बसियाउड़ के दिन नालंदा में मटका फोड़ का धमाल, ढोल-नगाड़ों पर थिरके लोग एंकर, नालंदा जिले में हिंदू धर्म के सबसे बड़े महापर्व होली को लेकर इस वर्ष भी उत्साह चरम पर रहा। जिले में हर साल की तरह इस बार भी एक विशेष और अनोखी परंपरा के साथ होली मनाई गई, जिसने पूरे इलाके को रंग और उल्लास से सराबोर कर दिया। बिहार थाना क्षेत्र के बैंगनबाद मोहल्ला, वार्ड नंबर 29 कहड़टोली गली में होली के दूसरे दिन ‘बसियाउड़’ के अवसर पर गुरुवार देर रात पारंपरिक ‘मटका फोड़’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मोहल्ले में उत्सव का ऐसा माहौल था, जिसे देख हर कोई आनंदित हो उठा। एक ओर महिलाएं रंग और गुलाल के साथ होली का आनंद ले रही थीं, तो दूसरी ओर युवाओं ने पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सबसे पहले लोगों ने कीचड़ और मिट्टी से होली खेलकर वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और होली गीतों की गूंज के बीच युवाओं ने मटका फोड़कर खुशियों का इजहार किया। कार्यक्रम में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। पूरे इलाके में भाईचारे और उल्लास का वातावरण बना रहा। तीन दिवसीय होली महोत्सव का समापन भी इसी पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम के साथ संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। दोपहर बाद लोग स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं और फिर रंग-गुलाल के साथ होली खेलते हैं। घर-घर में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देते हैं। नालंदा की यह अनोखी होली न केवल जिले की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। यही वजह है कि इस परंपरा को देखने दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं। इस अवसर पर आयोजक सुमित कुमार, जितेंद्र कुमार, टुनटुन सिंह, रौशन कुमार, अमन कुमार, सौरव कुमार, पीयूष कुमार, पुष्पा देवी और सागर कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
बसियाउड़ के दिन नालंदा में मटका फोड़ का धमाल, ढोल-नगाड़ों पर थिरके लोग एंकर, नालंदा जिले में हिंदू धर्म के सबसे बड़े महापर्व होली को लेकर इस वर्ष भी उत्साह चरम पर रहा। जिले में हर साल की तरह इस बार भी एक विशेष और अनोखी परंपरा के साथ होली मनाई गई, जिसने पूरे इलाके को रंग और उल्लास से सराबोर कर दिया। बिहार थाना क्षेत्र के बैंगनबाद मोहल्ला, वार्ड नंबर 29 कहड़टोली गली में होली के दूसरे दिन ‘बसियाउड़’ के अवसर पर गुरुवार देर रात पारंपरिक ‘मटका फोड़’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मोहल्ले में उत्सव का ऐसा माहौल था, जिसे देख हर कोई आनंदित हो उठा। एक ओर महिलाएं रंग और गुलाल के साथ होली का आनंद ले रही थीं, तो दूसरी ओर युवाओं ने पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सबसे पहले लोगों ने कीचड़ और मिट्टी से होली खेलकर वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और होली गीतों की गूंज के बीच युवाओं ने मटका फोड़कर खुशियों का इजहार किया। कार्यक्रम में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। पूरे इलाके में भाईचारे और उल्लास का वातावरण बना रहा। तीन दिवसीय होली महोत्सव का समापन भी इसी पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम के साथ संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। दोपहर बाद लोग स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं और फिर रंग-गुलाल के साथ होली खेलते हैं। घर-घर में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देते हैं। नालंदा की यह अनोखी होली न केवल जिले की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। यही वजह है कि इस परंपरा को देखने दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं। इस अवसर पर आयोजक सुमित कुमार, जितेंद्र कुमार, टुनटुन सिंह, रौशन कुमार, अमन कुमार, सौरव कुमार, पीयूष कुमार, पुष्पा देवी और सागर कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।
- एंकर, नालंदा जिले में हिंदू धर्म के सबसे बड़े महापर्व होली को लेकर इस वर्ष भी उत्साह चरम पर रहा। जिले में हर साल की तरह इस बार भी एक विशेष और अनोखी परंपरा के साथ होली मनाई गई, जिसने पूरे इलाके को रंग और उल्लास से सराबोर कर दिया। बिहार थाना क्षेत्र के बैंगनबाद मोहल्ला, वार्ड नंबर 29 कहड़टोली गली में होली के दूसरे दिन ‘बसियाउड़’ के अवसर पर गुरुवार देर रात पारंपरिक ‘मटका फोड़’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मोहल्ले में उत्सव का ऐसा माहौल था, जिसे देख हर कोई आनंदित हो उठा। एक ओर महिलाएं रंग और गुलाल के साथ होली का आनंद ले रही थीं, तो दूसरी ओर युवाओं ने पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सबसे पहले लोगों ने कीचड़ और मिट्टी से होली खेलकर वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और होली गीतों की गूंज के बीच युवाओं ने मटका फोड़कर खुशियों का इजहार किया। कार्यक्रम में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। पूरे इलाके में भाईचारे और उल्लास का वातावरण बना रहा। तीन दिवसीय होली महोत्सव का समापन भी इसी पारंपरिक मटका फोड़ कार्यक्रम के साथ संपन्न हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। दोपहर बाद लोग स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं और फिर रंग-गुलाल के साथ होली खेलते हैं। घर-घर में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देते हैं। नालंदा की यह अनोखी होली न केवल जिले की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और सामुदायिक एकता का भी प्रतीक है। यही वजह है कि इस परंपरा को देखने दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं। इस अवसर पर आयोजक सुमित कुमार, जितेंद्र कुमार, टुनटुन सिंह, रौशन कुमार, अमन कुमार, सौरव कुमार, पीयूष कुमार, पुष्पा देवी और सागर कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।1
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- निशांत कुमार1
- Post by Amit Kumar1
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