अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर भारत-नेपाल सीमा पर नशे के खिलाफ एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नरकटियागंज और नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने मिलकर सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया। इस दौरान, ग्रामीणों को नशा मुक्त समाज बनाने की शपथ दिलाई गई और युवाओं से नशे से दूर रहने का आग्रह किया गया। यह विशेष जागरूकता कार्यक्रम 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नरकटियागंज के कार्यवाहक कमांडेंट श्री गोविन्द कुमार ठाकुर के मार्गदर्शन में वाहिनी मुख्यालय और सभी सीमा चौकियों पर आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों, विशेषकर युवाओं को नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के खतरों से अवगत कराना था। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा का अक्सर नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए दुरुपयोग किया जाता है। इस चुनौती से निपटने के लिए दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां लगातार सहयोग कर रही हैं। इसी क्रम में, SSB और APF नेपाल ने संयुक्त रूप से यह अभियान चलाकर लोगों को नशे के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, युवा, महिलाएं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे। सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने बताया कि नशा न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को नष्ट करता है, बल्कि पारिवारिक खुशियों को छीन लेता है और समाज में अपराध व सामाजिक विघटन को बढ़ावा देता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि नशीली दवाओं का बढ़ता चलन युवाओं के भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा बन रहा है, क्योंकि नशे में लिप्त व्यक्ति अपने परिवार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर हो जाता है। इस दौरान, उपस्थित ग्रामीणों और युवाओं को नशे से दूर रहने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। लोगों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नशा नहीं करेंगे और अपने परिवार तथा समाज को भी नशामुक्त बनाने में सहयोग करेंगे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि नशा एक सामाजिक बुराई है जिसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है, जिससे घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट, अपराध और मानसिक तनाव जैसी अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने जोर दिया कि इसका समाधान केवल कानून के माध्यम से नहीं, बल्कि जन जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। कार्यक्रम में 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के उप कमांडेंट श्री ज्ञानेन्द्र कुमार, सहायक कमांडेंट श्री रामवीर कुमार और सहायक कमांडेंट श्री तरुण कुमार सहित कई अधिकारी व जवान मौजूद थे, जबकि APF नेपाल के अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों और बलकर्मियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। भारत और नेपाल के सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया यह संयुक्त जागरूकता अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे के खिलाफ एक जन आंदोलन का रूप लेने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुरक्षा बलों ने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें कहीं भी नशीले पदार्थों की तस्करी या बिक्री की सूचना मिलती है, तो वे तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचित करें ताकि समाज को इस खतरे से बचाया जा सके। इस संयुक्त अभियान ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है, और जागरूकता, सहयोग व सामूहिक प्रयास से ही एक नशामुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।
अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर भारत-नेपाल सीमा पर नशे के खिलाफ एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नरकटियागंज और नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने मिलकर सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया। इस दौरान, ग्रामीणों को नशा मुक्त समाज बनाने की शपथ दिलाई गई और युवाओं से नशे से दूर रहने का आग्रह किया गया। यह विशेष जागरूकता कार्यक्रम 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नरकटियागंज के कार्यवाहक कमांडेंट श्री गोविन्द कुमार ठाकुर के मार्गदर्शन में वाहिनी मुख्यालय और सभी सीमा चौकियों पर आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों, विशेषकर युवाओं को नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के खतरों से अवगत कराना था। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा का अक्सर नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए दुरुपयोग किया जाता है। इस चुनौती से निपटने के लिए दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां लगातार सहयोग कर रही हैं। इसी क्रम में, SSB और APF नेपाल ने संयुक्त रूप से यह अभियान चलाकर लोगों को नशे के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, युवा, महिलाएं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे। सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने बताया कि नशा न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को नष्ट करता है, बल्कि पारिवारिक खुशियों को छीन लेता है और समाज में अपराध व सामाजिक विघटन को बढ़ावा देता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि नशीली दवाओं का बढ़ता चलन युवाओं के भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा बन रहा है, क्योंकि नशे में लिप्त व्यक्ति अपने परिवार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर हो जाता है। इस दौरान, उपस्थित ग्रामीणों और युवाओं को नशे से दूर रहने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। लोगों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नशा नहीं करेंगे और अपने परिवार तथा समाज को भी नशामुक्त बनाने में सहयोग करेंगे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि नशा एक सामाजिक बुराई है जिसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है, जिससे घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट, अपराध और मानसिक तनाव जैसी अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने जोर दिया कि इसका समाधान केवल कानून के माध्यम से नहीं, बल्कि जन जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। कार्यक्रम में 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के उप कमांडेंट श्री ज्ञानेन्द्र कुमार, सहायक कमांडेंट श्री रामवीर कुमार और सहायक कमांडेंट श्री तरुण कुमार सहित कई अधिकारी व जवान मौजूद थे, जबकि APF नेपाल के अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों और बलकर्मियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। भारत और नेपाल के सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया यह संयुक्त जागरूकता अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे के खिलाफ एक जन आंदोलन का रूप लेने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुरक्षा बलों ने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें कहीं भी नशीले पदार्थों की तस्करी या बिक्री की सूचना मिलती है, तो वे तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचित करें ताकि समाज को इस खतरे से बचाया जा सके। इस संयुक्त अभियान ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है, और जागरूकता, सहयोग व सामूहिक प्रयास से ही एक नशामुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।
- पश्चिम चंपारण के बेतिया जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक माँ ने अपनी ही छह माह की मासूम बेटी का गला धारदार हसुआ से काटकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद उसने खुद भी आत्महत्या करने की कोशिश की, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मृत बच्ची की पहचान सुनील दास की छह माह की पुत्री पूजा कुमारी के रूप में हुई है। यह घटना गोपालपुर थाना क्षेत्र में हुई। बताया गया है कि बच्ची के पिता सुनील दास चंडीगढ़ में मजदूरी करते हैं, जबकि बच्ची अपनी माँ और दादी के साथ घर पर रहती थी। गुरुवार की रात करीब आठ बजे बच्ची लगातार रो रही थी। माँ उसे चुप कराने की कोशिश कर रही थी, लेकिन जब वह शांत नहीं हुई तो गुस्से में आकर महिला ने घर में सब्जी काटने के लिए रखे हसुआ को उठा लिया और मासूम का गला काट दिया। वारदात के बाद महिला ने खुद के गले पर भी हसुआ से कई वार कर आत्महत्या का प्रयास किया। इसी दौरान, बच्ची की दादी सरस्वती देवी चीख-पुकार सुनकर कमरे में पहुँचीं। कमरे का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए, जहाँ जमीन पर मासूम की खून से लथपथ लाश पड़ी थी और बहू खुद का गला रेतने की कोशिश कर रही थी। दादी ने किसी तरह उसके हाथ से हसुआ छीना और शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के लोग मौके पर जुट गए। घटना की सूचना मिलने पर गोपालपुर थाना अध्यक्ष अंकित कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जीएमसीएच बेतिया भेज दिया, जबकि घायल महिला को हिरासत में लेकर इलाज और पूछताछ शुरू की गई। महिला के गले पर गंभीर जख्म पाए गए हैं, जिस पर चिकित्सकों ने चार टांके लगाए हैं। शुक्रवार सुबह मृत बच्ची की दादी सरस्वती देवी के आवेदन पर गोपालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त धारदार हसुआ भी बरामद कर लिया है। मामले की जांच के दौरान पुलिस को महिला की मानसिक स्थिति को लेकर भी संदेह हुआ है। थाना अध्यक्ष अंकित कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हो रही है, हालांकि इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही की जा सकेगी। फिलहाल, पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। एक माँ द्वारा अपनी ही मासूम बेटी की हत्या की इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है और लोग इस घटना को लेकर स्तब्ध हैं।1
- स्वच्छता साथियों द्वारा किया जा रहा कार्य समाज के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और बड़ी भागीदारी है। यह प्रयास सामाजिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।1
- बेतिया में 26.06.2026 को राजर्षि माननीय श्री साहू जी महाराज की जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। यह कार्यक्रम ऑल इंडिया गरीब पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्री विनय कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें उत्साहपूर्वक भागीदारी देखी गई।1
- मझौलिया थाना क्षेत्र के हरपुर गढ़वा पंचायत अंतर्गत गढ़वा बाजार के वार्ड संख्या-7 में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के पति और ससुर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। थानाध्यक्ष अमर कुमार ने बताया कि धोकराहा वार्ड संख्या-1 निवासी लालू मियां के आवेदन के आधार पर यह कार्रवाई की गई। पुलिस ने मृतका के पति अफरोज आलम और ससुर खेदु देवान को गिरफ्तार किया है। इन दोनों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध मौत से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। मृतका के पिता लालू मियां ने पुलिस को दिए अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले उनकी बेटी रेशमा की शादी मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार अफरोज आलम से हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष लगातार दहेज में टीवीएस अपाची मोटरसाइकिल की मांग को लेकर रेशमा को प्रताड़ित करता था। लालू मियां ने बताया कि गुरुवार की अहले सुबह लगभग तीन बजे जब उन्होंने अपनी बेटी को फोन किया तो उसका मोबाइल बंद मिला। किसी अनहोनी की आशंका होने पर वे तत्काल गढ़वा स्थित उसकी ससुराल पहुँचे, जहाँ उन्हें अपनी बेटी का शव पड़ा हुआ मिला। इसके बाद उन्होंने घटना की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची, शव को कब्जे में लिया, पोस्टमार्टम कराया और बाद में परिजनों को सौंप दिया। पुलिस इस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।1
- बेतिया के मझौलिया प्रखंड स्थित सरिसवा बाजार के भरवलिया गांव से रामगढ़वा गई बारात में उस समय खुशी का माहौल मातम में बदल गया, जब जयमाला से ठीक पहले दूल्हे शक्तिनाथ शर्मा की अचानक तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद बारात बिना शादी संपन्न हुए ही वापस लौट आई। जानकारी के अनुसार, भरवलिया वार्ड संख्या-6 निवासी 25 वर्षीय शक्तिनाथ शर्मा, जो स्वर्गीय जगदीश शर्मा के पुत्र थे, की शादी गुरुवार रात रामगढ़वा निवासी संतोष शर्मा की बेटी रघुनी कुमारी के साथ राम-जानकी मंदिर में होनी थी। बारात गुरुवार दोपहर करीब एक बजे सरिसवा से रामगढ़वा के लिए निकली थी। जयमाला की रस्म से पहले अचानक शक्तिनाथ शर्मा के पेट में तेज दर्द उठा, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। परिजन और बाराती उन्हें तुरंत रक्सौल के एसआरपी अस्पताल ले गए, जहाँ उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दूल्हे का शव शुक्रवार सुबह पैतृक गांव भरवलिया पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई, और बड़ी संख्या में ग्रामीण व महिलाएं अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ीं। जवान बेटे की असमय मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इस हादसे के चलते दोनों परिवारों के सभी मांगलिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। यह भी बताया गया कि रघुनी कुमारी, दूल्हे के बड़े भाई कर्मा शर्मा की साली हैं। कुछ परिवार के सदस्य इस दुखद घटना को अंधविश्वास से जोड़ते हुए 'डायन-बिसाही' जैसी बातें कर रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में कोई प्रमाण या आधिकारिक पुष्टि नहीं है, और चिकित्सकों द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र के अनुसार उनकी मृत्यु रक्सौल के एसआरपी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई।1
- पाकिस्तान की वूमेन'स टीम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। टीम पहले 2026 के T20 वर्ल्ड कप के लिए 'अग्रेशन' की तैयारी कर रही थी। हालाँकि, उन्हें शुरुआती तीन मैचों में ही तीन लगातार हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद वे प्रतियोगिता से बाहर हो गईं।1
- भारत और आयरलैंड के बीच होने वाले मैच में वैभव सूर्यवंशी को कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।1
- अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर भारत-नेपाल सीमा पर नशे के खिलाफ एक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नरकटियागंज और नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने मिलकर सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया। इस दौरान, ग्रामीणों को नशा मुक्त समाज बनाने की शपथ दिलाई गई और युवाओं से नशे से दूर रहने का आग्रह किया गया। यह विशेष जागरूकता कार्यक्रम 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नरकटियागंज के कार्यवाहक कमांडेंट श्री गोविन्द कुमार ठाकुर के मार्गदर्शन में वाहिनी मुख्यालय और सभी सीमा चौकियों पर आयोजित किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों, विशेषकर युवाओं को नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के खतरों से अवगत कराना था। भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा का अक्सर नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए दुरुपयोग किया जाता है। इस चुनौती से निपटने के लिए दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां लगातार सहयोग कर रही हैं। इसी क्रम में, SSB और APF नेपाल ने संयुक्त रूप से यह अभियान चलाकर लोगों को नशे के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, युवा, महिलाएं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे। सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने बताया कि नशा न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को नष्ट करता है, बल्कि पारिवारिक खुशियों को छीन लेता है और समाज में अपराध व सामाजिक विघटन को बढ़ावा देता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि नशीली दवाओं का बढ़ता चलन युवाओं के भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा बन रहा है, क्योंकि नशे में लिप्त व्यक्ति अपने परिवार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर हो जाता है। इस दौरान, उपस्थित ग्रामीणों और युवाओं को नशे से दूर रहने तथा दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई गई। लोगों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नशा नहीं करेंगे और अपने परिवार तथा समाज को भी नशामुक्त बनाने में सहयोग करेंगे। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि नशा एक सामाजिक बुराई है जिसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है, जिससे घरेलू हिंसा, आर्थिक संकट, अपराध और मानसिक तनाव जैसी अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। उन्होंने जोर दिया कि इसका समाधान केवल कानून के माध्यम से नहीं, बल्कि जन जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। कार्यक्रम में 44वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के उप कमांडेंट श्री ज्ञानेन्द्र कुमार, सहायक कमांडेंट श्री रामवीर कुमार और सहायक कमांडेंट श्री तरुण कुमार सहित कई अधिकारी व जवान मौजूद थे, जबकि APF नेपाल के अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों और बलकर्मियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। भारत और नेपाल के सुरक्षा बलों द्वारा चलाया गया यह संयुक्त जागरूकता अभियान सीमावर्ती क्षेत्रों में नशे के खिलाफ एक जन आंदोलन का रूप लेने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुरक्षा बलों ने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें कहीं भी नशीले पदार्थों की तस्करी या बिक्री की सूचना मिलती है, तो वे तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचित करें ताकि समाज को इस खतरे से बचाया जा सके। इस संयुक्त अभियान ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है, और जागरूकता, सहयोग व सामूहिक प्रयास से ही एक नशामुक्त और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है।1