कुशीनगर के विशुनपुरा विकास खण्ड के मनीकौरा ग्राम सभा में केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी 15वें वित्त आयोग योजना के तहत लगाए जा रहे आरओ प्लांट में भारी भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई लगभग ₹4 लाख 64 हजार की इस परियोजना में ग्राम प्रधान नंदलाल साहनी और सचिव राजकिशोर राय की मिलीभगत से बंदरबांट किए जाने का दावा किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि कार्य पूरी तरह समाप्त होने से पहले ही ₹3 लाख 66 हजार का भुगतान कर दिया गया है, जिस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच-पड़ताल में सामने आया है कि ग्राम सचिवालय परिसर में लगे आरओ प्लांट के नीचे निर्माण किए गए चबूतरे में घटिया और दोयम दर्जे की ईंटों का प्रयोग किया गया है। मौके पर सिर्फ एक छोटा चबूतरा, लोकल क्वालिटी की टाइल्स, एक साधारण मशीन और उसकी सुरक्षा के लिए प्लाई का घेरा ही खड़ा किया गया है। स्थानीय निर्माण विशेषज्ञों के अनुसार, मौके पर हुए कुल कार्य की वास्तविक लागत डेढ़ लाख रुपये से भी कम दिखाई देती है, जिससे यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि शेष लाखों रुपये आखिर कहां खर्च हुए। भुगतान प्रक्रिया पर सबसे बड़ा सवाल उठाया जा रहा है, क्योंकि नियमों के अनुसार 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में कार्य पूर्ण होने और तकनीकी सत्यापन (जिसमें जेई, एडीओ पंचायत का निरीक्षण, माप पुस्तिका तैयारी, जियो टैगिंग, फोटोग्राफी और गुणवत्ता परीक्षण शामिल है) के बाद ही भुगतान किया जाता है। हालांकि, मनीकौरा में ग्राम प्रधान और सचिव ने नियम विरुद्ध तरीके से, कार्य शुरू होने से पहले ही ₹3 लाख 66 हजार निकालकर धन का बंदरबांट कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य अधूरा होने और सभी औपचारिकताएं पूरी न होने के बावजूद लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया, जिससे ग्राम प्रधान नंदलाल साहनी और सचिव राजकिशोर राय की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जब ग्राम प्रधान नंदलाल साहनी से अधूरे काम पर भारी भुगतान को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बेहद लापरवाह और बेअंदाज लहजे में कहा, “आप लोगों से क्या मतलब? अभी काम पूरा नहीं हुआ है। अधिकारी पूछेंगे तो हम उनसे बात कर लेंगे।” प्रधान ने यह भी स्वीकार किया कि कार्य पूरा होने से पहले भुगतान किया गया है, जिसे उन्होंने "रनिंग पेमेंट" बताते हुए कहा कि बाकी पैसा बाद में मिलेगा और वे अधिकारियों से बात कर लेंगे क्योंकि वे पांच बार से प्रधान हैं। प्रधान का यह बयान गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिससे यह प्रतीत होता है कि सरकारी नियम-कानूनों की जगह व्यक्तिगत रसूख और अधिकारियों से 'सेटिंग' के दम पर योजनाएं चलाई जा रही हैं। ग्राम सचिव का जवाब तो और भी चौंकाने वाला था; जब उनसे आरओ प्लांट के कुल बजट और खर्च के बारे में पूछा गया तो उन्होंने निर्लज्जता से कहा, “बजट से क्या मतलब? आप अपनी मंशा बताइए।” सचिव ने यह भी दावा किया कि जितना पैसा निकाला गया है, उतना काम पूरा हो गया है और जरूरत पड़ने पर प्रस्ताव कर बजट बढ़ाकर काम करा दिया जाएगा। इन बेलगाम बयानों और अधूरे निर्माण पर लाखों रुपये के भुगतान से बड़े स्तर पर मिलीभगत के खेल का संकेत मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के विकास के नाम पर सरकारी धन को खुलेआम लूटा जा रहा है। इस मामले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं: कार्य पूर्ण हुए बिना भुगतान किस आधार पर किया गया? माप पुस्तिका किसने तैयार की? जियो टैगिंग और गुणवत्ता सत्यापन कब हुआ? वास्तविक लागत और भुगतान राशि में इतना बड़ा अंतर क्यों है? और क्या अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है? ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले की समय रहते जांच नहीं हुई, तो लोग सरकारी योजनाओं पर से अपना भरोसा खो देंगे और प्रधान व सचिव इसी तरह सरकारी धन का बंदरबांट करते रहेंगे। अब यह देखना बाकी है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस वित्तीय अनियमितता पर कोई कार्रवाई करते हैं, या यह मामला प्रधान के "अधिकारियों से बात कर लेंगे" वाले कथन के साथ ही समाप्त हो जाता है।
कुशीनगर के विशुनपुरा विकास खण्ड के मनीकौरा ग्राम सभा में केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी 15वें वित्त आयोग योजना के तहत लगाए जा रहे आरओ प्लांट में भारी भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता का आरोप लगा है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई लगभग ₹4 लाख 64 हजार की इस परियोजना में ग्राम प्रधान नंदलाल साहनी और सचिव राजकिशोर राय की मिलीभगत से बंदरबांट किए जाने का दावा किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि कार्य पूरी तरह समाप्त होने से पहले ही ₹3 लाख 66 हजार का भुगतान कर दिया गया है, जिस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच-पड़ताल में सामने आया है कि ग्राम सचिवालय परिसर में लगे आरओ प्लांट के नीचे निर्माण किए गए चबूतरे में घटिया और दोयम दर्जे की ईंटों का प्रयोग किया गया है। मौके पर सिर्फ एक छोटा चबूतरा, लोकल क्वालिटी की टाइल्स, एक साधारण मशीन और उसकी सुरक्षा के लिए प्लाई का घेरा ही खड़ा किया गया है। स्थानीय निर्माण विशेषज्ञों के अनुसार, मौके पर हुए कुल कार्य की वास्तविक लागत डेढ़ लाख रुपये से भी कम दिखाई देती है, जिससे यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि शेष लाखों रुपये आखिर कहां खर्च हुए। भुगतान प्रक्रिया पर सबसे बड़ा सवाल उठाया जा रहा है, क्योंकि नियमों के अनुसार 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में कार्य पूर्ण होने और तकनीकी
सत्यापन (जिसमें जेई, एडीओ पंचायत का निरीक्षण, माप पुस्तिका तैयारी, जियो टैगिंग, फोटोग्राफी और गुणवत्ता परीक्षण शामिल है) के बाद ही भुगतान किया जाता है। हालांकि, मनीकौरा में ग्राम प्रधान और सचिव ने नियम विरुद्ध तरीके से, कार्य शुरू होने से पहले ही ₹3 लाख 66 हजार निकालकर धन का बंदरबांट कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य अधूरा होने और सभी औपचारिकताएं पूरी न होने के बावजूद लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया, जिससे ग्राम प्रधान नंदलाल साहनी और सचिव राजकिशोर राय की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जब ग्राम प्रधान नंदलाल साहनी से अधूरे काम पर भारी भुगतान को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बेहद लापरवाह और बेअंदाज लहजे में कहा, “आप लोगों से क्या मतलब? अभी काम पूरा नहीं हुआ है। अधिकारी पूछेंगे तो हम उनसे बात कर लेंगे।” प्रधान ने यह भी स्वीकार किया कि कार्य पूरा होने से पहले भुगतान किया गया है, जिसे उन्होंने "रनिंग पेमेंट" बताते हुए कहा कि बाकी पैसा बाद में मिलेगा और वे अधिकारियों से बात कर लेंगे क्योंकि वे पांच बार से प्रधान हैं। प्रधान का यह बयान गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है, जिससे यह प्रतीत होता है कि सरकारी नियम-कानूनों की जगह व्यक्तिगत रसूख और अधिकारियों से 'सेटिंग' के दम पर योजनाएं चलाई जा रही हैं। ग्राम सचिव का जवाब तो और भी चौंकाने वाला था; जब उनसे आरओ
प्लांट के कुल बजट और खर्च के बारे में पूछा गया तो उन्होंने निर्लज्जता से कहा, “बजट से क्या मतलब? आप अपनी मंशा बताइए।” सचिव ने यह भी दावा किया कि जितना पैसा निकाला गया है, उतना काम पूरा हो गया है और जरूरत पड़ने पर प्रस्ताव कर बजट बढ़ाकर काम करा दिया जाएगा। इन बेलगाम बयानों और अधूरे निर्माण पर लाखों रुपये के भुगतान से बड़े स्तर पर मिलीभगत के खेल का संकेत मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के विकास के नाम पर सरकारी धन को खुलेआम लूटा जा रहा है। इस मामले में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं: कार्य पूर्ण हुए बिना भुगतान किस आधार पर किया गया? माप पुस्तिका किसने तैयार की? जियो टैगिंग और गुणवत्ता सत्यापन कब हुआ? वास्तविक लागत और भुगतान राशि में इतना बड़ा अंतर क्यों है? और क्या अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है? ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले की समय रहते जांच नहीं हुई, तो लोग सरकारी योजनाओं पर से अपना भरोसा खो देंगे और प्रधान व सचिव इसी तरह सरकारी धन का बंदरबांट करते रहेंगे। अब यह देखना बाकी है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस वित्तीय अनियमितता पर कोई कार्रवाई करते हैं, या यह मामला प्रधान के "अधिकारियों से बात कर लेंगे" वाले कथन के साथ ही समाप्त हो जाता है।
- कुशीनगर जनपद के अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ आज सुबह 23 वर्षीय एक युवक की बेरहमी से पिटाई की गई, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बरडिहा निवासी मृतक संदीप यादव (23 वर्ष), पुत्र शिवधारी यादव, अपने घर के पास गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाए गए थे। उन्हें तुरंत बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने बताया कि यह घटना आपसी रंजिश या मारपीट के दौरान हुई। घटना की सूचना मिलते ही अहिरौली बाजार पुलिस और उच्चाधिकारी तत्काल मौके पर पहुँचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर दिया है और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, दोषियों की जल्द पहचान और गिरफ्तारी के लिए फॉरेंसिक टीम और सर्विलांस टीम को भी जाँच में शामिल किया गया है। इस मामले पर जानकारी देते हुए क्षेत्राधिकारी (सीओ) कसया, कुन्दन कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस टीम घटना स्थल पर पहुँच गई थी और मृतक का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि घटना के हर पहलू की गहनता से जाँच की जा रही है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस फिलहाल परिजनों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात हमलावरों की पहचान करने में जुटी है, और इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।1
- कुशीनगर के नगरपालिका परिषद पडरौना कार्यालय में रविवार को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मासिक कार्यक्रम 'मन की बात' के 134वें एपिसोड का सीधा प्रसारण बड़े उत्साह और अनुशासन के साथ सुना गया। इस कार्यक्रम का आयोजन नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष विनय जायसवाल के निर्देशन में उनके प्रतिनिधि मनीष बुलबुल जायसवाल के नेतृत्व में किया गया था। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भीषण गर्मी से बचाव, जल संरक्षण, समाज सेवा, प्रेरणादायक जनांदोलन, भारत की खेल उपलब्धियों और आम से जुड़ी सांस्कृतिक गतिविधियों सहित कई समसामयिक मुद्दों पर विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा शक्ति देश का भविष्य है, जिनकी ऊर्जा, नवाचार और सामाजिक जागरूकता ने देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी और लू से बचाव के उपायों के साथ ही नई उम्मीदों और संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का संदेश भी दिया। कार्यक्रम के बाद, अध्यक्ष जायसवाल ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत अपनी स्वर्णिम यात्रा शुरू कर चुका है और बहुआयामी विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत कृषि, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक के साथ-साथ खेल और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है, और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्सुक है। जायसवाल ने पश्चिमी अरब देशों में युद्ध की स्थिति के बावजूद ईंधन की प्रचुर आपूर्ति और मूल्य नियंत्रण को एक बड़ी विदेश नीतिगत विजय बताते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की। इस दौरान विनोद गुप्ता, विशाल कुमार, बृजेश कुमार, राहुल कुमार, अखिलेश सिंह, अमन मोदनवाल, नीरज मिश्र, विनय पाण्डेय, गौरव रौनियर, अभय मारोदिया, मृत्युंजय दीक्षित, गुलाबी शाह, संतोष चौहान, सागर जायसवाल, केदार मद्धेशिया, राहुल गुप्ता और मुरारी पटेल सहित कई आमजन उपस्थित रहे।4
- कुशीनगर में परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को भोजन परोसने वाली रसोइयों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रीय रसोइया कर्मचारी समिति, जनपद कुशीनगर के बैनर तले इन रसोइयों ने सोमवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राम जियावन मौर्य को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें राज्य कर्मचारी का दर्जा, मानदेय में भारी बढ़ोतरी और नियमितीकरण की प्रमुख मांगें उठाई गईं। मुख्यमंत्री को संबोधित इस ज्ञापन में बताया गया कि रसोइयों को प्रतिमाह मात्र 2000 रुपये का मानदेय मिलता है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में परिवार चलाने के लिए बिल्कुल अपर्याप्त है। इसके अतिरिक्त, कई विद्यालयों में उनसे भोजन बनाने के अलावा झाड़ू लगाने, शौचालय साफ करने और बर्तन धोने जैसे अतिरिक्त कार्य भी कराए जाते हैं, जिसके कारण उन्हें मानसिक और आर्थिक शोषण का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने मांग की है कि उनका मानदेय बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए, उन्हें नियमित कर राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, मानदेय का भुगतान समय पर हो और उन पर होने वाले उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाई जाए। समिति के जिला अध्यक्ष जयप्रकाश कुशवाहा के नेतृत्व में यह ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन प्राप्त करने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राम जियावन मौर्य ने रसोइयों की मांगों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस दौरान फेकनी, कलावती, रेनू देवी, ऊषा देवी, गुड़िया, गीता सहित बड़ी संख्या में रसोइया कर्मचारी मौजूद रहीं।4
- एक भयंकर आर्थिक तूफ़ान सर पर मंडरा रहा है, जिसके लिए पिछले 12 सालों में मोदी जी द्वारा खड़ा किया गया ढाँचा ज़िम्मेदार बताया गया है। इस दावे के अनुसार, यह ढाँचा विशेष रूप से अडानी और अंबानी के लिए निर्मित किया गया था और अब यही ढाँचा भरभराकर ढहने वाला है। आशंका जताई गई है कि जब यह ढाँचा ढहेगा, तब अडानी और अंबानी को चोट नहीं पहुँचेगी, क्योंकि उनके पास इस स्थिति से निकलने के रास्ते मौजूद हैं। हालाँकि, इसका सीधा और बुरा असर आम जनता पर पड़ेगा। इसमें युवाओं, ग़रीबों, मध्यमवर्ग के लोगों, किसानों, मज़दूरों और छोटे व्यापारियों को चोट पहुँचने की बात कही गई है, जिन्हें इस ढाँचे का कभी हिस्सा नहीं माना गया।1
- बंगाल में हजारों हिंदुओं की हत्या, हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार, जजों को बंधक बनाए जाने और सांसद-विधायकों की पिटाई जैसी गंभीर घटनाओं को लेकर गहरा गुस्सा व्यक्त किया गया है। यह तीव्र रोष इन कथित कृत्यों के संदर्भ में सामने आया है, जिसके साथ ही यह भी कहा गया है कि “जैसी करनी वैसी भरनी।”1
- बकरीद के दिन हिंदू लड़के सूर्या चौहान की हत्या के मुख्य आरोपी मोहम्मद असद को उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया है। इस कार्रवाई पर लोगों ने 'नो जेल नो बेल सीधे अल्लाह से मेल' जैसे नारे के साथ संतुष्टि व्यक्त की है, जो इस मामले को लेकर व्याप्त जन आक्रोश को दर्शाता है।1