ड्राइवर से हजारों की वसूली का आरोप, नौकरी नहीं मिलने पर जिलाधिकारी से लगाई गुहार झाँसी। हंस सिटी बस में कार्यरत रहे एक ड्राइवर ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। प्रार्थी जय हिंद, निवासी चिरगांव, ने आरोप लगाया है कि नौकरी पर पुनः तैनाती के नाम पर उससे लगभग ₹50 हजार की अवैध वसूली की गई, इसके बावजूद उसे सेवा में वापस नहीं लिया गया। पीड़ित के अनुसार वह वर्ष 2023 में अपनी पत्नी के प्रसव के चलते विधिवत अवकाश पर गया था। इसी दौरान उसके पिता की तबीयत बिगड़ गई और जून 2024 में उनका निधन हो गया। पारिवारिक परिस्थितियों से उबरने के बाद जब उसने दोबारा ड्यूटी जॉइन करने का प्रयास किया, तो डिपो में तैनात एचआर अधिकारी ने उसे बार-बार आश्वासन दिया कि बस संचालन शुरू होते ही उसे वापस रख लिया जाएगा। आरोप है कि इसी आश्वासन के नाम पर एचआर ने उससे ₹40 हजार नगद और करीब ₹10 हजार अन्य खर्च के रूप में दिलवा दिए। इसके बावजूद करीब दो वर्षों तक उसे सिर्फ टालमटोल किया जाता रहा। पीड़ित का यह भी आरोप है कि हाल ही में नए एचआर ने साफ शब्दों में कह दिया कि उसे नौकरी नहीं दी जाएगी, क्योंकि उसकी पत्नी द्वारा पूर्व एचआर की शिकायत किए जाने से उनका ट्रांसफर हो गया था। साथ ही संबंधित अधिकारियों के बीच आपसी रिश्तेदारी और मिलीभगत की बात भी सामने आई है। जय हिंद ने आरोप लगाया कि विभाग में संगठित तरीके से ड्राइवरों और कंडक्टरों को फंसाकर उनसे धन उगाही की जा रही है और बाद में उन्हें नौकरी से वंचित कर दिया जाता है। पीड़ित ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने, अवैध रूप से लिए गए धन की वापसी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही स्वयं को पुनः सेवा में बहाल किए जाने की भी अपील की है।
ड्राइवर से हजारों की वसूली का आरोप, नौकरी नहीं मिलने पर जिलाधिकारी से लगाई गुहार झाँसी। हंस सिटी बस में कार्यरत रहे एक ड्राइवर ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। प्रार्थी जय हिंद, निवासी चिरगांव, ने आरोप लगाया है कि नौकरी पर पुनः तैनाती के नाम पर उससे लगभग ₹50 हजार की अवैध वसूली की गई, इसके बावजूद उसे सेवा में वापस नहीं लिया गया। पीड़ित के अनुसार वह वर्ष 2023 में अपनी पत्नी के प्रसव के चलते विधिवत अवकाश पर गया था। इसी दौरान उसके पिता की तबीयत बिगड़ गई और जून 2024 में उनका निधन हो गया। पारिवारिक परिस्थितियों से उबरने के बाद जब उसने दोबारा ड्यूटी जॉइन करने का प्रयास किया, तो डिपो में तैनात एचआर अधिकारी ने उसे बार-बार आश्वासन दिया कि बस संचालन शुरू होते ही उसे वापस रख लिया जाएगा। आरोप है कि इसी आश्वासन के नाम पर एचआर ने उससे ₹40 हजार नगद और करीब ₹10 हजार अन्य खर्च के रूप में दिलवा दिए। इसके बावजूद करीब दो वर्षों तक उसे सिर्फ टालमटोल किया जाता रहा। पीड़ित का यह भी आरोप है कि हाल ही में नए एचआर ने साफ शब्दों में कह दिया कि उसे नौकरी नहीं दी जाएगी, क्योंकि उसकी पत्नी द्वारा पूर्व एचआर की शिकायत किए जाने से उनका ट्रांसफर हो गया था। साथ ही संबंधित अधिकारियों के बीच आपसी रिश्तेदारी और मिलीभगत की बात भी सामने आई है। जय हिंद ने आरोप लगाया कि विभाग में संगठित तरीके से ड्राइवरों और कंडक्टरों को फंसाकर उनसे धन उगाही की जा रही है और बाद में उन्हें नौकरी से वंचित कर दिया जाता है। पीड़ित ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने, अवैध रूप से लिए गए धन की वापसी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही स्वयं को पुनः सेवा में बहाल किए जाने की भी अपील की है।
- Post by Niraj Lakhere5
- Post by Bablu Ramaiya1
- *झाँसी जिला अस्पताल इमरजेंसी में डिसेंर्टी का इलाज करा रहे पत्रकार और डॉक्टर/स्टाफ में अभद्रता हुई। अस्पताल ने पुलिस को सूचना दी। वीडियो वायरल*1
- Post by Mohammad Irshad5
- Post by Hemant Kumar Gupta1
- फर्जी बीमा गिरोह का खुलासा: सांसद के नाम का दुरुपयोग, झाँसी पुलिस की बड़ी कार्रवाई झांसी में फर्जी फसल बीमा क्लेम के बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है और चौंकाने वाली बात ये कि इस पूरे खेल में झांसी-ललितपुर के सांसद अनुराग शर्मा के नाम का भी दुरुपयोग किया गया है। दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। झांसी पुलिस की कार्रवाई में फर्जीवाड़े का एक संगठित नेटवर्क सामने आया है। थाना प्रेमनगर और थाना गरौठा पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए उन आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में करोड़ों के खेल को अंजाम दे रहे थे। आरोपी किसानों और लोगों को बहला-फुसलाकर उनके बैंक और पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करते थे, इसके बाद खसरा-खतौनी में नाम और पता बदलकर फर्जी बीमा क्लेम तैयार किए जाते थे। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस फर्जीवाड़े में झांसी-ललितपुर के सांसद अनुराग शर्मा के नाम का भी इस्तेमाल किया गया साथ ही बृजेश कुमार शर्मा समेत अन्य लोगों के नाम पर भी धोखाधड़ी की गई। पुलिस के मुताबिक आरोपी कंप्यूटर सेंटर के जरिए ऑनलाइन खतौनी डाउनलोड कर उसमें हेरफेर करते थे और बीमा कंपनियों के पोर्टल पर अपलोड कर पैसा निकालते थे। इस गिरोह में और भी लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। बड़ा सवाल ये है कि जब जनप्रतिनिधि तक के नाम का दुरुपयोग हो सकता है, तो आम आदमी कितना सुरक्षित है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है।1
- Post by S News1
- Post by Bablu Ramaiya1