चौथे दिन समाप्त हुई एनएसयूआई की भूख हड़ताल हजारीबाग (विनोबा भावे विश्वविद्यालय परिसर)। विनोबा भावे विश्वविद्यालय, परिसर में छात्रों की जायज़ मांगों को लेकर एनएसयूआई के बैनर तले चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल चौथे दिन समाप्त हो गई। छात्र संघ चुनाव की माँग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अप्रैल महीने के भीतर छात्र संघ चुनाव सम्पन्न करवा लिया जाएगा। गौरतलब है कि एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अभिषेक राज कुशवाहा के नेतृत्व में छात्र पिछले चार दिनों से कड़ाके की ठंड में विश्वविद्यालय परिसर में भूख हड़ताल पर बैठे थे। छात्रों की प्रमुख मांगों में छात्र संघ चुनाव कराना, बंद पड़े हॉस्टलों को खोलना, शैक्षणिक सत्र को नियमित करना, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करना सहित कई बुनियादी मुद्दे शामिल थे। बुधवार देर रात हुई वार्ता रही विफल बुधवार देर रात कुलपति और छात्रों के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण वह वार्ता विफल रही। इसके बाद भी छात्र अपने आंदोलन पर डटे रहे। चौथे दिन गुरुवार को एक बार फिर गंभीर माहौल में वार्ता हुई, जिसमें इस बार कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष जय शंकर पाठक, जिला अध्यक्ष जेपी पटेल, पूर्व बरही विधानसभा प्रत्याशी अरुण साहू के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कुलपति की गैर-मौजूदगी में छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष विकास कुमार, सुकलायन मोइत्रा, सुरेंद्र कुशवाहा, विनोद रंजन, इंद्रजीत कुमार एवं सरोज सिंह वार्ता के लिए पहुँचे। लंबी बातचीत के बाद सभी 21 सूत्री मांगों को लेकर सहमति बनी और मुख्य मांग छात्र संघ चुनाव को अप्रैल महीने में कराए जाने को लेकर आश्वासन दिया गया। भूख हड़ताल समाप्त कराने में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अहम रही। उन्होंने स्वयं भूख हड़ताल स्थल पर पहुँचकर छात्रों से मुलाक़ात की, उनकी बातों को सुना और प्रशासन से सकारात्मक पहल के लिए संवाद किया। एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अभिषेक राज कुशवाहा एवं राजेश कुमार को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया गया। चार दिनों तक चले इस शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन के दौरान छात्रों की तबीयत भी बिगड़ी, लेकिन इसके बावजूद वे अपने हक़ की लड़ाई पर डटे रहे। छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन फिलहाल स्थगित किया गया है, लेकिन यदि भविष्य में दिए गए आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ तो वे फिर से लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने को मजबूर होंगे।
चौथे दिन समाप्त हुई एनएसयूआई की भूख हड़ताल हजारीबाग (विनोबा भावे विश्वविद्यालय परिसर)। विनोबा भावे विश्वविद्यालय, परिसर में छात्रों की जायज़ मांगों को लेकर एनएसयूआई के बैनर तले चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल चौथे दिन समाप्त हो गई। छात्र संघ चुनाव की माँग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अप्रैल महीने के भीतर छात्र संघ चुनाव सम्पन्न करवा लिया जाएगा। गौरतलब है कि एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अभिषेक राज कुशवाहा के नेतृत्व में छात्र पिछले चार दिनों से कड़ाके की ठंड में विश्वविद्यालय परिसर में भूख हड़ताल पर बैठे थे। छात्रों की प्रमुख मांगों में छात्र संघ चुनाव कराना, बंद पड़े हॉस्टलों को खोलना, शैक्षणिक सत्र को नियमित करना, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करना सहित कई बुनियादी मुद्दे शामिल थे। बुधवार देर रात हुई वार्ता रही विफल बुधवार देर रात कुलपति और छात्रों के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति नहीं बन पाने के कारण वह वार्ता विफल रही। इसके बाद भी छात्र अपने आंदोलन पर डटे रहे। चौथे दिन गुरुवार को एक बार फिर गंभीर माहौल में वार्ता हुई, जिसमें इस बार कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष जय शंकर पाठक, जिला अध्यक्ष जेपी पटेल, पूर्व बरही विधानसभा प्रत्याशी अरुण साहू के हस्तक्षेप के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कुलपति की गैर-मौजूदगी में छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष विकास कुमार, सुकलायन मोइत्रा, सुरेंद्र कुशवाहा, विनोद रंजन, इंद्रजीत कुमार एवं सरोज सिंह वार्ता के लिए पहुँचे। लंबी बातचीत के बाद सभी 21 सूत्री मांगों को लेकर सहमति बनी और मुख्य मांग छात्र संघ चुनाव को अप्रैल महीने में कराए जाने को लेकर आश्वासन दिया गया। भूख हड़ताल समाप्त कराने में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अहम रही। उन्होंने स्वयं भूख हड़ताल स्थल पर पहुँचकर छात्रों से मुलाक़ात की, उनकी बातों को सुना और प्रशासन से सकारात्मक पहल के लिए संवाद किया। एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अभिषेक राज कुशवाहा एवं राजेश कुमार को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया गया। चार दिनों तक चले इस शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन के दौरान छात्रों की तबीयत भी बिगड़ी, लेकिन इसके बावजूद वे अपने हक़ की लड़ाई पर डटे रहे। छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन फिलहाल स्थगित किया गया है, लेकिन यदि भविष्य में दिए गए आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ तो वे फिर से लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने को मजबूर होंगे।
- हजारीबाग (मुफस्सिल थाना)।मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बहेरी गांव निवासी बिट्टू कुमार का शव कुछ दिन पूर्व संदिग्ध अवस्था में मिलने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए आज देर शाम ग्रामीणों के साथ जिला परिषद चौक से झंडा चौक तक कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोगों ने बिट्टू कुमार के हत्यारों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। प्रदर्शन में मृतक की पत्नी यशोदा कुमारी, समाजसेवी अभिषेक कुमार और सखिया पंचायत के मुखिया पवन कुमार ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। परिजनों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो धरना-प्रदर्शन और विधानसभा घेराव किया जाएगा।1
- #हजारीबाग को क्या हो गया है ऊपरवाले?!? #चेन #छिनतई करने वाले लोगों की नींद उड़ा दिए हैं, घरों में घुसकर चोर जीना हराम कर दिए हैं तो इधर कल शाम की बात है कि PVM के एक #रक्तवीर के जूते को एक चोर SBMCH ब्लड बैंक से चुराने में भी परहेज ना किया। वीडियो देखें और #जूता_चोर से भी होशियार रहें। #SBMCH #BloodBank #Shoe #thief #hazaribagh #jharkhand1
- Post by Md Javed Ansari1
- कर्नाटक के DGP Officer को Suspend कर दिया गया है औरतों के साथ अश्लीलता हरकत करने के वजह से ||1
- Post by Md Javed Ansari1
- गहलौर घाटी की तस्वीर बनी संघर्ष और संकल्प की जीवंत मिसाल संजय वर्मा गहलौर (गया)। गहलौर घाटी की पहाड़ को हथौड़े से तोड़ते बाबा दशरथ मांझी की ऐतिहासिक तस्वीर आज भी संघर्ष, प्रेम और अटूट संकल्प की पहचान बनी हुई है। इस तस्वीर में बाबा दशरथ मांझी साधारण धोती-कुर्ता में, नंगे पांव या साधारण चप्पल पहने, हाथ में हथौड़ा लिए कठोर चट्टान पर वार करते दिखाई देते हैं। चेहरे पर थकान साफ झलकती है, लेकिन आंखों में जिद, दर्द और लक्ष्य को पाने की अद्भुत चमक नजर आती है। चारों ओर फैला ऊँचा और बेरहम पहाड़ तथा सन्नाटा उनके अकेले संघर्ष की गवाही देता है। यह ऐतिहासिक तस्वीर बिहार के गया जिले के गहलौर गांव की है। दशरथ मांझी ने यह संघर्ष अपनी पत्नी फगुनी देवी की असमय मृत्यु के बाद शुरू किया। पहाड़ पार करते समय इलाज न मिल पाने के कारण उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। उसी क्षण उन्होंने संकल्प लिया कि वे पहाड़ को काटकर ऐसा रास्ता बनाएंगे, जिससे भविष्य में किसी को इस तरह की पीड़ा न सहनी पड़े। करीब 22 वर्षों (1960 से 1982) तक उन्होंने अकेले हथौड़ा-छेनी से पहाड़ काटकर लगभग 360 फीट लंबा, 30 फीट चौड़ा और 25 फीट गहरा रास्ता बना दिया। इस रास्ते से गहलौर गांव की दूरी अस्पताल और शहर से काफी कम हो गई। इस अवसर पर पूर्व मुखिया अरविंद मांझी एवं वर्तमान मुखिया मदन मांझी ने बाबा दशरथ मांझी की जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। दोनों ने संयुक्त रूप से यह निर्णय लिया कि बाबा मांझी के संघर्ष और विचारों को जन-जन तक पहुंचाकर समाज को जागरूक किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी संकल्प और मेहनत का महत्व समझ सके।3
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- Post by Md Javed Ansari1
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