बेटी ने पूरी की पिता की आखिरी इच्छा तो भर आई सबकी आंखें, हार्ट की लंबी बीमारी से निधन के बाद दी बड़ी बेटी ने मुखाग्नि,पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया।बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो पिता की अर्थी को कंधा देती दोनों बेटी , 19 अप्रैल 2026 दिन रविवार को पटना सिटी के बाहरी बेगमपुर निवासी विनय कृष्ण मौर्य की अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। यह यात्रा सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि परंपराओं को चुनौती देने और समाज में नई सोच को जन्म देने वाला क्षण बन गई। जब अर्थी उठी, तो सबसे आगे बढ़ीं उनकी बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि । आंसुओं से भरी आंखें, लेकिन कदमों में दृढ़ता। सोनम ने वही किया जो उनके पिता जीवनभर कहते रहे थे कि 'मेरी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। विनय कृष्ण मौर्य लंबे समय से हार्ट की बीमारी से से जूझ रहे थे। बीमारी के दौरान वे अक्सर अपनी इच्छा जताते थे कि उनकी अंतिम यात्रा में उनकी बेटी ही कंधा दे और मुखाग्नि भी वही करे।पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया। जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो गया। कांपते हाथों लेकिन मजबूत इरादों के साथ बड़ी बेटी कोमल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। उस क्षण वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं, लेकिन उन आंसुओं में गर्व और सम्मान साफ झलक रहा था।इस फैसले में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बना। बल्कि पूरा समर्थन भी दिया। पटना सिटी के कुशवाहा बालिका उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर विनय कृष्ण मौर्य छात्राओं को शिक्षा दे रहे थे ۔लंबे समय से एक शिक्षक की भूमिका में छात्राओं को विद्यालय में पढ़ाया करते थे, अचानक निधन हो जाने के बाद छात्राओं में भी मायूसी छा गई है ۔विनय कृष्ण मौर्य शिक्षक के साथ एक समाज सेवी भी थे ۔हमेशा दूसरों की मदद करना उनकी पहली प्राथमिकता रहती थी ۔उनके इस दुनिया से अचानक जाने से सभी लोग अचंभित हैं ,सभी लोगों के बीच बे उनलोगों के दिल में अपनी पहचान बन चुके थे ۔उनकी अंतिम यात्रा में शुभचिंतकों के साथ समाजसेवी ,शिक्षाविद,पूर्व डिप्टी में संतोष मेहता ,पूर्व पार्षद शिव मेहता ,पटना नगर निगम वार्ड संख्या 62 के पार्षद प्रतिनिधि उमेश कुशवाहा ,के साथ पूरे परिवार के लोग शामिल हुए,यही इस कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू है, जहां रिश्तों ने परंपराओं से ऊपर उठकर इंसानियत और समानता को चुना।आने वाली पीढि़यों के लिए बनी प्रेरणा समाज में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। लोग कहने लगे कि यह सिर्फ एक बेटी का साहस नहीं था, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश था। यह विदाई साबित करती है कि बेटियां भी उतनी ही सक्षम हैं जितने बेटे । यह क्षण परंपराओं को चुनौती देने और नई सोच को जन्म देने वाला था । पिता की अंतिम यात्रा में बेटी का यह साहसिक कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। बेटी ने पूरी की पिता की आखिरी इच्छा तो भर आई सबकी आंखें, हार्ट की लंबी बीमारी से निधन के बाद दी बड़ी बेटी ने मुखाग्नि,पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया।बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो पिता की अर्थी को कंधा देती दोनों बेटी , 19 अप्रैल 2026 दिन रविवार को पटना सिटी के बाहरी बेगमपुर निवासी विनय कृष्ण मौर्य की अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। यह यात्रा सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि परंपराओं को चुनौती देने और समाज में नई सोच को जन्म देने वाला क्षण बन गई। जब अर्थी उठी, तो सबसे आगे बढ़ीं उनकी बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि । आंसुओं से भरी आंखें, लेकिन कदमों में दृढ़ता। सोनम ने वही किया जो उनके पिता जीवनभर कहते रहे थे कि 'मेरी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। विनय कृष्ण मौर्य लंबे समय से हार्ट की बीमारी से से जूझ रहे थे। बीमारी के दौरान वे अक्सर अपनी इच्छा जताते थे कि उनकी अंतिम यात्रा में उनकी बेटी ही कंधा दे और मुखाग्नि भी वही करे।पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया। जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो गया। कांपते हाथों लेकिन मजबूत इरादों के साथ बड़ी बेटी कोमल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। उस क्षण वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं, लेकिन उन आंसुओं में गर्व और सम्मान साफ झलक रहा था।इस फैसले में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बना। बल्कि पूरा समर्थन भी दिया। पटना सिटी के कुशवाहा बालिका उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर विनय कृष्ण मौर्य छात्राओं को शिक्षा दे रहे थे ۔लंबे समय से एक शिक्षक की भूमिका में छात्राओं को विद्यालय में पढ़ाया करते थे, अचानक निधन हो जाने के बाद छात्राओं में भी मायूसी छा गई है ۔विनय कृष्ण मौर्य शिक्षक के साथ एक समाज सेवी भी थे ۔हमेशा दूसरों की मदद करना उनकी पहली प्राथमिकता रहती थी ۔उनके इस दुनिया से अचानक जाने से सभी लोग अचंभित हैं ,सभी लोगों के बीच बे उनलोगों के दिल में अपनी पहचान बन चुके थे ۔उनकी अंतिम यात्रा में शुभचिंतकों के साथ समाजसेवी ,शिक्षाविद,पूर्व डिप्टी में संतोष मेहता ,पूर्व पार्षद शिव मेहता ,पटना नगर निगम वार्ड संख्या 62 के पार्षद प्रतिनिधि उमेश कुशवाहा ,के साथ पूरे परिवार के लोग शामिल हुए,यही इस कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू है, जहां रिश्तों ने परंपराओं से ऊपर उठकर इंसानियत और समानता को चुना।आने वाली पीढि़यों के लिए बनी प्रेरणा समाज में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। लोग कहने लगे कि यह सिर्फ एक बेटी का साहस नहीं था, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश था। यह विदाई साबित करती है कि बेटियां भी उतनी ही सक्षम हैं जितने बेटे । यह क्षण परंपराओं को चुनौती देने और नई सोच को जन्म देने वाला था । पिता की अंतिम यात्रा में बेटी का यह साहसिक कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
बेटी ने पूरी की पिता की आखिरी इच्छा तो भर आई सबकी आंखें, हार्ट की लंबी बीमारी से निधन के बाद दी बड़ी बेटी ने मुखाग्नि,पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया।बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो पिता की अर्थी को कंधा देती दोनों बेटी , 19 अप्रैल 2026 दिन रविवार को पटना सिटी के बाहरी बेगमपुर निवासी विनय कृष्ण मौर्य की अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। यह यात्रा सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि परंपराओं को चुनौती देने और समाज में नई सोच को जन्म देने वाला क्षण बन गई। जब अर्थी उठी, तो सबसे आगे बढ़ीं उनकी बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि । आंसुओं से भरी आंखें, लेकिन कदमों में दृढ़ता। सोनम ने वही किया जो उनके पिता जीवनभर कहते रहे थे कि 'मेरी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। विनय कृष्ण मौर्य लंबे समय से हार्ट की बीमारी से से जूझ रहे थे। बीमारी के दौरान वे अक्सर अपनी इच्छा जताते थे कि उनकी अंतिम यात्रा में उनकी बेटी ही कंधा दे और मुखाग्नि भी वही करे।पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया। जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो गया। कांपते हाथों लेकिन मजबूत इरादों के साथ बड़ी बेटी कोमल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। उस क्षण वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं, लेकिन उन आंसुओं में गर्व और सम्मान साफ झलक रहा था।इस फैसले में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बना। बल्कि पूरा समर्थन भी दिया। पटना सिटी के कुशवाहा बालिका उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर विनय कृष्ण मौर्य छात्राओं को शिक्षा दे रहे थे ۔लंबे समय से एक शिक्षक की भूमिका में छात्राओं को विद्यालय में पढ़ाया करते थे, अचानक निधन हो जाने के बाद छात्राओं में भी मायूसी छा गई है ۔विनय कृष्ण मौर्य शिक्षक के साथ एक समाज सेवी भी थे ۔हमेशा दूसरों की मदद करना उनकी पहली प्राथमिकता रहती थी ۔उनके इस दुनिया से अचानक जाने से सभी लोग अचंभित हैं ,सभी लोगों के बीच बे उनलोगों के दिल में अपनी पहचान बन चुके थे ۔उनकी अंतिम यात्रा में शुभचिंतकों के साथ समाजसेवी ,शिक्षाविद,पूर्व डिप्टी में संतोष मेहता ,पूर्व पार्षद शिव मेहता ,पटना नगर निगम वार्ड संख्या 62 के पार्षद प्रतिनिधि उमेश कुशवाहा ,के साथ पूरे परिवार के लोग शामिल हुए,यही इस कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू है, जहां रिश्तों ने परंपराओं से ऊपर उठकर इंसानियत और समानता को चुना।आने वाली पीढि़यों के लिए बनी प्रेरणा समाज में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। लोग कहने लगे कि यह सिर्फ एक बेटी का साहस नहीं था, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश था। यह विदाई साबित करती है कि बेटियां भी उतनी ही सक्षम हैं जितने बेटे । यह क्षण परंपराओं को चुनौती देने और नई सोच को जन्म देने वाला था । पिता की अंतिम यात्रा में बेटी का यह साहसिक कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। बेटी ने पूरी की पिता की आखिरी इच्छा तो भर आई सबकी आंखें, हार्ट की लंबी बीमारी से निधन के बाद दी बड़ी बेटी ने मुखाग्नि,पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया।बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो पिता की अर्थी को कंधा देती दोनों बेटी , 19 अप्रैल 2026 दिन रविवार को पटना सिटी के बाहरी बेगमपुर निवासी विनय कृष्ण मौर्य की अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। यह यात्रा सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि परंपराओं को चुनौती देने और समाज में नई सोच को जन्म देने वाला क्षण बन गई। जब अर्थी उठी, तो सबसे आगे बढ़ीं उनकी बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि । आंसुओं से भरी आंखें, लेकिन कदमों में दृढ़ता। सोनम ने वही किया जो उनके पिता जीवनभर कहते रहे थे कि 'मेरी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। विनय कृष्ण मौर्य लंबे समय से हार्ट की बीमारी से से जूझ रहे थे। बीमारी के दौरान वे अक्सर अपनी इच्छा जताते थे कि उनकी अंतिम यात्रा में उनकी बेटी ही कंधा दे और मुखाग्नि भी वही करे।पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया। जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो गया। कांपते हाथों लेकिन मजबूत इरादों के साथ बड़ी बेटी कोमल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। उस क्षण वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं, लेकिन उन आंसुओं में गर्व और सम्मान साफ झलक रहा था।इस फैसले में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बना। बल्कि पूरा समर्थन भी दिया। पटना सिटी के कुशवाहा बालिका उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर विनय कृष्ण मौर्य छात्राओं को शिक्षा दे रहे थे ۔लंबे समय से एक शिक्षक की भूमिका में छात्राओं को विद्यालय में पढ़ाया करते थे, अचानक निधन हो जाने के बाद छात्राओं में भी मायूसी छा गई है ۔विनय कृष्ण मौर्य शिक्षक के साथ एक समाज सेवी भी थे ۔हमेशा दूसरों की मदद करना उनकी पहली प्राथमिकता रहती थी ۔उनके इस दुनिया से अचानक जाने से सभी लोग अचंभित हैं ,सभी लोगों के बीच बे उनलोगों के दिल में अपनी पहचान बन चुके थे ۔उनकी अंतिम यात्रा में शुभचिंतकों के साथ समाजसेवी ,शिक्षाविद,पूर्व डिप्टी में संतोष मेहता ,पूर्व पार्षद शिव मेहता ,पटना नगर निगम वार्ड संख्या 62 के पार्षद प्रतिनिधि उमेश कुशवाहा ,के साथ पूरे परिवार के लोग शामिल हुए,यही इस कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू है, जहां रिश्तों ने परंपराओं से ऊपर उठकर इंसानियत और समानता को चुना।आने वाली पीढि़यों के लिए बनी प्रेरणा समाज में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। लोग कहने लगे कि यह सिर्फ एक बेटी का साहस नहीं था, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश था। यह विदाई साबित करती है कि बेटियां भी उतनी ही सक्षम हैं जितने बेटे । यह क्षण परंपराओं को चुनौती देने और नई सोच को जन्म देने वाला था । पिता की अंतिम यात्रा में बेटी का यह साहसिक कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
- Patna #दिनदहाड़े 15 से 20 लाख की ज्वेलरी की #डकैती राजधानी पटना में 24 घंटे में खुलासा प्रशासनने कहा1
- पटना: राजधानी के फुलवारी शरीफ स्थित अलंकार ज्वेलर्स में रविवार दोपहर करीब 20 लाख रुपये की लूट की सनसनीखेज घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार, बाइक सवार पांच बदमाश श्रीलक्ष्मी अलंकार ज्वेलर्स की दुकान पर पहुंचे थे। सभी अपराधी हेलमेट पहने हुए थे, जिससे उनकी पहचान मुश्किल हो गई। बताया जा रहा है कि बदमाशों ने हथियार के बल पर दुकानदार और ग्राहकों को बंधक बना लिया। विरोध करने पर दुकान मालिक के साथ मारपीट भी की गई। इसके बाद महज 5 से 6 मिनट के भीतर ही लूटपाट कर अपराधी मौके से फरार हो गए। पूरी घटना दुकान में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है। चश्मदीदों के मुताबिक, भागने से पहले बदमाशों ने 2-3 राउंड फायरिंग भी की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही रामकृष्ण नगर थाना पुलिस और सदर पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी रंजन कुमार मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घायल दुकानदार का बयान दर्ज कर लिया है और आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। STF की टीम भी जांच में जुट गई है। यह वारदात रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र के धनुजी कॉलोनी की बताई जा रही है।1
- बेटी ने पूरी की पिता की आखिरी इच्छा तो भर आई सबकी आंखें, हार्ट की लंबी बीमारी से निधन के बाद दी बड़ी बेटी ने मुखाग्नि,पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया।बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो पिता की अर्थी को कंधा देती दोनों बेटी , 19 अप्रैल 2026 दिन रविवार को पटना सिटी के बाहरी बेगमपुर निवासी विनय कृष्ण मौर्य की अंतिम यात्रा ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। यह यात्रा सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि परंपराओं को चुनौती देने और समाज में नई सोच को जन्म देने वाला क्षण बन गई। जब अर्थी उठी, तो सबसे आगे बढ़ीं उनकी बड़ी बेटी सोनल और छोटी बेटी सृष्टि । आंसुओं से भरी आंखें, लेकिन कदमों में दृढ़ता। सोनम ने वही किया जो उनके पिता जीवनभर कहते रहे थे कि 'मेरी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है। विनय कृष्ण मौर्य लंबे समय से हार्ट की बीमारी से से जूझ रहे थे। बीमारी के दौरान वे अक्सर अपनी इच्छा जताते थे कि उनकी अंतिम यात्रा में उनकी बेटी ही कंधा दे और मुखाग्नि भी वही करे।पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बेटी ने साहसिक कदम उठाया। उन्होंने सबसे पहले पुष्पांजलि दी, फिर खुद कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया। जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो माहौल पूरी तरह शांत हो गया। कांपते हाथों लेकिन मजबूत इरादों के साथ बड़ी बेटी कोमल ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। उस क्षण वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं, लेकिन उन आंसुओं में गर्व और सम्मान साफ झलक रहा था।इस फैसले में परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बना। बल्कि पूरा समर्थन भी दिया। पटना सिटी के कुशवाहा बालिका उच्च विद्यालय में शिक्षक के पद पर विनय कृष्ण मौर्य छात्राओं को शिक्षा दे रहे थे ۔लंबे समय से एक शिक्षक की भूमिका में छात्राओं को विद्यालय में पढ़ाया करते थे, अचानक निधन हो जाने के बाद छात्राओं में भी मायूसी छा गई है ۔विनय कृष्ण मौर्य शिक्षक के साथ एक समाज सेवी भी थे ۔हमेशा दूसरों की मदद करना उनकी पहली प्राथमिकता रहती थी ۔उनके इस दुनिया से अचानक जाने से सभी लोग अचंभित हैं ,सभी लोगों के बीच बे उनलोगों के दिल में अपनी पहचान बन चुके थे ۔उनकी अंतिम यात्रा में शुभचिंतकों के साथ समाजसेवी ,शिक्षाविद,पूर्व डिप्टी में संतोष मेहता ,पूर्व पार्षद शिव मेहता ,पटना नगर निगम वार्ड संख्या 62 के पार्षद प्रतिनिधि उमेश कुशवाहा ,के साथ पूरे परिवार के लोग शामिल हुए,यही इस कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू है, जहां रिश्तों ने परंपराओं से ऊपर उठकर इंसानियत और समानता को चुना।आने वाली पीढि़यों के लिए बनी प्रेरणा समाज में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। लोग कहने लगे कि यह सिर्फ एक बेटी का साहस नहीं था, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश था। यह विदाई साबित करती है कि बेटियां भी उतनी ही सक्षम हैं जितने बेटे । यह क्षण परंपराओं को चुनौती देने और नई सोच को जन्म देने वाला था । पिता की अंतिम यात्रा में बेटी का यह साहसिक कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।1
- पटना में लुटेरों का तांडव: दिनदहाड़े ज्वेलरी दुकान में घुसकर 20 लाख के जेवर लुटे, दुकानदार का सिर फोड़ा पटना के रामकृष्ण नगर में श्री लक्ष्मी अलंकार ज्वेलर्स से 20 लाख की लूट। 5 अपराधियों ने दुकानदार को मारकर घायल किया। पुलिस 24 घंटे में खुलासे का दावा कर रही है। पटना में लुटेरों का तांडव: दिनदहाड़े ज्वेलरी दुकान में घुसकर राजधानी पटना के रामकृष्ण नगर थाना अंतर्गत धनजी कॉलोनी में हथियारबंद अपराधियों ने दिनदहाड़े एक बड़ी लूट की वारदात को अंजाम दिया है। 'श्री लक्ष्मी अलंकार ज्वेलर्स' में घुसे पांच नकाबपोश अपराधियों ने पिस्टल के बल पर करीब 20 लाख रुपये के सोने और चांदी के जेवरात लूट लिए। लूट का विरोध करने पर अपराधियों ने दुकान के मालिक धनंजय कुमार के सिर पर पिस्टल की बट से प्रहार कर उन्हें लहूलुहान कर दिया। वारदात के बाद सभी अपराधी हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। ग्राहक बने रहे बंधक, 5 मिनट में 100 ग्राम सोना और 3 किलो चांदी पार पीड़ित दुकानदार धनंजय कुमार ने बताया कि घटना के वक्त दुकान में तीन ग्राहक मौजूद थे। तभी दो बाइकों पर सवार होकर 5 अपराधी पहुँचे, जो हेलमेट पहने हुए थे। दुकान में घुसते ही अपराधियों ने सभी को गन पॉइंट पर लेकर एक कोने में बंधक बना लिया। अपराधियों ने तिजोरी और शोरूम में रखे लगभग 100 ग्राम सोने के जेवरात और 3 किलो चांदी के गहने समेट लिए। दुकानदार ने जब प्रतिरोध करने की कोशिश की, तो उनके सिर पर जानलेवा हमला किया गया। सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस, सिटी एसपी ने कहा- "24 घंटे में होगा खुलासा" वारदात की सूचना मिलते ही रामकृष्ण नगर थाना पुलिस और सदर एसडीपीओ रंजन कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने घायल दुकानदार का बयान दर्ज कर प्राथमिक उपचार के लिए भेजा है। नगर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) परिचय कुमार ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद बताया कि प्रारंभिक जांच में 5 अपराधियों के शामिल होने की पुष्टि हुई है। उन्होंने दावा किया है कि पुलिस की विशेष टीम अपराधियों के भागने के रूट और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है और अगले 24 घंटों के भीतर मामले का उद्भेदन कर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। राजधानी में बढ़ता क्राइम: व्यापारियों में सुरक्षा को लेकर भारी आक्रोश इस लूट की घटना के बाद पटना के ज्वेलरी व्यवसायियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। धनजी कॉलोनी जैसे रिहायशी इलाके में घुसकर अपराधियों द्वारा दी गई इस चुनौती ने पुलिसिया गश्त पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराधी इतने बेखौफ थे कि उन्हें पुलिस का जरा भी डर नहीं था। फिलहाल, पुलिस की टीमें शहर के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं, लेकिन अभी तक अपराधियों का कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग सका है।4
- Post by Spiderman1
- Post by Live tv news 24×71
- Post by N BHARAT NEWS 3651
- बिहार के मुख्यमंत्री #सम्राट_चौधरी के बनते ही ऑपरेशन बुलडोजर के तहत पटना के जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है ۔सड़कों पर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ ऑपरेशन बुलडोजर के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है ۔पटना के भद्रघाट से दीदारगंज तक फोर लाइन सड़क का निर्माण कार्य होना है पटना सिटी अंचलाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि भद्रघाट से कंगनघाट तक चिन्हित किया गया है जिसमे सड़क किनारे 313 कच्चे पक्के मकान बने हुए है ۔जिसे शनिवार को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया ۔कई पक्के मकान और कई कच्चे मकानों को ध्वस्त किया गया۔इस दौरान रहने वाले लोगों ने विरोध भी किया ۔लोगों का कहना था कि जिला प्रशासन की तरफ से कोई नोटिस नहीं दिया गया है ۔अचानक बुलडोजर चलाया जा रहा है जिसके कारण पूरा परिवार सड़क पर आ गए हैं۔۔#ApnaCityTakNews #Buldojar #SmrathChodhri #Cm Mukhmantri patnacity1