अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस | 👁️ तीसरी आंख का सच कल 8 मार्च था। सुबह से ही सोशल मीडिया पर बधाइयों की बारिश थी। “Happy Women’s Day”, “नारी शक्ति”, “Respect Women”, “Give to Gain” — जैसे अचानक पूरी दुनिया को महिलाओं की याद आ गई हो। किसी ने सेल्फी डाली, किसी ने भाषण दिया, किसी ने मंदिर में मुफ्त दर्शन की घोषणा कर दी, किसी ने बस किराए में छूट दे दी। शाम तक टाइमलाइन गुलाबी थी… और ज़मीन पर सच्चाई वही पुरानी। अब सवाल यह नहीं है कि महिला दिवस मनाया गया या नहीं। सवाल यह है कि उसमें सच्चाई कितनी थी और दिखावा कितना। अगर ईमानदारी से देखें तो सच थोड़ा कड़वा है। लगभग 70% ढोंग था। वही लोग जो साल के बाकी 364 दिन महिलाओं की आवाज़ नहीं सुनते, 8 मार्च को अचानक “नारी सम्मान” के पोस्ट डालने लगते हैं। कार्यालय में “महिलाओं के सम्मान” का केक काटा गया, लेकिन उसी ऑफिस में वही महिला कर्मचारी कल भी ओवरटाइम करेगी, और क्रेडिट किसी और के नाम जाएगा। सोशल मीडिया पर “You are strong” लिखने वाला पति रात को घर आकर पूछेगा – “खाना बना या नहीं?” जैसे महिला दिवस सिर्फ स्टेटस अपडेट का त्योहार हो। फिर करीब 25% औपचारिकता। सरकारी घोषणाएँ — मंदिर में मुफ्त प्रवेश, बस में छूट, महिला सशक्तिकरण के भाषण। अच्छा लगता है सुनकर। लेकिन ये छूट उस औरत को क्या राहत देगी जो रोज बस में खड़ी होकर छेड़छाड़ सहती है? जो भीड़ में अपने शरीर को बचाने के लिए अपनी ही साड़ी को ढाल बना लेती है? टिकट सस्ता होने से सफर आसान हो सकता है, लेकिन सम्मान सस्ता नहीं होता। सम्मान तब होता जब छेड़छाड़ करने वाला आदमी दो घंटे में जेल पहुँचे, न कि दो साल तक केस की फाइल धूल खाती रहे। और बाकी सिर्फ 5% सच था। वो महिला पुलिसकर्मी जो सीमा पर ड्यूटी कर रही थी। वो ग्रामीण औरत जिसने स्वयं सहायता समूह में 500 रुपये बचाकर पहली बार अपना बैंक खाता खोला। वो माँ जो समाज की तानों के बावजूद अपनी बेटी को पढ़ा रही है। वो महिला जो घरेलू हिंसा के बाद खड़ी हुई और बोली — “अब बस।” यही असली नारी शक्ति है। बाकी सब टिन के तमगे हैं। सबसे कड़वी बात यह है कि अगर सच में महिलाओं का सम्मान होता, तो शायद महिला दिवस की जरूरत ही नहीं पड़ती। सम्मान किसी एक तारीख का मोहताज नहीं होता। जिस दिन 9 मार्च को भी औरत सुरक्षित, सम्मानित और बराबर महसूस करेगी, उस दिन 8 मार्च खुद ही बेमानी हो जाएगा। तब तक 8 मार्च एक खूबसूरत झूठ है। और उस झूठ में हम सब कहीं न कहीं शामिल हैं। हम सब। और हाँ— इस पोस्ट को शेयर करने से पहले बस एक सवाल खुद से पूछ लेना… कल से क्या बदलोगे?
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस | 👁️ तीसरी आंख का सच कल 8 मार्च था। सुबह से ही सोशल मीडिया पर बधाइयों की बारिश थी। “Happy Women’s Day”, “नारी शक्ति”, “Respect Women”, “Give to Gain” — जैसे अचानक पूरी दुनिया को महिलाओं की याद आ गई हो। किसी ने सेल्फी डाली, किसी ने भाषण दिया, किसी ने मंदिर में मुफ्त दर्शन की घोषणा कर दी, किसी ने बस किराए में छूट दे दी। शाम तक टाइमलाइन गुलाबी थी… और ज़मीन पर सच्चाई वही पुरानी। अब सवाल यह नहीं है कि महिला दिवस मनाया गया या नहीं। सवाल यह है कि उसमें सच्चाई कितनी थी और दिखावा कितना। अगर ईमानदारी से देखें तो सच थोड़ा कड़वा है। लगभग 70% ढोंग था। वही लोग जो साल के बाकी 364 दिन महिलाओं की आवाज़ नहीं सुनते, 8 मार्च को अचानक “नारी सम्मान” के पोस्ट डालने लगते हैं। कार्यालय में “महिलाओं के सम्मान” का केक काटा गया, लेकिन उसी ऑफिस में वही महिला कर्मचारी कल भी ओवरटाइम करेगी, और क्रेडिट किसी और के नाम जाएगा। सोशल मीडिया पर “You are strong” लिखने वाला पति रात को घर आकर पूछेगा – “खाना बना या नहीं?” जैसे महिला दिवस सिर्फ स्टेटस अपडेट का त्योहार हो। फिर करीब 25% औपचारिकता। सरकारी घोषणाएँ — मंदिर में मुफ्त प्रवेश, बस में छूट, महिला सशक्तिकरण के भाषण। अच्छा लगता है सुनकर। लेकिन ये छूट उस औरत को क्या राहत देगी जो रोज बस में खड़ी होकर छेड़छाड़ सहती है? जो भीड़ में अपने शरीर को बचाने के लिए अपनी ही साड़ी को ढाल बना लेती है? टिकट सस्ता होने से सफर आसान हो सकता है, लेकिन सम्मान सस्ता नहीं होता। सम्मान तब होता जब छेड़छाड़ करने वाला आदमी दो घंटे में जेल पहुँचे, न कि दो साल तक केस की फाइल धूल खाती रहे। और बाकी सिर्फ 5% सच था। वो महिला पुलिसकर्मी जो सीमा पर ड्यूटी कर रही थी। वो ग्रामीण औरत जिसने स्वयं सहायता समूह में 500 रुपये बचाकर पहली बार अपना बैंक खाता खोला। वो माँ जो समाज की तानों के बावजूद अपनी बेटी को पढ़ा रही है। वो महिला जो घरेलू हिंसा के बाद खड़ी हुई और बोली — “अब बस।” यही असली नारी शक्ति है। बाकी सब टिन के तमगे हैं। सबसे कड़वी बात यह है कि अगर सच में महिलाओं का सम्मान होता, तो शायद महिला दिवस की जरूरत ही नहीं पड़ती। सम्मान किसी एक तारीख का मोहताज नहीं होता। जिस दिन 9 मार्च को भी औरत सुरक्षित, सम्मानित और बराबर महसूस करेगी, उस दिन 8 मार्च खुद ही बेमानी हो जाएगा। तब तक 8 मार्च एक खूबसूरत झूठ है। और उस झूठ में हम सब कहीं न कहीं शामिल हैं। हम सब। और हाँ— इस पोस्ट को शेयर करने से पहले बस एक सवाल खुद से पूछ लेना… कल से क्या बदलोगे?
- जगदलपुर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था निशा स्वर वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा टाउन हॉल में महिलाओं के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में नगर निगम की स्वच्छता दीदियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।1
- उमरगाँव(अ) में वन प्रबंधन समिति के सम्मेलन में लिए गए अहम निर्णय।1
- *✰तत्वदर्शी संत कौन है, उसकी पहचान क्या है?✰* जानने के लिए अवश्य देखिए *SANT RAMPAL JI MAHARAJ* YouTube Channel1
- कांकेर। प्रार्थी ने थाना उपस्थित होकर मौखिक रिपोर्ट दर्ज कराया कि दिनांक 07 मार्च की रात्रि में प्रार्थी की नाबालिक बेटी को कोई अज्ञात व्यक्ति के द्वारा घर से सोये स्थिति से उठाकर लेकर गया। प्रार्थी की रिपोर्ट पर थाना कांकेर में गुम इन्सान क्र. - 22/26 दिनांक 07.03.2026 कायम कर पृथक से अपराध क्र. 89/26 धारा 137(2) बीएनएस पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के निर्देशन में, योगेश साहू अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कांकेर के मार्गदर्शन में, श्री मोहसिन खान अनुविभागीय अधिकारी पुलिस कांकेर के पर्यवेक्षण में, थाना कांकेर द्वारा विषेष टीम गठित की जाकर नाबालिक बालिका व अज्ञात आरोपी के बारे में पता तलाश हेतु टीम रवाना किया गया। विवेचना के दौरान प्रार्थी की नाबालिक बेटी का पता तलाश के दौरान परिजनों के पेश करने पर दस्तयाब कर नाबालिक बालिका से पुछताछ करने पर एक व्यक्ति जो सफेद रंग का शर्ट एवं काले रंग का पैंट पहना हुआ था, उसके साथ एक और लडका था दोनों खेत की ओर ले जाकर गलत काम किया जाना बताई। ग्रामीणों से पुछताछ करने पर दिनांक 07 मार्च को रात्रि में गांव के अमित जैन और उसके दोस्त रोहन जैन को प्रार्थी के घर आस-पास घूमते देखना बताने पर दोनों को पुलिस अभिरक्षा में लेकर पुछताछ करने पर आरोपीगण के द्वारा दिनांक घटना को अपराध घटित करना कबूल करने पर आरोपी अमित कुमार जैन एवं रोहन जैन के द्वारा अपराध धारा 65(2),70(2),332 बीएनएस, 4,6,8,10 पाॅक्सो एक्ट का घटित होना पाये जाने से उक्त धारा का समावेश कर आरोपीगण के विरूद्ध विधिवत् कार्यवाही कर न्यायिक रिमाण्ड पर माननीय न्यायालय पेश किया गया। करवाई में पुलिस टीम में निरीक्षक जितेन्द्र कुमार साहू, सउनि भुनेश्वरी भगत, महिला प्रधान आरक्षक हितेश्वरी चेलक, आरक्षक रामू जुर्री, आरक्षकनअनिल मरकाम, महिला आरक्षक सुभिया गोटा शामिल थे। कांकेर पुलिस की अपील अपराध पर नियंत्रण पुलिस और जनता की साझा जिम्मेदारी हैं। कई बार आपकी एक छोटी सी सूचना बडे अपराधों को रोक सकती हें, इसी उद्देश्य से जिला उत्तर बस्तर कांकेर पुलिस द्वारा किसी भी संदिग्ध या अपराधिक गतिविधियों की जानकारी देने के लिए अपराधिक हेल्पलाईन नंबर 94791-55125 संचालित की जा रही हैं। यह दी गई हर सुचना एवं सूचनाकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती हैं।2
- Post by SAHIL Bhagat1
- छतरपुर की विधायिका ने रंगपंचमी के अवसर पर जमकर खेली होली। रंगों और गुलाल के साथ मनाया गया रंगपंचमी का उत्सव,1
- कहीं ऐसा ना हो मेरे पास खुदकुशी करने के अलावा और कोई विकल्प ना बचें। वर्ष 2007 बारहवीं कक्षा के अध्ययन के दौरान वर्षभर प्रतिदिन मुझे वें बातें कहीं गई जिसने मेरे जीवन में बहुत प्रभाव किया मैं जीवित हूं तो इसलिए लगता ताकि किसी और निर्दोषों को ऐसा प्रताड़ित ना किया जाएं। वर्ष 2021 में बनाया वीडियो । वर्तमान समय में दुर्गवासियों को मेरे समाजसेवी कार्यों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता हैं। 😔.1
- जगदलपुर में युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कैरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर आकाश छिकारा ने अग्निवीर भर्ती अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि वर्दी का अपना अलग ही क्रेज और सम्मान होता है। उन्होंने युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाते हुए देश सेवा के लिए आगे आने की अपील की।1