कहलगांव प्रखंड के मिर्धाचक आदिवासी टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण को समर्पित एक अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रधान शिक्षक अर्जुन केशरी ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जहाँ उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब उनका मानसिक स्वास्थ्य ठीक हो। प्रधान शिक्षक केशरी ने “सूखा पौधा” कहानी के माध्यम से अभिभावकों को समझाया कि प्यार और दुलार के बिना बच्चे सूखे पौधे के समान मुरझा जाते हैं। उन्होंने बच्चों के साथ प्रेम, धैर्य और संवेदनशीलता से व्यवहार करने तथा उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। संगोष्ठी में बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, भावनात्मक सुरक्षा, सकारात्मक पारिवारिक वातावरण, पोषण और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान अभिभावकों से गर्मी की छुट्टी में बच्चों के घर पर अध्ययन के लिए अनुकूल माहौल बनाने की अपील भी की गई। कार्यक्रम में विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया। इस अवसर पर खुशी कुमारी को “स्टूडेंट ऑफ द मंथ” और किरण देवी को “पेरेंट्स ऑफ द मंथ” के खिताब से सम्मानित किया गया। शिक्षा समिति के सचिव सोनी हेम्ब्रम, सदस्य सुलेखा देवी, निर्मला देवी, किरण देवी, आशा देवी, नवल किशोर यादव, छोटू मुर्मू, डेमोय बासकी, मंजु मरांडी, मोनिका किस्कू सहित दर्जनों अभिभावक इस आयोजन में उपस्थित थे। संगोष्ठी के अंत में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि बच्चों का उज्ज्वल भविष्य विद्यालय और अभिभावकों के संयुक्त प्रयासों से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।
कहलगांव प्रखंड के मिर्धाचक आदिवासी टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण को समर्पित एक अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रधान शिक्षक अर्जुन केशरी ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जहाँ उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब उनका मानसिक स्वास्थ्य ठीक हो। प्रधान शिक्षक केशरी ने “सूखा पौधा” कहानी के माध्यम से अभिभावकों को समझाया कि प्यार और दुलार के बिना बच्चे सूखे पौधे के समान मुरझा जाते हैं। उन्होंने बच्चों के साथ प्रेम, धैर्य और संवेदनशीलता से व्यवहार करने तथा उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। संगोष्ठी में बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, भावनात्मक सुरक्षा, सकारात्मक पारिवारिक वातावरण, पोषण और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान अभिभावकों से गर्मी की छुट्टी में बच्चों के घर पर अध्ययन के लिए अनुकूल माहौल बनाने की अपील भी की गई। कार्यक्रम में विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई और बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया। इस अवसर पर खुशी कुमारी को “स्टूडेंट ऑफ द मंथ” और किरण देवी को “पेरेंट्स ऑफ द मंथ” के खिताब से सम्मानित किया गया। शिक्षा समिति के सचिव सोनी हेम्ब्रम, सदस्य सुलेखा देवी, निर्मला देवी, किरण देवी, आशा देवी, नवल किशोर यादव, छोटू मुर्मू, डेमोय बासकी, मंजु मरांडी, मोनिका किस्कू सहित दर्जनों अभिभावक इस आयोजन में उपस्थित थे। संगोष्ठी के अंत में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि बच्चों का उज्ज्वल भविष्य विद्यालय और अभिभावकों के संयुक्त प्रयासों से ही सुनिश्चित किया जा सकता है।
- मथुरापुर और प्यालापुर क्षेत्रों में सड़कें पूरी तरह से बारिश के पानी से भर गई हैं। यह स्थिति कल शाम लगभग 5:30 बजे आई जोरदार बारिश और आंधी-तूफान के कारण उत्पन्न हुई, जिसमें गरज के साथ पानी बरसा। लोगों और बच्चों को आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, साथ ही यह भी अपील की गई है कि बारिश होने पर घर से बाहर न निकलें।1
- राजस्थान के चूरू जिले में एक रेत का बवंडर देखा गया। यह जानकारी मगही शेर अभिषेक रंजन नामक हैंडल से साझा की गई है।1
- झारखंड के बड़ा तालबोना गाँव से एक घटना सामने आई है जहाँ एक गाय ने लात मारकर सारा दूध गिरा दिया। इस घटना के बाद, लोगों से सतर्क और सावधान रहने की अपील की जा रही है।1
- लोगों ने सरकार से अत्यंत भावुक निवेदन किया है कि उन्हें 'जाने आने की रस्म' प्रदान की जाए। यह मार्मिक अपील इसलिए की गई है क्योंकि उन्हें 'जाने आने' के लिए अनुमति नहीं दी जा रही है।2
- राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वास्तविकता जानने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन के फैसले को ऐतिहासिक बताया। मरांडी के अनुसार, यह कदम न केवल जनसांख्यिकीय परिवर्तन की हकीकत को उजागर करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संस्कृति को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पाकुड़ में आयोजित दो दिवसीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के समापन सत्र में भाग लेते हुए बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन की वजह से संथाल परगना प्रमंडल और झारखंड के कई जिलों में आदिवासियों की आबादी में भारी कमी आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के कारण देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से झारखंड और संथाल परगना में, आदिवासियों की संस्कृति, उनकी सुरक्षा और संपत्ति की रक्षा जैसे गंभीर मुद्दे खड़े हो गए हैं। मरांडी ने संथाल परगना प्रमंडल के आंकड़े देते हुए बताया कि 1951 में आदिवासियों की जो आबादी थी, वह जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारण घटकर आज 25 प्रतिशत रह गई है, जबकि मुसलमानों की आबादी इसी अवधि में 9 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार की यह उच्च-स्तरीय समिति मामले की गहनता से जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को निश्चित रूप से भागना पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आदिवासियों के जीवन में बदलाव आएगा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही बांग्लादेशी घुसपैठियों में भगदड़ मचने का भी जिक्र किया और कहा कि झारखंड में होने वाले एसआईआर (SIR) से भी इन घुसपैठियों की हकीकत सामने आएगी।1
- करोड़ों के एक्सप्रेसवे के व्यापक प्रचार और ढिंढोरे के बावजूद, यह सवाल उठाया गया है कि आखिर सरकारी बसों को चलाने के लिए भी जनता को क्यों धक्का लगाना पड़ रहा है।1
- ओडिशा के पुरी में एक घटना सामने आई है जहाँ अधिकारियों द्वारा एक ठेलेवाले को अवैध वेंडिंग के आरोप में हटाए जाने के बाद, स्थानीय लोगों ने उसकी खाजा मिठाइयों को लूट लिया।1