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी का सशक्त आंदोलन बन जाता है। प्रवासी राजस्थानियों के इतिहास में यह आयोजन एक नए स्वर्णिम अध्याय का सूत्रपात करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।1
- बेड़ा के युवा उद्यमी ने आदिवासी 300 महिलाओं को दिया रोजगार,सीताफल-जामुन से बनाई सफलता की नई कहानी* *बेड़ा के युवा उद्यमी ने आदिवासी 300 महिलाओं को दिया रोजगार,सीताफल-जामुन से बनाई सफलता की नई कहानी* उपखण्ड बाली क्षेत्र बेड़ा के युवा उद्यमी ने आदिवासी महिलाओं को दिया रोजगार, सीताफल-जामुन से बनाई सफलता की नई कहानी बेड़ा कस्बे के युवा उद्यमी मुकेश ओझा ने उदयपुर के पास जसवंतगढ़ में अपनी सोच, नवाचार और सामाजिक सरोकार के दम पर आदिवासी अंचल की महिलाओं के लिए रोजगार का नया मॉडल तैयार किया है उन्होंने जंगलों में मिलने वाले सीताफल और जामुन जैसे फलों का प्रसंस्करण कर फूड प्रोसेसिंग का कार्य शुरू किया, जिससे आज करीब 300 आदिवासी महिलाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है । डीके देवासी को जानकारी गिरीश वियास देते हुए मुकेश ओझा ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में हर वर्ष बड़ी मात्रा में सीताफल और जामुन उपलब्ध होते हैं, लेकिन समय पर बाजार नहीं मिलने के कारण अधिकांश फल खराब हो जाते थे किसानों और आदिवासी परिवारों को इसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता था इसी समस्या को अवसर में बदलने की सोच के साथ उन्होंने फूड प्रोसेसिंग यूनिट की नवम्बर 2025 में सखी एग्रो कम्पनी से शुरुआत की कंपनी के माध्यम से महिलाएं फल संग्रह, छंटाई, गूदा निकालने, प्रसंस्करण और पैकेजिंग जैसे कार्यों से जुड़ी हैं। इससे उन्हें अपने गांव के आसपास ही रोजगार मिल रहा है और उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है। यह पहल आदिवासी परिवारों के लिए आर्थिक संबल बनकर उभरी है ओझा ने बताया कि कंपनी प्राकृतिक स्वाद और गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए सीताफल और जामुन से विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही है। इन उत्पादों में किसी प्रकार के कृत्रिम स्वाद या रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे उपभोक्ताओं को प्राकृतिक और पौष्टिक उत्पाद उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। भविष्य में इस पहल का विस्तार कर और अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की योजना है ग्रामीणों का कहना है कि पहले जंगलों से मिलने वाले फल बेकार चले जाते थे, लेकिन अब उन्हें उचित दाम मिलने लगे हैं महिलाओं को गांव में ही रोजगार मिलने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनके जीवन स्तर में भी सुधार आया है मुकेश ओझा की यह पहल आज ग्रामीण उद्यमिता, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और महिला सशक्तिकरण का प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह प्रयास अब सैकड़ों परिवारों के लिए आजीविका का मजबूत आधार बन गया है2