भोपाल जिले के परवलिया थाना क्षेत्र स्थित झिरनिया गांव में जमीन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किए जा रहे पौधारोपण कार्य का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया है, आरोप लगाया है कि इस परियोजना से उनकी आजीविका छीनने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे जिस जमीन पर पौधारोपण किया जा रहा है, उस पर पिछले लगभग 50 वर्षों से खेती करते आ रहे हैं और पीढ़ियों से इसी भूमि से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका आरोप है कि NHAI हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर उनकी उपजाऊ कृषि भूमि पर पेड़ लगाने की योजना बना रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी मांग रखते हुए सुझाव दिया है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर बड़ी मात्रा में बंजर और खाली जमीन उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और NHAI को वृक्षारोपण करना ही है, तो उन बंजर भूमि पर किया जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य भी पूरा होगा और किसानों की खेती भी प्रभावित नहीं होगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। साथ ही, उन्होंने प्रशासन को यह भी भरोसा दिलाया है कि बंजर जमीन पर होने वाले वृक्षारोपण अभियान में गांव के सभी लोग पूरा सहयोग करेंगे। फिलहाल, ग्रामीणों ने प्रशासन से इस परियोजना को तत्काल प्रभाव से रोकने और मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि किसानों की आजीविका और पर्यावरण संरक्षण के बीच इस विवाद का समाधान प्रशासन किस तरह निकालता है।
भोपाल जिले के परवलिया थाना क्षेत्र स्थित झिरनिया गांव में जमीन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किए जा रहे पौधारोपण कार्य का ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया है, आरोप लगाया है कि इस परियोजना से उनकी आजीविका छीनने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे जिस जमीन पर पौधारोपण किया जा रहा है, उस पर पिछले लगभग 50 वर्षों से खेती करते आ रहे हैं और पीढ़ियों से इसी भूमि से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका आरोप है कि NHAI हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर उनकी उपजाऊ कृषि भूमि पर पेड़ लगाने की योजना बना रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी मांग रखते हुए सुझाव दिया है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर बड़ी मात्रा में बंजर और खाली जमीन उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और NHAI को वृक्षारोपण करना ही है, तो उन बंजर भूमि पर किया जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य भी पूरा होगा और किसानों की खेती भी प्रभावित नहीं होगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। साथ ही, उन्होंने प्रशासन को यह भी भरोसा दिलाया है कि बंजर जमीन पर होने वाले वृक्षारोपण अभियान में गांव के सभी लोग पूरा सहयोग करेंगे। फिलहाल, ग्रामीणों ने प्रशासन से इस परियोजना को तत्काल प्रभाव से रोकने और मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि किसानों की आजीविका और पर्यावरण संरक्षण के बीच इस विवाद का समाधान प्रशासन किस तरह निकालता है।
- मध्य प्रदेश के भोपाल में अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़ा एक्शन लिया गया है। इस कार्रवाई के तहत कुल 70 दुकानें और 42 झुग्गियां हटाई गई हैं।1
- बैरागढ़ वन ट्री हिल्स रोड पर स्थित डॉ. ज्ञानचंदानी क्लिनिक और शासकीय स्कूल के सामने नालों की सफाई के काम के दौरान नगर निगम ने मुख्य पानी की सप्लाई लाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया है। इस घटना के चलते कई मोहल्लों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है, जिससे लोग पिछले दो दिनों से पानी के लिए भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। नगर निगम द्वारा अभी तक इस टूटी हुई लाइन की मरम्मत नहीं की गई है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया और लाइन ठीक नहीं की गई, तो वे महापौर के कार्यालय जाकर जोरदार प्रदर्शन करेंगे।1
- आज राजधानी भोपाल के करोंद चौराहे के पास मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान निर्माण कंपनी की एक बड़ी लापरवाही सामने आई, जहाँ मेट्रो का एक निर्माणाधीन पिलर अचानक भरभराकर गिर गया। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में भारी हड़कंप और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पिलर गिरने से 11KV की बिजली लाइन भी टूट गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, बिजली विभाग और संबंधित एजेंसियों की टीमें तुरंत मौके पर पहुँचीं। सुरक्षा के मद्देनज़र, क्षेत्र को घेरकर लोगों की आवाजाही को सीमित कर दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, किसी भी जनहानि की सूचना नहीं है, जो एक बड़ी राहत की बात है, हालांकि अधिकारी मामले की जाँच कर रहे हैं। घटना के तत्काल बाद बिजली विभाग ने क्षेत्र की बिजली सप्लाई बंद कर दी और पुलिस ने यातायात को भी डायवर्ट कर दिया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि मेट्रो निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण इस तरह की दुर्घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं।1
- भोपाल जिले के परवलिया थाना परिसर में ग्रामीण क्षेत्रों और बाजार के जिम्मेदार नागरिकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देहात पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे सुरक्षा अभियान के तहत लोगों को जागरूक करना था। पुलिस अधिकारियों ने सभी ग्रामीणों, व्यापारियों और नागरिकों से विशेष अपील की कि वे अपनी दुकानों और मकानों के बाहर कम से कम एक सीसीटीवी कैमरा अवश्य लगाएं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीसीटीवी कैमरे न केवल उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, बल्कि गांव और बाजार क्षेत्र में होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर भी प्रभावी ढंग से नजर रखने में सहायक सिद्ध होंगे। पुलिस प्रशासन का मानना है कि इन कैमरों की मदद से किसी भी घटना की जानकारी तुरंत प्राप्त की जा सकेगी, जिससे अपराधियों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी में आसानी होगी। साथ ही, यह पहल नागरिकों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद करेगी, जिससे क्षेत्र में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा। बैठक में मौजूद लोगों ने पुलिस प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया।1
- भोपाल के मित्तल कॉलेज में वन-विभाग परीक्षा में धांधली के गंभीर आरोपों को लेकर छात्रों ने जमकर हंगामा किया और धरने पर बैठ गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी परीक्षा ढाई बजे की पाली में होनी थी, लेकिन परीक्षा की वेबसाइट पिछले दो घंटे से बंद थी। शाम साढ़े चार बजे उन्हें बताया गया कि सर्वर क्रैश हो गया है, जिसके बाद उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता और धांधली का आरोप लगाया। इस पूरे हंगामे के दौरान, कॉलेज प्रबंधन ने कथित तौर पर अभ्यर्थियों को धक्का देकर कॉलेज परिसर से बाहर निकाल दिया, जिसे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया जा रहा है।1
- रविवार को भोपाल के मित्तल कॉलेज, करोंद में वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी एवं सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा 2026 की द्वितीय पाली स्थगित होने के बाद बाहर से आए छात्रों ने जमकर हंगामा किया। यह परीक्षा दोपहर 02:30 बजे से 04:30 बजे तक आयोजित होनी थी, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण इसे टाल दिया गया। अब यह परीक्षा 07 जून रविवार की जगह 20 जून को आयोजित होगी। इस स्थगन को लेकर छात्रों के हंगामे की सूचना मिलने पर थाना निशातपुरा पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों को समझा-बुझाकर शांत कराया।1
- भाजपा सरकार पर विक्टोरिया अस्पताल के कर्मचारियों का वेतन रोकने के बावजूद 'अभिनंदन' करने का आरोप लगाया गया है। इस कार्रवाई को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की जा रही है, क्योंकि कर्मचारियों को अभी तक उनके वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।1
- राजधानी भोपाल में नगर निगम 'स्वच्छ भारत का इरादा कर लिया हमने' और 'गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल' जैसे गीत बजाता है, लेकिन बाणगंगा नाले और रवींद्र भवन परिसर के आसपास कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। यह स्थिति स्वच्छता के दावों पर सवाल खड़ा करती है, विशेषकर जब बड़े-बड़े पदों पर बैठे जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी यहां अक्सर पहुंचते हैं। शिकायत है कि इतनी भारी मात्रा में कचरा पड़े रहने के कारण बारिश होने पर यह सारा कचरा नाले में बह जाएगा, जिससे गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न होगी। यह पूरा क्षेत्र वार्ड नंबर 24 और जोन नंबर 21 के अंतर्गत आता है। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए अब ठोस और प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता जताई गई है। नागरिकों की मांग है कि तत्कालीन सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अजय श्रवण जी के समय जैसी सफाई व्यवस्था यहां रहती थी, उसे फिर से बहाल किया जाए, ताकि भोपाल सही मायने में स्वच्छ रह सके।1
- छत्तीसगढ़ NSUI ने NEET, CBSE, SSC और CUET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं, कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते भ्रष्टाचार के खिलाफ बिलासपुर सांसद निवास का घेराव कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह बिग ब्रेकिंग न्यूज़ है जिसमें संगठन ने शिक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि देश के करोड़ों मेहनती छात्रों के भविष्य, सपनों और अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। NSUI शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है और अपने इस अभियान को आगे बढ़ा रही है। NSUI ने घोषणा की है कि छात्र विरोधी नीतियों, परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य पर हो रहे इस प्रहार के खिलाफ यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती और सभी छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता।1