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Kuldeep Pal
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More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- कानपुर देहात के जिलाधिकारी कपिल सिंह ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में माती स्थित ईवीएम वेयरहाउस का त्रैमासिक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान, जिलाधिकारी ने वेयरहाउस की सीसीटीवी व्यवस्था, साफ-सफाई और रखरखाव का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने इन सभी पहलुओं की जांच के उपरांत संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।1
- मुख्य विकास अधिकारी श्री विधान जायसवाल की अध्यक्षता में मंगलवार को विकास भवन सभागार में "फैमिली आईडी : एक परिवार-एक पहचान" योजना की प्रगति की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना, पात्र परिवारों का शत-प्रतिशत पंजीकरण करना और विभागीय समन्वय के माध्यम से योजना की प्रगति को गति प्रदान करना था। मुख्य विकास अधिकारी ने बल देते हुए कहा कि यह योजना शासन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है, जिससे पात्र परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सुगम तरीके से मिल सकेगा। बैठक में जनपद स्तरीय अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से और खण्ड विकास अधिकारियों, सहायक विकास अधिकारियों तथा नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। समीक्षा के दौरान, मुख्य विकास अधिकारी ने पंजीकरण, सत्यापन, डेटा अद्यतन और लंबित प्रकरणों की स्थिति की विस्तार से जांच की। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरतने और निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि जिन परिवारों का अभी तक पंजीकरण नहीं हो पाया है, उन्हें चिह्नित कर विशेष अभियान चलाकर योजना से जोड़ा जाए और ग्राम पंचायत व नगरीय क्षेत्रों में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। विभागवार प्रगति की समीक्षा करते हुए, मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को नियमित रूप से अद्यतन प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और तकनीकी या प्रशासनिक समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक पात्र परिवार की पहचान कर उन्हें योजनाओं से लाभान्वित करना सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी क्रम में, समाज कल्याण विभाग के एडीओ समाज कल्याण मुख्यालय शिव शंकर द्वारा अपने पदीय दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन न करने और लक्ष्यों की पूर्ति न करने पर उनका वेतन रोक दिया गया। उन्हें चेतावनी देते हुए स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अतिरिक्त, समाज कल्याण विभाग के ब्लॉक स्तर पर तैनात सभी एडीओ समाज कल्याण का वेतन भी रोकने के साथ-साथ चेतावनी और स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक के अंत में, मुख्य विकास अधिकारी ने सभी अधिकारियों को समन्वित प्रयासों से कार्य करने और योजना के लक्ष्यों को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी दोहराया कि अधिकारी फैमिली आईडी बनाने के कार्य में तेजी लाएं, अन्यथा लापरवाही बरतने वालों पर कार्यवाही की जाएगी। इस दौरान अपर जिलाधिकारी न्यायिक, जिला विकास अधिकारी सुनील तिवारी, उपायुक्त श्रम रोजगार अशोक कुमार, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी प्रतिभा सिंह, और अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।2
- मूल पोस्ट के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि एक निश्चित कहानी पर 1076 लगाने की आवश्यकता होगी।1
- राजधानी लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के मद्देनज़र, प्रदेश भर में बेसमेंट और बिना फायर एनओसी के चल रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई का अभियान जारी है। इसी क्रम में, बुधवार को जालौन जिला प्रशासन ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे संस्थानों के खिलाफ अभियान चलाया। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह के निर्देश पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे कोचिंग संस्थानों के खिलाफ यह अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए जनपद में तहसीलवार पांच संयुक्त जांच टीमों का गठन किया गया है, जिनमें विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं। जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडे ने बताया कि सबसे पहले कोचिंग संस्थानों का चिन्हांकन किया जा रहा है, और जांच में यह देखा जा रहा है कि कहां पर संस्थान बिना अनुमति के चल रहे हैं, कहां पर फायर सेफ्टी के इंतज़ाम नहीं हैं, और कौन से कोचिंग सेंटर बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं। जहां बचाव के पर्याप्त संसाधन और सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिली, वहां के संस्थानों को सील किया जा रहा है। जिला प्रशासन की टीम ने बुधवार को जनपद के एक दर्जन से अधिक पंजीकृत कोचिंग संस्थानों की जांच की। जांच में ये सभी सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिसके बाद उन्हें सील कर दिया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण और सीलिंग का यह क्रम लगातार जारी रहेगा जब तक सभी अवैध और असुरक्षित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती। इसके साथ ही, प्रशासन द्वारा लोगों को जागरूक करने का कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है, जिसमें उन्हें यह बताया जा रहा है कि वे उन इमारतों में जाएं, जहां सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन निकास और अग्निशमन प्रबंध मौजूद हों। जिला प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए यह अभियान मिशन मोड पर चलाया जा रहा है।1
- लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में हुई आगजनी की घटना के बाद जालौन प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने जिले भर के कोचिंग सेंटरों और शिक्षण संस्थानों के खिलाफ एक व्यापक जांच अभियान चलाया, जिसमें अधिकांश संस्थान निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए गए। जांच के दौरान अग्निशमन सुरक्षा, आपातकालीन निकास व्यवस्था, भवन मानकों, पंजीकरण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया गया। कई कोचिंग संस्थानों में गंभीर खामियाँ मिलने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया। इस कार्रवाई की जद में शहर के प्रमुख कोचिंग संस्थान जैसे इंफिनिटी विजन, जेटकिंग, महाश्वेता अकादमी और भदोरिया क्लासेस भी आए, जिन्हें अनियमितताएँ पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, कई अन्य संस्थानों को भी नोटिस जारी कर निर्धारित समयावधि में कमियाँ दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और सभी कोचिंग सेंटरों को निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिले में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों की चरणबद्ध जांच की जाएगी और जहाँ भी सुरक्षा या अन्य नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहाँ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस अभियान से जिले के कोचिंग संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है, और प्रशासन ने यह भी चेताया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।1
- एक व्यक्ति ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को 400 फीट गहरी खाई में धकेल कर मौत के घाट उतार दिया। यह क्रूर कृत्य इसलिए किया गया क्योंकि वह अपने बॉयफ्रेंड के साथ शादी करना चाहती थी। इस जघन्य वारदात के बाद अब सभी की यही पुकार है कि पीड़ित को न्याय मिलेगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या वास्तव में न्याय मिलेगा?1
- कानपुर देहात के माती कलेक्ट्रेट कार्यालय में जिलाधिकारी कपिल सिंह द्वारा जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने जनसामान्य की विभिन्न शिकायतों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध, पारदर्शी तथा गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। प्राप्त प्रार्थना पत्रों के संबंध में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों का संतोषजनक निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब से बचा जाए। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ताओं को उनके प्रकरणों के निस्तारण की प्रगति और स्थिति से समय-समय पर अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए।1
- जालौन के विकासखंड क्षेत्र के ग्राम बोहदपुरा में जलभराव की गंभीर समस्या ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। गाँव के कई मुख्य मार्गों पर लंबे समय से पानी भरा रहने के कारण लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि टूटी हुई नालियों और सफाई व्यवस्था की लगातार अनदेखी के चलते हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उनके घरों के सामने और प्रमुख रास्तों पर अक्सर पानी भरा रहता है, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को खासकर बरसात के दिनों में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीण शिव शंकर पांचाल, सतनारायण पांचाल, अनिल कुशवाहा और खुदा कुशवाहा समेत अन्य लोगों ने ग्राम प्रधान सचिन और पंचायत सचिव पर इस समस्या को लेकर कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सफाई कर्मचारी भी नियमित रूप से काम नहीं कर रहे हैं, जिससे नालियाँ चोक हो गई हैं और गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल टूटी हुई नालियों की मरम्मत कराने, जल निकासी की उचित व्यवस्था करने और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है ताकि उन्हें इस गंभीर समस्या से निजात मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है।1