सुलतानपुर शहर के घासीगंज (बशीर नगर) निवासी मोहम्मद रफीक ने अपने सगे भाइयों फारूक, तौफीक और रऊफ पर पुश्तैनी मकान पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित मोहम्मद रफीक ने इस संबंध में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच, मकान पर हुए अवैध कब्जे को हटवाने और अपने जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। मोहम्मद रफीक के अनुसार, वह वर्ष 2014 में रोजगार के सिलसिले में गुजरात चले गए थे। उनकी शिकायत है कि इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर उनके भाइयों ने उनके मकान पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। जब वह वापस लौटे और उन्होंने अपने भाइयों से मकान खाली करने की बात कही, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी। पीड़ित का कहना है कि स्थानीय स्तर पर इस विवाद का कोई समाधान नहीं निकल पाने के बाद उन्होंने प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, और न ही आरोपी भाइयों का पक्ष सामने आया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी।
सुलतानपुर शहर के घासीगंज (बशीर नगर) निवासी मोहम्मद रफीक ने अपने सगे भाइयों फारूक, तौफीक और रऊफ पर पुश्तैनी मकान पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित मोहम्मद रफीक ने इस संबंध में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच, मकान पर हुए अवैध कब्जे को हटवाने और अपने जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। मोहम्मद रफीक के अनुसार, वह वर्ष 2014 में रोजगार के सिलसिले में गुजरात चले गए थे। उनकी शिकायत है कि इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर उनके भाइयों ने उनके मकान पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। जब वह वापस लौटे और उन्होंने अपने भाइयों से मकान खाली करने की बात कही, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी। पीड़ित का कहना है कि स्थानीय स्तर पर इस विवाद का कोई समाधान नहीं निकल पाने के बाद उन्होंने प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, और न ही आरोपी भाइयों का पक्ष सामने आया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी।
- सुल्तानपुर पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के शिकार हुए लोगों को बड़ी राहत प्रदान की है। जून 2024 के महीने में, पुलिस ने विभिन्न साइबर ठगी के 19 पीड़ितों के बैंक खातों में कुल ₹10,33,140 (दस लाख तैंतीस हजार एक सौ चालीस रुपये) सफलतापूर्वक वापस कराए हैं। यह महत्वपूर्ण कार्रवाई पुलिस अधीक्षक चारू निगम के कुशल निर्देशन में की गई। इस अभियान में नोडल अधिकारी एएसपी बृजनरायण सिंह और क्षेत्राधिकारी, साइबर क्राइम थाना आलोक कुमार सिंह का पर्यवेक्षण रहा, जबकि साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व में टीम ने ठगी गई राशि को वापस दिलाने का काम किया। पुलिस अधीक्षक चारू निगम ने इस विषय पर एक वीडियो बयान भी जारी किया है, जिसमें उन्होंने जनता से एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने बताया कि साइबर धोखाधड़ी होने के बाद शुरुआती 24 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित इस अवधि में तुरंत अपनी शिकायत दर्ज कराता है, तो ठगी गई राशि को अपराधियों द्वारा अन्य खातों में स्थानांतरित होने से पहले ही रोका जा सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि ठगी का अहसास होते ही सीधे थाने जाने के बजाय तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। एसपी ने यह भी जानकारी दी कि केंद्र सरकार के मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के तहत, अब साइबर थाने के प्रभारी निरीक्षक को 50,000 रुपये तक की होल्ड की गई राशि को जांच के बाद सीधे पीड़ित के खाते में वापस ट्रांसफर करने का अधिकार मिल गया है। इस प्रावधान से छोटे मामलों में पीड़ितों को अदालत के चक्कर लगाए बिना त्वरित राहत मिल रही है। उन्होंने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि जैसे ही कोई धोखाधड़ी हो, बिना समय गंवाए 1930 पर कॉल करना चाहिए, क्योंकि पैसा अपराधियों के खाते में होल्ड होने पर रिफंड की संभावना काफी बढ़ जाती है।3
- उत्तर प्रदेश के मेरठ में DIOS कार्यालय के बाबू राजीव सिंघल को ₹25 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार, राजीव सिंघल ने एक चपरासी की पेंशन जारी करने के लिए कुल ₹1 लाख की रिश्वत की डील तय की थी, जिसमें से वह ₹25 हजार लेते हुए पकड़े गए।1
- सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने जून माह में हुए साइबर ठगी के एक मामले में कार्रवाई करते हुए, पीड़ित को 10,33,140 रुपये की ठगी गई रकम सफलतापूर्वक वापस दिलाई है। इस सराहनीय पहल को लेकर ज़िले भर में एसपी के काम की बड़ी प्रशंसा हो रही है।1
- समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी को कुछ देर पहले दिल का दौरा पड़ा है। उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राजेंद्र चौधरी समाजवादी पार्टी की संस्थापक टीम के सदस्य रहे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाते थे। जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने, तब मुलायम सिंह यादव ने उन्हें अखिलेश के साथ साये की तरह रहने का निर्देश दिया था। इसके बाद से राजेंद्र चौधरी कभी भी अखिलेश यादव से एक भी दिन, एक भी घंटे अलग नहीं हुए और हमेशा उनके आसपास ही नजर आते हैं। घटना की जानकारी मिलने पर, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अस्पताल पहुंचकर राजेंद्र चौधरी का हालचाल लिया। उन्होंने डॉक्टरों से उनकी सेहत के बारे में विस्तृत जानकारी ली और बेहतर से बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।1
- प्रतापगढ़ जनपद के युवा समाजसेवी आकाश सिंह गरीब और जरूरतमंदों को प्रतिदिन भोजन कराने के लिए उल्लेखनीय प्रयास कर रहे हैं। उनका यह कार्य गरीब व जरूरतमंदों के भोजन के लिए एक शानदार पहल है।1
- प्रतापगढ़ पुलिस ने CEIR पोर्टल और अपनी सर्विलांस टीम की तकनीकी सहायता से कई गुम हुए मोबाइल फोन सफलतापूर्वक बरामद किए हैं। इन सभी बरामद मोबाइल फोन को आज उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द कर दिया गया है। इस पूरी कार्यवाही के संबंध में प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक श्री दीपक भूकर की बाइट का भी जिक्र किया गया है। अपने गुम हुए मोबाइल फोन वापस मिलने पर लोगों ने प्रतापगढ़ पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्यवाही की भरपूर सराहना की है।1
- सुलतानपुर शहर के घासीगंज (बशीर नगर) निवासी मोहम्मद रफीक ने अपने सगे भाइयों फारूक, तौफीक और रऊफ पर पुश्तैनी मकान पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित मोहम्मद रफीक ने इस संबंध में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने इस मामले में निष्पक्ष जांच, मकान पर हुए अवैध कब्जे को हटवाने और अपने जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। मोहम्मद रफीक के अनुसार, वह वर्ष 2014 में रोजगार के सिलसिले में गुजरात चले गए थे। उनकी शिकायत है कि इसी दौरान उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर उनके भाइयों ने उनके मकान पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। जब वह वापस लौटे और उन्होंने अपने भाइयों से मकान खाली करने की बात कही, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी। पीड़ित का कहना है कि स्थानीय स्तर पर इस विवाद का कोई समाधान नहीं निकल पाने के बाद उन्होंने प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। फिलहाल, इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, और न ही आरोपी भाइयों का पक्ष सामने आया है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद आगे की उचित कार्रवाई की जाएगी।1
- कानपुर शहर में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण एक बड़ा हादसा हो गया, जहां काकादेव थाना क्षेत्र के पांडु नगर स्थित हार्मोनी विला सोसायटी में जमीन धंस गई, जिससे इमारत का बेसमेंट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना में कई कारें और दोपहिया वाहन मलबे में दब गए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, और प्रशासन, पुलिस तथा एसडीआरएफ की टीमों ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाकर 50 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने सोसायटी के पास चल रहे मेट्रो के भूमिगत निर्माण कार्य को इस हादसे का संभावित कारण बताया, लेकिन मेट्रो प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मेट्रो प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में टनल निर्माण का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और इसका वर्तमान घटना से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल, प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और विशेषज्ञों की एक टीम जमीन धंसने के कारणों का पता लगा रही है। एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। यह हादसा लगातार बारिश के बीच शहरी निर्माण और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।1