चित्तौड़गढ़ ज़िले के चिकारड़ा स्थित अशोक वाटिका में सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण-संवर्धन हेतु भगवान शिव-पार्वती परिवार की तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो रहा है। वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-हवन और पूजन-अर्चन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया है। मंगलवार को महोत्सव के तहत एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें शिव-पार्वती परिवार की प्रतिमाओं को सुसज्जित ट्रैक्टर में विराजित कर पूरे गांव में शोभायात्रा की गई। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ देव प्रतिमाओं का स्वागत किया। इस यात्रा में 101 महिलाओं ने एक जैसी पारंपरिक चूंदड़ पहनकर सिर पर कलश धारण किए, जो सनातन संस्कृति की अनुपम छटा प्रस्तुत कर रहा था। कलश यात्रा अशोक वाटिका से शुरू होकर सांवलियाजी चौराहा, जाट मोहल्ला, बस स्टैंड, सदर बाजार, नीम चौक, प्रजापत मोहल्ला और उदयपुर-निंबाहेड़ा मार्ग से होती हुई डूंगला रोड स्थित अशोक वाटिका पहुंची। यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो उठा। समाजसेवी दिनेश अग्रवाल ने श्रद्धालुओं के लिए शीतल जलपान की व्यवस्था भी की। अशोक वाटिका में विद्वान आचार्यों और महापंडितों की देखरेख में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार यज्ञ, हवन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान निरंतर जारी रहे। सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा को देवत्व के आह्वान का एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है, जिसके माध्यम से मूर्ति में दिव्य चेतना का विधिपूर्वक आह्वान किया जाता है। आयोजक शोभागमल मातोश्री सोहन बाई छाजेड़ परिवार ने ग्रामीणों को कलश यात्रा और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने के लिए माइक प्रचार और सोशल मीडिया के माध्यम से आमंत्रित किया था, जिसका व्यापक प्रभाव दिखा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। यह तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव 17 जून, बुधवार को भगवान शिव-पार्वती परिवार की वैदिक विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के साथ समाप्त होगा, जिसके बाद समस्त श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी (भोजन प्रसादी) का आयोजन भी किया गया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का भी एक प्रेरणादायी प्रयास बनकर उभर रहा है।
चित्तौड़गढ़ ज़िले के चिकारड़ा स्थित अशोक वाटिका में सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण-संवर्धन हेतु भगवान शिव-पार्वती परिवार की तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो रहा है। वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-हवन और पूजन-अर्चन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया है। मंगलवार को महोत्सव के तहत एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें शिव-पार्वती परिवार की प्रतिमाओं को सुसज्जित ट्रैक्टर में विराजित कर पूरे गांव में शोभायात्रा की गई। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ देव प्रतिमाओं का स्वागत किया। इस यात्रा में 101 महिलाओं ने एक जैसी पारंपरिक चूंदड़ पहनकर सिर पर कलश धारण किए, जो सनातन संस्कृति की अनुपम छटा प्रस्तुत कर रहा था। कलश यात्रा अशोक
वाटिका से शुरू होकर सांवलियाजी चौराहा, जाट मोहल्ला, बस स्टैंड, सदर बाजार, नीम चौक, प्रजापत मोहल्ला और उदयपुर-निंबाहेड़ा मार्ग से होती हुई डूंगला रोड स्थित अशोक वाटिका पहुंची। यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो उठा। समाजसेवी दिनेश अग्रवाल ने श्रद्धालुओं के लिए शीतल जलपान की व्यवस्था भी की। अशोक वाटिका में विद्वान आचार्यों और महापंडितों की देखरेख में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार यज्ञ, हवन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान निरंतर जारी रहे। सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा को देवत्व के आह्वान का एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है, जिसके माध्यम से मूर्ति में दिव्य चेतना का विधिपूर्वक आह्वान किया जाता है। आयोजक शोभागमल मातोश्री सोहन
बाई छाजेड़ परिवार ने ग्रामीणों को कलश यात्रा और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने के लिए माइक प्रचार और सोशल मीडिया के माध्यम से आमंत्रित किया था, जिसका व्यापक प्रभाव दिखा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। यह तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव 17 जून, बुधवार को भगवान शिव-पार्वती परिवार की वैदिक विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के साथ समाप्त होगा, जिसके बाद समस्त श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी (भोजन प्रसादी) का आयोजन भी किया गया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का भी एक प्रेरणादायी प्रयास बनकर उभर रहा है।
- डूंगला में अरावली पर्वतमाला की ऐलागढ़ पहाड़ी पर स्थित प्राचीन ऐलवा माताजी मंदिर में सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर, लोक न्यास ट्रस्ट एवं ऐलवा माता विकास समिति द्वारा मंदिर का भंडार विधिवत खोला गया। समिति के पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में हुई गणना में भंडार से 1 लाख 52 हजार 360 रुपये की नकद राशि और श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए आभूषण प्राप्त हुए। यह मंदिर क्षेत्र के प्राचीनतम और प्रसिद्ध शक्ति पीठों में से एक है, जहाँ वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं। ग्रामीणों और भक्तों का अटूट विश्वास है कि माता के दरबार में सच्ची श्रद्धा से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। इसी आस्था के चलते, मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु माता को नकद, आभूषण और अन्य चढ़ावा अर्पित करने के साथ-साथ मंदिर परिसर में भोजन प्रसादी (भंडारे) का आयोजन भी करवाते हैं, जो यहाँ की वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, भंडार में प्राप्त हुई राशि का उपयोग मंदिर के विकास, धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा। प्राप्त आभूषणों को भी नियमानुसार सुरक्षित रखते हुए अभिलेखों में दर्ज कर लिया गया है। सोमवती अमावस्या पर मंदिर परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष नारायण लाल व्यास, ओंकार लाल व्यास, पूरणमल अहीर, दुर्गाशंकर शर्मा सहित ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे। सभी ने श्रद्धालुओं के सहयोग और विश्वास के प्रति आभार व्यक्त करते हुए जनसहयोग से मंदिर की धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।2
- बड़ी सादड़ी रेलवे स्टेशन से नीमच रोड तक के मार्ग में कई स्थान शामिल हैं। इन स्थानों में शिकार भूपत पूरा, नाहर जी खेड़ा, चारण खेड़ी और जर खाना का उल्लेख किया गया है।1
- उदयपुर जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने मंगलवार शाम वल्लभनगर क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम पंचायत गोटिपा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर का निरीक्षण किया। कलक्टर अग्रवाल ने शिविर स्थल पर विभिन्न विभागों की स्टाॅल्स पर पहुँचकर उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की जानकारी ली और आमजन से प्राप्त होने वाली परिवेदनाओं के निस्तारण की पूरी प्रक्रिया को समझा। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि सेवा शिविरों का उद्देश्य राज्य सरकार की मंशा के अनुसार आमजन के राजस्व सहित विभिन्न विभागों से जुड़े कार्यों का हाथों हाथ समाधान कर उन्हें राहत पहुँचाना है। जिला कलक्टर ने इस दौरान आमजन से सीधा संवाद भी किया और उनकी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।1
- छोटी सादड़ी क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित रेलवे परियोजना का कार्य अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। जलोदा जागीरदार तक का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसी कड़ी में, छोटी सादड़ी में रेलवे ब्रिज का निर्माण कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी है। उम्मीद है कि बहुत जल्द ही बड़ी सादड़ी से नीमच तक रेल सुविधाओं का लाभ लोगों को मिलना शुरू हो जाएगा, जिससे क्षेत्र के लोगों का लंबा इंतजार खत्म होगा।3
- श्रीसांवलियाजी में दो दिन के बाद आखिरकार गिनती शुरू हो गई है। गिनती के पहले ही दिन कुल 17.55 करोड़ रुपये की राशि गिनी गई। अब बुधवार को गिनती का दूसरा चरण आयोजित किया जाएगा।1
- एक पीड़ित व्यक्ति ने कलेक्टर से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है, जिसमें बताया गया है कि हाई कोर्ट से स्टे मिलने के बावजूद दबंग अपनी गुंडागर्दी पर उतारू हैं। पीड़ित के आरोप के अनुसार, दबंगों ने उन्हें स्पष्ट धमकी दी है कि अगर वे अपने मकान पर लौटे तो उन्हें जान से मारकर वहीं गाड़ दिया जाएगा। यह घटना हाई कोर्ट के आदेश की सीधी अवहेलना और दबंगों के बढ़ते आतंक को उजागर करती है।1
- चित्तौड़गढ़ ज़िले के चिकारड़ा स्थित अशोक वाटिका में सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण-संवर्धन हेतु भगवान शिव-पार्वती परिवार की तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हो रहा है। वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-हवन और पूजन-अर्चन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया है। मंगलवार को महोत्सव के तहत एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें शिव-पार्वती परिवार की प्रतिमाओं को सुसज्जित ट्रैक्टर में विराजित कर पूरे गांव में शोभायात्रा की गई। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ देव प्रतिमाओं का स्वागत किया। इस यात्रा में 101 महिलाओं ने एक जैसी पारंपरिक चूंदड़ पहनकर सिर पर कलश धारण किए, जो सनातन संस्कृति की अनुपम छटा प्रस्तुत कर रहा था। कलश यात्रा अशोक वाटिका से शुरू होकर सांवलियाजी चौराहा, जाट मोहल्ला, बस स्टैंड, सदर बाजार, नीम चौक, प्रजापत मोहल्ला और उदयपुर-निंबाहेड़ा मार्ग से होती हुई डूंगला रोड स्थित अशोक वाटिका पहुंची। यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो उठा। समाजसेवी दिनेश अग्रवाल ने श्रद्धालुओं के लिए शीतल जलपान की व्यवस्था भी की। अशोक वाटिका में विद्वान आचार्यों और महापंडितों की देखरेख में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार यज्ञ, हवन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान निरंतर जारी रहे। सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा को देवत्व के आह्वान का एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है, जिसके माध्यम से मूर्ति में दिव्य चेतना का विधिपूर्वक आह्वान किया जाता है। आयोजक शोभागमल मातोश्री सोहन बाई छाजेड़ परिवार ने ग्रामीणों को कलश यात्रा और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने के लिए माइक प्रचार और सोशल मीडिया के माध्यम से आमंत्रित किया था, जिसका व्यापक प्रभाव दिखा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। यह तीन दिवसीय धार्मिक महोत्सव 17 जून, बुधवार को भगवान शिव-पार्वती परिवार की वैदिक विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के साथ समाप्त होगा, जिसके बाद समस्त श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी (भोजन प्रसादी) का आयोजन भी किया गया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का भी एक प्रेरणादायी प्रयास बनकर उभर रहा है।3
- उदयपुर में देबारी घाटा वाली माता जी के पास हाईवे पर एक बड़ा हादसा हो गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि तीन अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं।1