खाट पर दम तोड़ती जिंदगी, 25 किलोमीटर पैदल लोकतंत्र” — आखिर कब जामडीह तक पहुंचेगी विकास की सड़क? रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड का सुदूरवर्ती जामडीह गांव आज भी विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। जंगल-पहाड़ और दुर्गम रास्तों के बीच बसे इस गांव की पीड़ा ऐसी है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल द्रवित हो जाए। आजादी के इतने वर्षों बाद भी गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं बन सकी है। सड़क के अभाव में यहां के लोग हर दिन जिंदगी, बीमारी और बदहाल व्यवस्था से जंग लड़ने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने भावुक अपील करते हुए माननीय सांसद कालीचरण सिंह, जननायक विधायक रामचंद्र सिंह एवं उपायुक्त संदीप कुमार से जामडीह गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण गांव आज भी मानो दुनिया से कटा हुआ है। गांव तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह जर्जर और खतरनाक है। चार पहिया वाहन गांव तक पहुंच ही नहीं पाते। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब पूरा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। ऐसे समय में गांव के लोग कई-कई दिनों तक बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। सबसे दर्दनाक स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ जाता है। सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में मरीजों को खाट पर लादकर कई किलोमीटर तक कंधों के सहारे महुआडांड़ अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने भारी मन से बताया कि कई लोगों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया। गांव की माताओं, बुजुर्गों और बच्चों की आंखों में आज भी उन दर्दनाक घटनाओं की पीड़ा साफ दिखाई देती है। ग्रामीणों ने बताया कि लोकतंत्र के महापर्व चुनाव में मतदान करने के लिए भी उन्हें करीब 25 किलोमीटर की कठिन दूरी तय करनी पड़ती है। बावजूद इसके आज तक गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। गांव के अधिकांश लोग गरीब, अशिक्षित और बेरोजगार हैं। सड़क नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा और रोजगार के अवसर भी गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जामडीह के ग्रामीणों ने उम्मीद भरी निगाहों से जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की ओर देखते हुए कहा कि यदि गांव तक सड़क बन जाती है, तो यह केवल मिट्टी और पत्थर की सड़क नहीं होगी, बल्कि यह गांव के लोगों के सपनों, सम्मान और नई जिंदगी की राह बनेगी। अब जामडीह के लोगों को उस दिन का इंतजार है, जब विकास की पहली गाड़ी गांव तक पहुंचेगी और वर्षों से उपेक्षित इस गांव की तस्वीर बदल जाएगी।
खाट पर दम तोड़ती जिंदगी, 25 किलोमीटर पैदल लोकतंत्र” — आखिर कब जामडीह तक पहुंचेगी विकास की सड़क? रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड का सुदूरवर्ती जामडीह गांव आज भी विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। जंगल-पहाड़ और दुर्गम रास्तों के बीच बसे इस गांव की पीड़ा ऐसी है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल द्रवित हो जाए। आजादी के इतने वर्षों बाद भी गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं बन सकी है। सड़क के अभाव में यहां के लोग हर दिन जिंदगी, बीमारी और बदहाल व्यवस्था से जंग लड़ने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने भावुक अपील करते हुए माननीय सांसद कालीचरण सिंह, जननायक विधायक रामचंद्र सिंह एवं उपायुक्त संदीप कुमार से जामडीह गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण गांव आज भी मानो दुनिया से कटा हुआ है। गांव तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह जर्जर और खतरनाक है। चार पहिया वाहन गांव तक पहुंच ही नहीं पाते। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब पूरा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। ऐसे समय में गांव के लोग कई-कई दिनों तक बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। सबसे दर्दनाक स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ जाता है। सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में मरीजों को खाट पर लादकर कई किलोमीटर तक कंधों के सहारे महुआडांड़ अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने भारी मन से बताया कि कई लोगों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया। गांव की माताओं, बुजुर्गों और बच्चों की आंखों में आज भी उन दर्दनाक घटनाओं की पीड़ा साफ दिखाई देती है। ग्रामीणों ने बताया कि लोकतंत्र के महापर्व चुनाव में मतदान करने के लिए भी उन्हें करीब 25 किलोमीटर की कठिन दूरी तय करनी पड़ती है। बावजूद इसके आज तक गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। गांव के अधिकांश लोग गरीब, अशिक्षित और बेरोजगार हैं। सड़क नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा और रोजगार के अवसर भी गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जामडीह के ग्रामीणों ने उम्मीद भरी निगाहों से जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की ओर देखते हुए कहा कि यदि गांव तक सड़क बन जाती है, तो यह केवल मिट्टी और पत्थर की सड़क नहीं होगी, बल्कि यह गांव के लोगों के सपनों, सम्मान और नई जिंदगी की राह बनेगी। अब जामडीह के लोगों को उस दिन का इंतजार है, जब विकास की पहली गाड़ी गांव तक पहुंचेगी और वर्षों से उपेक्षित इस गांव की तस्वीर बदल जाएगी।
- खाट पर दम तोड़ती जिंदगी, 25 किलोमीटर पैदल लोकतंत्र” — आखिर कब जामडीह तक पहुंचेगी विकास की सड़क? रामप्रवेश गुप्ता महुआडांड़ प्रखंड का सुदूरवर्ती जामडीह गांव आज भी विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। जंगल-पहाड़ और दुर्गम रास्तों के बीच बसे इस गांव की पीड़ा ऐसी है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल द्रवित हो जाए। आजादी के इतने वर्षों बाद भी गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं बन सकी है। सड़क के अभाव में यहां के लोग हर दिन जिंदगी, बीमारी और बदहाल व्यवस्था से जंग लड़ने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने भावुक अपील करते हुए माननीय सांसद कालीचरण सिंह, जननायक विधायक रामचंद्र सिंह एवं उपायुक्त संदीप कुमार से जामडीह गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण गांव आज भी मानो दुनिया से कटा हुआ है। गांव तक पहुंचने वाला रास्ता पूरी तरह जर्जर और खतरनाक है। चार पहिया वाहन गांव तक पहुंच ही नहीं पाते। बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब पूरा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। ऐसे समय में गांव के लोग कई-कई दिनों तक बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। सबसे दर्दनाक स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ जाता है। सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में मरीजों को खाट पर लादकर कई किलोमीटर तक कंधों के सहारे महुआडांड़ अस्पताल पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने भारी मन से बताया कि कई लोगों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया। गांव की माताओं, बुजुर्गों और बच्चों की आंखों में आज भी उन दर्दनाक घटनाओं की पीड़ा साफ दिखाई देती है। ग्रामीणों ने बताया कि लोकतंत्र के महापर्व चुनाव में मतदान करने के लिए भी उन्हें करीब 25 किलोमीटर की कठिन दूरी तय करनी पड़ती है। बावजूद इसके आज तक गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। गांव के अधिकांश लोग गरीब, अशिक्षित और बेरोजगार हैं। सड़क नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा और रोजगार के अवसर भी गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जामडीह के ग्रामीणों ने उम्मीद भरी निगाहों से जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की ओर देखते हुए कहा कि यदि गांव तक सड़क बन जाती है, तो यह केवल मिट्टी और पत्थर की सड़क नहीं होगी, बल्कि यह गांव के लोगों के सपनों, सम्मान और नई जिंदगी की राह बनेगी। अब जामडीह के लोगों को उस दिन का इंतजार है, जब विकास की पहली गाड़ी गांव तक पहुंचेगी और वर्षों से उपेक्षित इस गांव की तस्वीर बदल जाएगी।1
- फरार वारंटी पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो अलग-अलग मामलों के आरोपी गिरफ्तार कर भेजे गए जेल चैनपुर थाना पुलिस ने लंबित मामलों में कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग कांडों के फरार वारंटी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जानकारी देते हुए दोपहर बारह बजे बताया गया कि न्यायालय से जारी वारंट के आलोक में पुलिस लगातार फरार आरोपियों की तलाश कर रही थी। पहले मामले में चैनपुर थाना कांड संख्या शून्य छह बटा तेरह, दिनांक चार अप्रैल दो हजार तेरह, एसटी नंबर दो सौ अट्ठानवे बटा दो हजार तेरह के इश्तहार वारंटी अभियुक्त बहुरा तुरी, उम्र लगभग पचास वर्ष, पिता स्वर्गीय बना तुरी, ग्राम तिगावल थाना चैनपुर को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। वहीं दूसरे मामले में चैनपुर थाना कांड संख्या शून्य आठ बटा तेइस, एसटी नंबर एक सौ बानवे बटा दो हजार तेइस के वारंटी अभियुक्त अशोक एक्का, उम्र लगभग उनतीस वर्ष, पिता स्वर्गीय पीयूष एक्का, ग्राम जमगई थाना चैनपुर को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। पुलिस ने बताया कि न्यायालय से जारी वारंट के निष्पादन हेतु लगातार अभियान चलाया जा रहा है तथा फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी आगे भी जारी रहेगी।1
- जैक बोर्ड परीक्षा 2026 में ऐतिहासिक सफलता पर गुमला में भव्य सम्मान समारोह आयोजित,माध्यमिक एवं इंटर में उत्कृष्ट प्रदर्शन से गुमला ने राज्य में लहराया परचम गुमला: झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) द्वारा आयोजित वार्षिक माध्यमिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में गुमला जिले के विद्यार्थियों द्वारा राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किए जाने के उपलक्ष्य में सोमवार, 11 मई 2026 को नगर भवन, गुमला में भव्य सम्मान समारोह का सफल आयोजन किया गया।इस वर्ष गुमला जिले ने जैक बोर्ड परीक्षाओं में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए माध्यमिक स्तर पर राज्य में प्रथम स्थान, इंटर कला संकाय में प्रथम स्थान, विज्ञान संकाय में द्वितीय स्थान तथा वाणिज्य संकाय में तृतीय स्थान प्राप्त कर पूरे राज्य में अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का परचम लहराया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो सहित जिले के सभी वरीय प्रशासनिक एवं शिक्षा पदाधिकारी उपस्थित रहे। समारोह के दौरान माध्यमिक परीक्षा में राज्य स्तरीय सेकेंड टॉपर रहे विद्यार्थियों, जिला स्तर पर टॉप-10 स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों एवं 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले कुल 310 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में जिला अंतर्गत टॉप-10 स्थान प्राप्त करने वाले कुल 40 विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया, जिनमें कला संकाय के 16 विद्यार्थी, वाणिज्य संकाय के 11 विद्यार्थी तथा विज्ञान संकाय के 13 विद्यार्थी शामिल रहे।इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों के मैट्रिक परीक्षा में टॉप-3 स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की मेधावी छात्राओं तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय के विशेष प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। इन विद्यालयों में एकल अभिभावक, अनाथ, अनुसूचित जनजाति, आदिम जनजाति, अभिवंचित वर्ग एवं सामाजिक रूप से वंचित बच्चों को निःशुल्क आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है।समारोह में शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले 100 से अधिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, बोर्ड परीक्षा विजय अभियान में योगदान देने वाले लगभग 70 शिक्षकों, जिला एवं प्रखंड स्तरीय मॉनिटरिंग टीम, शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों तथा विभिन्न स्तरों पर कार्यरत कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने अपने संबोधन में कहा कि गुमला जैसे अति दुर्गम क्षेत्र के विद्यार्थियों द्वारा राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करना अत्यंत गर्व की बात है और यह उपलब्धि एक दिन की नहीं बल्कि वर्षों के सतत प्रयास, सुनियोजित रणनीति और टीम वर्क का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पूर्व उपायुक्तों के नेतृत्व में "शिक्षा कर भेंट अभियान" एवं "बोर्ड परीक्षा विजयी अभियान" के तहत प्रारंभिक स्तर पर मंथन कर रणनीति तैयार की गई थी , जिसके अंतर्गत अनुभवी शिक्षकों एवं अधिकारियों की कोर टीम का गठन कर निरंतर मॉनिटरिंग, विद्यालयों का निरीक्षण, मॉक टेस्ट, रेमेडियल कक्षाएं तथा संचालित किया गया।उन्होंने आगे कहा कि इस सफलता में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं प्रशासन सभी की समान भूमिका रही है और अब सबसे बड़ी चुनौती इस उपलब्धि को निरंतर बनाए रखना है। उन्होंने विद्यार्थियों को समर्पण, दृढ़ संकल्प और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने का संदेश देते हुए कहा कि यही तीन गुण जीवन में सफलता सुनिश्चित करते हैं।अपर समाहर्ता गुमला शशिंद्र कुमार बड़ाइक ने अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन के वास्तविक नायक छात्र-छात्राएं हैं, जिनकी मेहनत के कारण आज पूरा जिला गौरवान्वित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सम्मान प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, किंतु उसे बनाए रखना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को समय का महत्व समझते हुए निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दिया तथा कहा कि हर बच्चा प्रतिभाशाली होता है, आवश्यकता केवल सही मार्गदर्शन की होती है। सिविल सर्जन गुमला शंभूनाथ चौधरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों के मार्गदर्शन के बिना कोई भी सफलता संभव नहीं है और निरंतर परिश्रम तथा अनुशासन ही वास्तविक सफलता की पहचान है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया तथा स्वास्थ्य जागरूकता के तहत सर्वाइकल कैंसर से बचाव हेतु वैक्सीनेशन की जानकारी भी दी।डीसीएलआर गुमला राजीव कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष के अनुभवों से सीख लेकर बेहतर रणनीति बनाई गई, जिसका परिणाम इस वर्ष सामने है। उन्होंने कहा कि हर बच्चा प्रतिभावान होता है, अंतर केवल सोच और पढ़ाई के तरीके में होता है तथा सही लक्ष्य निर्धारण और दिशा मिलने पर कोई भी छात्र सफलता प्राप्त कर सकता है।एसडीओ सदर राजीव नीरज ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि जिस प्रकार उन्होंने वर्तमान में सफलता प्राप्त की है, उसी प्रकार भविष्य में भी लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास जारी रखें।एसडीओ चैनपुर पूर्णिमा कुमारी ने कहा कि यह उपलब्धि सभी की सामूहिक मेहनत और सटीक रणनीति का परिणाम है और आगे भी इसी प्रकार प्रयास जारी रखे जाएंगे।जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खालको ने कहा कि गुमला जिले की यह सफलता किसी संयोग का परिणाम नहीं है, बल्कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के निरंतर प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने बताया कि नियमित मॉक टेस्ट, रेमेडियल कक्षाएं, ऑनलाइन मॉनिटरिंग, प्रश्नपत्र निर्माण तथा कोर कमिटी द्वारा दैनिक अभ्यास जैसे प्रयासों से यह सफलता संभव हो सकी है। उन्होंने कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयास से ही प्राप्त हुई है।कार्यक्रम में उपायुक्त गुमला, अपर समाहर्ता, सिविल सर्जन गुमला, डीसीएलआर, एसडीओ सदर, एसडीओ चैनपुर, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला परिवहन पदाधिकारी , जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सहित शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।यह सम्मान समारोह गुमला जिले की सामूहिक प्रतिबद्धता, रणनीतिक योजना और शिक्षा के प्रति समर्पण का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जिसने यह सिद्ध कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और समन्वित प्रयासों से उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।1
- चैनपुर पुलिस की कार्रवाई: दो वारंटी अभियुक्त गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए चैनपुर थाना पुलिस ने लंबित मामलों में फरार चल रहे दो वारंटी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस द्वारा चलाए जा रहे वारंटी धर-पकड़ अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई।1
- गुमला जिले की ऐतिहासिक उपलब्धि - भव्य सम्मान समारोह पूरे झारखंड की वार्षिक माध्यमिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर गुमला जिले को बहुत-बहुत बधाई! इस शानदार सफलता के उपलक्ष्य में मेधावी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षा विभाग के सभी कर्मियों के उत्कृष्ट योगदान के लिए एक सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है।3
- अवैध पशु तस्करी एवं पशु क्रूरता प्रकरण में फरार 01 आरोपी गिरफ्तार पूर्व में 01 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार, कुल 02आरोपियों पर कार्यवाही जिला बलरामपुर-रामानुजगंज पुलिस द्वारा अवैध पशु तस्करी एवं पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में चौकी विजयनगर पुलिस ने अपराध क्रमांक 40/26 में पूर्व में गिरफ्तार 01 आरोपी के अतिरिक्त फरार चल रहे 01 अन्य आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। आरोपियों के विरुद्ध 2004 कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम की धारा 4, 6, 10 एवं पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(घ) के तहत वैधानिक कार्यवाही की गई है।* *घटना का संक्षिप्त विवरण* *दिनांक 07.03.2026 को चौकी विजयनगर स्टाफ शासकीय वाहन से रात्रि गश्त पर रवाना थे। गश्त के दौरान रात लगभग 2:00 बजे मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि कुछ तस्कर मवेशियों को क्रूरता पूर्वक मारते पीटते मेघुली से कन्हऱ नदी होते हुए (झारखण्ड) की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम द्वारा घेराबंदी किया गया। रात व घने जंगल का फायदा उठाकर तस्कर भागने मे सफल रहे. परन्तु स्थानीय लोग जो खेत मे पानी पटा रहे थे, अपने हीं गांव से सहयोगी को पहचान लिए और पूछताछ में नाम उजागर कर दिए. घटना स्थल से 09 रास पशु गाय बैल की जप्ती की गई. क्षेत्र मे लगातार आने वाले व्यापारी सफीक पिता अजीम अंसारी, 56 वर्ष निवासी मानपुर रंका (झारखण्ड) को उसके सकुनत से गिरफ्तार किया गया था जो आज फरार चल रहे आरोपी क़ासिम हुसैन पिता हकीम हुसैन निवासी शारदापुर चलगली थाना चलगली को गिरफतार कर न्यायिक रिमांड पे भेजा गया ।* *पुलिस अधीक्षक महोदय के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के मार्गदर्शन में फरार आरोपी की चौकी विजयनगर पुलिस एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम द्वारा लगातार पतासाजी की जा रही थी। तकनीकी साक्ष्य एवं मुखबिर सूचना पे आरोपी कासिम पिता हकीम निवासी शारदापुर चलगली जिला बलरामपुर छत्तीसगढ़ को दिनांक 11.05 .2026 को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक रिमांड हेतु माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।1
- हत्या की आशंका जताने वाले युवक की खून से लथपथ लाश मिलने से हड़कंप, पुलिस और प्रशासन पर उठे सवाल अंबिकापुर/गढ़वा। सरगुजा जिले के अंबिकापुर निवासी युवक अमन ओझा की झारखंड में संदिग्ध परिस्थितियों में खून से लथपथ लाश मिलने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। युवक ने कुछ दिन पहले ही पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन को लिखित आवेदन देकर अपनी जान को खतरा बताया था। इसके बावजूद सुरक्षा नहीं मिलने पर अब पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार अमन ओझा, पिता विद्यासागर ओझा, निवासी मिशन चौक तिवारी बिल्डिंग रोड, अंबिकापुर ने कलेक्टर सरगुजा सहित संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि एक युवक उसकी पत्नी आंचल ओझा को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। अमन ने यह भी बताया था कि उसकी चार वर्षीय बेटी भी उसके साथ है। अपने आवेदन में अमन ओझा ने उल्लेख किया था कि जब भी वह अपनी पत्नी से संपर्क करने या उसका पता लगाने की कोशिश करता था, तब उसे मोबाइल नंबर 6265828643 से लगातार धमकियां दी जाती थीं। युवक ने आरोप लगाया था कि उसके साथ गाली-गलौज की जाती है तथा जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इतना ही नहीं, उसने यह भी कहा था कि आरोपी पक्ष के लोगों द्वारा उस पर हमला कराने की कोशिश की गई है। अमन ओझा ने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर अपनी हत्या की आशंका जताई थी। उसने विभिन्न हिंदू संगठनों और बजरंग दल से मदद की अपील भी की थी। हालांकि समय रहते न तो प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही उसे पर्याप्त सुरक्षा मिल सकी। इसी बीच झारखंड के गढ़वा जिले के रंका प्रखंड स्थित बुढ़ापरास ग्राम पंचायत क्षेत्र में अमन ओझा का शव खून से लथपथ हालत में बरामद हुआ। शव पर कई गंभीर चोटों के निशान बताए जा रहे हैं, जिससे हत्या की आशंका और प्रबल हो गई है। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अंबिकापुर से शव मिलने वाले स्थान की दूरी लगभग 125 किलोमीटर है, ऐसे में यह मामला सामान्य नहीं प्रतीत होता। आरोप लगाए जा रहे हैं कि युवक को अंबिकापुर से ले जाकर उसकी बेरहमी से हत्या की गई है। अब इस पूरे मामले में पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि युवक द्वारा दी गई शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाती तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। वहीं क्षेत्र में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश का माहौल है और लोग दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।1
- 2 साल से पुल टूटा हुआ है जान जोखिम में रखकर लोग सफर कर रहे हैं विधायक सांसद स्थानीय नेता किसी का कोई ध्यान नहीं है, रोजाना लोग जान जोखिम में रखकर सफर करते हैं1