नम आंखों से दी विदाई: फतुहा गंगा घाट पर उमड़ा जनसैलाब, जय नारायण सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि। सैदनपुर के पूर्व निदेशक जय नारायण सिंह का अंतिम संस्कार समसपुर स्थित गंगा घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। उनके बड़े पुत्र गोपाल शंकर सिंह ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म निभाई। इस दौरान गंगा घाट पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। जय नारायण सिंह के निधन की खबर से सैदनपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी, जिसने उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा को दर्शाया। उपस्थित जनसमूह ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। अपने जीवनकाल में जय नारायण सिंह एक सरल, मिलनसार और समाजसेवी व्यक्ति के रूप में पहचाने जाते थे। उन्होंने अपने कार्यों और व्यवहार से समाज में एक अलग पहचान बनाई और हमेशा ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। अंतिम संस्कार में परिवारजन, रिश्तेदार, शुभचिंतक एवं क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी और इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
नम आंखों से दी विदाई: फतुहा गंगा घाट पर उमड़ा जनसैलाब, जय नारायण सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि। सैदनपुर के पूर्व निदेशक जय नारायण सिंह का अंतिम संस्कार समसपुर स्थित गंगा घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। उनके बड़े पुत्र गोपाल शंकर सिंह ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म निभाई। इस दौरान गंगा घाट पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। जय नारायण सिंह के निधन की खबर से सैदनपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी, जिसने उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा को दर्शाया। उपस्थित जनसमूह ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। अपने जीवनकाल में जय नारायण सिंह एक सरल, मिलनसार और समाजसेवी व्यक्ति के रूप में पहचाने जाते थे। उन्होंने अपने कार्यों और व्यवहार से समाज में एक अलग पहचान बनाई और हमेशा ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। अंतिम संस्कार में परिवारजन, रिश्तेदार, शुभचिंतक एवं क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी और इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
- सैदनपुर के पूर्व निदेशक जय नारायण सिंह का अंतिम संस्कार समसपुर स्थित गंगा घाट पर पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। उनके बड़े पुत्र गोपाल शंकर सिंह ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म निभाई। इस दौरान गंगा घाट पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। जय नारायण सिंह के निधन की खबर से सैदनपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी, जिसने उनके प्रति सम्मान और श्रद्धा को दर्शाया। उपस्थित जनसमूह ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। अपने जीवनकाल में जय नारायण सिंह एक सरल, मिलनसार और समाजसेवी व्यक्ति के रूप में पहचाने जाते थे। उन्होंने अपने कार्यों और व्यवहार से समाज में एक अलग पहचान बनाई और हमेशा ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। अंतिम संस्कार में परिवारजन, रिश्तेदार, शुभचिंतक एवं क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी और इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।1
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- बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी गुरुवार को पटना सिटी स्थित तख्त श्री हरिमंदिर साहिब पटना साहिब गुरुद्वारा पहुँचे। दोपहर करीब एक बजे मुख्यमंत्री गुरुद्वारा साहिब पहुंचे, जहां उन्होंने दरबार साहिब में जाकर गुरु महाराज के चरणों में मत्था टेका। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला मौका था जब वह पटना साहिब गुरुद्वारा पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी की प्रेरणा से पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत आगे बढ़ रहा है। नीतीश कुमार के 20 साल के शासनकाल में बिहार में काफी काम हुआ। यहां तक कि जब गुरु गोविंद सिंह जी का 350वां प्रकाश पर्व मनाया गया था तब नगर विकास विभाग का मंत्री रहते हुए यहां काफी करने का अवसर मिला था। उन्होंने कहा कि आज उन्होंने गुरु गोविंद सिंह जी से बिहार की समृद्धि और विकसित बिहार के लिए कामना की। गुरु दरबार में मत्था टेकने के बाद मुख्यमंत्री को गुरु महाराज से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियां दी गईं। उन्होंने कुछ देर तक शबद कीर्तन भी सुना और गुरुद्वारे के धार्मिक माहौल में समय बिताया। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी की ओर से उन्हें सम्मान स्वरूप तलवार भी भेंट की गई। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले, बुधवार को शपथ ग्रहण समारोह के लिए लोक भवन जाते समय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राजवंशी नगर हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।4
- Patna #युवा अंबेडकर #संगठन के द्वारा #भारत रत्न डॉक्टर भीमराव #अंबेडकर की जयंती पर #भव्य शोभा यात्रा1
- पटना में CM सम्राट चौधरी का दौरा, गुरुद्वारे में टेका माथा; बयानबाजी भी तेज पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना साहिब गुरुद्वारे में माथा टेका और दरबार में हाजिरी लगाई। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने उन्हें सिरोपा देकर सम्मानित किया। इसके बाद उन्होंने सचिवालय पहुंचकर अहम बैठक भी की। वहीं दूसरी ओर, राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। रोहिणी ने सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा कि “नरसंहार के दाग वाले व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया गया है।” CM के धार्मिक दौरे और विपक्ष के हमले के बीच बिहार की सियासत एक बार फिर गरमा गई है।1
- #पटना_सिटी के रानीपुर के प्राचीन पंजर भोकबा मेला आयोजन होता जिसका आज अंतिम रूप दिया गया लोग शरीर में त्रिशूल आकर के पंजरा में भोगकर सड़कों पर नाचते गाते रानीपुर गंज पर जाकर समाप्त हुआ #patnacity #patna #Panjrbhokwa #apnacitytaknews1
- साबरचक पंचायत से कुंदन कुमार पेक्स अध्यक्ष प्रत्याशी से खास बातचीत, कैसे करेंगे विकास।।1
- पितांबरपुर गांव में 67 दिवसीय जनजागरण यात्रा के तहत संत पंकज जी महाराज का भव्य स्वागत किया गया। जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगमन पर श्रद्धालुओं ने बाजे-गाजे और पुष्पवर्षा के साथ गर्मजोशी से अभिनंदन किया, जिससे पूरे गांव का वातावरण भक्तिमय हो उठा। सत्संग के दौरान महाराज जी ने मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे सदाचार, साधना और सत्संग के माध्यम से सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने रामायण की चौपाई के माध्यम से मानव जीवन की श्रेष्ठता का उल्लेख करते हुए आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने साधना के महत्व को बताते हुए कहा कि मनुष्य शरीर में स्थित दिव्य केंद्र के माध्यम से आत्मज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही सुरत-शब्द योग और नामदान की प्रक्रिया को विस्तार से समझाते हुए लोगों को सच्चे संत की शरण में जाने का संदेश दिया। समाज सुधार पर जोर देते हुए उन्होंने मांसाहार और नशे से दूर रहने की अपील की और बच्चों को अच्छे संस्कार देने की बात कही। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, वहीं शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह आयोजन भक्ति और सामाजिक जागरूकता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने1