दतिया शहर में हो रहे विकास कार्य अब निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। इसी क्रम में, रेलवे द्वारा बनाई जा रही बाउंड्री को रोकने की मांग को लेकर शहर की लगभग दस कॉलोनियों और रामनगर डेरा के सैकड़ों निवासी न्यू कलेक्ट्रेट पहुँचे। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया, आरोप लगाया कि रेलवे विभाग रास्ता बंद कर रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह मार्ग आजादी के समय से ही आम रास्ते के रूप में उपयोग किया जा रहा है और यह उनके दैनिक आवागमन का प्रमुख साधन है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत गांव तक सड़क का निर्माण भी इसी मार्ग पर किया गया था। निवासियों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि यह रास्ता बंद होता है, तो हजारों लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। विशेष रूप से, स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुँचना पड़ेगा। इन सभी परेशानियों को देखते हुए, क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि आमजन की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए रेलवे की बाउंड्री निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाई जाए और लोगों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
दतिया शहर में हो रहे विकास कार्य अब निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। इसी क्रम में, रेलवे द्वारा बनाई जा रही बाउंड्री को रोकने की मांग को लेकर शहर की लगभग दस कॉलोनियों और रामनगर डेरा के सैकड़ों निवासी न्यू कलेक्ट्रेट पहुँचे। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया, आरोप लगाया कि रेलवे विभाग रास्ता बंद कर रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह मार्ग आजादी के समय से ही आम रास्ते के रूप में उपयोग किया जा रहा है और यह उनके दैनिक आवागमन का प्रमुख साधन है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत गांव तक सड़क का निर्माण भी इसी मार्ग पर किया गया था। निवासियों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि यह रास्ता बंद होता है, तो हजारों लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। विशेष रूप से, स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुँचना पड़ेगा। इन सभी परेशानियों को देखते हुए, क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि आमजन की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए रेलवे की बाउंड्री निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाई जाए और लोगों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला पहुंचकर मां वाग्देवी के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से पूजन-अर्चन भी संपन्न किया।1
- दतिया शहर में हो रहे विकास कार्य अब निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। इसी क्रम में, रेलवे द्वारा बनाई जा रही बाउंड्री को रोकने की मांग को लेकर शहर की लगभग दस कॉलोनियों और रामनगर डेरा के सैकड़ों निवासी न्यू कलेक्ट्रेट पहुँचे। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया, आरोप लगाया कि रेलवे विभाग रास्ता बंद कर रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह मार्ग आजादी के समय से ही आम रास्ते के रूप में उपयोग किया जा रहा है और यह उनके दैनिक आवागमन का प्रमुख साधन है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत गांव तक सड़क का निर्माण भी इसी मार्ग पर किया गया था। निवासियों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि यह रास्ता बंद होता है, तो हजारों लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। विशेष रूप से, स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुँचना पड़ेगा। इन सभी परेशानियों को देखते हुए, क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि आमजन की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए रेलवे की बाउंड्री निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाई जाए और लोगों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।1
- दतिया शहर के वार्ड क्रमांक-01 स्थित आदिवासी डेरा शनिवार को जंगल से उठी भीषण आग की चपेट में आ गया, जिससे देखते ही देखते लगभग 12 घर जलकर राख हो गए। आग इतनी भयावह थी कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और घरों में रखा राशन, कपड़े, नकदी, जरूरी दस्तावेज और वर्षों की गृहस्थी कुछ ही देर में नष्ट हो गई। इस विनाशकारी आग ने कई परिवारों की कमर तोड़ दी है। विकलांग माया आदिवासी ने बताया कि उसकी बेटी की शादी तय है और वह कई वर्षों से शादी के लिए धीरे-धीरे पैसा और सामान जुटा रही थी, लेकिन आग ने सब कुछ खत्म कर दिया। रोते हुए माया ने कहा कि अब उसके पास बेटी की शादी के लिए कुछ नहीं बचा। बलवंत आदिवासी के अनुसार, शनिवार दोपहर पहले जंगल में आग लगी थी, जो तेज हवा के कारण डेरा और मकानों तक फैल गई। इस त्रासदी में पिंजरों में बंद कई पक्षी भी जिंदा जल गए। घटना के बाद राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बावजूद न तो डायल 112 समय पर पहुंची और न ही दमकल की टीम। उनके मुताबिक, दमकल रात करीब 10 बजे मौके पर पहुंची, जब तक आग बस्ती में भीषण तबाही मचा चुकी थी। लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन पानी और संसाधनों की कमी के कारण वे सफल नहीं हो सके। क्षेत्र में बिजली न होने के कारण निजी बोरवेल भी चालू नहीं हो पाए, जिससे आग बुझाने में और भी मुश्किलें आईं। रविवार सुबह भी कई घरों में आग सुलग रही थी, और लोग जले हुए मकानों के बीच अपने सामान के अवशेष तलाशते दिखे। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष है, उनका कहना है कि यदि समय रहते दमकल और पुलिस पहुंच जाती तो नुकसान कम हो सकता था। फिलहाल, प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं और शासन-प्रशासन से तत्काल मुआवजे की मांग कर रहे हैं।1
- 'मुद्दा बुंदेलखंड का समाचार' एक हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र है। यह प्रकाशन बुंदेलखंड क्षेत्र से संबंधित समाचारों पर केंद्रित है।1
- दतिया के भांडेर विकासखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सालोंन बी में आज रविवार को एक ग्रामीण महिला की डिलीवरी होने पर अस्पताल स्टाफ ने नाल काटने के लिए तीन हजार रुपये की मांग की। आरोप है कि पैसे न मिलने पर पूरा स्वास्थ्य स्टाफ जच्चा-बच्चा को तड़पता छोड़कर अपने-अपने घरों को चला गया। इस घटना के बाद पीड़ित ने सी.एम. हेल्प लाइन पर शिकायत दर्ज कराई। जानकारी के अनुसार, इमलिया निवासी नारायण सिंह माहौर अपनी 26 वर्षीय पत्नी तनुजा माहौर की डिलीवरी कराने रविवार सुबह 9 बजे सालोंन बी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। दोपहर 12 बजे तनुजा ने एक बच्ची को जन्म दिया, जिसके बाद वहां पदस्थ नर्स ने नाल काटने के एवज में तीन हजार रुपये मांगे। प्रसूता के पति नारायण सिंह ने जब सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, तो अस्पताल का स्टाफ नाराज होकर अपने घर चला गया। इस भीषण गर्मी में जच्चा-बच्चा चार घंटे तक अस्पताल में पड़े रहे, जहां वार्डबॉय से लेकर स्टाफ नर्स और डॉक्टर कोई मौजूद नहीं था। सीएम हेल्पलाइन की शिकायत सुनने के कुछ समय बाद ही अस्पताल स्टाफ ने वापस आकर प्रसूता की नाल काटी। हितग्राही ने आरोप लगाया कि सालोंन बी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्मी से बचाव के लिए कूलर-पंखा की उचित व्यवस्था न होने के कारण जच्चा-बच्चा दोनों की जान को खतरा बना रहा। उन्होंने यह भी कहा कि सालोंन बी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की देखभाल को लेकर हर रोज ऐसी ही खराब हालत बनी रहती है। इस संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सालोंन बी के प्रभारी डॉ. अरविंद परिहार ने बताया कि वे दो दिन के अवकाश पर हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर उनके स्वास्थ्य केंद्र पर किसी स्टाफ द्वारा डिलीवरी के नाम पर पैसे की मांग की गई है या कार्य में लापरवाही की गई है, तो उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी।1
- मध्य प्रदेश के दतिया जिले के ग्रामीण क्षेत्र में जंगल से फैली आग ने एक आदिवासी बस्ती में भारी तबाही मचा दी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया, जिससे आदिवासी डेरा के लगभग 12 घर जलकर राख हो गए। इस भीषण आगजनी में घरों में रखा अनाज, कपड़े, घरेलू सामान और नगदी तक खाक हो गई। दुखद बात यह है कि एक परिवार ने अपनी बेटी की शादी के लिए जो सामान जुटाया था, वह भी इस आग की भेंट चढ़ गया, जिससे पूरा परिवार सदमे में है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जंगल में लगी आग तेज हवा के कारण तेजी से बस्ती तक फैल गई। आग की लपटें इतनी भयंकर थीं कि ग्रामीणों को अपने घरों से सामान निकालने तक का भी मौका नहीं मिला। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन आग लगातार फैलती रही। घटना की सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग को बुलाया गया, मगर लोगों का आरोप है कि फायर ब्रिगेड काफी देर से मौके पर पहुंची, जिससे नुकसान और बढ़ गया। दमकल की इस देरी को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई, और उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि दमकल समय पर पहुंच जाती तो नुकसान को कम किया जा सकता था। आगजनी की इस घटना के बाद प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता दिलाने का भरोसा दिया है। हालांकि, ग्रामीण तत्काल राहत सामग्री, आर्थिक मदद और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं ताकि वे इस आपदा से उबर सकें।1
- प्रेमी ने अपनी प्रेमिका रजनी की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। यह वारदात इसलिए हुई क्योंकि प्रेमिका रजनी, अपने प्रेमी पर लगातार साथ रहने का दबाव बना रही थी।1
- दतिया जिले में नौतपा की शुरुआत के साथ ही भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। सुबह से ही गर्म हवाएं चलने लगी हैं, जिसके कारण तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और लोगों का सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तेज धूप और लू के चलते लोग अपने घरों में ही रहने को मजबूर हैं, और केवल अति आवश्यक काम होने पर ही वे बाहर निकल रहे हैं। गर्मी का सीधा असर बाजारों पर भी दिख रहा है, जहां दोपहर के समय सड़कों और दुकानों पर सन्नाटा पसरा रहता है। लोगों की आवाजाही और दुकानदारी केवल सुबह और शाम के समय ही देखने को मिल रही है। इस तपती गर्मी से बचने के लिए लोग अपने चेहरे पर गमछा और दुपट्टा बांधकर निकल रहे हैं, वहीं शरीर को ठंडा रखने के लिए पानी, शिकंजी, जूस और अन्य तरल पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तापमान में और अधिक वृद्धि की संभावना जताई है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता और भी बढ़ गई है।1