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2,38,566 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और लगभग 25 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश में 75 ज़िले, 350 तहसीलें, 18 मंडल, 826 विकास खंड और 97,941 से ज़्यादा गाँव हैं। लेकिन इतने बड़े राज्य में 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसे वृक्षारोपण अभियानों के तहत हुए खर्चों या नतीजों के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। 'ग्रीन इंडिया' के नाम पर हर साल यह काम किए जाते हैं, लेकिन नतीजा पूरी तरह शून्य रहता है, जिसे साफ़ देखा जा सकता है। यह स्थिति तब है जब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। ऐसे में सोचिए कि अगर उत्तर प्रदेश में दूसरी सरकारें हों या राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे अन्य राज्यों की बात करें, तो वहाँ 'ग्रीन इंडिया' योजना के तहत क्या हाल होगा। यह सब भारतीय नागरिकों के पैसे की सरासर बर्बादी है।
Yogendra Singh
2,38,566 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और लगभग 25 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश में 75 ज़िले, 350 तहसीलें, 18 मंडल, 826 विकास खंड और 97,941 से ज़्यादा गाँव हैं। लेकिन इतने बड़े राज्य में 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसे वृक्षारोपण अभियानों के तहत हुए खर्चों या नतीजों के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। 'ग्रीन इंडिया' के नाम पर हर साल यह काम किए जाते हैं, लेकिन नतीजा पूरी तरह शून्य रहता है, जिसे साफ़ देखा जा सकता है। यह स्थिति तब है जब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। ऐसे में सोचिए कि अगर उत्तर प्रदेश में दूसरी सरकारें हों या राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे अन्य राज्यों की बात करें, तो वहाँ 'ग्रीन इंडिया' योजना के तहत क्या हाल होगा। यह सब भारतीय नागरिकों के पैसे की सरासर बर्बादी है।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- सोशल मीडिया पर लगातार फैल रही भ्रामक खबरों और अफवाहों को लेकर पुलिस ने एक महत्वपूर्ण संदेश और बड़ी चेतावनी जारी की है। मामले में पुलिस अधिकारी ने बयान जारी कर सख्त हिदायत दी है कि बिना किसी पुष्टि के किसी भी खबर को सोशल मीडिया पर शेयर न किया जाए।1
- उत्तर प्रदेश 2,38,566 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल, 75 जिलों, 350 तहसीलों, 18 मंडलों, 826 विकास खंडों, 97,941 से अधिक गांवों और लगभग 25 करोड़ की आबादी के साथ देश का सबसे बड़ा राज्य है। हालांकि, यहां 'एक पेड़ मां के नाम' और ग्रीन इंडिया योजना के तहत किए जा रहे वृक्षारोपण तथा उसके खर्चों की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। हर साल अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन ग्रीन इंडिया के नाम पर जमीनी परिणाम 'नील बटा सन्नाटा' है जिसे नंगी आंखों से साफ देखा जा सकता है। वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान भी यह स्थिति बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे अन्य राज्यों में भी ग्रीन इंडिया योजना के तहत हालात बेहद खराब हैं। इस प्रकार की योजनाओं में भारतीय नागरिकों के पैसों की सरासर बर्बादी की जा रही है।1
- देश में पेपर लीक के मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और भारी हंगामा देखने को मिल रहा है। इस मामले पर राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल अलग-अलग प्रदर्शन करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव रखा है, लेकिन विपक्ष इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहा है। राजनीतिक घमासान के साथ-साथ देश के कई राज्यों में मानसून की भारी बारिश और बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा है, जिससे बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को भारी नुकसान पहुँचा है। इसके अलावा नागा साधुओं के ब्रह्म पात्र के आध्यात्मिक महत्व पर भी बात की गई है।2
- अलीगढ़ के नासिराबाद गांव में गलियों की सड़कों की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। सड़कों के खस्ताहाल होने के कारण गांव की गलियों से आने-जाने और निकलने में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।1
- पेपर लीक मामले पर मोदी जी का बयान सामने आया है। इस पूरे मुद्दे पर मोदी जी ने अपनी बात रखी है और मामले से जुड़ी पूरी खबर सुनने व जानने की बात कही गई है।1
- हाथरस के थाना साइबर क्राइम पुलिस टीम द्वारा सराहनीय कार्य करते हुए सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम) से संबंधित कार्य किया गया है।1
- Post by KRANTKARI Khabar1
- 2,38,566 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल और लगभग 25 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश में 75 ज़िले, 350 तहसीलें, 18 मंडल, 826 विकास खंड और 97,941 से ज़्यादा गाँव हैं। लेकिन इतने बड़े राज्य में 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसे वृक्षारोपण अभियानों के तहत हुए खर्चों या नतीजों के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। 'ग्रीन इंडिया' के नाम पर हर साल यह काम किए जाते हैं, लेकिन नतीजा पूरी तरह शून्य रहता है, जिसे साफ़ देखा जा सकता है। यह स्थिति तब है जब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। ऐसे में सोचिए कि अगर उत्तर प्रदेश में दूसरी सरकारें हों या राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे अन्य राज्यों की बात करें, तो वहाँ 'ग्रीन इंडिया' योजना के तहत क्या हाल होगा। यह सब भारतीय नागरिकों के पैसे की सरासर बर्बादी है।1