बागपत में शनिवार को हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर 22 जिलों के अधिवक्ताओं ने दोपहर से शाम तक एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने शामिल होकर विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। अधिवक्ताओं ने बताया कि पिछले 50 वर्षों से हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग की जा रही है, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बैठक में आगे की रणनीति पर विचार करते हुए अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है, तो वे सांसदों का घेराव करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में वे उसी उम्मीदवार या पार्टी को वोट देंगे, जो हाईकोर्ट बेंच की मांग पूरी करने का ठोस आश्वासन देगा। इस मुद्दे पर सभी अधिवक्ताओं से विचार-विमर्श जारी है। केंद्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता अनुज शर्मा ने बताया कि भविष्य की रणनीति पर विचार किया गया है और जल्द ही इस मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
बागपत में शनिवार को हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर 22 जिलों के अधिवक्ताओं ने दोपहर से शाम तक एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने शामिल होकर विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। अधिवक्ताओं ने बताया कि पिछले 50 वर्षों से हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग की जा रही है, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बैठक में आगे की रणनीति पर विचार करते हुए अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है, तो वे सांसदों का घेराव करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में वे उसी उम्मीदवार या पार्टी को वोट देंगे, जो हाईकोर्ट बेंच की मांग पूरी करने का ठोस आश्वासन देगा। इस मुद्दे पर सभी अधिवक्ताओं से विचार-विमर्श जारी है। केंद्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता अनुज शर्मा ने बताया कि भविष्य की रणनीति पर विचार किया गया है और जल्द ही इस मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
- बागपत में शनिवार को हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर 22 जिलों के अधिवक्ताओं ने दोपहर से शाम तक एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने शामिल होकर विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। अधिवक्ताओं ने बताया कि पिछले 50 वर्षों से हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग की जा रही है, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बैठक में आगे की रणनीति पर विचार करते हुए अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है, तो वे सांसदों का घेराव करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में वे उसी उम्मीदवार या पार्टी को वोट देंगे, जो हाईकोर्ट बेंच की मांग पूरी करने का ठोस आश्वासन देगा। इस मुद्दे पर सभी अधिवक्ताओं से विचार-विमर्श जारी है। केंद्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष अधिवक्ता अनुज शर्मा ने बताया कि भविष्य की रणनीति पर विचार किया गया है और जल्द ही इस मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।1
- NEET पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में जगह-जगह जोरदार प्रदर्शन हुए। CJP द्वारा देशभर में आंदोलन की अपील के बाद प्रदेशभर की पुलिस अलर्ट मोड पर है। प्रयागराज में वकीलों ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया और कहा कि जिन पर लाठियां बरसाई गईं, वे उनके बच्चे हैं और अब यह लड़ाई सड़कों पर होगी। वहीं अलीगढ़ में कलेक्ट्रेट के बाहर सपा नेता पीएम मोदी का पुतला फूंकने का प्रयास कर रहे थे, तभी पुलिस से धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। इस दौरान सिविल लाइंस के प्रभारी निरीक्षक सतवीर सिंह ने पिस्टल निकाल ली, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर सरकारी काम में बाधा और अभद्रता समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विरोध का असर देखने को मिला, जहां मेरठ में सपा कार्यकर्ताओं द्वारा धर्मेंद्र प्रधान की निकाली गई प्रतीकात्मक अर्थी को पुलिसकर्मियों ने छीन लिया और सड़क पर लेटे एक कार्यकर्ता को उठाकर ले गई। कानपुर में सपा विधायक ने ढपली बजाकर प्रदर्शन किया, जबकि लखीमपुर में छात्र हाथों में तिरंगा और पोस्टर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और SDM को गुलाब के फूल देकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस बीच मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार छात्रों के आंदोलन को उग्र बताने की कोशिश कर रही है, जबकि युवा केवल रोजगार मांग रहे हैं और पुलिस के डंडे में सरकार का चेहरा दिखता है।1
- दिल्ली में सरकार के साथ हुई बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने कल दोपहर तक का समय मांगा है। पार्टी को उम्मीद है कि सरकार उन्हें जल्द ही बर्खास्त कर देगी। इसके अलावा, आशुतोष रांका ने जानकारी दी कि सरकार ने उनकी दो अन्य मांगों पर इन-प्रिंसिपल (सैद्धांतिक) मंजूरी दे दी है। इनमें सुसाइड से मरने वाले NEET कैंडिडेट्स के परिवारों के लिए मुआवजा देना और छात्रों पर दर्ज FIR तथा लीगल केस वापस लेना शामिल है।1
- गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर देशभर में जनअभियान चलाया जा रहा है। इस राष्ट्रव्यापी मुहिम के माध्यम से गौ माता को राष्ट्रमाता का स्थान और दर्जा दिलाए जाने की मांग को पूरे देश में प्रमुखता से उठाया जा रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के ग्राम्य विकास विभाग में बड़ी कार्रवाई करते हुए मनरेगा के संयुक्त आयुक्त संजय कुमार पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों पर यह कार्रवाई की गई है। संजय कुमार पांडेय को उन्नाव में उपायुक्त (स्वतः रोजगार), राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के पद पर तैनाती के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें कार्यालय आयुक्त, ग्राम्य विकास, उत्तर प्रदेश (लखनऊ) से संबद्ध किया गया है। उन पर शासनादेशों के उल्लंघन और लापरवाही के गंभीर आरोप हैं। लोकपालों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उनके कार्यकाल विस्तार या नवीनीकरण की पत्रावली प्रस्तुत नहीं की गई थी। इसके साथ ही संबंधित विशेषज्ञ के खिलाफ कार्रवाई न करने, भारत सरकार के निर्देशों व शासनादेशों का सही ढंग से पालन न करने और मनरेगा से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर उचित पर्यवेक्षण न करने का दोषी पाया गया है। इस पूरे मामले की विस्तृत जांच अब लखनऊ के मंडलायुक्त करेंगे।1
- महिला की गरिमा को किसी भी आंदोलन से बड़ा बताते हुए स्पष्ट किया गया है कि यदि विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी महिला के साथ अभद्रता या हिंसा हुई है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आवाज़ उठाने के साथ-साथ सम्मान, इंसानियत और महिलाओं की सुरक्षा को सबसे पहले रखने की बात कही गई है। दूसरी ओर, छात्रों की आवाज को कमजोर करने और दबाने के लिए पुलिस द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने का गंभीर आरोप लगा है। कल रात के बाद आज फिर आवास पर पुलिस के पहुँचने का दावा किया गया है। हालांकि, यह साफ कर दिया गया है कि छात्रों की न्यायपूर्ण मांगों को किसी भी डर या पुलिसिया दबाव से नहीं रोका जा सकता।1