कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ एक मार्च निकाला। कांग्रेस ने केवल एक दिन की घटना न बताकर, प्रदेशव्यापी '90 दिवसीय संघर्ष' की शुरुआत घोषित किया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले तीन महीनों तक वे "सड़क से लेकर सदन तक" जनता की आवाज को मुखर करेंगे। देहरादून ही नहीं, अब पार्टी राज्य के हर जिले में बारी-बारी से धरना और जनसभाएं आयोजित करेगी। विधानसभा सत्र के दौरान इन मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा ताकि सरकार को जवाबदेह बनाया जा सके। रैली में शामिल हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी कार्यकर्ताओं के जोश और नारों से गूंजती सड़कों ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड कांग्रेस अब पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आ रही है। देहरादून परेड ग्राउंड से शुरू हुआ हुजूम (सचिवालय) की ओर बढ़ा,! जिसका मुख्य उद्देश्य शासन की विफलताओं पर कड़ा विरोध दर्ज कराना था। राज्य की कानून-व्यवस्था और बढ़ती महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को सीधे तौर पर घेरने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कानून व्यवस्था: राज्य में बढ़ते अपराध और सुरक्षा की गिरती स्थिति। महंगाई: घरेलू सामान और ईंधन की बढ़ती कीमतों से आम जनता की बदहाली। महिला सुरक्षा: प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने में विफलता। बेरोजगारी: युवाओं के पास रोजगार के अवसरों का अभाव और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी। भ्रष्टाचार: सरकारी विभागों में कथित अनियमितताओं और पारदिर्शता की कमी। भू-कानून: जमीन से जुड़े मामलों में स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा।
कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ एक मार्च निकाला। कांग्रेस ने केवल एक दिन की घटना न बताकर, प्रदेशव्यापी '90 दिवसीय संघर्ष' की शुरुआत घोषित किया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले तीन महीनों तक वे "सड़क से लेकर सदन तक" जनता की आवाज को मुखर करेंगे। देहरादून ही नहीं,
अब पार्टी राज्य के हर जिले में बारी-बारी से धरना और जनसभाएं आयोजित करेगी। विधानसभा सत्र के दौरान इन मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा ताकि सरकार को जवाबदेह बनाया जा सके। रैली में शामिल हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी कार्यकर्ताओं के जोश और नारों से गूंजती सड़कों ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड कांग्रेस अब पूरी तरह से
चुनावी मोड में नजर आ रही है। देहरादून परेड ग्राउंड से शुरू हुआ हुजूम (सचिवालय) की ओर बढ़ा,! जिसका मुख्य उद्देश्य शासन की विफलताओं पर कड़ा विरोध दर्ज कराना था। राज्य की कानून-व्यवस्था और बढ़ती महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को सीधे तौर पर घेरने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कानून व्यवस्था: राज्य में बढ़ते अपराध और
सुरक्षा की गिरती स्थिति। महंगाई: घरेलू सामान और ईंधन की बढ़ती कीमतों से आम जनता की बदहाली। महिला सुरक्षा: प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने में विफलता। बेरोजगारी: युवाओं के पास रोजगार के अवसरों का अभाव और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी। भ्रष्टाचार: सरकारी विभागों में कथित अनियमितताओं और पारदिर्शता की कमी। भू-कानून: जमीन से जुड़े मामलों में स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा।
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- देहरादून परेड ग्राउंड से शुरू हुआ हुजूम (सचिवालय) की ओर बढ़ा,! जिसका मुख्य उद्देश्य शासन की विफलताओं पर कड़ा विरोध दर्ज कराना था। राज्य की कानून-व्यवस्था और बढ़ती महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को सीधे तौर पर घेरने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कानून व्यवस्था: राज्य में बढ़ते अपराध और सुरक्षा की गिरती स्थिति। महंगाई: घरेलू सामान और ईंधन की बढ़ती कीमतों से आम जनता की बदहाली। महिला सुरक्षा: प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने में विफलता। बेरोजगारी: युवाओं के पास रोजगार के अवसरों का अभाव और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी। भ्रष्टाचार: सरकारी विभागों में कथित अनियमितताओं और पारदिर्शता की कमी। भू-कानून: जमीन से जुड़े मामलों में स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा का मुद्दा।4
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- डोईवाला क्षेत्र में लगातार हो रही चोरियों पर अंकुश लगाने और पूर्व मेहू चोरी के खुलासे की मांग को लेकर डोईवाला नगर पालिका के तमाम सभासद और भाजपा नेता डोईवाला कोतवाली पहुंचे और प्रभारी निरीक्षक प्रदीप राणा से मिलकर अपनी मांग रखी।1