सतना मेडिकल कॉलेज में लिफ्ट संकट: 6 महीने से बंद हैं 13 लिफ्ट, डॉक्टर और छात्र सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर सतना: सतना के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में इन दिनों सुविधाओं का बुरा हाल है। पिछले करीब छह महीनों से कॉलेज परिसर की आधी से ज्यादा लिफ्ट बंद पड़ी हैं, जिससे डॉक्टरों, कर्मचारियों और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 27 लिफ्टों में से 13 लिफ्ट चालू नहीं हैं। स्थिति इतनी खराब है कि डॉक्टरों और छात्रों को हर दिन 8 से 9 मंजिल तक सीढ़ियों के रास्ते आना-जाना पड़ रहा है। कॉलेज के शैक्षणिक ब्लॉक में छात्रों को दिन में कई बार अलग-अलग कक्षाओं और विभागों में जाने के लिए इन मंजिलों को सीढ़ियों से ही तय करना पड़ता है। लगातार सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने के कारण वे शारीरिक रूप से थक जाते हैं, जिसका असर उनकी पढ़ाई और काम की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि परिसर के नौ मंजिला आवासीय भवनों और हॉस्टलों में रहने वाले अन्य लोग भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्हें सीढ़ियाँ चढ़ने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। आपातकालीन स्थिति में भी बंद लिफ्ट किसी बड़ी मुसीबत का कारण बन सकती है। बजट अटका, वारंटी खत्म कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने लिफ्टों को ठीक कराने के लिए सरकार से बजट मांगा है, लेकिन अभी तक राशि नहीं मिली है, जिसके कारण मरम्मत का काम अटका हुआ है। मेडिकल कॉलेज में स्थापित लिफ्टें ऑर्बिस एलिवेटर कंपनी लिमिटेड की हैं और इनकी वारंटी फरवरी 2026 में खत्म हो चुकी है। तत्कालीन डीन डॉ. एसपी गर्ग ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को पत्र भेजकर लिफ्टों की मरम्मत और ट्रांसफार्मर लगाने के लिए आवश्यक बजट की मांग की थी। जानकारी के अनुसार, 13 लिफ्टों की मरम्मत के लिए 7 लाख 5 हजार 78 रुपये और ट्रांसफार्मर के लिए 8 लाख 21 हजार 612 रुपये की मांग की गई थी। इस संबंध में पीआईयू और पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री को भी पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। छात्रों की परेशानी और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने 29 अगस्त को सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई थी। सूत्रों के अनुसार, अब तक 10 से ज्यादा शिकायतें की जा चुकी हैं। छात्रों का कहना है कि सिर्फ सीढ़ियाँ चढ़ना ही उनकी परेशानी नहीं है; हॉस्टल में पानी की आपूर्ति प्रभावित होने पर उन्हें पानी भी सीढ़ियों से ही ऊपरी मंजिलों तक ले जाना पड़ता है। एक लिफ्ट निवासियों ने अपने खर्च पर कराई चालू कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार, आवासीय परिसर की एक लिफ्ट निवासियों ने अपने खर्च पर चालू कराई है। हालांकि, निवासियों का दावा है कि इस लिफ्ट की रस्सी कमजोर है और इसके इस्तेमाल में दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। लिफ्ट कंपनी और निर्माण एजेंसी के बीच 'हैंडओवर' और तीन साल की 'डिफेक्ट लायबिलिटी' को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सूत्रों के अनुसार, लिफ्ट कंपनी ने 2022 में निर्माण एजेंसी को लिफ्टें हैंडओवर की थीं, जबकि भवन का हैंडओवर 2023 में हुआ। इसी आधार पर लिफ्ट की वास्तविक उपयोग अवधि और डिफेक्ट लायबिलिटी की अवधि को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। मध्य भारत न्यूज़
सतना मेडिकल कॉलेज में लिफ्ट संकट: 6 महीने से बंद हैं 13 लिफ्ट, डॉक्टर और छात्र सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर सतना: सतना के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) में इन दिनों सुविधाओं का बुरा हाल है। पिछले करीब छह महीनों से कॉलेज परिसर की आधी से ज्यादा लिफ्ट बंद पड़ी हैं, जिससे डॉक्टरों, कर्मचारियों और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 27 लिफ्टों में से 13 लिफ्ट चालू नहीं हैं। स्थिति इतनी खराब है कि डॉक्टरों और छात्रों को हर दिन 8 से 9 मंजिल तक सीढ़ियों के रास्ते आना-जाना पड़ रहा है। कॉलेज के शैक्षणिक ब्लॉक में छात्रों को दिन में कई बार अलग-अलग कक्षाओं और विभागों में जाने के लिए इन मंजिलों को सीढ़ियों से ही तय करना पड़ता है। लगातार सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने के कारण वे शारीरिक रूप से थक जाते हैं, जिसका असर उनकी पढ़ाई और काम की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि परिसर के नौ मंजिला आवासीय भवनों और हॉस्टलों में रहने वाले अन्य लोग भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्हें सीढ़ियाँ चढ़ने में सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। आपातकालीन स्थिति में भी बंद लिफ्ट किसी बड़ी मुसीबत का कारण बन सकती है। बजट अटका, वारंटी खत्म कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने लिफ्टों को ठीक कराने के लिए सरकार से बजट मांगा है, लेकिन अभी तक राशि नहीं मिली है, जिसके कारण मरम्मत का काम अटका हुआ है। मेडिकल कॉलेज में स्थापित लिफ्टें ऑर्बिस एलिवेटर कंपनी लिमिटेड की हैं और इनकी वारंटी फरवरी 2026 में खत्म हो चुकी है। तत्कालीन डीन डॉ. एसपी गर्ग ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को पत्र भेजकर लिफ्टों की मरम्मत और ट्रांसफार्मर लगाने के लिए आवश्यक बजट की मांग की थी। जानकारी के अनुसार, 13 लिफ्टों की मरम्मत के लिए 7 लाख 5 हजार 78 रुपये और ट्रांसफार्मर के लिए 8 लाख 21 हजार 612 रुपये की मांग की गई थी। इस संबंध में पीआईयू और पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री को भी पत्र लिखा गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। छात्रों की परेशानी और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत हॉस्टल में रहने वाले छात्रों ने 29 अगस्त को सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई थी। सूत्रों के अनुसार, अब तक 10 से ज्यादा शिकायतें की जा चुकी हैं। छात्रों का कहना है कि सिर्फ सीढ़ियाँ चढ़ना ही उनकी परेशानी नहीं है; हॉस्टल में पानी की आपूर्ति प्रभावित होने पर उन्हें पानी भी सीढ़ियों से ही ऊपरी मंजिलों तक ले जाना पड़ता है। एक लिफ्ट निवासियों ने अपने खर्च पर कराई चालू कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार, आवासीय परिसर की एक लिफ्ट निवासियों ने अपने खर्च पर चालू कराई है। हालांकि, निवासियों का दावा है कि इस लिफ्ट की रस्सी कमजोर है और इसके इस्तेमाल में दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है। लिफ्ट कंपनी और निर्माण एजेंसी के बीच 'हैंडओवर' और तीन साल की 'डिफेक्ट लायबिलिटी' को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सूत्रों के अनुसार, लिफ्ट कंपनी ने 2022 में निर्माण एजेंसी को लिफ्टें हैंडओवर की थीं, जबकि भवन का हैंडओवर 2023 में हुआ। इसी आधार पर लिफ्ट की वास्तविक उपयोग अवधि और डिफेक्ट लायबिलिटी की अवधि को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है। मध्य भारत न्यूज़
- बड़ी खबर DGP के आदेश के बाद भी सतना ट्रैफिक पुलिस को लगा रील का रोग: सतना में सारे नियम आम जनता के लिए* सतना। आम जनता का बिना सीट बेल्ट चालान काटने वाली सतना ट्रैफिक पुलिस खुद नियमों की धज्जियां उड़ा रही है। प्रदेश के DGP की सख्त रोक के बावजूद, पुलिसकर्मी बिना सीट बेल्ट वाहन चलाते हुए सोशल मीडिया पर लगातार रील्स अपलोड कर रहे हैं।जबकि डीजीपी ने साफ तौर पर आदेश जारी किया है कि वर्दी की गरिमा और पुलिस विभाग के अनुशासन के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। DGP के आदेश और इस दोहरे मापदंड पर जनता सवाल खड़े कर रही है। खाकी का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया कानून का सरेआम मजाक बना रहा है। अब सवाल उठता है दूसरों का चालान काटने वालों का कौन चालान काटेगा, फिलहाल रील बनाने के लिए "वीआईपी ड्यूटी चल रही है भैया" आप भी देखिए1
- *नागौद शिविल अस्पताल से डियूटी डॉ नदारत, फोन लगाने पर मरीजो *नागौद शिविल अस्पताल से डियूटी डॉ नदारत, फोन लगाने पर मरीजो के परिजन से करते है बत्तमीजी से बात ,मरीज हो रहे परेशान , स्टाफ नर्स से पूछने पर ड्यूटी डॉक्टर के बीमार होने की बात की गई*1
- खबर रीवा राजेंद्र शुक्ला का इस्तीफा मांगने पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस की कथित बर्बरता ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने पहुंचे कार्यकर्ताओं के साथ बल प्रयोग खबर रीवा राजेंद्र शुक्ला का इस्तीफा मांगने पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस की कथित बर्बरता ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने पहुंचे कार्यकर्ताओं के साथ बल प्रयोग की कार्रवाई पर कांग्रेस ने नाराजगी जताई है। सवाल सिर्फ विरोध का नहीं, लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी है। #3
- 25 दिन से बिजली न आने के कारण ग्राम बजवाही ग्राम पंचायत नौगवां में एक महीने से बिजली ट्रांसफार्मर जल जाने के कारण गांव में आए दिन कोई न कोई घटना होती हैं जैसे किसी के घर में सांप बिच्छू हर दिन घर में घूस जाते छोटे छोटे बच्चे और वृद्ध लोग रहते हैं और बच्चों की पढ़ाई का भी काफी नुकसान होता है। बिजली के कारण आए दिन ग्रामीण में समस्या का सामना करना पड़ता हैं। कोई शासन प्रशासन या अधिकारी के द्वारा कोई कार्यवाही नही की जा रही हैं। कृपया बिजली विभाग के अधिकारियो द्वारा जल्द से जल्द ग्रामीण लोगों की समस्या का समाधान किया जाए जिससे कोई अनहोनी न हो पाए। आपका बहोत बहोत धन्यवाद।👏👏👏1
- लोकेशन रीवा। न्याय आंदोलन में जीतू पटवारी का सरकार पर हमला, जच्चा-बच्चा और बच्चों की मौत पर स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफा मांगा। रीवा में पिछले पांच दिनों से चल रहे कांग्रेस के न्याय आंदोलन में आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शामिल हुए। मंच से पटवारी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। रीवा की जच्चा-बच्चा मौत और बालाघाट में बच्चों की मौत के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की। रीवा के न्याय आंदोलन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता जुटे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार बदहाल हो रही है और गंभीर घटनाओं के बावजूद सरकार जिम्मेदारी तय करने से बच रही है। पटवारी ने रीवा और बालाघाट में हुई मौतों का हवाला देते हुए सरकार से जवाब मांगा और कहा कि जब स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं और लोगों की जान जा रही है, तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि कांग्रेस स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होने तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।1
- जगत जननी मां शारदा भवानी जी के मैहर स्थित श्री शारदा शक्तिपीठ से आज दिनांक 10.09.2026 दिन गुरुवार के प्रातः कालीन के अलौकिक दिव्य श्रृंगार दर्शन 💐💐🙏🏻2
- *नागौद शिविल अस्पताल से डियूटी डॉ नदारत, फोन लगाने पर मरीजो के परिजन से करते है बत्तमीजी से बात ,मरीज हो रहे परेशान , स्टाफ नर्स से पूछने पर ड्यूटी डॉक्टर के बीमार होने की बात की गई* *नागौद शिविल अस्पताल से डियूटी डॉ नदारत, फोन लगाने पर मरीजो के परिजन से करते है बत्तमीजी से बात ,मरीज हो रहे परेशान , स्टाफ नर्स से पूछने पर ड्यूटी डॉक्टर के बीमार होने की बात की गई*1
- खबर मैहर किराने की दुकान की आड़ में गांजा कारोबार का आरोप, ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद कार्रवाई पर सवाल किराने की दुकान की आड़ में गांजा कारोबार का आरोप, ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद कार्रवाई पर सवाल मैहर। पहाड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र में किराने की दुकान की आड़ में कथित रूप से गांजे का कारोबार तेजी से संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गौतम नामक युवक द्वारा दुकान की आड़ में नशीले पदार्थ की बिक्री की जा रही है। स्थानीय लोगों ने कई बार इसका विरोध करने के साथ पुलिस को भी सूचना दिए जाने की बात कही है, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। सूत्रों के अनुसार, यदि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित कारोबारी से पूछताछ करती है, तो गांजे की आपूर्ति से जुड़े बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ग्रामीणों ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए दुकान और संबंधित व्यक्ति की जांच कराने तथा यदि आरोप सही पाए जाएं तो एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।अब सवाल यह है कि ग्रामीणों की बार-बार की शिकायतों के बावजूद पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है क्या मामले की जांच होगी या शिकायतें इसी तरह अनसुनी होती रहेंगी1
- सतना प्रशासन की बेरुखी और रोज हो रहे हादसे से परेशान ग्रामीणों ने खुद संभाली कमान,लामबंद ग्रामीणों ने पुल को चलने लायक बनाने शुरू किया श्रमदान, खड़ौरा खड़ौरी नगवर गांव का रास्ता हो गया था बंद, महू नदी में बनी एक मात्र रास्ते की पुल बाढ़ से हो गई थी बर्बाद, नगवर गांव में बनी थी पुल, मुख्य मार्ग से संपर्क हो गया था बाधित, सिर्फ जान जोखिम में डाल कर बाइक से हो पा रही थी आवाजाही, सतना प्रशासन की बेरुखी और रोज हो रहे हादसे से परेशान ग्रामीणों ने खुद संभाली कमान,लामबंद ग्रामीणों ने पुल को चलने लायक बनाने शुरू किया श्रमदान, खड़ौरा खड़ौरी नगवर गांव का रास्ता हो गया था बंद, महू नदी में बनी एक मात्र रास्ते की पुल बाढ़ से हो गई थी बर्बाद, नगवर गांव में बनी थी पुल, मुख्य मार्ग से संपर्क हो गया था बाधित, सिर्फ जान जोखिम में डाल कर बाइक से हो पा रही थी आवाजाही,1